गुजरात की बेटी उर्फ़ इनॉगरेशन क्वीन - हेतल बेन Neelam Kulshreshtha द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

गुजरात की बेटी उर्फ़ इनॉगरेशन क्वीन - हेतल बेन

नीलम कुलश्रेष्ठ

    अहमदाबाद की गुजरात की एक मात्र एन जी ओ कल्याणी साहसिक महिला विकास संघ [ के एस एम वी एस ] का सन २०२० में 'थेपला स्कीम प्रोजेक्ट' ---इसकी सत्तर सदस्याएं थेपले बनाने में जुटीं हुईं थीं। एक थेपला मात्र तीन रूपये लेकिन चिलचिलाती धूप में अपना सामन ढोते, बच्चों को कंधे या गोद में ले जाते हुए पलायन करने को आतुर मज़दूरों को गुलमोहर मॉल में पनाह दी हुई थी या फिर कोई गरीब वहां रुक सकता था। उनके खाने की समस्या हल की एकमात्र हेतल बेन अमीन द्वारा स्थापित इसी एन जीओ ने उन्हें दोनों समय भोजन यानी थेपले के पैकेट्स पहुंचाकर। ऐसे में जबकि लोगों की नौकरियां जा रहीं थीं। उनकी पत्नियों ने इस संस्था के मास्क बनाने के प्रोजक्ट में योगदान करके अपने घर की ज़रूरतें पूरी कीं। इस तरह से २५० घरों की परवरिश इन प्रोजेक्ट से हो सकी थी। उन्हें २२ वर्ष से समाज सेवा का अनुभव है। 

हेतल बेन के अमीन के जीवन की कुछ झलकियाँ------

----वे कहीं प्रशिक्षण क्लास, सेमीनार या वर्कशॉप करवाती दिखाई दे सकतीं हैं क्योंकि वे महिलाओं को अपनी आजीविका कमाकर आत्मनिर्भर बनाना चाहतीं हैं।

----- एक रात वो घर रात के एक बजे पहुँच पाईं क्योंकि एक ओपन एयर रेस्टोरेंट के बड़े परिसर में एक तरफ़ उन्हें सात आठ महिलाओं की फ़ूड स्टॉल्स आरम्भ करवानी थी। इस तरह से उन्होंने इन महिलाओं को रोज़गार दिलवाया। 

---वे हमेशा सुंदर लुभावने हैंडीक्राफ्ट्स खोजती रहतीं हैं जिससे इन्हें बनाने वाले कलाकारों को सरकारी स्कीम का फ़ायदा मिल सके। इनकी प्रदर्शनी लगवाने में सहायता करतीं हैं जिससे लोगों तक ये कला पहुंचे।

----हेतल बेन की चिंता ग्रामीण स्त्रियों के लिये बहुत है। वे अपनी संस्था के माध्यम से गुजरात के गाँवों में जाकर स्त्रियों को सरकारी स्कीम की जानकारी देकर उन्हें अपनी आजीविका कमाने में सहायता करतीं हैं। इस तरह से वे 1०, ००० कामगार स्त्रियों को सरकारी पहचान पत्र व सहायता दे पाईं हैं।

-----जब भी उन्हें पता लगता है कि किसी स्त्री के साथ अन्याय हो रहा है तो उसे सहारा देकर मार्गदर्शन करके उसे अपने पर आत्मविश्वास करना सिखातीं हैं।

-----8 मार्च सं 2021 के विश्व  महिला दिवस को सार्थक बनाने में उन्होंने एक अस्पातल के साथ डेढ़ सौ महिलाओं के लिए स्वास्थ्य समबन्धी जानकारी देता एक आकर्षक कार्यक्रम रक्खा था। 

----उन पंद्रह जोड़ों के सामूहिक लगन के चेम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स व कल्याणी साहसिक महिला विकास संघ  से आमंत्रण पत्र प्रकाशित हो चुके थे लेकिन कुछ दिन पहले विवाह स्थल देने वाले परिवार का बुरी तरह एक्सीडेंट हो गया। हेतल बेन परेशान इधर उधर भागदौड़, बार बार फ़ोन करके मुश्किल से दूसरा विवाह स्थल स्पॉन्सर करने वाले को खोजा। वह पंद्रह जोड़ों का विवाह कुछ इस तरह आलीशान ढंग से संपन्न हुआ कि ये अपना सारा तनाव व मेहनत भूल गईं। सबसे बड़ी ख़ुशी ये थी कि इन कम आय वाले परिवार की लड़कियों को ज़रुरत का सामान भी संस्था से मिल गया था।

---हस्तकला हैण्डीक्राफ़्ट्स की कोई प्रदर्शनी हो या टैरो कार्ड्स कार्यक्रम या पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम या रेडीमेंट गारमेंट्स या आर्टिफ़िशियल ज्वैलरी की प्रदर्शनी हो या कोई स्वास्थ्य सम्बन्धी शिविर -हेतल बेन सुंदर, बनी संवरी हुई गंभीरता से उसका उद्घाटन करती नज़र आ सकतीं हैं .

-------  इन्होंने नरेन्द्र मोदी जी के 'शॉपिंग फ़ेस्टिवल' कार्यक्रम को कुछ इस तरह नियोजित व आयोजित किया कि मोदीजी भी इनकी प्रशंसा किये बिना रुक नहीं सके।

  ''आज मैंने पांच कार्यक्रम का उद्घाटन किया। अहमदाबाद की दूरियां तो आप जानतीं हैं। मुझे ख़ुद विश्वास नहीं होता ये सब कैसे हो जाता है ? ''वे हंस कर बता रहीं थीं, मैं चकित सुन रही थी। 

     मेरे मुंह से अनायास निकला था, '' क्या हेलीकॉप्टर से अहमदाबाद की दूरियां नापतीं हैं ? आप तो 'इनॉगरेशन क्वीन 'हैं। ''

      अहमदाबाद और आस पास के गाँवों में उन्होंने महिला उत्कर्ष के लिए इतना काम किया है कि महिलाओं में एक विश्वास पैदा हो गया है कि यदि हेतल बेन से उद्घाटन करवाया तो हमारा बिज़नेस बहुत प्रगति करेगा। उन्होंने अपनी टीम के साथ गाँव गाँव जाकर हैंडीक्राफ्ट्स बनाने वाली स्त्रियों से सम्पर्क किया व उन्हें गुजरात सरकार की स्कीम्स से परिचित करवाकर उनका गुजरात सरकार का आर्टीसेन कार्ड बनवाया। इस तरह से उन्होंने 10, 000 स्त्रियों को उनकी प्रगति का रास्ता दिखाया है, ये सिलसिला ज़ारी है। 

     हेतल बेन के व के एस एम वी एस कार्यकर्ताओं के इसी समर्पण के कारण उन्हें सं 2016 में सरकार ने उन्हें 'डॉटर ऑफ़ गुजरात 'की उपाधि से सम्मानित किया सिर्फ़ तीन वर्ष के कार्यकाल के बाद क्योंकि ये एन जी ओ उन्होंने सं 2013 में स्थापित की थी। शायद अब ये जानकार आश्चर्य नहीं होगा कि इस संस्था के देश के समाचार पत्रों व न्यूयॉर्क टाइम्स में चर्चा होती रही हैं।शायद ये अब तक की गुजरात की एकमात्र एन जीओ होगी जिसे 72 पुरस्कार मिल चुके हैं।

   कोई सन 2013 में संस्था स्थापित करे और उसे सरकार सन 2016 में 'गुजरात की बेटी 'उपाधि दे दे। बात कुछ हजम नहीं होती न ? लेकिन आपको क्लास वन ऑफ़िसर की एक बारहवीं पास लड़की से मिलना होगा जिसके दो भाई इंजीनियरिंग पढ़ रहे थे। पापा की इच्छा थी कि वे डॉक्टर बने लेकिन लड़की ने साफ़ साफ़ कह दिया उसे आर्ट का शौक है। सारा घर सकते की हालत में पड़ गया लेकिन पापा ने कहा, ठीक है, ''जो तुम्हारा दिल करे वह कैरियर चुनो। ''

   लड़की ने फ़ैशन डिज़ाइनिंग कॉलेज में एडमिशन लिया व सुबह पांच या छः बजे उठकर लाल दरवाज़े के हर इतवार को लगने वाले इतवारी बाज़ार में जाने लगी। जहाँ पन्द्रहवीं, सोलहवीं शताब्दी की पुस्तकें सस्ते में ख़रीदती जिसमें राजा महाराजाओं की पोषाकों की फ़ोटोज़ होतीं थीं, कच्छ के हस्तकार अपनी कढ़ाई के कपड़े लातीं वह ख़रीदती जिससे अपने बनाये चनियाँ चोली पर पैचवर्क कर सकें। शेक्सपियर जैसे लेखकों की पुस्तकें काम दामों में ख़रीदकर पढ़तीं। साहित्य का शौक इतना हुआ कि इन्होने अंग्रेज़ी साहित्य में बी ए कर डाला था। शाहीबाग इलाके की उन स्त्रियों को कढ़ाई करते देखने जातीं कि कैसे ये इतना सुंदर आकृति बनातीं हैं। इनके पापा के चार बंगले थे इन्होने उनसे कहा था, ''आपका एक बँगला ख़ाली पड़ा है, आप मुझे वहां काम करने दीजिये। ''

      पापा ने अनुमति दे दी। अहमदाबाद के रानिप क्षेत्र के बंगले के आस पास रहने वाली बहुत सी स्त्रियां कढ़ाई का काम करतीं थीं। इन्होने उनसे सम्पर्क किया, कुछ इन्होंने सहायक रखकर चनियाँ चोली बनाने आरम्भ किये। । सुबह 7 बजे से 11 तक यहां काम करतीं। दोपहर में कॉलेज जातीं। लॉ गार्डन में चनिया चोली बेचने वालियों को इन्होने सौ -सौ चनियाँ चोली सप्लाई किये थे। इनके बुटिक की प्रसिद्धि इतनी फैली की ख़ुद स्त्रियां काम मांगने इनके पास आने लगीं। जो युवा लड़की स्त्री सशक्तिकरण अर्थ भी नहीं जानती थी वह कामगार स्त्रियों को अपने पैरों पर खड़ा होना सिखा रही थी। 

    इन्हें पता लगा कि पेठापुर क्षेत्र में कुछ कारीगर ब्लॉक प्रिंट का कार्य करते हैं तो ये उन्हें इस प्रिंट करवाने के लिए कपड़े भेजने लगीं। उन्हें नियमित काम मिलने लगा तो हेतल बेन ने उनकी एन जी ओ बनवा दी।

 लम्बे ख़ूबबसूरत बालों के रख रखाव में जब समय नष्ट होता तो इन्होंने बाल कटवा लिये। कटे बालों से जब ये कार चलातीं तो लोग कहते, ''ये तो जगदीश भाई का डिकरा [बेटा] है। '' 

   परिवार वाले बहुत ख़ुश होते व दंग होकर कहते, ''हेतल तो अपनी नानी पर गई है। उनके गाँव में कोई भी आये उसे बिना चाय पिलाये जाने नहीं देतीं थीं। गाँव में किसी पर कोई दुख आये तो उसके पास सबसे पहले वो खड़ी हो जातीं थी। ''

   ये जूनून ऐसा बढ़ा कि गाँव गांव घूमकर इन्होने गुजरात के 52 हैंडीक्राफ्ट्स का अध्ययन किया जिसमें बाँधनी, अजरक प्रिंट, पटोला, सिकोरी बांधनी, टाय एन्ड डाय शामिल हैं। रानियां जो पटोला साड़ी पहनतीं थीं उसे बनाने में एक साल लग जाता है। ये बंगले के आस पास की बहिनों को चनियां चोली बनाने का काम देने लगीं थीं। इनका बुटिक इतना चलने लगा कि इन्होंने अपने पापा को बंगले का किराया देना आरम्भ कर दिया था ।

  सन 2002 में कच्छ का दौरा किया। तब तक स्मार्ट फ़ोन आ गए थे तो इन्होनें कच्छ की कढ़ाई करने वाली स्त्रियों की एक एन जी ओ बनाई उसे सरकार से जोड़ा। इस काम में सहायता मिली तत्कालीन डेवलपमेंट हैंडीक्राफ्ट्स एन्ड हेंडलूम्स मंत्री दर्शना बेन से।

   वे बतातीं हैं, '' अहमदाबाद के वाडज में पंद्रह सौ बेनें पैचवर्क का काम करतीं हैं। उन पर किसी का ध्यान नहीं गया। मैंने और दर्शना बेन ने छः घंटे में सारा प्रोग्राम बनाया। हमारी कोशिश से गांधी आश्रम के पास 'क्राफ़्ट विलेज 'खुलने वाला है जो आश्रम टूर का हिस्सा होगा, जहाँ देशी व विदेशी पर्यटक आएंगे जिससे इनका रोज़गार बहुत बढ़ेगा व इन लोगों को अपनी आजीविका कमाने अपना घर छोड़कर जाने की आवश्यकता भी नहीं है। ''

   ''आपने इतनी उम्र में इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी ली। क्या कभी आपको नुक्सान नहीं हुआ ?''

   ''ऊपरवाले की मेहरबानी है लेकिन सं 2006 में सूरत की बाढ़ के कारण बेनों का बहुत नुक्सान हुआ। मुझे आत्मसंतोष है कि मैंने गुजरात की कला को  पेरिस, लंडन व और भी देशों में पहुंचाया है। ''

   ''आपने जगह जगह यहाँ तक कि कच्छ के कारीगरों की एन जी ओ बनवाईं कभी सोचा नहीं कि ख़ुद की भी कोई एन जी ओ बनाऊँ ? ''

    ''मैंने इस विषय में या शादी के विषय में कभी सोचा ही नहीं। जब लोगों ने कहा कि आप अपनी संस्था बनाइये। तब हमने सं 2013 में के एस एम वी एम की स्थापना की थी। मेरे परिवार पर रिश्तेदारों का दवाब बढ़ने लगा तो मेरी शादी डॉक्टर साहब से कर दी। मेरा सौभाग्य है कि कदम अदम पर साथ देने वाले मेरे पति मिले। ''

   ''आपकी बेटी आई टी इंजीनियरिंग व बेटा कम्प्यूटर इंजीयरिंग कर रहा है इसका मतलब सारी व्यस्तताओं के बावजूद आप सफ़ल माँ भी हैं तो किस तरह परिवार को समय दे पातीं हैं ?''

    ''देखिये दिन में चौबीस घंटे होते हैं। सोने के लिये सिर्फ आठ घण्टे बहुत हैं। कोई स्त्री अगर चाहे तो अपने काम व परिवार में संतुलन रख सकती है। हम डेढ़ दो महीने में समय निकालकर एक साथ घूमने चले जाते हैं, रात का खाना साथ में खाते हैं। ''

    सिटी पल्स फ़िल्म इंस्टीट्यूट में प्रियंका चोपड़ा फ़ैशन शो में आने वालीं थीं। मॉडल्स इन्हीं के बनवाये कपड़े पहने थीं। प्रियंका इनके काम से बहुत प्रभावित हुईं थीं।

    ''आपने स्मृति ईरानी के प्रोजेक्ट से 10,000 ग्रामीण बहिनों के आर्टीसन कार्ड्स बनवाये थे। इस बात पर प्रकाश डालेंगी। ''

     ''इन बेनों को अपनी वस्तुएं बेचने में बहुत कठिनाई होती थी। अब ये बेनें गांधींनागर से सिर्फ़ दो सौ रूपये में किसी एग्ज़ीबिशन में एक स्टॉल बुक कर सकतीं हैं. मुझे अब इतना अनुभव हो गया है कि यदि कोई कहे कि पांच सौ बेनों की वस्तुओं की एग्जीबिशन लगानी है तो मैं पांच छः घंटे में लगा सकतीं हूँ। ''

   ''आपकी एन जी ओ को किसी सरकारी प्रोजेक्ट में काम करने पर क्या मिलता है ?''

    ''मैं एक भी रुपया सरकार से नहीं लेती, नहीं तो मेरे हाथ बंध जाएंगे। उनके प्रोजेक्ट के लिए कारीगर देतीं हूँ। इन्हें जो रोज़गार मिलता है उसे देखकर मुझे संतुष्टि मिलती है। ''

   ''आप चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स से कब जुड़ीं थीं ?''

    ''मैं 8 साल से चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के लिये काम कर रहीं थी। इन्हें बहुत लाभ पहुंचाया है। तीन वर्ष पहले इसके चेयरमैन श्री जितेंद्र तन्ना जी ने मुझसे कहा कि आप अहमदाबाद के चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के वीमन विंग की चेयरपर्सन क्यों नहीं बन जातीं ? सच मानिये मैं शॉक्ड रह गई थी। मुझे इतना सम्मान मिलेगा मैंने सोचा भी नहीं था।''

  ''क्या आप कोई उदाहरण देकर समझायेंगी कि आपने किसी स्त्री की कैसे सहायता की कि उसकी ज़िन्दगी बदल गई। ''

      ''जी एक अलका सोनी मेरे पास आईं थी जो हेण्डीक्राफ़्ट्स का काम करना चाहतीं थी लेकिन उसके पास पैसा बिल्कुल नहीं था। उसकी प्रतिभा व लगन पहचानकर मैंने उसके लिए कारीगर खोजे व पैसा दिलवाया। आज उसके अहमदाबद व आनंद में दो शो रूम हैं। मैंने 20 वर्ष तक फ़ैशन डिज़ाइनर का काम किया है इसलिए डिज़ाइन बनाने मेमेरी रे लेने के लिये भी बेने मेरे पास आती रहतीं हैं। ''

कोरोनाकाल में हेतल बेन ने जिस तेज़ी से काम किया, उन्होंने सबको अचम्भे में डाल दिया था। महसाना ज़िले के वडसर गाँव में ५८ मौतें हुईं।इतने मृत शरीर का कैसे क्रिया कर्म करें ?सरपंच समझ नहीं पा रहे थे। वहां ये पहुंचीं सबकी क्रिया की व्यवस्था की। सारा गाँव सेनीटाइज़ करवाया व मास्क बांटे व आश्वासन दिया कि किसी तरह की सहायता की आवश्यकता हो तो हेतल बेन से सम्पर्क करें। 

     इनकी एन जी ओ को १० लाख मास्क बनाने का सरकारी ऑर्डर मिला था। इन्होंने रोज़ काम करने वाले प्लंबर, लुहार, अलग लारी वाले, कुछ मज़दूर व औरतों को इकठ्ठा किया। इन्हें कुछ लोगों ने सरखेज व वेजलपुर में गोडाऊन दे दिए थे, जहाँ इन्होंने इन्हें तीन तीन फ़ीट की दूरी पर मास्क लगवाकर मास्क बनने का मुहिम आरम्भ किया। ट्रक पर ट्रक भरकर मास्क सप्लाई किये थे। इस तरह इस समय में ये व्यवस्था की कि जहाँ तक हो सके लोग भूखे पेट न सोएं। इस तरह से २५० परिवार को ये बड़ी राहत थी। 

  ''आपका जो थेपला सप्लाई प्रोजेक्ट था उससे बेनों को कैसे आर्थिक सहायता मिली थी ?''

   ''कुछ लोगों ने अपने गोडाऊन, माल्स में मज़दूरों को पनाह दी थी। वही लोग हमें प्रति थेपला तीन रुपये देते थे जिससे थेपला बनाने वाली बेनों के घरवालों का पेट भर सके।एक तो डी एस पी की लड़की ने लारी वाले से शादी कर ली थी, वह आकर मेरे पास रोई कि मैं ऐसे घर की हूँ कि मेरे घर में पांच पांच नौकर काम करते थे लेकिन अब मेरे यहां खाने को भी नहीं है।इस तरह की बहूत से बनों को रुपये कमाने का मौका मिला था।  ''

  सारा शहर कोरोना के सामने हेतल बेन का साहस देखकर दंग रह गया था। इन्होंने व इनकी साथियों ने अस्पताल के आई सी यू में जाकर लाल रंग की साड़ियां स्त्रियों में बांटीं थीं। अभी हाल फिलहाल का गांधीनगर 'मेंगो फ़ेस्टिवल 'जब इन्होने आयोजित किया तो बेनें आम के विभिन्न अचार से 8 -8 लाख रुपया कमाकर लौटीं थीं । 

    जब उनसे पूछा गया कि आप कोरोनाकाल में बिना डरे किस तरह इतने परिवारों को आर्थिक मदद कर पाईं तो हेतल बेन का उत्तर था,'', ''इतिहास साक्षी है कि जब जब देश पर मुसीबत आई है स्त्रियों ने भी उनके सामने तनकर उनका सामना किया है। इसलिए भी हमारा देश आज़ादी में सांस ले रहा है। मैं ऐसी दुनियां का निर्माण करने में लगीं हूँ जहाँ हर स्त्री सुरक्षित हो, शक्तिमान हो व इतनी आत्मनिर्भर बने कि लोग उसे महत्व दें। '' ''

----------------------------------------

  नीलम कुलश्रेष्ठ 

e-mail-----rediffmail.com