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यादें - 2
by प्रियंका गुप्ता
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एक अजीब सी बेचैनी तारी हो गई थी मुझ पर...। क्या हो रहा होगा वहाँ...? काश, मैं तुम्हारे साथ होती। वैसे तुम अकेले भी नहीं थे, अच्छा-खासा स्टॉफ़ गया ...

इन्तज़ार
by Kalyan Singh
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       दोपहर का समय था मैं और अनूप अपनी फील्ड ट्रेनिंग पर चेन्नई जा रहे थे ,  तभी हमारी ट्रेन नागपुर पहुंची और हमें अपनी सामने वाली ...

कमसिन - 30
by Seema Saxena
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आज पूरे तीन महीने के बाद रवि के अलावा भी कोई उसके दिलो दिमाग पर छाया था अन्यथा उसे सिर्फ रवि की छवि, उसकी बातें, उसकी यादें ही किसी ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 16
by Rashmi Ravija
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

आमची मुम्बई - 41
by Santosh Srivastav
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मुम्बई कभी सोती नहीं उसकी नाइटलाइफ़ के बारे में यही कहा जाता है मुझे याद आ रहाहै ‘मुम्बई रात की बाहों में’ एथेना, लश, ...

गुमशुदा की तलाश - 15
by Ashish Kumar Trivedi
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                                         गुमशुदा की तलाश                ...

एक दिन रेल के सफर में
by Upasna Siag
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मैं एक व्यवसायी या कहिये एक सफल व्यवसायी रहा हूँ। अपने जीवन में बहुत रुपया, नाम, इज्ज़त कमाई है। लेकिन कभी बाहर की दुनिया का भ्रमण ही नहीं कर पाया। अब ...

फेसबुक और तीन प्रेमी युगल - 2
by Arpan Kumar
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डॉ. इला त्रिपाठी ने आगे अपनी मनोवैज्ञानिक व्याख्या जारी रखी, “मित्रो, कई बार समाज के कुछ ग़लत तत्व फेसबुक पर फेक अकाउंट खोलकर आपको प्रलोभित करते हैं, अपने आकर्षण ...

पथ के दावेदार - 10 - Last Part
by Sarat Chandra Chattopadhyay
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भोजन की थाली उसी तरह पड़ी रही। उसकी आंखों से आंसू की बड़ी-बड़ी बूंदे गालों पर से झर-झर नीचे गिरने लगीं। अपूर्व की मां को उसने कभी देखा नहीं ...

फिल्म रिव्यू ‘लाल कप्तान’- सफलता का रंग चढेगा..?
by Mayur Patel
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उंची दुकान फिका पकवान. ये कहावत 'लाल कप्तान' पर बराबर फिट बैठती है. निर्देशक के रुप में जब ‘मनोरमा सिक्स फिट अन्डर’ और ‘एनएच टॅन’ जैसी सफल थ्रिलर देनेवाले ...

डॉमनिक की वापसी - 9.
by Vivek Mishra
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दीपांश उस चट्टान पर कुछ देर और हिमानी के साथ बैठता तो उसे बताता कि आज उसे यहाँ नहीं होना चाहिए था। आज उसे अपनी मंडली और पन्द्रह और ...

सबेरे सबेरे
by r k lal
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सबेरे सबेरेआर 0 के 0 लालसंजीव अपने बॉस के कमरे से निकल कर कार्यालय के हाल में आया तो उसने सबको बताया कि आज बॉस का मूड बहुत खराब ...

दीवाली
by Rajesh Bhatnagar
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आज सरला मुंह अंध्ंारे ही उठ बैठी थी । उसने पौ फअने तक तो आंगन की झाड़ू लगाकर हैण्डपम्प से पानी भी भर लिया था । पानी भरते-भरते उसका ...

सौदा बेचने वाली
by Saadat Hasan Manto
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सुहैल और जमील दोनों बचपन के दोस्त थे...... उन की दोस्ती को लोग मिसाल के तौर पर पेश करते थे। दोनों स्कूल में इकट्ठे पढ़े। फिर इस के बाद ...

स्वप्न
by Akshay jain
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आज हम स्वप्न के विषय पर अपने विचार रखेंगे । मेरा निवेदन है कि इसे पढ़ने के पहले आप सभी "नींद" वाला लेख जरूर पढ़ें। इससे आप मेरी बात ...

वरुण का सफर -- अजनबी से........तक
by Deepak Singh
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नमस्कार मित्रों,सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार।आप सभी पाठकों ने मेरा पहला लेख "मेरा पहला अनुभव...." को इतना प्यार और स्नेह दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आपके इतने ...

आपदा प्रबंधन
by Rajesh Maheshwari
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                                                        आपदा प्रबंधन   गोकुलदास नाम का एक नवयुवक नये साल की पूर्व संध्या का आनंद उठाने के लिए दुबई गया था। वहाँ वह सायंकाल के समय विश्व प्रसिद्ध ...

मायामृग - 12
by Pranava Bharti
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व्यवसाय में असफलता के फलस्वरूप उदित का पीना बढ़ गया था दोनों पति-पत्नी में पहले भी झगड़े होते थे अब अधिक होने लगे थे सभी ...

अफसर का अभिनन्दन - 22
by Yashvant Kothari
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हेलमेट की परेशानी                              यशवन्त कोठारी        वरमाजी राष्ट्रीय  पौशाक अर्थात लुगी और फटी बनियांन में सुबह सुबह आ धमके। गुस्से में चैतन्य चूर्ण की पींक मेरे गमले ...

आसपास से गुजरते हुए - 12
by Jayanti Ranganathan
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मैं दिल्ली आने से पहले साल-भर चेन्नई में थी। मैंने जैसे ही कंप्यूटर का कोर्स पूरा किया, मुझे मुंबई में अच्छी नौकरी मिल गई। जब उन्होंने मेरे सामने चेन्नई ...

ચીસ - 39
by SABIRKHAN
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કાલી પર અસવાર થઈ બાદશાહ મહેલમાં પહોંચ્યો ત્યારે સભાસદો અને રાજમહેલના પ્રત્યેક વ્યક્તિને મહારાજની ઈંતેજારી હતી. વિક્ટોરિયા મહારાજને મળીને ગઈ ત્યાર પછી સભાસદોમાં અનેક તર્ક-વિતર્ક થતા રહ્યા. અંગ્રેજી સલ્તનત ...

एकजुटता
by KAMAL KANT LAL
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एकजुटता इस विघटनकारी समय में सामाजिक एकजुटता के नए आयाम परिभाषित करती कहानी     एकजुटता उस दिन मैं जयपुर से अपने शहर लौटने के लिए एयरपोर्ट की तरफ ...

पथ के दावेदार - 9
by Sarat Chandra Chattopadhyay
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भारती प्रसन्नता भरे स्वर में पुकार उठी, 'शशि बाबू, हम लोग आ गए। खिलाने-पिलाने का इंतजाम कीजिए। नवतारा कहां है? नवतारा!....नवतारा....!!' शशि बोले, 'आइए, नवतारा यहां नहीं है।' डॉक्टर ने मुस्कराते ...

आखर चौरासी - 8
by Kamal
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जिस समय जगदीश से उलझते गुरनाम को खींचते हुए प्रकाश कॉमन रुम से बाहर निकला था, लगभग उसी समय राजकिशोर ने कॉमन रुम में प्रवेश किया था। उसने दूर ...

मेरा नाम अन्नपुर्णी है।
by S Bhagyam Sharma
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बाहर से कुछ आवाज आई। मैंने सिर्फ थोड़ा सा सिर बाहर करके झांका तो देखा सास लक्ष्मी एक बडे थैले को लेकर आ रहीं थी। ऐ बात पन्द्रह दिन ...

उधड़े ज़ख़्म - 4
by Junaid Chaudhary
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वंडर लैंड की तरफ जाते हुए रास्ते में मेने अपनी बाइक के कानो को मरोड़ना शुरू कर दिया,जिसकी वजह से वो चल कम रही थी और आवाज़ ज़्यादा करने ...

टिफिन
by Satender_tiwari_brokenwords
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इस कहानी एक काल्पनिक रचना है। इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है।। **********************************************रोहन की टिफ़िन में दाल चावल होता था जिसे वो बिरयानी बोलता था। और अमन के ...

लबरी
by Geeta Shri
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“लबरा लबरी चले बाजार...लबरा गिरा बीच बाजार, लबरी बोली खबरदार...” माला कुमारी ने जिस घड़ी गांव जाने के बारे में सोचा था तभी से कान में एक ही धुन बज ...

सैलाब - 10
by Lata Tejeswar renuka
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संयुक्त परिवार में बड़ों की बातें छोटों को बहुत प्रभावित करती है। हर वक्त बच्चों के सामने माधवी के ताने सुनते सुनते बच्चे भी कुछ इस तरह की बातें ...

पिता से 1,800 रुपये उधार लेकर शुरू की कंपनी, लाखों का टर्नओवर
by Mrityunjay Singh
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मृत्युंजय सिंह ने 21 साल की उम्र में ही एडवर्टाइजमेंट टेक्नोलॉजी से रिलेटेड स्टार्टअप Adjuction.com की स्थापना की और उन्हें 20 दिन में ही मिल गयी 10 लाख की ...