कैसा ये इश्क़ है.... - (69) Apoorva Singh द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

कैसा ये इश्क़ है.... - (69)

शान वहां से पैदल ही आगे निकल जाते हैं।वही मालिनी अभिनव से संपर्क कहती है, सर टिया का गला ठीक नही है तो उसने स्पेशल परमिशन लेकर अजय जी को खुद के साथ गाने के लिए बोला है।लेकिन परेशानी ये है कि अजय जी यहां से घूमने निकल चुके हैं।अब आप ही बताइये क्या किया जाये।टिया के करियर का सवाल है।

मालिनी की बात सुन अभिनव गुस्से से बोले ये लड़की हमेशा मन की करेगी,न जाने कब इसे अक्ल आयेगी।अजय इसकी कोई हेल्प नही करने वाला।वो अपनी मर्जी का मालिक है अब इस कम अक्ल को मैं कैसे हैंडल करूँ।

अभिनव की बात सुन मालिनी अजय से ज्यादा खुद को श्रेष्ठ बताने के उद्देश्य से भड़काते हुए बोली सर आपको नही लगता ये मिस्टर अजय कुछ ज्यादा ही अकड़ू और सनकी टाइप है।भला ऐसे छात्रों को कौन ट्रीट करता है।बस दो चार नयी धुने सिखा दी हो गया वैसे भी उनसे ज्यादा तो छात्रों को मैं ही सम्हालती हूँ।गाना सिखाती हूँ,उनके साथ उनकी परेशानी शेयर करती हूँ जब उस धुन पर मैं गाना सिखा सकती हूँ तो धुन बनाना कौन सी नयी बात है।

मालिनी की बात सुन अभिनव बोले,उस अकेले बंदे ने पूरी अकैडमी सम्हाल रखी है मालिनी जी।वो अकड़ू है और आपके लिए सनकी है थोड़ा पागल है लेकिन उसमे हुनर और अच्छाई गॉड ने कूट कूट कर भरी है।उसमे कुछ तो विशेष बात होगी जो मैंने पूरी अकैडमी का मैनेजर उसे बनाया है।आप इस बारे में ज्यादा दिमाग न लगाये जहां आपकी सोच खत्म होती है उसकी सोच वहां से शुरू होती है सो उससे अपनी तुलना करने की जगह आप अपने कार्य को बेहतर करने की कोशिश करें।इसी से आप भी आगे बढ़ सकती है।

जी!सर मालिनी ने बुझे मन से कहा और वापस अंदर आ जाती है।वहीं अंदर अपने ही झूठ में फंसी टिया मालिनी की ओर देखती है जो न में अपनी गर्दन हिला देती है।ये देख वो मन ही मन बोली मुझे तो लगा था कि मिस्टर अकड़ू तुम अकैडमी की इज्जत के नाम पर मेरे इस जाल में फंस जाआगे और मैं सब लोगों के सामने तुम्हारी हंसी उड़वा दूंगी।लेकिन अब तुम्हारे न आने पर मुझे लग रहा है कि मैंने अपने ही पैरो पर कुल्हाड़ी मार ली है अब तो मैं जीतते हुए भी हार गयी।टिया बड़बड़ाई और माइक ले बोली सॉरी कहती हूँ गला खराब होने की वजह से मैं नही गा सकती और मेरे पाटर्नर मिस्टर अजय किसी जरूरी काम से बाहर निकल गये है।असुविधा के लिए खेद है कहते हुए टिया हार की खुन्नस लिए दनदनाते हुए नीचे उतरती है और सीधा बाहर की ओर लपकती है वो अजय को ढूंढते हुए पैदल चलती जाती है।कुछ आगे चल कर उसकी नजर सड़क पर टहलते हुए शान पर पड़ती है।वो बिन सोचे समझे शान के पास पहुंच और उसके आगे आ कर उसका रास्ता रोक खड़ी हो जाती है और बोली-

टिया :- समझते क्या हो खुद को।मैं वहां स्टेज पर खड़े हो तुम्हारा इंतजार कर रही थी और तुम आये ही नही।क्यों ऐसा कौन से जरूरी काम कर रहे थे तुम।मुझे तो टहलने के अलावा कोई जरूरी काम नजर नही आ रहा।

शान एक तरफ हुए और आगे बढ़ गये।शान की इस हरकत ने टिया के गुस्से में घी का काम किया वो आगे बढ़ी और शान का हाथ पकड़ रोकते हुए बोली ऐ मिस्टर अकड़ू...आगे कुछ कहती तब तक शान के झटके से हाथ छुड़ाने के कारण वो नीचे जमीन पर पड़ी होती है।

शान गुस्से से घूरते हुए बोले :- मेंटेन योर लिमिट्स..!मॉक माय वर्ड्स।कहते हुए वो आगे बढ़ जाते है।टिया को शान के इस तरह हाथ छुड़ाने पर बहुत गुस्सा आता है।वो गुस्से में आगे बढ़ी और शान के आगे आ कर बोली!क्यों आप कहीं के शहंशाह है।मिस्टर अजय आप मेरी अकैडमी में सिर्फ एक मैनेजर है और मैं मालिक की बेटी आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे धक्का देने की कहते हुए वो दोनो हाथो से शान को आगे से धक्का देती है।

शान बिन कुछ कहे एक तरफ हट कर चलने लगते हैं।ये देख टिया फिर से आगे आई और धक्का देने के लिए जैसे ही आगे बढ़ी शान एक तरफ हट गये और वो खाली सड़क पर फिर से गिर पड़ी।इस बार वो अपने वेग से उठती है और दौड़ते हुए शान को धक्का देती है।शान सम्हल नही पाते वो गिर जाते है उनके साथ ही धक्का लगने से टिया भी गिर पड़ती है।

टिया अपनी आँखे खोलती है तो खुद को शान की पीठ से सहारा लिए देख एक पल को तो वो ठहर जाती है।वहीं शान टिया को इतने पास देख गुस्साते हुए उठते है जिससे टिया एक साइड में गिर जाती है।

शान उठे और बोले :- अपने हाथ पैर शरीर सोच सब पर लगाम लगाओ।आज सिर्फ धक्का दिया है अगली बार अपनी लिमिट्स क्रॉस की तो एक जोर की चमाट लगाने से हिचकूँगा नही।नारी हो नारी की मर्यादा में रहकर व्यवहार करो।टीचर हूँ तुम्हारा दोस्त या बॉयफ्रेंड नही।ये मेरी पहली और आखिरी वार्निंग है शान ने गुस्से से देखा और वहां से आगे बढ़ गये।

शान वहां से वापस ऑडिटोरियम की ओर बढ़ जाते हैं।वो वहां से ऑडिटोरियम में टीचर्स के सेक्शन के अंतर्गत एक प्रस्तुति देने के लिए आगे बढ़ते हैं।और मन ही मन सोचते हुए बोले अप्पू इस प्रतियोगिता का प्रसारण रेडियो और टीवी दोनो जगह हो रहा है मुझे भरोसा है तुम जहां भी होगी मेरी आवाज तुम तक जरूर पहुंचेगी जिससे तुम्हे रियलाइज हो जाये मैं तुम्हे कितना याद कर रहा हूँ और तुम जिद छोड़ कर मेरे पास चली आओ!

वहीं मसूरी में युवराज और पूर्वी हॉल में बैठे हुए टीवी पर लाइव शो देख रहे है।पूर्वी ठहरी संगीत की विद्यार्थी उसे इन सब का बहुत शौक है वो अक्सर ऐसे शो सुना और देखा करती थी।

शान का नाम अजय के रूप में अनाउंस हो जाता है तो वो अपना गिटार लेकर स्टेज के पास पहुंचते है जहां लाइट्स ऑफ के लिए उन्होंने पहले ही बोल रखा था।टिया शान को गिटार लेकर जाते हुए देखती है तो मन ही मन खुश होते हुए बोली,चलो जो बेइज्जती मैं इनकी करना चाह रही थी वो अब ये खुद करवाएंगे मिस्टर अजय संगीत में सिर्फ वादन ही काफी नही होता प्रतियोगिता में गाना भी पड़ता है ...

वहीं लाइट्स ऑफ होने पर शान स्टेज पर पहुंचते है और गिटार ट्यून करते हुए कुछ लाइने बोलते हैं..!

तेरे जाने के बाद बस इतना सा काम किया
यादों की तेरी गठरी बना कर दिल के कौने में समेट लिया।

शान की आवाज सुन पूर्वी बोली युव्वि ये अजय की आवाज कुछ कुछ प्रशांत सर जैसी ही है।काश कि ये प्रशांत सर होते।काश...लेकिन ये अजय हैं।युवी ने कहा।

वही लखनऊ में टीवी पर चैनल्स बदल रही त्रिशा ये चैनल लगा कर रुक जाती है और खुशी खुशी तालियां बजाने लगती है वो चाचू, चाचू चाचू कहते हुए चिल्लाने लगती है।

चित्रा उसे सुन टीवी की ओर देखती है लेकिन बेहद कम रोशनी के कारण शान को देख ही नही पाती है।
चित्रा :- त्रिशा, वो आपके चाचू नही है।क्यों चिल्लाते हुए शोर मचा रही हो शांत हो जाओ।

नही मम्मा!चाचू।चाचू।कह खुशी से ताली बजाने लगती है।क्या मिल गया त्रिशा को।शोभा ने हॉल की ओर आते हुए पूछा तो त्रिशा बस इतना ही बोली चाचू चाचू।अंकल गीटाल।

शोभा तुरंत टीवी के सामने आती है और देखते हुए बोली चित्रा ये तो प्रशांत है।प्रशांत का पता चल गया अब मुझे कुछ आगे सोचना होगा।शोभा ने मन ही मन कहा और शान की परफॉर्मन्स देखने लगती है।

अब वो मुहब्बत का मौसम नही!
तेरी जुदाई का पर गम नही!
वो प्यार के चार दिन सौ बरस से कम नही।
आवाज दो हमको, हम खो गये
कब नींद से जागे कब सो गये
तुम क्या गये दूर हम दूर सबसे हो गये।
आवाज दो हमको हम खो गये....! (फिल्म दुश्मन )

गाते हुए वो एक बार फिर भावुक हो जाते है और स्टेज से उतर कर वहां से निकल जाते हैं।

बर्फ की सफेद वादियां!लग रहा है जैसे धरती ने बर्फ की चादर ओढ़ रखी है।पेड़ पौधे पत्ते सभी बर्फ से से ढंके हुए हैं।इसी बर्फ की वादियो में एक लम्बा सा लड़का चलता चला रहा है।चलते हुए उसके पैर बर्फ में धंसने लगते है।शान!अरे बाबा रुको न!रुक जाओ शान!देखो बहुत सर्दी हो रही है हमे वापस चलना चाहिए।

न अप्पू!तुम हमेशा मनमानी करती हो मुझे तुमसे बात नही करनी समझी!शान सुनिये तो, हम घर चलकर बात करते हैं न शान रुक जाइये!आगे से कोई गलती नही होगी रुकिए तो!शान!तभी सामने से बर्फ की एक शीला ऊपर पहाड़ी से लुढ़कती चली आ रही है अर्पिता वो देख लेती है और शान को आवाज लगाते हुए कहती है शान हटिये सामने से, शान हमने कहा हटिये शान..शान ..

शान को परेशानी में देख कोमा में पड़ी अर्पिता की आँखे नम होती है उसकी आँखे छलक जाती है एवं उसके खामोश होंठ शान..!हटिये शान..कहते हुए अपनी खामोशी तोड़ते हैं।उसकी मूर्छा टूटती है और वो शान कहते हुए उठकर बैठ जाती है।आँखे भरी हुई चेहरे पर हैरानी परेशानी के भाव कुछ देर तक असमंजस में पड़ी रहती है ..फिर धीरे धीरे उसे एहसास होता है कि ये सपना था।वहीं शान चलते हुए अचानक रुक जाते है वो कुछ क्षण रुक अपने आसपास देखते है और फिर आगे बढ़ जाते है।

बड़ी ही अजब प्रीत की रीत होती है।एक दूसरे के प्रति तन मन धन से समर्पण रखने वाले दो प्रेमी दुनिया के किसी कौने में हो एक के दिल की पुकार दूसरे तक पहुंच ही जाती है।वो समय जरूर लेती है लेकिन पहुंचे बिन रुकती नही है।इसी पुकार के प्रभाव से शान की अर्पिता भी अपने होश में आ जाती है।वो अपने चारो ओर देखती है।ये बिल्कुल अजनबी जगह है उसके लिए हम कहां है शान!

वो अपने पैरो पर खड़ी होती है और उठकर बाहर आती है।शान,आप यहां है क्या..?शान कहां है आप..आप ठीक तो हैं शान?कहते हुए वो अपने दिमाग पर जोर डालती है एक एक कर सारे दृश्य उसकी आंखों के सामने आ जाते है हम तो वहां क्लिफ से नीचे..हम यहां कैसे..?अर्थात हमारी सांसे अभी भी चल रही है।हम है कहां..हे ठाकुर जी हम कहां है बड़बड़ाते हुए वो कमरे से बाहर आई उसे देख पूर्वी और युवराज उसके पास आये।अर्पिता ने दोनो को देखा तो हैरानी से बोली आप दोनो यहां हमारे सामने ..?कैसे हम कहां है..?हमे बताइये और शान वो कहां है कैसे है वो यहां है नही क्या वो..?

अर्पिता जी एक साथ इतने सारे सवाल सब का जवाब हम देंगे!लेकिन धीरे धीरे!आप पहले यहां बैठो थोड़ा रिलेक्स करो फिर हम आपको।एक एक कर सारी बातें बताते हैं।युवराज ने अर्पिता को वहीं सोफे पर बैठने के लिए कहा।

अर्पिता सोफे पर बैठ जाती है और सवालिया नजरो से पूर्वी और युव्वि की ओर देखती है।

पूर्वी बोली :- मैम क्लिफ से गिरने के बाद पिछले दो महीनों से आप कोमा में है।आज जाकर आप कोमा से बाहर आई हैं।प्रशांत सर ने आपका बहुत इंतजार किया फिर मैंने शोभा आंटी को आपके साथ हुए हादसे की खबर दी जिससे वो यहां आई और सर को अपने साथ ले गयी।सर बहुत परेशान थे वो तो यहां से जाना भी नही चाहते थे शोभा आंटी जी उन्हें डॉक्टर की मदद से नींद का इंजेक्शन लगा उन्हें बेहोश कर ले गयी।मैंने लखनऊ अकैडमी भी खबर कराई जाकर लेकिन प्रशांत सर वहां है ही नही रवीश सर ने बताया कि वो हादसे वाले दिन के बाद वहां लौट कर गये ही नही है।

पूर्वी की बात सुन अर्पिता की आँखे भर आई और मन ही मन बोली शान आपकी अर्पिता ने आपको बहुत रुलाया है।अब इसकी सजा भी ईश्वर ने दे ही दी जो हमे जीवित बचा लिया।ये ठाकुर जी का इंसाफ ही है जो हमारी जिंदगी से हमे दूर कर शरीर यहां छोड़ दिया।अब तो और मुश्किल होने वाला है ये सफर।हम आपके पास वापस आ नही सकते और आपके बिन रह भी नही सकते।अर्पिता को परेशान और खोया देख पूर्वी बोली, मैम एक बात कहूँ?

अर्पिता :- हां पूर्वी बोलो।
पूर्वी :- मैम ये छोटा मुंह बड़ी बात होगी लेकिन वैद्य काका कहते है गर्भवती स्त्रियों को परेशानी तनाव और निंदा से हमेशा दूर रहना चाहिए बच्चे पर बुरा असर पड़ता है।तो आप भी परेशान मत रहिये आपके बेबी पर बुरा असर पड़ेगा और वो भी ऐसे ही परेशान रोंदू सा जन्म लेगा।

पूर्वी की बात सुन अर्पिता हैरान रह जाती है।और सोचती है हम गर्भ से हां हो सकता है हमारे वो कदम उठाने से पहले ही शान की अर्पिता शान की हो चुकी थी ये सच ही है।अर्थात ठाकुर जी ने हमे ये जीवन बेवजह नही दिया।हमारे पास हमारे जीने की वजह है।थैंक्यू थैंक्यू ठाकुर जी अर्पिता ने मन ही मन कहते हुए ठाकुर जी को हाथ जोड़ धन्यवाद किया।और पूर्वी से बोली, थैंक यू पूर्वी तुम अपना ख्याल रखो बाकी ठाकुर जी सब सही करेंगे।इस खबर से ही अर्पिता के मन मष्तिस्क में चेतना आ चुकी है।

शिमला में शान वहां से बाहर चले जाते है।वहीं शान की आवाज सुन टिया और मालिनी दोनो अवाक रह जाती है।
टिया बड़बड़ाई :- इतनी तन्मयता गाने में!ये तो मिस्टर अकड़ू ने तो मेरे ही होश उड़ा कर मेरे दिल पर ही बिजली गिरा दी।कुछ तो बात है इसमे।अब तो इसके बारे में सब पता करके ही रहूंगी।इतना रूडी,बट चार्मिंग,अट्रैक्टिव, गायन और वादन दोनो प्रतिभाओ का धनी।बहुत से राज छुपे है इस पर्सनैलिटी में।नही तो आवाज में इतना बनावटी दर्द ला पाना सम्भव ही नही है।प्रतियोगिता समाप्त हो जाती है और सर्वसम्मति से टीचर्स ग्रुप में शान विजयी हो जाते है।लेकिन ये सम्मान लेने के लिए वो वहां होते ही नही है तो टिया सबको अपना परिचय देते हुए शान का पुरुस्कार ग्रहण कर लेती है।

लख़नऊ में प्रशांत के शिमला में अकैडमी से जुड़े होने की खबर मिलने पर त्रिशा के सोने के बाद शोभा चित्रा से बोली, चित्रा मुझे पता है कि तुम प्रशांत को पसंद करती हो तो अगर मैं तुमसे प्रशांत के पास जाकर उसका ख्याल रखने को कहूँ तो क्या तुम ये कर पाओगी।क्योंकि अर्पिता के बाद एक तुम ही हो जिसे वो अपने पास रखने से मना नही कर सकता उसका कारण है त्रिशा।शान त्रिशा से बहुत प्रेम करता है एवं इस समय उसके जख्मो को कोई भर सकता है तो त्रिशा ही है।उसके साथ ही वो सहज हो पायेगा।
शोभा की बाते सुन चित्रा बोली मैं पूरी कोशिश करूँगी आंटी जी।प्रेम निभाना मैंने राधिका से सीखा है एकतरफा है तो क्या हुआ प्रेम तो करती हूँ उनसे।अब मुझे मौका मिल रहा है अपने प्रेमी के ध्यान रखने का तो वो मैं कैसे छोड़ दूँ।

ये देख शोभा बोली तुम्हारा जवाब सुनकर मेरे मन को बहुत तसल्ली हुई।मैं जानती हूँ मैं थोड़ा स्वार्थी हो रही हूँ लेकिन प्रशांत के स्वभाव से मैं अच्छी तरह परिचित हूँ।अब तुम आज ही शिमला के लिए निकल जाओ।कल सुबह तक तो पहुंच ही जाओगी।बाकी जब तक प्रशांत तक पहुंच न जाओ तब तक के लिए मैं परम से कह एक होटल में रूम बुक करा देती हूँ।ठीक है।

जी आंटी जी चित्रा ने कहा और मुस्कुराने लगती है।वो अपने कमरे में गयी और पैकिंग करने लगी।सब सच जानते हुए भी उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट आ ही जाती है।लेकिन वो इस बात से अंजान है कि जिस प्रशांत से उसने प्रेम किया वो प्रशांत अब अजय बन चुका है।पैकिंग कर चित्रा त्रिशा को साथ ले शोभा जी को बता कर लखनऊ से शिमला जाने के लिए निकल आती है।

शिमला में टिया अपने कमरे में बैठी हुई।अजय के बारे में सोचते हुए मुस्कुरा रही है।उसके जेहन में अजय द्वारा गाया हुआ गाना ही गूंज रहा है।फैंटास्टिक!क्या सच में मिस्टर अजय की आवाज इतनी अच्छी है।अगर इतनी अच्छी है तो फिर उसे लोगों से छुपाते क्यों फिरते हैं।टिया जिसने समझदारी के पायदान पर अभी अभी कदम ही रखा है।वो अजय के प्रति एक आकर्षण का अनुभव करने लगती है।इसी आकर्षण से खिंचती हुई वो शान के बारे में सोचती जा रही है सोचते हुए वो मुस्कुराती भी जा रही है।

अपने कमरे में बैठे हुए प्रशांत आज टिया की घटना याद कर खुद से चिढ़े हुए कमरे में घूम रहे हैं।कुछ बोल नही रहे है लेकिन फिर भी तेज कदमो से इधर से उधर घूम रहे है।जब घूम कर थक जाते है तो फिर रुक कर अर्पिता के पोस्टर से बाते करते हुए कहते है, अर्पिता ...अब क्या बोलूं मैं तुमसे..!नही आज तो चुप ही रहता हूँ आज यूँ समझ लो नाराज हूँ तुमसे। कहते हुए वो खिड़की के पास जाकर बैठ जाते है और चांद की ओर निहारने लगते हैं।कुछ देर बाद पोस्टर की ओर देख बोले अब तुमसे नाराज होकर मैं करूँ भी क्या तुम यहां हो ही नही मुझसे कारण पूछने के लिए।

पूर्वी!अर्पिता जी को देखा है तुमने कहां है वो सर्दी बढ़ रही है तो ऐसे में उन्हें यही घर के अंदर होना चाहिए।युवराज ने घर के बाहर से पूर्वी के पास आते हुए कहा जिसे सुन पूर्वी बोली,अर्पिता मैम छत पर है वो चांद से बातें कर रही है।

चांद से!रियली।युवराज ने हैरानी से कहा जिसे सुन पूर्वी बोली अब खुद ही देख लो जाकर।

नही पूर्वी!हमे उनकी निजता में दखल नही देना चाहिए।युवराज ने कहा।तो पूर्वी मुस्कुराने लगती है।कुछ देर बाद अर्पिता नीचे चली आती है।एवं युवराज और पूर्वी से कहती है हमे कुछ कहना है पूर्वी।

पूर्वी :- मैम तो इसमे पूछने की क्या बात है आप अपनी बात कहिये न।

अर्पिता :- युवराज,पूर्वी आप दोनो ने हम पर जो उपकार किया है उसे हम उतार नही सकते। हम ये कहना चाहते है कि हम किसी पर भी बोझ बनकर नही रह सकते!हमे यहां से जाना होगा।

पूर्वी धीरे धीरे बोली :- मैम!आप घर वापस जाना चाहती है या कहीं और?क्योंकि जब मैं प्रशांत सर से मिली तो उन्होंने परेशानी में बताया कि आप वहां से कूद गयी थी।

अर्पिता बोली :- पूर्वी,हालात कभी कभी वैसे नही होते जैसे हमे दिखते है।बाकी आपने बताया कि आपके प्रशांत सर लखनऊ पहुंचे ही नही तो उनके बिन हमारा वहां जाना व्यर्थ ही है।कह चुप हो जाती है।

अर्पिता की बात सुन पूर्वी और युवराज कुछ देर चुप रहते है उन्होंने एक दूसरे की ओर देखा और पूर्वी बोली मैम आपको कहीं जाने की आवश्यकता नही है!आप मेरे साथ हमारी केयर टेकर बनकर रहिये।वैसे भी युवी के माता पिता मुझसे अब तक नाराज है इस वजह से हम लोग यहां रहते है।ऐसे में आप हमारे साथ रहेंगी तो हमे ये तसल्ली रहेगी कि कम से कम कोई अपना बड़ा हमारे साथ है और रही बात काम की तो आपके पास जो भी हुनर है उसे अपनी आजीविका बना लीजिये लेकिन यहां से कहीं मत जाइये।तब तक तो नही जब तक प्रशांत सर का पता नही चल जाता।

अब आजीविका के लिए हमे संगीत सर्वप्रिय है लेकिन हम उसे अपनी आजीविका नही बनाएंगे।क्योंकि ये हमे फिर हमारे अतीत के सामने लाकर खड़ा देगा।हम बच्चो के केयर टेकर बनना पसंद करेंगे।उसकी हमे आगे जरूरत भी पड़ेगी तो अभ्यास भी हो जायेगा।अर्पिता ने सोचते हुए कहा जिसे सुन पूर्वी बोली ठीक है मैम वैसे भी ये टूरिस्ट प्लेस है तो यहां ऐसी महिलाओं की आवश्यकता रहती ही है जो बच्चो को सम्हाल सके।बाकी हम दोनो कल शाम तक आपको कहीं न कहीं अपॉइंट करा ही देंगे लेकिन आप जाने का मत सोचना ठीक है।

ठीक है तो फिर यहां का रेंट भी बता दो अर्पिता ने कहा जिसे सुन पूर्वी बोली आपका किराया है ढेर सारा प्यार।

पूर्वी की बात सुन अर्पिता मुस्कुराते हुए बोली ठीक है फिर इसी प्रेम से हम आपके लिए जो भी करे उसे आपको स्वीकार करना होगा बताओ मंजूर है।

मंजूर है दोनो ने कहा।ठीक है फिर हम कहीं नही जाएंगे।अर्पिता बोली।

चित्रा शिमला पहुंच जाती है और होटल में न जाकर सीधे टीवी में बताई गयी अकैडमी जाती है।जहां वो अभिनव से मिल कर उनसे पूछती है, 'यहां मिस्टर प्रशांत मिश्रा'कार्य करते है क्या आप मुझे बता सकते है कि वो कहां मिलेंगे।

अभिनव हैरान होते हुए कहता है, आपको गलतफहमी हुई है यहां कोई प्रशांत मिश्रा नही है।

चित्रा :- अरे कल टीवी में जो प्रस्तुति आ रही थी जिसमे एक व्यक्ति ने गिटार लेकर प्रस्तुति दी थी वही तो है प्रशांत मिश्रा।उनकी प्रस्तुति के बाद इसी अकैडमी का नाम लिया था और आप बोल रहे है कि यहां कोई प्रशांत नही है।कितने बड़े झूठे है आप सफेद झूठ बोल रहे है।

चित्रा की बात सुन अभिनव सख्ती से बोला मुझे झूठा बोलने वाली आप हो कौन।मैं इस अकैडमी का मालिक हूँ आपको किसी से बात करने की तमीज नही है क्या।

त्रिशा जो वहीं चित्रा का हाथ पकड़े खड़ी होती है वो चुपके से हाथ छोड़ वहां से अंदर भाग जाती है और शान को ढूंढने लगती है।टिया जो अपनी क्लास के लिए जा रही है उसे यूँ भागता देखती है तो उसके पास आती है और उस पर गुस्सा करते हुए बोली, ए लड़की,यहां कहां घूम रही हो तुम?यहां किसके साथ आई हो।

आवाज सुन त्रिशा खड़ी हो गयी और कुछ देर उसे देखते हुए पहचानने की कोशिश करती है लेकिन जब पहचान नही पाती तो धीरे धीरे आगे बढ़ एकदम से सामने गैलरी में दौड़ जाती है।

ओ तेरी बित्ते भर की लड़की और मुझे चकमा देने की कोशिश कर रही है।रुक अभी बताती हूँ।टिया बोली और लगभग तीन साल की त्रिशा के पीछे भागती है।वहीं त्रिशा दौड़ते हुए आगे से आ रहे प्रशांत को देख चाचू,चाचू कहते हुए उसके पास चली आती है।

शान त्रिशा को वहां देखते है तो हैरान हो उसे गोद में उठा लिया और चलते हुए बोले हे लिटिल एंजेल आप यहां!टिया उसके पीछे शान के पास आ जाती है और उस बच्ची को शान के साथ देख उसे बुरा लगता है।वो उसका परिचय जानने के लिए शान के पास आती है और उससे पूछते हुए बोली, मिस्टर अजय ये कौन है?

शान :- मेरी लिटिल एंजेल!

टिया ;- मतलब आपकी बेटी।
शान :- कुछ ऐसा ही समझ लो।और त्रिशा की ओर देख उससे बोले आपकी मम्मा कहां है?

त्रिशा मासूमियत से बोली वो भी आई है बाहर है चलो।
हम्म कहते हुए शान उसे लेकर आगे बढ़ जाते है।उनके जाने के बाद टिया बड़बड़ाते हुए बोली,रिश्ता बड़ा गहरा लग रहा है आपका इसके साथ पता करना पड़ेगा ...!

शान त्रिशा को साथ लेकर चित्रा के पास पहुंचे और उनसे बोले घर चलिये अभी के अभी बात करनी है।कहते हुए वो आगे बढ़ जाते हैं।

चित्रा अभिनव को सॉरी बोल वहां से शान के पीछे चली आती है।
शान चित्रा को रूम पर ले जाकर त्रिशा से बोले आप जाकर टीवी देखो हम अभी आये है त्रिशा।ठीक है चाचू कहते हुए त्रिशा वहां से छोटे से हॉल में चली जाती है।शान ने चित्रा की ओर देखा और उससे उससे सवाल करते हुए बोले आप यहां कैसे क्यों?

चित्रा :- शोभा आंटी जी ने भेजा है।उन्होंने कहा कि आप पहले से परेशान है तो मैं त्रिशा को लेकर आपके पास चली आऊं।

शान गुस्से से अपना हाथ उठा कर दीवार पर झटका और बड़बड़ाए आपको यहां नही आना चाहिए था चित्रा।ताईजी को परवाह है मेरी लेकिन आप तो समझदार है यूँ अकेले बिन किसी रिश्ते के साथ रहने का अर्थ समझती है न आप।

चित्रा :- समझती हूँ लेकिन जमाने की परवाह नही करती हूँ।ये घर इतना भी छोटा नही कि दो दोस्त यहां न रह पाये।

शान :- ताईजी ने क्या सोचकर आपको यहां भेज दिया!चित्रा जी।अब मैं क्या बोलूं आपसे।आप यहां आ गयी हो तो कही बाहर अंजान जगह रहने को नही बोल सकता।इस घर में एक रूम और है स्टोर रूम अब आपको बुरा न लगे और आपको कम्फर्टेबल हो तो आप वहीं देख लो।बाकी मुझसे कुछ पूछने बताने की जरूरत नही जो मन हो वो करना।अब आप इस कमरे से जा सकती है एक और बात ये कमरा सिर्फ और सिर्फ मेरा है यहां मुझे किसी की मौजूदगी पसंद नही।जिस दिन आपने ये रूल तोड़ा उसी दिन मैं यहां से कहीं और निकल जाऊंगा।शान ने रूडलि कहा और वहां से उठकर अंदर चले जाते हैं।

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Anubha Gautam

Anubha Gautam 1 साल पहले

aage ke part ka kya hain ya nhi

Aruna Patel

Aruna Patel 1 साल पहले

Usha Dattani Dattani

Usha Dattani Dattani 1 साल पहले

Navin Shriwastava

Navin Shriwastava 1 साल पहले

Nayana Bambhaniya

Nayana Bambhaniya 1 साल पहले