यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक की कल्पना पर आधारित हैं। इस कहानी का उद्देश्य केवल मनोरंजन और एक काल्पनिक प्रेम कथा प्रस्तुत करना है। किसी भी धर्म, जाति, समुदाय, संस्कृति, परंपरा या व्यक्ति का समर्थन, विरोध, अपमान, आलोचना या भावनाएँ आहत करना हमारा उद्देश्य नहीं है। यदि इस कहानी का कोई पात्र, घटना या परिस्थिति किसी वास्तविक व्यक्ति, संस्था या घटना से मिलती-जुलती प्रतीत होती है, तो उसे केवल संयोग माना जाए। कृपया इस कहानी को केवल एक काल्पनिक रचना के रूप में पढ़ें।
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 1
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक की कल्पना पर आधारित हैं।इस कहानी का उद्देश्य केवल मनोरंजन और एक काल्पनिक प्रेम कथा प्रस्तुत करना है। किसी भी धर्म, जाति, समुदाय, संस्कृति, परंपरा या व्यक्ति का समर्थन, विरोध, अपमान, आलोचना या भावनाएँ आहत करना हमारा उद्देश्य नहीं है।यदि इस कहानी का कोई पात्र, घटना या परिस्थिति किसी वास्तविक व्यक्ति, संस्था या घटना से मिलती-जुलती प्रतीत होती है, तो उसे केवल संयोग माना जाए।कृपया इस कहानी ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 2
एपिसोड 2: पहली टक्करसुबह के लगभग नौ बजे थे।लखनऊ की सड़कें रोज़ की तरह चहल-पहल से भरी हुई थीं। अपने दफ़्तर जा रहा था, कोई दुकान खोल रहा था, तो कोई कॉलेज की ओर भाग रहा था।उधर अर्जुन वशिष्ठ अपनी काली बाइक पर तेज़ रफ़्तार से मेडिकल कॉलेज की ओर बढ़ रहा था। गले में रुद्राक्ष की माला, दाहिने हाथ में लाल कलेवा, हल्की दाढ़ी और चेहरे पर वही बेपरवाह अंदाज़।कॉलेज के गेट पर पहुँचते ही कई छात्रों की नज़र उस पर पड़ी।"भाई... अर्जुन आ गया।""आज फिर किसी की शामत आने वाली है।"कुछ लड़कियाँ मुस्कुराकर उसे देखने लगीं, लेकिन ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 3
एपिसोड 3 नामुमकिन इश्कअर्जुन अभी उस लड़की को बचाकर अपनी क्लास की ओर जा ही रहा था कि तभी के मुख्य गेट पर एक सफ़ेद कार आकर रुकी।दरवाज़ा खुला।धीरे-धीरे एक लड़की कार से नीचे उतरी।हल्के फ़िरोज़ी रंग का सूट, सिर पर सलीके से रखा सफ़ेद दुपट्टा, हाथों में कुछ किताबें और चेहरे पर ऐसी सादगी कि जो भी देखे, एक पल के लिए ठहर जाए।उसकी बड़ी-बड़ी काली आँखों में हल्की-सी घबराहट थी। आखिर आज इस कॉलेज में उसका पहला दिन था।वह इधर-उधर देखते हुए आगे बढ़ी, लेकिन उसे रास्तों का बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था।उधर अर्जुन अपनी ही धुन में ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 4
एपिसोड 4: एक अजीब-सी बेचैनीकॉलेज की छुट्टी हुए लगभग एक घंटा बीत चुका था।शाम की हल्की सुनहरी धूप पूरे शहर को अपनी नरम रोशनी से ढक रही थी। सड़कों पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी थी। कहीं चाट की दुकानें सजी थीं, कहीं कुल्हड़ वाली चाय की महक हवा में घुल रही थी। बाज़ार अपनी पूरी रौनक पर था।उधर आयत अपनी छोटी बहन हया का हाथ पकड़े अमीनाबाद बाज़ार की गलियों में धीरे-धीरे चल रही थी।"आपा... जल्दी चलिए ना, मुझे नई चूड़ियाँ भी लेनी हैं और अम्मी ने कपड़ा भी मंगवाया है।" हया ने मासूमियत से कहा।आयत मुस्कुराई।"अच्छा बाबा... ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 5
एपिसोड 5नई सुबह... नई हलचलअगली सुबह लखनऊ का आसमान हल्की सुनहरी धूप से जगमगा रहा था। शहर की सड़कों रोज़ की तरह चहल-पहल शुरू हो चुकी थी। कुछ ही देर में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज का विशाल कैंपस भी छात्रों की भीड़ से भर गया।उसी समय कॉलेज के मुख्य गेट से अर्जुन वशिष्ठ अपने दो दोस्तों के साथ अंदर दाखिल हुआ। सफेद शर्ट के ऊपर काली जैकेट, गले में रुद्राक्ष की माला, हाथ में लाल कलेवा और चेहरे पर हमेशा की तरह बेफिक्र मुस्कान।उसे देखते ही कई छात्रों ने आवाज़ लगाई—"अर्जुन भाई... गुड मॉर्निंग!"अर्जुन मुस्कुराया।"गुड मॉर्निंग... पढ़ाई पर ध्यान ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 6
एपिसोड 6 अर्जुन कॉलेज रस्टिकेट हो गयाआयत और सावी अभी भी गार्डन की बेंच पर बैठी बातें कर रही दूसरी ओर अर्जुन अपने दोस्त गौरव के साथ खड़ा था, लेकिन उसकी नज़र बार-बार अनायास ही आयत की ओर चली जाती।गौरव ने मुस्कुराकर उसकी कोहनी में हल्की-सी टक्कर मारी।"क्या बात है अर्जुन? आजकल किसी को बड़े गौर से देख रहा है।"अर्जुन जैसे अचानक ख्यालों से बाहर आया।"कुछ भी मत बोल।""अच्छा? फिर पिछले पाँच मिनट से तेरी नज़र उसी तरफ़ क्यों है?"अर्जुन ने एक गहरी साँस ली।"पता नहीं यार... समझ नहीं आ रहा। जब तक एक बार उसे देख न लूँ, ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 7
एपिसोड 7बेचैनी का नाम... शायद मोहब्बतअर्जुन को कॉलेज से निलंबित हुए तीन दिन हो चुके थे।इन तीन दिनों में मेडिकल की किताबें तो कई बार खोलीं, लेकिन हर बार कुछ ही मिनटों में बंद कर देता।वह खुद से ही परेशान था।कमरे की बालकनी में खड़ा उसने गहरी साँस ली।"ये मुझे हो क्या गया है...?"उसके दिमाग में बार-बार एक ही चेहरा घूम रहा था...आयत।उसने खुद से कहा,"मैं तो उसे ठीक से जानता भी नहीं... फिर भी बार-बार उसी का चेहरा क्यों याद आता है?""जब तक उसे देख नहीं लेता... मन बेचैन-सा रहता है।""ये आखिर कैसा एहसास है?"उसे अपने ही सवालों ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 8
नामुमकिन इश्क एपिसोड 8कॉलेज की छुट्टी की घंटी बज चुकी थी। कैंपस में छात्रों की भीड़ धीरे-धीरे मुख्य गेट ओर बढ़ रही थी।आयत अपनी नई दोस्त रीवा के साथ बातें करते हुए बाहर निकल रही थी।रीवा मुस्कुराकर बोली,"तो... अब लखनऊ कैसा लग रहा है?"आयत भी मुस्कुरा दी।"शुरुआत में लगा था कि यहाँ एडजस्ट करना मुश्किल होगा... लेकिन अब थोड़ा-थोड़ा अच्छा लगने लगा है।""और कॉलेज?""कॉलेज भी अच्छा है। बस... अभी सब नए हैं।"दोनों हँसते हुए आगे बढ़ ही रही थीं कि अचानक उनके सामने रोहन मेहरा आकर खड़ा हो गया।उसके साथ समर भी था।रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा,"हैलो, मिस आयत ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 9
एपिसोड – नया मोड़ अगली सुबह लखनऊ की हल्की ठंडी हवा पूरे शहर में ताज़गी घोल रही थी। मेडिकल का विशाल परिसर हमेशा की तरह छात्रों की चहल-पहल से गूंज रहा था। कोई अपनी किताबों में खोया हुआ था, कोई दोस्तों के साथ हँसी-मज़ाक कर रहा था, तो कोई आने वाले इंटरनल एग्जाम की चिंता में डूबा हुआ था। कॉरिडोर में फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर के छात्र अपनी-अपनी क्लास की तरफ़ जा रहे थे। किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि आज होने वाली एक घोषणा उनकी ज़िंदगी की दिशा बदलने वाली है। कुछ ही देर बाद कॉलेज ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 10
नया सफ़रअगली सुबह ठीक दस बजे का समय था।लखनऊ मेडिकल कॉलेज का कैंपस हमेशा की तरह छात्रों की चहल-पहल भरा हुआ था। कोई अपनी क्लास की तरफ़ जा रहा था, कोई कैंटीन में बैठकर चाय पी रहा था, तो कोई दोस्तों के साथ हँसी-मज़ाक में लगा था।तभी कॉलेज के एडमिन ब्लॉक से एक कर्मचारी हाथ में सफेद रंग की फाइल लेकर बाहर निकला। उसके हाथ में एक नोटिस था।वह बिना कुछ बोले सीधे नोटिस बोर्ड के पास पहुँचा और बड़े आराम से वह नोटिस बोर्ड पर चिपका दिया।नोटिस लगते ही उसने सिर्फ इतना कहा—"जो भी छात्र क्लिनिकल ट्रेनिंग के ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 11
बस धीरे-धीरे कॉलेज के मुख्य गेट से बाहर निकल चुकी थी। खिड़कियों के बाहर लखनऊ की सड़कें पीछे छूटती रही थीं, जबकि बस के अंदर हँसी-मज़ाक और बातचीत का माहौल था।कोई गाने सुन रहा था, कोई सेल्फी ले रहा था, तो कोई आने वाले एक महीने की ट्रेनिंग को लेकर उत्साहित था।अर्जुन हमेशा की तरह सबसे अलग था।वह बस की सबसे आख़िरी सीट पर, खिड़की के पास जाकर बैठ गया। एक हाथ खिड़की पर टिका था और दूसरे हाथ में मोबाइल। कभी वह किसी मेडिकल नोट्स को देख रहा था, तो कभी बाहर गुजरते हुए नज़ारों पर उसकी नज़र ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 12
बस अपनी रफ़्तार से लखनऊ की सड़कों पर दौड़ रही थी। खिड़की से आती ठंडी हवा पूरे माहौल को दे रही थी।सनाया के दूसरी सीट पर चले जाने के बाद अर्जुन फिर से खिड़की के बाहर देखने लगा। लेकिन कुछ ही पल बाद उसे महसूस हुआ कि कोई उसकी तरफ़ बढ़ रहा है।उसने सिर घुमाया।सामने आयत खड़ी थी।उसके चेहरे पर हल्की-सी झिझक थी, जैसे कुछ कहना चाहती हो लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रही हो।अर्जुन मुस्कुराया।"जी... कुछ कहना था?"आयत ने धीरे से कहा,"वो... अगर आपको बुरा न लगे तो... मैं दो मिनट यहाँ बैठ सकती हूँ?"अर्जुन ने बगल वाली ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 13
एपिसोड 13करीब एक घंटे का सफ़र तय करने के बाद बस आखिरकार लखनऊ के सबसे मशहूर सिटी सुपर स्पेशियलिटी के मुख्य गेट पर आकर रुक गई।बस रुकते ही सभी छात्रों की नज़रें खिड़की से बाहर चली गईं।सामने कई मंज़िला शीशों से बनी विशाल इमारत खड़ी थी। गेट पर बड़े-बड़े अक्षरों में अस्पताल का नाम लिखा था। अंदर एम्बुलेंस लगातार आ-जा रही थीं। सफेद कोट पहने डॉक्टर और नर्सें तेज़ी से अपने-अपने काम में व्यस्त थे।रीवा ने हैरानी से कहा, "वाह... ये हॉस्पिटल तो हमारी सोच से भी बड़ा है।"आयत ने चारों ओर देखते हुए धीमे से कहा, "सच में... ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 14
एपिसोड 14– पहली ड्यूटी, पहला साथ और पहली साज़िशसिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के कॉन्फ्रेंस हॉल में सभी तीस छात्र थे। सफेद कोट पहने हर किसी के चेहरे पर उत्साह और घबराहट दोनों साफ़ दिखाई दे रहे थे।डॉ. आदित्य राठौर ने सभी की ओर देखते हुए कहा,"आज से आप लोग सिर्फ़ स्टूडेंट नहीं हैं। आज से आप भविष्य के डॉक्टर हैं। यहाँ एक छोटी-सी लापरवाही भी किसी की ज़िंदगी पर भारी पड़ सकती है। इसलिए याद रखिए—यहाँ अहंकार नहीं, अनुशासन चलेगा।"पूरा हॉल शांत हो गया।कुछ देर बाद सभी छात्रों को अलग-अलग यूनिट में बाँटना शुरू किया गया।एक-एक करके नाम पुकारे ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 15
एपिसोड 15 – साज़िश का पहला पर्दाफाशजनरल मेडिसिन वार्ड का माहौल अचानक तनाव से भर गया था।बेड नंबर 18 मरीज फाइल गायब होने की वजह से पूरे स्टाफ में हलचल मच गई थी। नर्सें एक अलमारी से दूसरी अलमारी तक फाइलें ढूँढ़ रही थीं। डॉ. मीरा सक्सेना के चेहरे पर नाराज़गी साफ़ दिखाई दे रही थी।उधर आयत की नज़र बार-बार अर्जुन पर जा रही थी।उसे पूरा यक़ीन था कि अर्जुन ऐसी लापरवाही कभी नहीं कर सकता।अर्जुन ने बिना घबराए पूरे रिकॉर्ड रूम को ध्यान से देखना शुरू किया। उसकी नज़र हर छोटी-सी छोटी चीज़ पर थी।वह धीरे-धीरे रिकॉर्ड डेस्क ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 16
एपिसोड 16– भरोसे की शुरुआतशाम के पाँच बज चुके थे।सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में पहले दिन की ट्रेनिंग खत्म वाली थी। पूरे दिन की भागदौड़ के बाद सभी छात्र थके हुए थे, लेकिन उनके चेहरों पर एक अलग ही संतोष था। आखिर उन्होंने पहली बार किताबों से बाहर निकलकर असली मरीजों के बीच काम किया था।अर्जुन अपनी टीम के सभी सदस्यों की रिपोर्ट एक बार फिर चेक कर रहा था।"रीवा, तुम्हारी रिपोर्ट पूरी हो गई?""जी, अर्जुन।""आरिफ?""हो गई भाई।"अर्जुन ने मुस्कुराकर सिर हिलाया।फिर उसकी नज़र आयत पर गई।वह अभी भी एक मरीज की फाइल में कुछ लिख रही थी।अर्जुन उसके ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 17
एपिसोड 17– एक गलतफ़हमी की शुरुआतशाम के छह बजने में अभी पाँच मिनट बाकी थे।हॉस्पिटल की ट्रेनिंग खत्म हो थी। ज़्यादातर डॉक्टर अपने-अपने केबिन में जा चुके थे और कई मरीज भी आराम कर रहे थे। हॉस्पिटल के पीछे बने छोटे-से गार्डन में हल्की ठंडी हवा चल रही थी।उधर आयत अपना बैग उठाने लगी।तभी उसे बैग की चेन के अंदर एक मुड़ा हुआ कागज़ दिखाई दिया।"ये क्या है...?"उसने हैरानी से कागज़ खोला।उस पर लिखा था—"आज शाम ठीक छह बजे हॉस्पिटल गार्डन में मिलना। कुछ ज़रूरी बात करनी है। — अर्जुन"आयत कुछ पल तक उस कागज़ को देखती रह गई।उसके ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 18
एपिसोड 18– पहली परीक्षाअगली सुबह...सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का माहौल हमेशा की तरह व्यस्त था। सुबह के आठ बजते डॉक्टर, नर्स और सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स अपनी-अपनी यूनिट में पहुँच चुके थे।अर्जुन सबसे पहले वार्ड में पहुँचा। उसने अपनी टीम के सभी सदस्यों की तरफ़ देखा।"गुड मॉर्निंग, एवरीवन।"सभी ने एक साथ जवाब दिया,"गुड मॉर्निंग।"अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा,"आज से हम सबकी असली परीक्षा शुरू होने वाली है। जो भी काम मिलेगा, उसे पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी से करेंगे। अगर किसी को कोई परेशानी हो तो छिपाना मत, तुरंत बताना।"सबने सिर हिलाकर हामी भर दी।तभी डॉ. मीरा सक्सेना वहाँ पहुँचीं।"आज मैं देखना ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 19
एपिसोड 19 – बढ़ती नज़दीकियाँ और नई चुनौतीसुबह के नौ बज चुके थे।सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल हमेशा की तरह और डॉक्टरों की आवाजाही से गुलज़ार था। सफेद कोट पहने सभी ट्रेनी डॉक्टर अपनी-अपनी यूनिट में पहुँच चुके थे।अर्जुन सबसे पहले वार्ड में पहुँचा। उसने एक नज़र पूरी टीम पर डाली।"सब लोग आ गए?""यस, सर!" लगभग सभी ने एक साथ जवाब दिया।रीवा हँसते हुए बोली,"टीम लीडर साहब, आज का मिशन क्या है?"अर्जुन भी मुस्कुरा दिया।"आज कोई मिशन नहीं... आज सिर्फ़ सीखना है। याद रखिए, यहाँ हम किसी से बेहतर साबित होने नहीं, बल्कि बेहतर डॉक्टर बनने आए हैं।"उसी समय डॉ. ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 20
एपिसोड 20– पहली नाइट ड्यूटी शाम के करीब पाँच बज चुके थे। सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में दिन की भागदौड़ के बाद भी किसी को आराम नहीं था। इमरजेंसी वार्ड के बाहर मरीजों की आवाजाही लगातार बनी हुई थी। सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स कॉन्फ्रेंस रूम में बैठे थे। तभी डॉ. मीरा सक्सेना अंदर आईं। "स्टूडेंट्स... आज से आपकी ट्रेनिंग का अगला फेज़ शुरू होने वाला है।" सभी एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। डॉ. मीरा ने आगे कहा, "आज रात आप सभी की पहली नाइट ड्यूटी होगी।" यह सुनते ही पूरी क्लास ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 21
एपिसोड 21– पहली इमरजेंसीरात के करीब डेढ़ बज रहे थे।पूरा सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल शांत था। ज़्यादातर मरीज सो थे। सिर्फ़ मॉनिटर की बीप... बीप... की आवाज़ और नर्सों के कदमों की आहट सुनाई दे रही थी।अर्जुन अपनी टीम के साथ वार्ड का आख़िरी राउंड ले रहा था।"रीवा, बेड नंबर 12 की दवाई समय पर दे देना।""ओके।""आयत, बेड नंबर 15 के मरीज का टेम्परेचर एक बार फिर नोट कर लेना।""जी।"इतने में पूरे हॉस्पिटल में अचानक इमरजेंसी अलार्म बज उठा।"कोड ब्लू... कोड ब्लू..."पूरा स्टाफ़ एकदम सतर्क हो गया।डॉ. मीरा तेज़ी से बाहर आईं।"सभी ट्रेनी अपने-अपने सीनियर डॉक्टर के साथ इमरजेंसी ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 22
एपिसोड 22 – एक नई दोस्ती, एक नई चुनौतीसुबह के लगभग नौ बज चुके थे।पूरी रात की ड्यूटी के सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स हॉस्पिटल के गेस्ट ब्लॉक में आराम कर रहे थे। किसी के हाथ में चाय थी, कोई मोबाइल चला रहा था तो कोई पिछली रात की इमरजेंसी की बातें कर रहा था।आयत बालकनी में खड़ी सुबह की ठंडी हवा महसूस कर रही थी।तभी पीछे से एक आवाज़ आई।"कल रात... तुमने बहुत अच्छा काम किया।"आयत ने मुड़कर देखा।सामने अर्जुन खड़ा था।सफेद कोट के ऊपर हल्की-सी मुस्कान उसके चेहरे पर हमेशा की तरह सधी हुई थी।आयत भी मुस्कुरा दी।"थैंक यू... ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 23
एपिसोड 23 – मुकाबले की शुरुआतअगली सुबह...सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का ऑडिटोरियम छात्रों की हलचल से भरा हुआ था। कानपुर और आगरा मेडिकल कॉलेज की टीमें अपनी-अपनी सीटों पर बैठ चुकी थीं। हर किसी की नज़र आज होने वाली इंटर-कॉलेज मेडिकल चैलेंज पर थी।स्टेज पर हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. राजीव मल्होत्रा आए।"गुड मॉर्निंग, एवरीवन।"पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा।।"सभी छात्र ध्यान से उनकी बात सुन रहे थे।उन्होंने आगे कहा,"प्रतियोगिता तीन राउंड में होगी। पहला राउंड होगा—मेडिकल नॉलेज क्विज़। दूसरा—क्लिनिकल केस एनालिसिस। और तीसरा—टीम इमरजेंसी रिस्पॉन्स। सबसे अधिक अंक पाने वाली टीम विजेता होगी।"पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा।पहला राउंडसभी ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 24
एपिसोड 24– असली परीक्षाऑडिटोरियम में एक बार फिर सन्नाटा छा गया।सभी टीमें अपनी-अपनी जगह पर बैठ चुकी थीं। अब का दूसरा राउंड शुरू होने वाला था।स्टेज पर डॉ. राजीव मल्होत्रा आए और मुस्कुराते हुए बोले,"अब तक आपने अपनी किताबों का ज्ञान दिखाया। लेकिन एक डॉक्टर की असली पहचान सिर्फ़ किताबों से नहीं होती। अब देखते हैं कि मुश्किल परिस्थिति में आपकी सोच कितनी तेज़ है।"इतना कहकर उन्होंने बड़ी स्क्रीन की तरफ़ इशारा किया।स्क्रीन पर एक मेडिकल केस दिखाई दिया।एक मरीज के लक्षण, रिपोर्ट और मेडिकल हिस्ट्री दी गई थी।हर टीम को दस मिनट का समय दिया गया ताकि वे ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 25
एपिसोड 25– आख़िरी राउंडऑडिटोरियम की सारी लाइटें हल्की हो गईं।सभी टीमों की नज़र अब स्टेज पर थी।डॉ. राजीव मल्होत्रा माइक अपने हाथ में लिया और मुस्कुराते हुए बोले,"अब शुरू होने जा रहा है इस प्रतियोगिता का आख़िरी और सबसे महत्वपूर्ण राउंड..."पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा।"इस राउंड का नाम है— टीम इमरजेंसी रिस्पॉन्स।""आप सभी टीमों को एक काल्पनिक इमरजेंसी मेडिकल केस दिया जाएगा। आपको यह बताना होगा कि ऐसी स्थिति में आपकी टीम किस क्रम में क्या करेगी। याद रखिए, यहाँ सिर्फ़ मेडिकल नॉलेज नहीं, बल्कि टीमवर्क, लीडरशिप और शांत दिमाग भी देखा जाएगा।"सभी टीमें पूरी तरह तैयार हो ...और पढ़े
नामुमकिन इश्क - एपिसोड 26
एपिसोड 26– एक नई शुरुआतइंटर-कॉलेज मेडिकल चैलेंज खत्म हुए दो दिन बीत चुके थे।लेकिन पूरे सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल आज भी सिर्फ़ एक ही टीम की चर्चा हो रही थी—लखनऊ मेडिकल कॉलेज।कई सीनियर डॉक्टर अर्जुन की लीडरशिप की तारीफ कर रहे थे, तो कुछ आयत की समझदारी और शांत स्वभाव की।उधर हॉस्पिटल के नोटिस बोर्ड पर एक नई सूचना लगा दी गई।"सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स ध्यान दें। अगले पंद्रह दिनों तक आपको अलग-अलग विभागों में रोटेशन ड्यूटी करनी होगी। हर विभाग में टीम लीडर अपनी टीम के साथ काम करेगा।"सूचना पढ़ते ही सभी छात्र एक-दूसरे से बातें करने लगे।रीवा उत्साहित ...और पढ़े