एपिसोड 6 अर्जुन कॉलेज रस्टिकेट हो गया
आयत और सावी अभी भी गार्डन की बेंच पर बैठी बातें कर रही थीं। दूसरी ओर अर्जुन अपने दोस्त गौरव के साथ खड़ा था, लेकिन उसकी नज़र बार-बार अनायास ही आयत की ओर चली जाती।
गौरव ने मुस्कुराकर उसकी कोहनी में हल्की-सी टक्कर मारी।
"क्या बात है अर्जुन? आजकल किसी को बड़े गौर से देख रहा है।"
अर्जुन जैसे अचानक ख्यालों से बाहर आया।
"कुछ भी मत बोल।"
"अच्छा? फिर पिछले पाँच मिनट से तेरी नज़र उसी तरफ़ क्यों है?"
अर्जुन ने एक गहरी साँस ली।
"पता नहीं यार... समझ नहीं आ रहा। जब तक एक बार उसे देख न लूँ, मन बेचैन-सा रहता है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।"
गौरव हँस पड़ा।
"लगता है डॉक्टर साहब को भी कोई बीमारी लग गई है।"
अर्जुन ने उसे हल्का-सा धक्का दिया।
"चुप कर। अच्छा बता, अगला लेक्चर कब है?"
"आधे घंटे बाद।"
"चल, क्लास में चलते हैं। कल का लेक्चर मिस हो गया था। किसी से नोट्स लेकर पूरे करने हैं, नहीं तो बाद में दिक्कत होगी।"
दोनों क्लास की ओर चल पड़े। जाते-जाते भी अर्जुन ने एक बार पलटकर आयत को देखा। वह खुद नहीं समझ पा रहा था कि आखिर उसके साथ हो क्या रहा है।
उधर सावी ने भी यह सब देख लिया था। उसने शरारती मुस्कान के साथ आयत को छेड़ा।
"क्या बात है? तुम भी अर्जुन भाई को चुपके-चुपके देख रही थीं। कहीं पसंद तो नहीं आ गए?"
आयत का चेहरा हल्का-सा लाल हो गया।
"अरे नहीं... ऐसी कोई बात नहीं है।"
सावी खिलखिलाकर हँस पड़ी।
"अच्छा... मैं मान लेती हूँ।"
दोनों हँसते हुए आगे बढ़ गईं।
कुछ देर बाद सावी लाइब्रेरी चली गई। आयत अकेली खड़ी अपने अब्बू से फ़ोन पर बात कर रही थी।
"जी अब्बू... कॉलेज अच्छा है। आप फ़िक्र मत कीजिए।"
कॉल समाप्त करके वह मुड़ी ही थी कि सामने रोहन और समर आ गए।
रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा,
"हैलो, आयत। मैं रोहन मेहरा।"
आयत ने विनम्रता से सिर हिलाया, लेकिन बिना बातचीत बढ़ाए आगे बढ़ने लगी।
रोहन ने उसका रास्ता रोक लिया।
"इतनी भी क्या जल्दी है? दो मिनट बात तो कर सकती हैं।"
आयत ने शांत स्वर में कहा,
"माफ़ कीजिए, मुझे क्लास के लिए देर हो रही है।"
उसी समय पीछे से एक सख्त आवाज़ आई—
"जब किसी ने साफ़ मना कर दिया है, तो रास्ता छोड़ देना चाहिए।"
रोहन पलटा।
सामने अर्जुन खड़ा था।
दोनों की नज़रें मिलीं और माहौल अचानक तनाव से भर गया...
अर्जुन तेज़ क़दमों से आयत के पास पहुँचा। उसकी आवाज़ शांत थी, लेकिन आँखों में सख्ती साफ़ दिखाई दे रही थी।
"आयत जी... आप क्लास में जाइए। यहाँ की बात मैं संभाल लूँगा।"
आयत कुछ पल अर्जुन को देखती रही। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे।
अर्जुन ने फिर कहा,
"कृपया... आप जाइए।"
आयत ने बिना कुछ कहे सिर हिलाया और धीरे-धीरे वहाँ से चली गई। जाते-जाते उसने एक बार पलटकर अर्जुन की तरफ़ देखा। उसके मन में अजीब-सी बेचैनी थी।
जैसे ही आयत वहाँ से गई, अर्जुन की नज़र रोहन पर टिक गई।
"कॉलेज पढ़ने आते हो या दूसरों को परेशान करने?"
रोहन हँस पड़ा।
"तुम होते कौन हो मुझे सिखाने वाले?"
अर्जुन ने एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा,
"जब कोई लड़की साफ़ मना कर दे, तो उसकी बात समझनी चाहिए।"
"और अगर न समझूँ तो?"
रोहन ने चुनौती भरे अंदाज़ में कहा।
अगले ही पल दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ी कि दोनों ने एक-दूसरे को धक्का दे दिया। कुछ ही क्षणों में कॉलेज के छात्र इकट्ठा हो गए। अर्जुन और रोहन के बीच हाथापाई होने लगी। दोनों के दोस्त भी उन्हें अलग करने की कोशिश करने लगे, लेकिन गुस्से में कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं था।
उसी समय समर भागता हुआ प्रिंसिपल के कार्यालय पहुँचा।
कुछ ही मिनटों बाद प्रिंसिपल और कई शिक्षक घटनास्थल पर पहुँच गए।
"बस... बहुत हो गया!"
प्रिंसिपल की गूँजती हुई आवाज़ सुनते ही पूरा माहौल शांत हो गया।
सभी छात्र पीछे हट गए।
प्रिंसिपल ने गुस्से से अर्जुन और रोहन की तरफ़ देखा।
"ये कॉलेज है, अखाड़ा नहीं! तुम लोग यहाँ डॉक्टर बनने आए हो या लड़ाई करने?"
समर तुरंत आगे आया और बोला,
"सर, अर्जुन ने बिना बात के रोहन पर हमला कर दिया।"
अर्जुन कुछ कहना चाहता था, लेकिन प्रिंसिपल ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया।
"मुझे इस समय कोई बहाना नहीं सुनना। कॉलेज में मारपीट किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
उन्होंने कठोर स्वर में कहा,
"अर्जुन वशिष्ठ, अनुशासन भंग करने के कारण तुम्हें दस दिनों के लिए निलंबित किया जाता है। दस दिन बाद ही तुम कॉलेज वापस आ सकोगे।"
यह सुनकर पूरे कैंपस में सन्नाटा छा गया।
रोहन और समर ने एक-दूसरे की तरफ़ देखा। दोनों के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान उभर आई।
अर्जुन ने एक बार उनकी तरफ़ देखा, फिर बिना कुछ बोले अपना बैग उठाया और कॉलेज से बाहर निकल गया।
उधर क्लासरूम में बैठी आयत को जब सावी से पता चला कि अर्जुन को दस दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है, तो उसका दिल धक से रह गया।
"क्या...?"
उसके चेहरे की मुस्कान पल भर में गायब हो गई।
"लेकिन... उन्होंने ऐसा क्यों किया?"
सावी ने धीरे से कहा,
"कॉलेज में लड़ाई हो गई थी।"
आयत एक पल भी रुकी नहीं। वह तेज़ी से क्लास से बाहर निकली और कॉलेज के मुख्य गेट की ओर दौड़ी।
लेकिन जब तक वह वहाँ पहुँची...
अर्जुन अपनी बाइक पर बैठकर जा चुका था।
आयत कुछ क्षण वहीं खड़ी रही।
उसने दूर जाती हुई बाइक को देखा और धीमे से बुदबुदाई,
"काश... मैं एक बार उनसे बात कर पाती..."
उसके दिल में पहली बार अर्जुन के लिए चिंता ने जगह बना ली थी।