एपिसोड 21– पहली इमरजेंसी
रात के करीब डेढ़ बज रहे थे।
पूरा सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल शांत था। ज़्यादातर मरीज सो चुके थे। सिर्फ़ मॉनिटर की बीप... बीप... की आवाज़ और नर्सों के कदमों की आहट सुनाई दे रही थी।
अर्जुन अपनी टीम के साथ वार्ड का आख़िरी राउंड ले रहा था।
"रीवा, बेड नंबर 12 की दवाई समय पर दे देना।"
"ओके।"
"आयत, बेड नंबर 15 के मरीज का टेम्परेचर एक बार फिर नोट कर लेना।"
"जी।"
इतने में पूरे हॉस्पिटल में अचानक इमरजेंसी अलार्म बज उठा।
"कोड ब्लू... कोड ब्लू..."
पूरा स्टाफ़ एकदम सतर्क हो गया।
डॉ. मीरा तेज़ी से बाहर आईं।
"सभी ट्रेनी अपने-अपने सीनियर डॉक्टर के साथ इमरजेंसी वार्ड में पहुँचो। जल्दी!"
अर्जुन बिना एक सेकंड गँवाए अपनी टीम को लेकर दौड़ पड़ा।
इमरजेंसी वार्ड के बाहर अफरा-तफरी मची हुई थी।
एक सड़क दुर्घटना में घायल कई लोगों को एक साथ अस्पताल लाया गया था।
किसी के सिर पर चोट थी, किसी के हाथ में फ्रैक्चर, तो कोई दर्द से कराह रहा था।
डॉ. मीरा ने तेज़ आवाज़ में कहा,
"घबराना नहीं... हर मरीज को प्राथमिकता के हिसाब से देखो।"
"यस मैम!"
अर्जुन ने तुरंत टीम को बाँट दिया।
"रीवा, नर्स की मदद करो।"
"आरिफ, मरीजों की डिटेल नोट करो।"
"आयत, मेरे साथ आइए।"
दोनों एक घायल बुज़ुर्ग व्यक्ति के पास पहुँचे।
उनके माथे से खून बह रहा था।
आयत पहली बार इतना खून देखकर कुछ पल के लिए घबरा गई।
उसके हाथ हल्के-हल्के काँपने लगे।
अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।
"आयत..."
वह चुप रही।
"मेरी तरफ़ देखिए।"
आयत ने उसकी तरफ़ देखा।
अर्जुन शांत आवाज़ में बोला,
"अभी डरने का समय नहीं है। इस समय मरीज को हमारी ज़रूरत है। गहरी साँस लीजिए... और वही कीजिए जो हमने सीखा है।"
अर्जुन की बात सुनकर आयत ने खुद को संभाला।
"जी..."
दोनों ने मिलकर डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार मरीज की मदद की।
कुछ देर बाद मरीज की हालत स्थिर हो गई।
डॉ. मीरा ने दूर से यह सब देखा।
उन्होंने संतोष से मुस्कुराकर कहा,
"वेरी गुड, अर्जुन... और आयत, तुमने भी अच्छा काम किया।"
आयत के चेहरे पर राहत की मुस्कान आ गई।
उधर दूसरी तरफ़...
रोहन भी अपनी टीम के साथ काम कर रहा था।
उसने देखा कि डॉ. मीरा फिर से अर्जुन की तारीफ़ कर रही हैं।
उसके चेहरे पर नाराज़गी साफ़ दिखाई देने लगी।
समर धीरे से बोला,
"यार, हर बार अर्जुन ही छा जाता है।"
रोहन ने दाँत भींचते हुए कहा,
"एक दिन ऐसा आएगा... जब सबके सामने वही गलती करेगा।"
समर ने पूछा,
"लेकिन कैसे?"
रोहन हल्का-सा मुस्कुराया।
"वक्त आने दो..."
करीब दो घंटे बाद...
सभी घायल मरीजों का इलाज शुरू हो चुका था।
हॉस्पिटल का माहौल फिर धीरे-धीरे सामान्य होने लगा।
डॉ. मीरा ने सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स को अपने पास बुलाया।
"आज आप लोगों ने बहुत अच्छा काम किया।"
सभी के चेहरे पर खुशी दिखाई दे रही थी।
उन्होंने आगे कहा,
"लेकिन सबसे ज़्यादा मैं अर्जुन की टीम से प्रभावित हूँ। इन्होंने घबराए बिना टीमवर्क दिखाया।"
सभी ने तालियाँ बजाईं।
अर्जुन ने विनम्रता से कहा,
"मैम, यह मेरी नहीं... पूरी टीम की मेहनत है।"
डॉ. मीरा मुस्कुरा दीं।
"एक अच्छा लीडर वही होता है जो सफलता का श्रेय अपनी टीम को दे।"
आयत ने पहली बार अर्जुन को गर्व भरी नज़रों से देखा।
उसके मन में अर्जुन के लिए सम्मान पहले से भी ज़्यादा बढ़ गया था।
सुबह होने लगी थी।
खिड़की से सूरज की हल्की किरणें वार्ड में आने लगीं।
नाइट ड्यूटी भी लगभग खत्म हो चुकी थी।
सभी ट्रेनी हॉस्पिटल के बाहर लॉन में खड़े होकर चाय पी रहे थे।
रीवा ने मुस्कुराते हुए कहा,
"आज की रात तो मैं कभी नहीं भूलूँगी।"
आयत भी मुस्कुरा दी।
"मैं भी नहीं..."
तभी अर्जुन वहाँ आया।
"सब लोग अच्छा काम कर रहे थे। ऐसे ही मेहनत करते रहिए।"
रीवा हँसते हुए बोली,
"टीम लीडर साहब, कभी अपनी भी तारीफ़ कर लिया कीजिए।"
अर्जुन हँस पड़ा।
"जब टीम अच्छी हो, तो लीडर की तारीफ़ अपने आप हो जाती है।"
सभी हँसने लगे।
दूर खड़ा रोहन यह सब देख रहा था।
उसने अपनी मुट्ठी भींच ली।
"अब सिर्फ़ जलने से कुछ नहीं होगा..."
"अब ऐसी चाल चलनी होगी... जिससे अर्जुन की सबसे बड़ी ताकत ही उसके खिलाफ़ चली जाए।"
उसकी नज़र एक पल के लिए आयत पर पड़ी।
फिर उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान उभर आई।
आने वाले दिनों में...
रोहन की अगली योजना सीधे अर्जुन और आयत के भरोसे की परीक्षा लेने वाली थी।
क्रमशः...