नामुमकिन इश्क - एपिसोड 19 kajal jha द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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नामुमकिन इश्क - एपिसोड 19

एपिसोड 19 – बढ़ती नज़दीकियाँ और नई चुनौती

सुबह के नौ बज चुके थे।

सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल हमेशा की तरह मरीजों और डॉक्टरों की आवाजाही से गुलज़ार था। सफेद कोट पहने सभी ट्रेनी डॉक्टर अपनी-अपनी यूनिट में पहुँच चुके थे।

अर्जुन सबसे पहले वार्ड में पहुँचा। उसने एक नज़र पूरी टीम पर डाली।

"सब लोग आ गए?"

"यस, सर!" लगभग सभी ने एक साथ जवाब दिया।

रीवा हँसते हुए बोली,"टीम लीडर साहब, आज का मिशन क्या है?"

अर्जुन भी मुस्कुरा दिया।

"आज कोई मिशन नहीं... आज सिर्फ़ सीखना है। याद रखिए, यहाँ हम किसी से बेहतर साबित होने नहीं, बल्कि बेहतर डॉक्टर बनने आए हैं।"

उसी समय डॉ. मीरा सक्सेना वार्ड में दाखिल हुईं।

"गुड मॉर्निंग, स्टूडेंट्स।"

"गुड मॉर्निंग, मैम।"

डॉ. मीरा ने कहा,

"आज आपको एक नया टास्क दिया जाएगा। हर टीम को पाँच मरीजों की देखभाल करनी होगी। शाम तक मैं खुद मरीजों से पूछूँगी कि किस टीम ने सबसे अच्छा व्यवहार और देखभाल की। सिर्फ़ मेडिकल नॉलेज नहीं, आपका व्यवहार भी आँका जाएगा।"

सभी उत्साहित हो गए।

अर्जुन ने तुरंत जिम्मेदारियाँ बाँटनी शुरू कर दीं।

"रीवा, तुम दादी माँ वाले वार्ड में रहना।"

"आरिफ, दवाइयों का रिकॉर्ड देखना।"

"गौरव, रिपोर्ट अपडेट करना।"

फिर उसने आयत की तरफ़ देखा।

"आयत, आप मेरे साथ आइए।"

"जी।"

दोनों एक छोटे बच्चे के वार्ड में पहुँचे।

करीब आठ साल का एक बच्चा इंजेक्शन के डर से रो रहा था।

उसकी माँ उसे समझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह मान नहीं रहा था।

आयत उसके पास बैठ गई।

"अरे... इतने बहादुर होकर भी डर रहे हो?"

बच्चे ने आँसू पोंछते हुए कहा,"इंजेक्शन बहुत दर्द करता है।"

आयत मुस्कुराई।

"अगर तुम बहादुरी दिखाओगे, तो मैं तुम्हें चॉकलेट दिलवाऊँगी।"

बच्चा चुप हो गया।

अर्जुन यह सब देख रहा था।

उसने धीरे से कहा,"तुम्हें बच्चों को संभालना अच्छे से आता है।"

आयत मुस्कुराकर बोली,"मेरी छोटी बहन भी ऐसी ही है।"

अर्जुन के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई।

कुछ देर बाद बच्चे का इलाज हो गया।

उसकी माँ ने दोनों की तरफ़ देखकर कहा,

"भगवान करे आप दोनों बहुत बड़े डॉक्टर बनें। आप जैसे डॉक्टरों की आज सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।"

आयत ने विनम्रता से मुस्कुराकर धन्यवाद कहा।

उधर दूर खड़ा रोहन यह सब देख रहा था।

उसे अच्छा नहीं लग रहा था कि जहाँ भी अर्जुन जाता, लोग उसकी तारीफ़ करते।

समर उसके पास आया।

"अब क्या सोच रहा है?"

रोहन बोला,

"अगर अर्जुन हर बार अच्छा काम करेगा, तो सब उसी की तारीफ़ करेंगे।"

"तो फिर?"

"तो मुझे ऐसा करना होगा कि सबका ध्यान उसकी तारीफ़ से हट जाए।"

दोपहर में सभी टीमों को अस्पताल की ओर से एक छोटा-सा प्रेज़ेंटेशन तैयार करने का काम दिया गया।

विषय था—

'एक अच्छे डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान क्या है?'

अर्जुन ने पूरी टीम को साथ बैठाया।

"देखो, यह किसी एक का काम नहीं है। हम सब मिलकर करेंगे।"

रीवा बोली,"मैं स्लाइड्स बनाऊँगी।"

आरिफ ने कहा,"मैं रिसर्च करूँगा।"

आयत बोली,"मैं मरीजों के अनुभव वाले पॉइंट लिखती हूँ।"

अर्जुन मुस्कुराया।

"परफेक्ट।"

टीम ने मिलकर काम शुरू कर दिया।

दूर से डॉ. मीरा यह सब देख रही थीं।

उन्होंने दूसरे डॉक्टर से कहा,

"यही लीडरशिप होती है। अर्जुन अपनी टीम से काम करवाता नहीं, बल्कि टीम के साथ काम करता है।"

रोहन ने यह बात भी सुन ली।

उसके चेहरे पर फिर वही जलन उभर आई।

शाम को जब सभी टीमों ने अपना प्रेज़ेंटेशन दिया, तो सबसे ज़्यादा तालियाँ अर्जुन की टीम को मिलीं।

डॉ. मीरा ने कहा,

"आज की बेस्ट टीम—लखनऊ मेडिकल कॉलेज।"

पूरी टीम खुशी से झूम उठी।

आयत ने पहली बार बिना झिझक अर्जुन की तरफ़ हाथ बढ़ाया।

"कॉनग्रैचुलेशन्स, टीम लीडर।"

अर्जुन ने मुस्कुराकर उसका हाथ मिलाया।

"ये मेरी नहीं... हमारी जीत है।"

दोनों के चेहरे पर सच्ची खुशी थी।

लेकिन हॉल के एक कोने में खड़ा रोहन उन्हें घूर रहा था।

उसने मन ही मन कहा,

"आज तुम जीत गए, अर्जुन...

लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ है।

अब मैं तुम्हें हराने की नहीं...

तुमसे आगे निकलने की तैयारी करूँगा।"

उसकी आँखों में चुनौती साफ़ दिखाई दे रही थी।

उधर अर्जुन और आयत को अभी भी यह एहसास नहीं था...

कि यह ट्रेनिंग सिर्फ़ उनके करियर को नहीं, बल्कि उनके रिश्ते को भी एक नई दिशा देने वाली है।