नामुमकिन इश्क - एपिसोड 16 kajal jha द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

नामुमकिन इश्क - एपिसोड 16

एपिसोड 16– भरोसे की शुरुआत

शाम के पाँच बज चुके थे।

सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में पहले दिन की ट्रेनिंग खत्म होने वाली थी। पूरे दिन की भागदौड़ के बाद सभी छात्र थके हुए थे, लेकिन उनके चेहरों पर एक अलग ही संतोष था। आखिर उन्होंने पहली बार किताबों से बाहर निकलकर असली मरीजों के बीच काम किया था।

अर्जुन अपनी टीम के सभी सदस्यों की रिपोर्ट एक बार फिर चेक कर रहा था।

"रीवा, तुम्हारी रिपोर्ट पूरी हो गई?"

"जी, अर्जुन।"

"आरिफ?"

"हो गई भाई।"

अर्जुन ने मुस्कुराकर सिर हिलाया।

फिर उसकी नज़र आयत पर गई।

वह अभी भी एक मरीज की फाइल में कुछ लिख रही थी।

अर्जुन उसके पास पहुँचा।

"आयत..."

आयत ने सिर उठाया।

"जी?"

"सब लोग अपना काम खत्म कर चुके हैं। तुम अभी तक यहीं हो?"

आयत हल्का-सा मुस्कुराई।

"एक जगह गलती हो गई थी। उसे ठीक कर रही हूँ। मरीज की हिस्ट्री अधूरी रह गई थी।"

अर्जुन ने फाइल हाथ में लेकर देखी।

कुछ सेकंड तक वह चुप रहा।

फिर बोला,

"गलती नहीं है... बस यहाँ एक-दो मेडिकल टर्म्स बदलने होंगे। बाकी काम बहुत अच्छा किया है।"

आयत हैरान होकर उसकी तरफ़ देखने लगी।

"सच?"

"हाँ। अगर पहली ही ट्रेनिंग में कोई सब कुछ परफेक्ट कर दे, तो सीखने का मतलब ही क्या रह जाएगा?"

आयत के चेहरे पर राहत भरी मुस्कान आ गई।

"थैंक यू... मुझे लगा था आप डाँटेंगे।"

अर्जुन हल्का-सा हँसा।

"डाँटना मेरा काम नहीं है। टीम लीडर का काम अपनी टीम को बेहतर बनाना होता है।"

यह बात आयत के दिल को छू गई।

उसे महसूस हुआ कि अर्जुन सिर्फ़ पढ़ाई में ही नहीं, इंसानियत में भी सबसे आगे है।

उधर कॉरिडोर में...

रोहन और समर खड़े थे।

समर ने धीमे स्वर में पूछा,

"अब क्या सोच रहा है?"

रोहन की नज़र दूर खड़े अर्जुन और आयत पर थी।

दोनों किसी रिपोर्ट पर बात कर रहे थे।

रोहन ने दाँत भींचते हुए कहा,

"मैंने सोचा था हॉस्पिटल आने के बाद दोनों दूर हो जाएँगे... लेकिन ये तो और करीब आते जा रहे हैं।"

समर मुस्कुराया।

"तो फिर कुछ ऐसा कर कि दोनों के बीच गलतफहमी हो जाए।"

रोहन की आँखों में चमक आ गई।

"यही तो करने वाला हूँ।"

अगले दिन सुबह...

सभी छात्र फिर समय पर हॉस्पिटल पहुँच गए।

डॉ. मीरा सक्सेना ने आते ही कहा,

"आज आपकी पहली असली ज़िम्मेदारी शुरू होगी। हर टीम को पाँच-पाँच मरीज दिए जाएँगे। उनकी रिपोर्ट, दवाइयों का रिकॉर्ड और रोज़ की स्थिति आप लोग संभालेंगे।"

सबने एक साथ कहा,

"यस मैम।"

डॉ. मीरा ने लिस्ट अर्जुन को दी।

"टीम लीडर, जिम्मेदारियाँ बाँट दीजिए।"

अर्जुन ने लिस्ट देखी।

"रीवा और आरिफ... बेड नंबर 1 से 2।"

"गौरव और विवेक... बेड नंबर 3।"

फिर उसने आयत की तरफ़ देखा।

"आयत... बेड नंबर 4 की जिम्मेदारी आप मेरे साथ संभालेंगी। मरीज की हालत थोड़ी गंभीर है।"

आयत ने सिर हिलाया।

"जी।"

दूर खड़ा रोहन सब देख रहा था।

उसका गुस्सा फिर बढ़ गया।

"हर बार... हर काम में यही दोनों साथ!"

कुछ देर बाद अर्जुन और आयत एक बुज़ुर्ग महिला मरीज के पास पहुँचे।

महिला के चेहरे पर दर्द साफ़ दिखाई दे रहा था।

अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा,

"नमस्ते दादी माँ... आज कैसी तबीयत है?"

महिला ने कमजोर आवाज़ में कहा,

"बेटा... दर्द तो है... लेकिन तुम लोगों को देखकर अच्छा लगता है।"

अर्जुन ने आयत की तरफ़ देखा।

"ब्लड प्रेशर नोट कीजिए।"

"जी।"

आयत ने सावधानी से मशीन लगाई।

लेकिन घबराहट में उससे रीडिंग ठीक से नहीं हो पाई।

वह परेशान हो गई।

अर्जुन ने धीरे से कहा,

"आराम से... जल्दी मत करो।"

उसने खुद मशीन पकड़कर तरीका समझाया।

"पहले मरीज को आराम से बैठाइए... फिर हाथ की पोज़िशन सही रखिए।"

आयत ने दोबारा कोशिश की।

इस बार रीडिंग बिल्कुल सही आई।

वह खुशी से मुस्कुरा उठी।

"हो गया!"

अर्जुन भी मुस्कुरा दिया।

"देखा... तुम कर सकती हो। बस खुद पर भरोसा रखना सीखो।"

यह सब देखकर बुज़ुर्ग महिला मुस्कुरा दीं।

"तुम दोनों की जोड़ी बहुत अच्छी लगती है।"

दोनों एक साथ चौंक गए।

आयत ने झेंपकर नीचे देख लिया।

अर्जुन हल्का-सा मुस्कुरा दिया।

"दादी माँ... हम सिर्फ़ स्टूडेंट्स हैं।"

महिला हँस पड़ीं।

"बेटा... बूढ़ी आँखें अक्सर दिल की बातें पहले पढ़ लेती हैं।"

दोनों बिना कुछ बोले अपना काम करने लगे।

लेकिन दोनों के दिल की धड़कन पहले से तेज़ हो चुकी थी।

उधर...

रोहन ने अपनी नई चाल चल दी।

वह चुपके से आयत के बैग के पास गया।

उसने एक छोटा-सा कागज़ उसमें रख दिया।

उस कागज़ पर लिखा था—

"आज शाम छह बजे हॉस्पिटल के गार्डन में मिलना। कुछ ज़रूरी बात करनी है। — अर्जुन"

रोहन मुस्कुराया।

"अब देखता हूँ... जब अर्जुन वहाँ नहीं जाएगा, तब आयत क्या सोचेगी।"

समर भी हँस पड़ा।

"कमाल का दिमाग है तेरा।"

रोहन बोला,

"गलतफहमियाँ... सबसे खतरनाक हथियार होती हैं।"

उसे नहीं पता था...

कि उसकी यह चाल जल्द ही उसी पर भारी पड़ने वाली है।

उधर अर्जुन पूरी तरह अनजान था।

और आयत भी नहीं जानती थी...

कि उसके बैग में रखा वह छोटा-सा कागज़ आने वाले समय में कई सवाल खड़े करने वाला है।

क्रमशः...