एपिसोड 26– एक नई शुरुआत
इंटर-कॉलेज मेडिकल चैलेंज खत्म हुए दो दिन बीत चुके थे।
लेकिन पूरे सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में आज भी सिर्फ़ एक ही टीम की चर्चा हो रही थी—लखनऊ मेडिकल कॉलेज।
कई सीनियर डॉक्टर अर्जुन की लीडरशिप की तारीफ कर रहे थे, तो कुछ आयत की समझदारी और शांत स्वभाव की।
उधर हॉस्पिटल के नोटिस बोर्ड पर एक नई सूचना लगा दी गई।
"सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स ध्यान दें। अगले पंद्रह दिनों तक आपको अलग-अलग विभागों में रोटेशन ड्यूटी करनी होगी। हर विभाग में टीम लीडर अपनी टीम के साथ काम करेगा।"
सूचना पढ़ते ही सभी छात्र एक-दूसरे से बातें करने लगे।
रीवा उत्साहित होकर बोली,"अब तो असली हॉस्पिटल लाइफ शुरू होगी।"
गौरव हँसते हुए बोला,"अब रात की ड्यूटी भी मिलेगी।"
आयत के चेहरे पर हल्की-सी घबराहट थी।
अर्जुन ने उसे देखा।
"क्या हुआ?"
आयत ने धीमे से कहा,"पहली बार अलग-अलग वार्ड में काम करना है... थोड़ा नर्वस लग रहा है।"
अर्जुन मुस्कुराया।
"जब पहली बार इंजेक्शन पकड़ना था, तब भी यही कहा था। अब देखो... सब कर लेती हो।"
आयत भी मुस्कुरा दी।
"शायद... आप सही कह रहे हैं।"
उसी समय डॉ. मीरा वहाँ पहुँचीं।
"सभी लोग ध्यान दें।"
सब उनके सामने खड़े हो गए।
उन्होंने फाइल खोलते हुए कहा,
"आज से आपकी नई ड्यूटी शुरू होगी।"
"अर्जुन, आयत, रीवा, गौरव और आरिफ... आप सभी इमरजेंसी यूनिट में रहेंगे।"
"रोहन, समर और विवेक... आपको ट्रॉमा सेंटर भेजा जा रहा है।"
"करण और सनाया... आप दोनों पीडियाट्रिक वार्ड में रहेंगे।"
ड्यूटी सुनते ही सब अपने-अपने विभाग की ओर बढ़ गए।
इमरजेंसी यूनिट
यह हॉस्पिटल का सबसे व्यस्त हिस्सा था।
हर कुछ मिनट में कोई न कोई मरीज आ रहा था।
डॉ. कबीर ने अर्जुन की टीम को देखकर कहा,
"आज से यहाँ तुम लोगों की असली ट्रेनिंग शुरू होगी। यहाँ एक छोटी-सी गलती भी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।"
सब गंभीर हो गए।
तभी अचानक बाहर से आवाज़ आई—
"इमरजेंसी... रास्ता खाली करो!"
एक स्ट्रेचर तेज़ी से अंदर लाया गया।
करीब दस साल का एक बच्चा बेहोश था।
उसके साथ उसकी माँ रोते हुए भाग रही थी।
"डॉक्टर साहब... मेरे बेटे को बचा लीजिए।"
डॉ. कबीर तुरंत मरीज के पास पहुँचे।
"अर्जुन... वाइटल्स चेक करो।"
"आयत... ऑक्सीजन तैयार करो।"
"रीवा... केस हिस्ट्री लो।"
पूरी टीम बिना एक सेकंड गँवाए काम में लग गई।
आयत के हाथ हल्के-हल्के काँप रहे थे।
अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।
"आयत... मेरी तरफ़ देखो।"
वह उसकी तरफ़ देखने लगी।
"घबराओ मत। तुम कर सकती हो।"
बस इतना सुनना था।
आयत ने गहरी साँस ली और पूरे आत्मविश्वास के साथ अपना काम शुरू कर दिया।
कुछ मिनट बाद...
बच्चे की साँसें सामान्य होने लगीं।
उसकी माँ की आँखों में आँसू आ गए।
"भगवान आपका भला करे..."
डॉ. कबीर मुस्कुराए।
"धन्यवाद हमें नहीं... इन बच्चों को दीजिए। इन्होंने बहुत अच्छा काम किया है।"
महिला ने अर्जुन और आयत की तरफ़ देखा।
"आप दोनों हमेशा खुश रहो।"
आयत पहली बार किसी मरीज के परिवार की दुआ सुन रही थी।
उसकी आँखें नम हो गईं।
दूसरी तरफ़...
पीडियाट्रिक वार्ड में करण बच्चों के साथ खेल रहा था।
एक छोटी बच्ची रो रही थी।
करण ने जेब से चॉकलेट निकालकर उसे दी।
बच्ची तुरंत हँसने लगी।
यह देखकर सनाया मुस्कुरा उठी।
"तुम बच्चों को संभालना अच्छी तरह जानते हो।"
करण ने हँसते हुए कहा,
"बच्चे झूठ नहीं बोलते... इसलिए मुझे अच्छे लगते हैं।"
सनाया कुछ पल उसे देखती रही।
उसके मन में पहली बार करण के लिए सम्मान की भावना पैदा हुई।
उधर...
ट्रॉमा सेंटर में रोहन की ड्यूटी लगी थी।
वह काम तो कर रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार इमरजेंसी यूनिट की तरफ़ जा रहा था।
समर ने पूछा,
"क्या हुआ?"
रोहन ने धीमे से कहा,
"हर जगह अर्जुन की ही तारीफ हो रही है।"
समर बोला,
"तारीफ मेहनत की हो रही है। अगर तू भी उसी पर ध्यान देगा, तो एक दिन तेरी भी होगी।"
रोहन ने कोई जवाब नहीं दिया।
लेकिन उसके चेहरे से साफ़ था...
कि उसके मन में अभी भी अर्जुन को पीछे छोड़ने की आग जल रही थी।
शाम को ड्यूटी खत्म हुई।
सभी स्टूडेंट्स हॉस्पिटल के गार्डन में बैठे थे।
रीवा हँसते हुए बोली,
"आज का दिन तो याद रहेगा।"
गौरव बोला,
"पहली बार लगा कि सच में डॉक्टर बनने की राह पर हैं।"
अर्जुन चुपचाप बैठा था।
आयत ने उसकी तरफ़ देखा।
"क्या सोच रहे हैं?"
अर्जुन मुस्कुराया।
"बस... यही कि एक दिन हम सब सचमुच अच्छे डॉक्टर बनें।"
आयत ने पहली बार बिना झिझक उसकी आँखों में देखकर कहा,
"अगर साथ ऐसे ही बना रहा... तो ज़रूर बनेंगे।"
दोनों की नज़रें कुछ पल के लिए एक-दूसरे से मिली रहीं।
दूर खड़ी रीवा यह सब देखकर मुस्कुरा रही थी।
उसे अब यकीन हो चुका था...
दोनों के दिल में कुछ ऐसा जन्म ले चुका है, जिसे शायद अभी दोनों खुद भी नाम नहीं दे पा रहे थे।
लेकिन उसी समय...
हॉस्पिटल के मुख्य गेट पर एक काली लग्ज़री कार आकर रुकी।
उसमें से एक प्रभावशाली शख्स बाहर उतरा।
उसे देखते ही हॉस्पिटल के कई सीनियर डॉक्टर सम्मान से खड़े हो गए।
डॉ. मीरा के चेहरे का रंग बदल गया।
उन्होंने धीरे से कहा,
"ये यहाँ... अभी क्यों आए हैं?"
और दूर खड़ा अर्जुन भी उस व्यक्ति को देखकर एक पल के लिए गंभीर हो गया।
लग रहा था...
इस आदमी की एंट्री सिर्फ़ हॉस्पिटल में नहीं, बल्कि अर्जुन और आयत की ज़िंदगी में भी बड़ा तूफ़ान लेकर आने वाली थी।