एपिसोड 14– पहली ड्यूटी, पहला साथ और पहली साज़िश
सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के कॉन्फ्रेंस हॉल में सभी तीस छात्र खड़े थे। सफेद कोट पहने हर किसी के चेहरे पर उत्साह और घबराहट दोनों साफ़ दिखाई दे रहे थे।
डॉ. आदित्य राठौर ने सभी की ओर देखते हुए कहा,
"आज से आप लोग सिर्फ़ स्टूडेंट नहीं हैं। आज से आप भविष्य के डॉक्टर हैं। यहाँ एक छोटी-सी लापरवाही भी किसी की ज़िंदगी पर भारी पड़ सकती है। इसलिए याद रखिए—यहाँ अहंकार नहीं, अनुशासन चलेगा।"
पूरा हॉल शांत हो गया।
कुछ देर बाद सभी छात्रों को अलग-अलग यूनिट में बाँटना शुरू किया गया।
एक-एक करके नाम पुकारे जाने लगे।
"रीवा शर्मा... जनरल मेडिसिन।"
"करण शर्मा... इमरजेंसी यूनिट।"
"सनाया खन्ना... इमरजेंसी यूनिट।"
यह सुनते ही करण ने एक पल के लिए सनाया की तरफ़ देखा। सनाया ने भी उसे देखा, लेकिन अगले ही पल नज़रें फेर लीं।
डॉ. आदित्य आगे बोले,
"रोहन मेहरा... जनरल मेडिसिन।"
रोहन मुस्कुराया।
फिर अगले ही पल...
"अर्जुन वशिष्ठ... जनरल मेडिसिन यूनिट इंचार्ज।"
"आयत खान... जनरल मेडिसिन।"
इतना सुनते ही आयत ने हैरानी से अर्जुन की तरफ़ देखा।
अर्जुन ने भी उसकी ओर देखा और हल्की-सी मुस्कान दे दी।
न जाने क्यों...
दोनों के चेहरे पर एक अलग ही सुकून था।
दूर खड़ा रोहन यह सब देख रहा था।
उसकी मुट्ठियाँ अपने आप भींच गईं।
"जहाँ भी जाता हूँ... यह अर्जुन बीच में आ ही जाता है। अब पूरे एक महीने आयत भी इसके साथ रहेगी। नहीं... ऐसा नहीं होने दूँगा।"
कुछ देर बाद सभी अपनी-अपनी यूनिट में पहुँच गए।
जनरल मेडिसिन वार्ड में करीब तीस मरीज भर्ती थे।
डॉ. मीरा सक्सेना, जो उस यूनिट की सीनियर डॉक्टर थीं, उन्होंने अर्जुन की तरफ़ देखा।
"मिस्टर अर्जुन, आप टीम लीडर हैं। इसलिए आज की ड्यूटी आप बाँटेंगे।"
"यस, मैम।"
अर्जुन ने सभी साथियों की तरफ़ देखा।
"रीवा, तुम बेड नंबर 1 से 10 तक के मरीजों की हिस्ट्री नोट करो।"
"जी।"
"आयत..."
अर्जुन की आवाज़ सुनकर आयत उसकी तरफ़ देखने लगी।
"आप मेरे साथ आइए। नए मरीजों की रिपोर्ट तैयार करनी है।"
"जी।"
दोनों साथ-साथ वार्ड की तरफ़ बढ़ गए।
पहला मरीज एक बुज़ुर्ग व्यक्ति था।
अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा,
"नमस्ते अंकल, कैसी तबीयत है?"
बुज़ुर्ग मुस्कुराए।
"अब तो तुम लोगों को देखकर आधी बीमारी वैसे ही ठीक हो गई।"
अर्जुन और आयत दोनों हँस पड़े।
अर्जुन ने धीरे से कहा,
"आयत, पहले मरीज की बात ध्यान से सुनो। डॉक्टर बनने के लिए किताबों से ज़्यादा मरीजों को समझना ज़रूरी होता है।"
आयत ने सिर हिलाया।
"जी।"
वह नोट्स बनाने लगी।
अर्जुन बीच-बीच में उसे समझाता जा रहा था कि किस तरह मरीज से सवाल पूछे जाते हैं और कौन-सी बातें सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण होती हैं।
आयत मन ही मन सोच रही थी—
"ये जितना सख़्त दिखता है... उतना है नहीं।"
उधर वार्ड के दूसरे कोने में खड़ा रोहन लगातार दोनों को देख रहा था।
समर उसके पास आया।
"क्या हुआ? कब से इन्हें ही देख रहा है?"
रोहन ने धीमी आवाज़ में कहा,
"देख नहीं रहा... सोच रहा हूँ कि इन दोनों को अलग कैसे करूँ।"
समर मुस्कुराया।
"कोई प्लान है?"
रोहन की आँखों में चालाकी उतर आई।
"पहला दिन है... और पहला वार भी आज ही होगा।"
इतना कहकर वह धीरे-धीरे रिकॉर्ड डेस्क की तरफ़ बढ़ गया।
वहाँ नर्स कुछ देर के लिए दूसरी तरफ़ गई हुई थी।
रोहन ने चारों तरफ़ देखा।
किसी का ध्यान उसकी तरफ़ नहीं था।
उसने जल्दी से बेड नंबर 18 की मरीज फाइल उठाई और दूसरी अलमारी में दूसरी फाइलों के बीच छिपा दी।
फिर बिल्कुल सामान्य बनकर वापस अपनी जगह आ गया।
कुछ ही मिनट बाद...
एक नर्स घबराते हुए बोली,
"मैम... बेड नंबर 18 की फाइल नहीं मिल रही!"
डॉ. मीरा तुरंत रिकॉर्ड डेस्क के पास पहुँचीं।
"क्या मतलब नहीं मिल रही? अभी तो यहीं थी!"
पूरा स्टाफ फाइल ढूँढ़ने लगा।
कुछ देर बाद भी जब फाइल नहीं मिली तो उन्होंने सख़्त आवाज़ में कहा,
"टीम लीडर अर्जुन को बुलाइए।"
अर्जुन तुरंत वहाँ पहुँचा।
"जी मैम?"
डॉ. मीरा ने गंभीर स्वर में पूछा,
"आपकी टीम की ड्यूटी शुरू होते ही मरीज की फाइल गायब कैसे हो गई?"
पूरे वार्ड की नज़र अब अर्जुन पर थी।
दूर खड़ा रोहन मन ही मन मुस्कुरा रहा था।
"अब देखता हूँ... टीम लीडर साहब अपनी पहली परीक्षा कैसे पास करते हैं।"
लेकिन अर्जुन घबराया नहीं।
उसने शांत आवाज़ में कहा,
"मैम, अगर फाइल यहीं से गायब हुई है... तो वह अस्पताल से बाहर नहीं जा सकती। मैं पाँच मिनट में उसे ढूँढ़ने की कोशिश करता हूँ।"
अर्जुन ने पूरे रिकॉर्ड रूम पर एक नज़र डाली।
फिर उसकी नज़र रोहन पर गई...
जो ज़रूरत से ज़्यादा शांत दिखाई दे रहा था।
अर्जुन की आँखों में हल्का-सा शक उभर आया।
उधर आयत भी बेचैन होकर अर्जुन को देख रही थी।
उसे पूरा भरोसा था...
कि अर्जुन कोई गलती नहीं कर सकता।
लेकिन क्या अर्जुन इतनी जल्दी असली साज़िश तक पहुँच पाएगा?
या रोहन की पहली चाल सफल हो जाएगी?