एपिसोड 23 – मुकाबले की शुरुआत
अगली सुबह...
सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का ऑडिटोरियम छात्रों की हलचल से भरा हुआ था। लखनऊ, कानपुर और आगरा मेडिकल कॉलेज की टीमें अपनी-अपनी सीटों पर बैठ चुकी थीं। हर किसी की नज़र आज होने वाली इंटर-कॉलेज मेडिकल चैलेंज पर थी।
स्टेज पर हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. राजीव मल्होत्रा आए।
"गुड मॉर्निंग, एवरीवन।"
पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा।
।"
सभी छात्र ध्यान से उनकी बात सुन रहे थे।
उन्होंने आगे कहा,
"प्रतियोगिता तीन राउंड में होगी। पहला राउंड होगा—मेडिकल नॉलेज क्विज़। दूसरा—क्लिनिकल केस एनालिसिस। और तीसरा—टीम इमरजेंसी रिस्पॉन्स। सबसे अधिक अंक पाने वाली टीम विजेता होगी।"
पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा।
पहला राउंड
सभी टीमें अपनी-अपनी टेबल पर बैठ गईं।
लखनऊ मेडिकल कॉलेज की टीम की कमान अर्जुन के हाथ में थी।
उसने टीम की तरफ़ देखा।
"घबराना मत। जो आता है वही जवाब देना। किसी पर बेवजह दबाव मत लेना।"
आयत ने मुस्कुराकर कहा,
"हम पूरी कोशिश करेंगे।"
रीवा बोली,
"और जीतकर ही लौटेंगे।"
अर्जुन हल्का-सा मुस्कुरा दिया।
उधर रोहन अपनी सीट पर बैठा अर्जुन को ही देख रहा था।
"हर बार इतना शांत कैसे रह लेता है?"
तभी पहला सवाल स्क्रीन पर आया।
"हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों में सबसे महत्वपूर्ण संकेत कौन-सा माना जाता है?"
बज़र बजा।
अर्जुन ने बिना देर किए जवाब दिया।
"सीने में दबाव जैसा दर्द, जो हाथ, कंधे या जबड़े तक फैल सकता है।"
"Correct."
पहला अंक लखनऊ की टीम को मिला।
दूसरा सवाल...
तीसरा...
चौथा...
हर सवाल पर अर्जुन टीम से राय लेकर जवाब देता।
कई बार आयत सही उत्तर बताती, कभी आरिफ, तो कभी गौरव।
डॉ. मीरा दूर खड़ी मुस्कुरा रही थीं।
"यही फर्क है... अर्जुन अकेले नहीं खेलता, पूरी टीम को साथ लेकर चलता है।"
पहला राउंड खत्म हुआ।
स्कोर बोर्ड पर अंक चमकने लगे—
लखनऊ मेडिकल कॉलेज – 48 अंक
कानपुर मेडिकल कॉलेज – 45 अंक
आगरा मेडिकल कॉलेज – 44 अंक
सिर्फ़ तीन अंकों का अंतर था।
एक नई मुलाक़ात
ब्रेक के दौरान सभी छात्र कैंटीन की तरफ़ जाने लगे।
"जी..."
"मैं अयान सिद्दीकी... कानपुर मेडिकल कॉलेज से।"
उसने मुस्कुराकर हाथ बढ़ाया।
"आपके जवाब बहुत अच्छे थे।"
आयत ने भी विनम्रता से हाथ मिलाया।
"थैंक यू। आपकी टीम भी बहुत अच्छा खेल रही है।"
अयान मुस्कुराया।
"फाइनल में शायद हमारी टक्कर होगी।"
दोनों हल्के-फुल्के अंदाज़ में बात करने लगे।
उसी समय अर्जुन वहाँ पहुँचा।
उसकी नज़र सबसे पहले आयत और अयान पर पड़ी।
कुछ पल के लिए वह वहीं रुक गया।
आयत ने अर्जुन को देखा और मुस्कुराकर कहा,
"अर्जुन... ये अयान हैं, कानपुर मेडिकल कॉलेज से।"
अयान ने आगे बढ़कर हाथ मिलाया।
"हाय, टीम लीडर। आपके बारे में बहुत सुना है।"
अर्जुन ने भी मुस्कुराकर हाथ मिलाया।
"ऑल द बेस्ट।"
बात तो सामान्य थी...
लेकिन पता नहीं क्यों, अर्जुन के मन में हल्की-सी बेचैनी उठी।
वह खुद भी नहीं समझ पाया कि ऐसा क्यों हुआ।
उधर रीवा दूर खड़ी सब देख रही थी।
वह धीरे से मुस्कुराई।
"लगता है... किसी को पहली बार हल्की-सी जलन हुई है।"
दूसरी तरफ़...
रोहन ने भी यह सब देख लिया था।
उसके चेहरे पर धीरे-धीरे मुस्कान फैल गई।
"तो आखिर... अर्जुन की भी कोई कमजोरी है।"
समर ने पूछा,
"क्या सोच रहा है?"
रोहन बोला,
"कुछ नहीं... बस खेल अब और दिलचस्प होने वाला है।"
लेकिन इस बार उसके मन में किसी को नुकसान पहुँचाने की नहीं, बल्कि प्रतियोगिता में अर्जुन को हराने की ज़िद थी।
हॉल में दोबारा घंटी बजी।
सभी टीमों को दूसरे राउंड के लिए बुलाया गया।
अब सामने सिर्फ़ सवाल नहीं...
बल्कि ऐसे मेडिकल केस आने वाले थे, जहाँ सही फैसला ही जीत और हार तय करेगा।
अर्जुन ने अपनी टीम की तरफ़ देखा।
"तैयार?"
सभी ने एक साथ कहा—
"यस, टीम लीडर!"
और यहीं से...
इंटर-कॉलेज मेडिकल चैलेंज का सबसे कठिन दौर शुरू होने वाला था।