ये कहानी एक लड़की की है जिसका नाम श्री है ।श्री का पूरा शरीर भले की कुरूप था लेकिन पता नहीं कैसे उसका मुंह ठीक था । बोले तो सुंदर था । मुंह देख कर तो कोई कहे नहीं सकता था कि उससे कोई शरीर का रोग भी है ।लेकिन जब कोई हाथ पैर देखता तो सब का मन दुखी हो जाता । सब श्री की चिंता करते । और किस तरह से उसके कुरूप शरीर के बाद भी एक हरि नाम का सुंदर सा लड़का उसे प्यार करेगा
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 1
ये कहानी एक लड़की की है जिसका नाम श्री है ।श्री का पूरा शरीर भले की कुरूप था लेकिन नहीं कैसे उसका मुंह ठीक था । बोले तो सुंदर था । मुंह देख कर तो कोई कहे नहीं सकता था कि उससे कोई शरीर का रोग भी है ।लेकिन जब कोई हाथ पैर देखता तो सब का मन दुखी हो जाता । सब श्री की चिंता करते ।और किस तरह से उसके कुरूप शरीर के बाद भी एक हरि नाम का सुंदर सा लड़का उसे प्यार करेगा .तो ये कहानी तब से शुरू होगी जब श्री अपनी मां की ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 2
तो अब अच्छे नंबर 12वीं में आ जाने के बाद, अब श्री ने इग्नू मे एडमिशन ले लिया, आगे पढ़ाई उसने ओपन से की थी, और UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी। हां श्री को अब IAS बनना था दिखाना था सब को कि वो कमजोर नहीं है। उसने अपना स्कूल ख़त्म होने के बाद अपनी मम्मी का एक प्राइमरी स्कूल खुलवाया। ज्यादा तर समय अब श्री अपनी पढ़ाई और भक्ति को देती थी और समय निकाल कर अपनी मम्मी के स्कूल में पढ़ाती भी थी।अपनी मां के विद्यालय में पढ़ाना। अपनी पढ़ाई करना । शाम को ट्यूशन ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 3
हरि अब गाड़ी स्टार्ट कर देता है । वो वहां से अपने घर की और गाड़ी घुमा लेता है। रेडियो में गाने चलाता है ।लेकिन श्री रेडियो बंद कर देती है। क्यूंकि श्री भजन के शिवाय किसी प्रकार का गाना पसंद नहीं करती थी।हरि कहता है आपने रेडियो बंद क्यों किया ।श्री ने कहा कि उसे गाने सुनना पसंद नहीं ।हरि बोला तुम कितनी बोरिंग हो ।यार।उसके यार बोलने पर श्री उसे घूरती है और बोलती है कि मैं आपकी कोई यार नहीं हु आगे से मुझे यार मत कहना । समझे। और रही बात की मैं बोरिंग हु ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 4
फ्लैश बैक endवर्तमान में ,श्री सीता जी से बात कर रही थी । सीता जी ने श्री से पूछा अब और भी ज्यादा भक्ति करने की क्या आवश्यकता है पिछली बार भी मैने तुम्हे समझाया था फिर फिर भी तुम्हारा ये रूप मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।श्री ने उनकी बात सुन कर कहा। आंटी आप मेरी मां जैसे है । जिस प्रकार वो मुझे समझाती है उसी प्रकार आपने भी मुझे समझाया। मेरे हित चाहने की इच्छा से आपने मुझे ये सब समझाया था। लेकिन मेरे लिए तो मेरा हित बस नारायण भक्ति में ही है ।अब मैने ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 5
श्री और हरि आपस में बात कर रहे थे की तभी हरि का फोन बजा वो वहां से चला । श्री ने अपनी दिनचर्या चालू रखते हुए शुर्यनमस्कार(योग) करना प्रारंभ किया । फोन कट होने के बाद हरि दुबारा जब किचेन की तरफ आ रहा था तब वो श्री को योगा करते हुए देख रहा था ।श्री ध्यान लगाने के बाद नित्य ही योगा भी करती थी । ध्यान और योग से श्री का शरीर और भी ज्यादा आकृषित होता जा रहा था । हरि चाह कर भी श्री से अपनी नजर नहीं हटा पा रहा था । श्री ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 6
अगले दिन श्री का upsc prelims परीक्षा थी । श्री अपना नित्य कार्य पूर्ण करके ध्यान योग करने के नाश्ते की टेबल पर सबके साथ नाश्ता करने लगी । सीता जी ने श्री से कहा बेटा आज तुम्हारा पेपर है बेस्ट ऑफ लक बेटा prelims में सबसे अच्छे नंबर तुम ही लाओगी मुझे विश्वास है। श्री ने कहा जी आंटी मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि आज की परीक्षा में मैं अपना बेस्ट दूंगी । आप चिंतित न हो । सीता जी ने हरि से कहा बेटा श्री को उसके एग्जाम सेंटर तक पहुंचा देना । ताकि वो लेट न ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 7
श्री अंदर चली गई । हरि और श्री सोफे पर आ कर बैठ गए हरि ने लैपटॉप ओपन किया श्री का रिजल्ट चेक करने लगा । श्री ने अपनी आंखें बंद की हुई थी और वो यही सोच रही थी कि जो होगा अच्छा ही होगा । हरि ने बोला श्री तुम्हारा रिजल्ट वो... हरि चुप हो गया श्री को डर लगने लगा श्री ने कहा बताइए न क्या है रिजल्ट। हरि ने एक दम से हस्ते हुए कहा —अरे तुम डर क्यों रही हो टॉप 25 रैंक है तुम्हारी श्री ने जैसे ही ये सुना खुशी से हरि ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 8
यही बाते सोचते सोचते दोनों अब घर पहुंच गए थे । श्री अपने कमरे में जाकर अपना बैग पैक लगी क्योंकि अब उसे अपने घर जाना था उसके दोनों एग्जाम हो चुके थे । इसलिए उसने यही फैसला लिया कि अब वो अपने घर जाएगी रिजल्ट अपने घर में ही चेक करेगी उसके बाद इंटरव्यू के लिए वो बाद में अपने पापा के साथ आ जाएगी। हरि उसके लिए चाय लेकर पहुंचा देखा कि श्री अपना बैग पैक कर रही है तो मन बहुत दुखी हुआ फिर हंसने का नाटक करते हुए कहने लगा —अच्छा तो अब जाने की ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 9
हरि ने कहा —जानता हु श्री तुम क्यूं रो रही हो क्योंकि तुम्हे लगता है कि तुम्हे skin problem तो कोई भी तुमसे प्यार कैसे कर सकता है ?लेकिन श्री मेरा यकीन मानो मुझे तुम्हारे शरीर से कोई फर्क नहीं पड़ता मैं तुमसे प्यार करता हु तुम्हारे शरीर से नहीं तुम्हारी आत्मा से करता हु ️। क्या तुम मुझे समझ सकती हो श्री मेरे मन की बात को स्वीकार कर सकती हो तुम 🫶श्री को तो अब कुछ समझ ही नहीं आया कि वो क्या कहे । शायद उसके मन में भी एक सुकून था हरि की बात सुनकर ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 10
श्री का भाई उसे लेने आ गया था । दोनों भाई बहन अब अपने घर चले गए । हरि को जाते हुए देख रहा था उसकी आंखों मे आंसू थे और वो यही सोच रहा था कि अब श्री और वो कब मिलेंगे।कुछ दिन बाद...श्री का रिजल्ट आ गया था उसके पापा उसका रिजल्ट देख रहे थे । श्री का ऑल इंडिया रैंक 10 आया अब उसे इंटरव्यू देना था वो अपने इंटरव्यू की तैयारी में लग गई ।एक दिन ऐसा भी आया जब उसका इंटरव्यू हो गया । अब वो एक ias बन चुकी थी । लेकिन अब ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 11
कमरे मे आकर सीता आंटी ने श्री को समझाने का निर्णय लिया सीता आंटी ने कहा श्री मुझे तुमसे बात करनी है बेटाश्री:- जी आंटी कहिए आपको क्या बात करनी है हमसेसीता आंटी:- देखो श्री मैं जानती हूँ हरि तुम्हारे लिए क्या महसूस करता है ..श्री ने कहा – आंटी जी इन सब बातों का अब मेरे जीवन में कोई मूल्य नहीं है जानती हूं आप क्या कहना चाहती हैं लेकिन मेरी बात को भी समझिए आंटी जी कृपा कर के ...सीता आंटी को अब श्री की बात सुनके क्रोध आया उन्होने कहा बस श्री बस तुम अपने मन ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 12
श्री वहाँ से जाने लगी हरि ने उसका हाथ पकड़ लियाश्री ने खुद को छुड़वाना चाहा लेकिन हरि के हाथों से खुद को नहीं छुड़वा पाई ।श्री ने कहा हरि जी हमारा हाथ छोड़िए हरि ने कहां ये हाथ छोड़ने के लिए नहीं पकड़ा है जीवन भर इस हाथ को थामना चाहता हु मैं। श्री ने कहा – क्या कहे रहे है आप हरि जी क्यों चाहते हो आप ऐसा क्यों? हरि ने कहां — श्री प्रेम क्यों हुआ ये पूछ रही हो?️हो गया क्या करूं अब नहीं रह सकता तुम्हारे बिना शादी करना चाहता हूं तुमसे मैं ।श्री– ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 13
हरि ने पीछे से आवाज देते हुआ कहा अरे मेरी प्रियतमा सुनो तो...श्री पीछे मूढ के -क्या कहे रहे आप कहा न हमे मत बोलिए ये शब्द आप मार खाएंगे हमसे।हरि हंसते हुए अच्छा बटुकी सी तो हो तुम मुझे मारोगी आओ मारो मेरी प्रियतमा..श्री– क्या कहा हम बुटकी इतनी हिम्मत आपकी अब देखिए आप सच में पिटोगे हमसे । श्री हरि के पीछे भागी हरि आगे आगे श्री उसके पीछे पीछे थप्पड़ दिखाते हुए और बोलते हुए की रुकिए आप अभी बताते है हम बुटकी है हा।हरि आगे भागते हुए हा हो बुटकी हो मेरी प्रियतमा बुटकीऔर मारोगी ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 14
अब हरि को श्री राधावल्लभ जी का आशिर्वाद मिल चुका था और अब उसे ये विश्वास था कि श्री मिल जाएगी ।सभी लोग अब होटल पहुंचते है और दोपहर का भोजन करने के लिए रेस्टोरेंट आते है ।सभी लोगों से पहले श्री और हरि आ जाते है खाना खाने।श्री जब अपनी कुर्सी पे बैठी तभी हरि उसके बगल वाली कुर्सी पे बैठ गया । श्री वहां से अब उठना चाहती थी लेकिन हरि ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसने कहा कि चुप चाप यही बैठो प्रिय नहीं तो सब के सामने अभी हमारी शादी का विषय छेड़ दूंगा ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 15
अब सब लोग होटल पहुंच गए थे ।थके होने के कारण सब सो गए...लेकिन हरि और श्री को नींद आ रही थी ।श्री कमरे की बालकनी में थी और हरि बाहर टहल रहा था उसने ऊपर मुंह कर के देखा तो श्री जागी हुई थी । उसने श्री को इशारा किया श्री उसके इशारे से नीचे आ गईअब दोनों एक साथ होटल के बागान में टहल रहे थे ।श्री ने कहा चलिए दिखाइए कौनसा आशिर्वाद मिला आपको राधावल्लभ जी से।हरि ने अपने हाथों में वही फूल माला ले रखी थी जो उसे राधावल्लभ जी के चरणों से मिली थी ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 16
श्री 1 साल की ट्रेनिग के बाद अपने शहर आई लोगों ने station पे ही बहुत भीड़ इक्कठी कर श्री के स्वागत में हरि और श्री का परिवार एक साथ आया श्री के स्वागत में कोई कमी नहीं थीहरि ने श्री को देखा श्री ने भी हरि को एक नजर देखा दोनों की नजरे मिले आंखों ही आंखों में बात हुई हरि श्री को देखे जा रहा था श्री नजरे चुराये जा रही थीऐसा लग रहा था मानो हरि आंखों ही आंखों में बोल रहा था कि अब तो तुम्हारे गुरुदेव से मिलेंगे और फिर तुम मेरी ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 17
सभी लोग गुरुदेव के आश्रम में पहुंच चुके थे श्री और हरि के परिवार वाले गुरुदेव के आगे नतमस्तक गए । सभी ने गुरुदेव को दंडवत प्रणाम किया वही पे आज गुरुदेव के एक शिष्य जिनका नाम था (सार्थक)दिखने में इतने खूब की क्या ही तारीफ करे उनकी हाइट लगभग हरि जितनी ही थी ... लेकिन हरि और सार्थक दोनों ही दिखने में उत्तम थे दोनों को एक साथ खड़ा किया जाए तो ये नहीं कहा जा सकता कि ये ज्यादा दिखने में उत्तम है या ये दोनों ही खूब सुंदर थे हरि भी और सार्थक भी आज ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 18
अब श्री का मन तो बस भगवान नारायण के लिए भारी हो रहा था वो किसी भी कीमत पे अपने प्रभु से दूर नहीं होना चाहती थी गुरुदेव ने सब को एक नजर देखा अब गुरुदेव बोले —श्री पुत्री यहां आइये हमारे पासश्री:— जी गुरुदेव गुरुदेव — पुत्री सबसे पहले तो आपको बहुत बहुत बधाई आप अब अपने जीवन में अपने सपनों को पूरा कर चुकी है और कामयाब हो चुकी हैं श्री — जी गुरुदेव धन्यवाद आपके आशीर्वाद से ही संभव हो पाया है आपका आशीर्वाद न होता प्रभु नारायण की कृपा न होती तो कभी न कर ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 19
विश्राम के बाद सभी लोगों ने हरिद्वार में गंगा स्नान और गंगा आरती देखने जाने का निश्चय किया।सबकी बात श्री गुरुदेव के पास आज्ञा लेने गईगुरुदेव ध्यान में लीन थे सार्थक गुरुदेव की सेवा में लीन था ....वही?.......श्री उनके समक्ष हाथ जोर के उनके पास बैठ गईगुरुदेव को आभास हुआ उन्होंने नेत्र खोलेश्री — गुरुदेव हम सब गंगा स्नान और गंगा आरती के लिए जाना चाहते है आपकी आज्ञा हो तो ....गुरुदेव — अवश्य पुत्री आप सब जाइएगुरुदेव सार्थक की तरफ देखते हुए –सार्थक पुत्र आप भी राम जी और कृष्ण जी के परिवार वालों के साथ जाए । ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 20
श्री— हरि जी कहा खो गए आप क्या सोच रहे है ?हरि— अरे नहीं नहीं बस कुछ काम का था मैं आता हु एक जरूरी कॉल कर के श्री— जी ठीक है...हरि वहां से चला जाता है ...अब श्री और सार्थक साथ साथ चल रहे थेहरि के परिवार को ये बात अच्छी नहीं लग रही थीसीता जी श्री की माँ गीता जीता जी से — गीता ये श्री के साथ ये लड़का सार्थक हर वक्त अच्छा नहीं लग रहा यारगीता जी — हा पर क्या करे गुरुदेव ने साथ भेज दिया वैसे ऐसा कुछ नहीं है सार्थक बहुत अच्छा ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 21
वही गुरुदेव ने सार्थक को भी बात करने को बुलाया थाजैसे ही सार्थक गुरुदेव के कक्ष के पास आया श्री और गुरुदेव की बात सुन ली....अब बिचारे सार्थक का तो दिल ही टूट गया था क्यूंकि उसने सुना कि श्री अपनी आत्मग्लानि के कारण हरि को स्वीकार नहीं कर पा रही लेकिन उसके मन में हरि के लिए भावनाएं है . और अब वो भक्ति में भी इतनी प्रवीण हो चुकी है कि भक्ति मार्ग का त्याग कभी नहीं करेगी श्री अपने भगवान नारायण के प्रति भी पूर्ण समर्पित है और गुरुदेव के हाथ में पूरा निर्णय है ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 22
अब सार्थक तो पूरी रात रोते रहे हमारी श्री के लिए परन्तु उनका भाव बहुत पवित्र था कि वो श्री की प्रसन्नता चाहते है जहां श्री खुश वहां सार्थक भी खुश वही हरि अपने कक्ष में एक बार को श्री की बात सुन के खुश था कि श्री सार्थक को बस अच्छा मित्र मानती है लेकिन दूसरी ही बार वो ये सोच के परेशान हो रहा था और रो भी रहा था कि कही सार्थक के मन में तो श्री के लिए प्रेम भाव नहीं यही सोच - सोच के हरि भी पूरी रात न सो पायाऔर ,श्री ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 23
श्री और सार्थक आपस में बात कर रहे थे अब तक सार्थक अपने मन की बात श्री को बता था । और ये एहसास भी दिल चुका था कि मनुष्य को शरीर के आकर्षण से नहीं बल्कि मन की सुंदरतावसे देखा जाता है इसके बाद श्री सार्थक से कहती है — सार्थक जी तो क्या आप इसलिए पूरी रात रोते रहे क्यूंकि आज आपको लगा कि अगर आप अपने मन की बात मुझे बताएंगे तो कही मैं नाराज न हो जाऊं और मित्रता समाप्त न हो जाए सार्थक— श्री आप हमे कितना अच्छे से समझती है माफी ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 24
श्री और हरि की नोक झोक तो हमेशा की तरह चल रहीं थी श्री बार बार देखिए हरि जी प्रिय प्रियतमा मत बोलिए समझे आपऔर हरि बार बार ठीक है प्रियतमाश्री— ऑफ हो आप कितने जिद्दी है समझ नहीं आता आपको मत बोलिए न ( बाहर से शख्त लेकिन भीतर ही भीतर श्री को अच्छा लग रहा था यू हरि का उसे परेशान करना )हरि— अब आप हमारी प्रियतमा है प्रियतमा न बोले तो क्या बोले जिसे प्यार करते है उसे यही कहते है श्री— झूठा गुस्सा दिखाते हुए –हरि जी हमने अभी तक आपके प्यार को ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 25
सार्थक और वो लड़की भी आपस में लड़ रहे थेसार्थक— आपने आपने हमें बुद्धू कहा seriously देखिये एक तो पहले ही बहुत काम है और आप मेरा समय व्यर्थ कर रही है , है कौन आप ?वो लड़की — ओये मैं इतनी अच्छे से बात कर रही और आप मुझे ही गुस्सा हो के दिखा रहे है बोला न मैने कि मैं आपको जानती हु गंगा आरती में देखा था समझ नहीं आता क्या सार्थक— देखिए मैं गुस्सा नहीं कर रहा परंतु मुझे सच में बहुत जरूरी काम है आप हमे जानती होंगी लेकिन मैं आपको नहीं जानता माफ ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 26
वही दूसरी तरफ सार्थक श्री को बुलाने मंदिर पहुंचासार्थक— श्री आपको गुरुदेव बुला रहे है ।श्री— जी हम अभी हैं गुरुदेव के पास अभी कुछ काम कर लेसार्थक— अरे नहीं नहीं अभी जाइए मैं पहले ही आ जाता आपको बुलाने लेकिन बीच में वो tape recorder.... मेरा मतलब हरि जी की बहन प्रिया मुझसे टकरा गई गुरुदेव बहुत देर से बुला रहे है आपको अभी जाना चाहिएश्री,— tape recorder सार्थक जी आप भी न हरि जी की बहन तो बहुत अच्छी है एकदम प्यारी सीसार्थक— प्यारी और वो रहने दीजिए सखी पका दिया आपकी प्यारी ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 27
अब श्री गुरुदेव से बात कर रही थी .....गुरुदेव— पुत्री आप हमे हरि के बारे में पहले ही बता है अब हम आपका निर्णय सुनना चाहते है और आपको आदेश भी दे रहे है कल तो आप हमे अपना निर्णय सुनायेगीसवाल ये नहीं है कि आप हरि को चुनेंगी या सार्थक को क्यूंकि अगर आपको इन दोनों में से चुनना पड़े तो आप हरि को ही चुनेगी ये आपकी बातों से स्पष्ट होता हैअब हमारा प्रश्न ये है कि आप गृहस्थी चुनेंगी हरि के साथ या संन्यास मार्ग सनातन धर्म की स्थापना और विकाश में अग्रसर होंगी कल तक ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 28
श्री के आते ही सार्थक और प्रिया तो चुप हो जाते है , और श्री दोनों को ही समझा होती हैतभी प्रिया मासूम चेहरा बनाते हुए बोलती है....प्रिया — श्री सच्ची में मैं तो बस ध्यान कैसे लगाते है सीखने आई थी याद है आपको मैंने आपको भी बोला था श्री मुझे भी सिखा दो ध्यान करना .. लेकिन आप उस समय अपनी पढ़ाई में व्यस्त थी इसलिए नहीं करा पाई आप मैने सोचा कि सार्थक जी सिखा देंगे तो ये लड़ने लगे हमसे हमने बोला कि श्री से बोल दूंगी तो बोले जाओ बोल दो किसी से ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 29
श्री अब अपनी बात गुरुदेव को बताती है ..श्री — गुरुदेव , हमने आज एक स्वप्न देखा उस स्वप्न हमने प्रभु नारायण के दर्शन प्राप्त किए गुरुदेव प्रभु नारायण ने हमसे कुछ ऐसा कहा जिसके बाद हमारे सोचने समझने का तरीका ही बदल गयागुरुदेव — पुत्री , ऐसा क्या कहा प्रभु नारायण ने स्वप्न में श्री — गुरुदेव , उन्होंने कहा कि"प्रेम त्यागकर भक्ति नहीं मिलती बल्कि,सच्चे प्रेम से ही भगवान मिल सकते हैं।"उन्होंने कहा कि प्रेम तो मेरी सबसे सुंदर रचना है प्रेम के बिना तो इस संसार का आधार ही नहीं ...गुरुदेव प्रभु नारायण स्वयं ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 30
श्री अब सार्थक और प्रिया को सुना रही थी ..श्री— बताइए किस बात पे हो रही थी इतनी बहस सखी जी ये प्रिया जी आई हमारे पास की अब सिखा दो ध्यान करना हम भागवत पाठ के अध्ययन में व्यस्त थे और ये यहां आ कर मुझे बुद्धू जी बोल रही थी श्री— तोसार्थक — श्री कभी किसी ने ऐसे बात नहीं की मुझसे जैसे ये प्रिया करती है श्री— सार्थक जी क्या आप जानते है कि हमने बचपन से क्या क्या सुना है , केवल अपने ऐसे शरीर के कारण तब भी हम विचलित नहीं हुए ...और पढ़े
श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 31
श्री अपनी माँ से बात कर रहीं थीगीता जी— बताओ बेटा क्या हुआश्री— माँ वो गुरुदेव ने कहा है मुझे अब हरि जी को अपने मन की बात बतानी है समझ नहीं आ रहा कैसे बोलो उनसे🫣गीता जी — अच्छा ये बात हैश्री— जी माँ 🫣गीता जी — बेटा , देखो हरि ने तो अपने मन की बात कब की बोल दी है अब तो बस हम सब तुम्हारे हाँ के इंतजार में है आपको भी जल्द से जल्द हरि बेटा को हाँ बोल देना चाहिए ️श्री— लेकिन कैसे 🫣गीता जी— बेटा , अपनी बात बोलने में ...और पढ़े