श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 5 Janshi Saroha द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 5

श्री और हरि आपस में बात कर रहे  थे की तभी हरि का फोन बजा वो वहां से चला गया । श्री ने अपनी दिनचर्या चालू रखते हुए शुर्यनमस्कार(योग)  करना प्रारंभ किया । फोन कट होने के बाद हरि दुबारा जब किचेन की तरफ आ रहा था तब वो श्री को योगा करते हुए देख रहा था ।
श्री ध्यान लगाने के बाद नित्य ही योगा भी करती थी । ध्यान और योग से श्री का शरीर और भी ज्यादा आकृषित होता जा रहा था । हरि चाह कर भी श्री से अपनी नजर नहीं हटा पा रहा था । श्री को जब आभाष हुआ कि हरि उसकी तरफ देख रहा है तो वह जल्दी अपना योग खत्म कर अपने कमरे को चली गई । 

हरि भी अपने कामों में व्यस्त हो गया  श्री ने अपनी पढ़ाई करनी शुरू करी हरि उसके लिए चाय बना कर ले आया । श्री ने कहा मैं अभी चाय नहीं पियूंगी हरि ने कहा फिर कब पियोगी मिस । श्री ने कहा सूर्य देव को जल देने के पश्चात ही मैं जलपान करती हु उससे पहले कुछ भी नहीं । हरि उसकी बात से हैरान था वो तो बस यही सोचता रहता कि आज के जमाने में भी ऐसी लड़की होती है क्या । 

हरि को एक मजाक सुझा उसने मजाक में ही श्री से बोला एक बात बोलू तुमसे श्री ने  कहा जी पूछिए
हरि बोला तुम हो तो इंग्लिश मीडियम स्टूडेंट 10 और 12 में भी हमसे ज्यादा नंबर लेकर आई हो । और तुम्हारी हिंदी तो बिल्कुल देवी देवताओं वाली है जैसी टीवी के देवी बोलती है न वैसे ही तुम हिंदी बोलती हो वही से सीखा है क्या तुमने इतनी अच्छी हिंदी बोलना ।😅

श्री ने कहा हम भारतवर्ष में ही रहते है न हिंदी न बोले तो और क्या बोले  और रही बात की हमने इतनी अच्छी हिंदी का अध्ययन कहा किया तो जवाब है कि हम पिछले 5 वर्षों से ग्रंथों का अध्ययन करते हुए आ रहे है जिस कारणवश हमारी हिन्दी वर्तनी शुद्ध हो गई । 🙂‍↕️

हरि हैरान रहे गया उसके मुंह से एक दम निकला क्या तुम ग्रन्थ भी पढ़ती हो अब तक कितने ग्रन्थ पढ़े होंगे पिछले 5 सालों में तुमने 
श्री ने कहा इतना तो अंदाजा नहीं परन्तु हां श्रीमद भगवतपुराण , भगवतगीता, शिवपुराण, देवी महापुराण  रामायण ,महाभारत, विष्णुपुराण और भी बहुत सारे ग्रन्थ के हमने अध्ययन करे है ।

हरि को तो अब चक्कर आने लगा था उसने श्री से कहा बस बस और सुनने लगा तो अभी मुझे चक्कर आ जाएगा तुमने इतने सारे पुराण ग्रन्थ कैसे पढ़े । 

श्री ने कहा इसमें कुछ मुश्किल नहीं संकल्प करने के बाद हम कुछ भी कर सकते है ।
हरि बोला चाय तो अब ठंडी हो गई सूरज अब निकल गया है तुम जल दे आओ । मैं तुम्हारे लिए दोबारा चाय बना देता हु। श्री ने हा में सर हिलाया। सूर्यदेव को  जल देने छत पर चली गई । जल दे कर श्री नीचे आई तब तक सारे घर वाले जग चुके थे । हरि सब के लिए चाय ले आया। सब ने बैठ कर चाय पी 

सीता जी ने श्री से पूछा —बेटा तुम्हारा पेपर अब कब है 
श्री ने कहा —आंटी मेरा पेपर कल है ।
सीता जी ने कहा —ठीक है बेटा मैं अभी  नाश्ता बना देती हु तुम जा कर पढ़ाई करो जब नाश्ता तैयार होगा मैं तुम्हे बुला लूंगी । 
श्री कमरे में चली गई पढ़ाई करने लगी सीता जी खाना बनाने चली गई । नाश्ता बनने के बाद सीता जी ने हरि को बोला जाओ श्री को बुला लो खाना खाने के लिए । हरि श्री के कमरे में गया श्री पढ़ रही थी हरि बोला आ जाओ नीचे खाना तैयार हो गया है । श्री ने हाँ बोला । हरि के साथ नाश्ते की टेबल पर आ रही थी। हरि की दादी उन्हें साथ में आते हुए देख कर उनकी बलाई उतार लेती है क्यूंकि दोनों सच में एकदूसरे के साथ बहुत अच्छे लगते थे। 

फिर वो एकदम निराश हो गई सोचने लगी कि कैसे वो सोचती थी कि गीता जी की होने वाली बेटी से अपने पोते की शादी कराएंगी और फिर जब श्री को उन्होंने पहली बार देखा वो निराश हो गई क्यूंकि श्री का पूरा शरीर रोगग्रस्त था ।
उसके पूरे शरीर पर धारियां थी एक बुड्ढी की तरह श्री का पूरा शरीर दिखता था। 
ये सब सोचकर ही वो निराश हो जाती उन्होंने कितनी कोशिश करी कि श्री पूरी तरह से ठीक हो जाए तो वह उसकी शादी अपने पोते से कर देंगी। लेकिन जहां भी श्री को ले कर जाया जाता सब जगह से बस एक ही जवाब आता जन्म  की बीमारियां ठीक नहीं होती । श्री जन्म से शरीर के रोग से ग्रस्त थी । हालांकि अब श्री को इन सब की आदत हो गई थी ।श्री ने इसे ही अपनी किस्मत मान लिया था । वैसे डॉक्टर तो यही कहते थे कि ये कोई बीमारी नहीं है और श्री की समस्या पानी की कमी की वजह से है ।

श्री जब अपनी मां की कोक में थी तब उन्हें पानी की कमी हो गई थी । पानी की कमी के कारण श्री का शरीर ऐसा दिखता था लेकिन ये समस्या फैलने वाली नहीं थी ये समस्या तो बस श्री तब सीमित थी । लेकिन तब भी उसे उसके शरीर से ही जज किया  जाता । 

हरि की दादी ये सब सोच ही रही थी कि हरि और श्री नीचे आए सब खाना खाने लगे । सीता जी ने श्री को कहा बेटा मन लगा कर पेपर देना मैं दिल से चाहती हु कि तुम अपने जीवन में कामयाब हो जाओ । श्री भी उनकी बात सुन कर मुस्कुरा दी और कहा जी आंटी जी मैं आपनी पूरी कोशिश करूंगी । नाश्ता करने के बाद श्री कमरे में पढ़ने चली गई पढ़ाई करने लगी। पढ़ाई में ही उसका पूरा दिन बीत रहा था। हरि बीच बीच में उसे कभी खाने के लिए कुछ दे जाता कभी चाय तो कभी कॉफी। श्री को दे देता था। 
श्री भी इन बातों को महसूस कर रही थी लेकिन फिलहाल वो बस पढ़ना चाहती थी । 
रात में सीता जी ने श्री को खाने के लिए बुलाया । श्री भी नीचे आ गई सब ने मिल कर खाना खाया। श्री खाने के बाद कमरे में चली गई । अपना नित्य भगवत्पाठ करने के बाद वो सो गई । अगले दिन उसे पेपर देने जाना था हरि उसके लिए कॉफी लेकर आया उसे लगा कि श्री पूरी रात पढ़ाई करेगी इसलिए वो श्री के लिए कॉफी ले कर आया देखता है कि श्री और उसकी बहन प्रिया  सो गई है हरि चुप चाप श्री को देखकर चला जाता है ।

धन्यवाद🙏
🙏🏻🙌🏻🕉️