श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 19 Shiv putri द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 19

विश्राम के बाद सभी लोगों ने हरिद्वार में गंगा स्नान और गंगा आरती देखने जाने का निश्चय किया।
सबकी बात सुन श्री गुरुदेव के पास आज्ञा लेने गई
गुरुदेव ध्यान में लीन थे 🧘🏻सार्थक गुरुदेव की सेवा में लीन था ....
वही?....... 
श्री उनके समक्ष हाथ जोर के उनके पास बैठ गई 
गुरुदेव को आभास हुआ उन्होंने नेत्र खोले 
श्री — गुरुदेव हम सब गंगा स्नान और गंगा आरती के लिए जाना चाहते है आपकी आज्ञा हो तो ....
गुरुदेव — अवश्य पुत्री आप सब जाइए
गुरुदेव सार्थक की तरफ देखते हुए –सार्थक पुत्र आप भी राम जी और कृष्ण जी के परिवार वालों के साथ जाए । तब से आप यही काम मे व्यस्त है 
सार्थक— जो आज्ञा गुरुवर 🙏🏻

सार्थक श्री के साथ उनके परिवार वालों के पास आया.... 

अब हरि ने जब देखा कि श्री के साथ सार्थक भी आ रहा है उसको अजीब लगा ... मन में सोचने लगा ... ये सार्थक जब देखो श्री के पास 😬 कही श्री सार्थक को पसंद तो नहीं करती या सार्थक भी कही श्री को पसंद तो नहीं करता 😬 श्री सार्थक के साथ कितना कंफर्टेबल रहती है दोनों इतने अच्छे दोस्त है 🥺 कही ऐसा न हो कि मैं प्रिय प्रियतमा करता रह जाऊं और पता चले श्री सार्थक से प्रेम करती है 😭 नहीं भगवान नहीं .....
वही हरि ने फिर सोचा 😔 लेकिन अगर मेरी श्री सार्थक को पसंद करती है उसे प्रेम करती है तो मैं त्याग कर दूंगा 🥺 क्योंकि मैं बस अपनी श्री की खुशी चाहता हु 🥺 चाहे मेरा कितना ही दिल टूटे और श्री ने भी कभी मुझे कोई सिग्नल नहीं दिया कि मुझे लगे कि श्री मुझे प्यार करती है वो तो बस मुझे अच्छा दोस्त मानती है 🥺 क्या होगा प्रभु 😭 इतना टूटा हुआ महसूस हो रहा है गुरुदेव का क्या निर्णय होगा ये सोच सोच के मेरे दिमाग की नस फट जाएगी प्रभु 🥺 श्री को खो तो नहीं दूंगा न मैं 😔 जो भी होगा आपने कुछ अच्छा ही सोचा होगा भगवान 😔 

यही सोचते सोचे हरि की आंखों में आँसू आए लेकिन उसने तुरंत सब से छुपा लिया लेकिन श्री से नहीं छिपा पाया 

आश्रम से गंगा तट पास ही था सब पैदल ही चल दिए 
सार्थक और श्री साथ साथ चल रहे थे लेकिन श्री को हरि के रोने का आभास हो गया था इसलिए उसका मन भी भारी था 
श्री— सार्थक जी हम ज़रा अभी आए बहुत जरूरी बात करनी है हरि जी से....
सार्थक — जी श्री जी .... वही सार्थक मन में ( श्री कही आप हरि जी से प्रेम तो नहीं करती पता चले कि मैं अपने मन की बात कभी बोल ही नहीं पाया और आप हरि जी की हो गई ..... श्री मैं आपसे प्रेम करता हु परन्तु उसे ज्यादा मैं आपका सम्मान करता हु अगर आप हरि  जी से प्रेम करती है तो मैं तो हु ही त्यागी 🥺 गुरुदेव की सेवा में खुद को पूर्णतः खो दूंगा आपको भूल तो नहीं पाऊंगा क्यूंकि मेरे जीवन में आप मेरी पहली और आखिरी महिला मित्र है 🥺 और एक ऐसी स्त्री भी जिसे मैं बहुत प्रेम करता हु 🥺 पर क्या फायदा .... मैं बस आपकी प्रसन्नता चाहता हु श्री सदैव खुश रहे श्री आप 🥹)

सार्थक ये सब सोच ही रहा था तब तक श्री अपने हरि के पास पहुँच चुकी थी 
श्री— हरि जी आप ठीक है
हरि— hmmmmm 
श्री— क्या hmmmmmm बोलिए क्या हुआ आपको
हरि— कुछ नहीं श्री बस ठीक हु तुम चिंता मत करो 
श्री— सारे जहां से झूठ बोल सकते है मेरे से नहीं आप रो रहे थे क्यू 
हरि— हा श्री तुम से कभी झूठ नहीं बोल सकता पता नहीं बस रोना आ गया रोना नहीं चाहा रहा था पता नहीं क्या हो गया 
श्री — हरि जी हम क्या बोले आपसे आप अपने बारे में सोचिए खुश रहिए हमेशा इतना ज्यादा क्यूं सोचते है आप 
हरि— अपनी खुशी के लिए ही तो यहां आया हु 🥺 क्या पता यहां मुझे वो मिल जाए जो मैं चाहता हु लेकिन मेरे लिए उसकी प्रसन्नता भी महत्व्पूर्ण है 🥹 
श्री— हरि जी आप किस की बात कर रहे है 
हरि – आप जानती है प्रिय आपसे कुछ नहीं छुपा मेरे मन का हाल 🥹

श्री 😳 एक दम चुप बोलते नहीं बन रहा था श्री से क्या बोले हरि को वो 
श्री– हरि जी हम अपने गुरुदेव की आज्ञा से बंधे है और याद रखियेगा हरि जी भगवान ने जो सोचा होगा अच्छा ही सोचा होगा हम कोई दूरदर्शी तो नहीं जो ये बता दे कि क्या होगा भविष्य मे परन्तु इतना अवश्य सिद्ध है हरि जी जो होगा अच्छा होगा और जो होता है अच्छे के लिए होता है आप भी चिंता मत कीजिए .....

हरि — तुम्मे यही तो खासियत है किसी को भी शांत कर देती हो तुम .... तुमसे बात कर के सारी overthinking खत्म हो गई प्रिय 
श्री — आप अब फिर शुरू हो गए ये प्रिय और प्रियतमा 🥲 
हरि — हंसते हुए 😂 जी आपकी कृपा है श्री 😂 अब आपने  ही सारी टेंशन खत्म कर दी और मेरा रोमांटिक mode on कर दिया 😂
श्री— oops बहुत बड़ी गलती हो गई हमसे 🥲 मन ही मन श्री को हंसी आ रही थी हरि की बात सुन लेकिन बाहर से एक दम पत्थर दिल 🙂 
हरि — 😂कोई बात नहीं प्रियतमा ऐसी गलती करते रहना चाहिए 
श्री — आप न कभी नहीं सुधरेंगे 
हरि — 😂
श्री — जा रहे है हम आप यहां दाँत निकालते रहिए कुछ ज्यादा ही हसी नहीं आती आपको
हरि — 😂 इंसान को हँसना भी चाहिए मैं कोई रोबोट थोड़ी हु 
श्री— आपसे तो बस बाते बनवा लो 

चलिए जल्दी गंगा आरती खत्म हो जाएगी 
हरि —हा हा चलिए चलिए... 

अब दोनों परिवार वाले गंगा तट पे स्नान कर रहे थे पुरुष अलग और स्त्रियां अलग जगह पे 
गंगा स्नान के बाद सब गंगा आरती के लिए इक्कठे हुए 

सार्थक और श्री गंगा आरती के टाइम ब्रह्मणों के साथ साथ मंत्र उच्चारण करते हुए दोनों ही प्रवक्त थे मंत्रों के उच्चारण में 
बड़े बड़े मंत्र श्री और सार्थक एक साथ बोल रहे थे 

हरि दोनों को एक साथ मंत्र उच्चारण करते देख 😳 shocked 
गंगा आरती खत्म होने के बाद ... सब आश्रम की तरफ चल रहे थे रस्ते में हरि सार्थक और श्री तीनों साथ में थे 

हरि— सार्थक से बात करते करते – अरे सार्थक जी आप तो आप श्री तुम भी कितना अच्छा संस्कृत के इतने बड़े बड़े श्लोक बोल लेती हो 
श्री— जी 🙂
सार्थक— श्री सदैव से गुरुदेव की आज्ञा के पालन में रही है श्री भले ही आश्रम में नहीं रही लेकिन अपने  घर में वह ग्रंथों का अध्ययन करती है इसलिए इन्हें कई मंत्रों की बहुत अच्छी जानकारी है 
श्री— सार्थक जी मंत्रों के सही उच्चारण की पकड़ तो आपने ही हमे सिखाई है आप सबसे अच्छे सखा है हमारे ☺️ 
सार्थक मन ही मन बहुत खुश होते हुए — श्री आप तो सदैव अपनी खुद की मेहनत को दूसरे का आशय दे देती है तभी तो आप श्रेष्ठ है इतना सा भी अहंकार आप में नहीं है सखी ... 
श्री — गुरुदेव की कृपा है 😅

हरि दोनों की बात सुन के और भी overthinking की दुनिया में चला जाता है हरि मन में — कितना अच्छे से श्री सार्थक से बात करती है दोनों एक दूसरे को कब से जानते है इतने अच्छे दोस्त है 🥺 लग रहा है कि श्री और सार्थक दोनों 🥺 एक दूसरे के लिए बने है दोनों में कितनी समानता है दोनों ही अपने गुरुदेव की आज्ञा का पालन करने वाले और दिनों ही अपने गुरुदेव के प्रिय शिष्य और शिष्या 🥺 और मैं मैं तो जैसे कही हु ही नहीं 🥺 
लेकिन तभी श्री ध्यान देती है हरि अपनी ही दुनिया में है 
श्री—  हरि जी क्या हुआ कहा खो गए आप  


देखते है क्या होगा आगे की कहानी में बने रहिये मेरी कहानी श्री में 🫶🏻 धन्यवाद