श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 8 Janshi Saroha द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 8

यही बाते सोचते सोचते दोनों अब घर पहुंच गए थे । श्री अपने कमरे में जाकर अपना बैग पैक करने लगी क्योंकि अब उसे अपने घर जाना था उसके दोनों एग्जाम हो चुके थे । इसलिए उसने यही फैसला लिया कि अब वो अपने घर जाएगी रिजल्ट अपने घर में ही चेक करेगी उसके बाद इंटरव्यू के लिए वो बाद में अपने पापा के साथ आ जाएगी। 🙂

हरि उसके लिए चाय लेकर पहुंचा देखा कि श्री अपना बैग पैक कर रही है तो मन बहुत दुखी हुआ 😔फिर हंसने का नाटक करते हुए कहने लगा —अच्छा तो अब जाने की तैयारी है 🥲
श्री ने भी फीकी मुस्कान देते हुए हामी भरी । 🙂
उसे भी बुरा लग रहा था पर क्या कर सकते है अब ...

हरि ने कहा अब कब मिलेंगे फिर 🥲 । श्री ने कहा पता नहीं भगवान जब चाहे तब हल्का सा मुस्कुरा दी लेकिन उस मुस्कान में दर्द था।🙂
जो शायद हरि ने भाप लिया । लेकिन कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर सका । 😶‍🌫️
हरि  उसके कमरे से बाहर आ गया आज उसकी आंखों में आंसू थे ।🥺

वो अपने मन की बात जान चुका था वो उससे श्री के शरीर से नहीं उसकी आत्मा से प्रेम था जो बहुत पवित्र थी जो सब के लिए अच्छा सोचती थी ।

लेकिन आज हरि अपने मन की बात किसी से भी नहीं कह पा रहा था 

शाम का समय...
अब घर में सभी लोग वापस आ गए थे ।
हरि अपने कमरे में बेड पर लेता हुआ था।
उसकी दादी उसके कमरे में आई हरि को ऐसे देखकर वो उसके पास बैठ गई और पूछा क्या हुआ बेटा तुम अकेले  बैठे हुए हो । कुछ कहना चाहते हो क्या बेटा  ?
हरि अपनी दादी का स्नेह देखकर अपने आंखों के आंसू की धाराओं को रोक न सका वो फुट फुट कर रोने लगा ।🥺
अपने पोते की ऐसी हालत देखकर दादी भी डर गई उन्होंने कहा कहो न हरि बेटा क्या हुआ तुम्हे? 🥺

हरि सुबकते सुबकते दादी की गोद में लेट गया ।
और अपनी मन की बात दादी को बताई ।
उसने कहा दादी मैं नहीं जानता ये सब क्या हुआ क्यूं हुआ लेकिन अब मैं नहीं रह सकता श्री के बिना । 🥺😔
मुझे वो चाहिए और उसने अपनी सारी उम्मीद छोड़ दी है  वो तो किसी से भी शादी नहीं करना चाहती दादी मुझे वो चाहिए उसे समझाओ न दादी।🥺
दादी ने कहा इसमें तुम्हारी गलती नहीं है हरि ।😶‍🌫️
ये तो पहले ही तह हो चुका था श्री के जन्म से भी पहले ।
हरि एक दम चौक गया क्या दादी क्या तह हुआ था श्री के जन्म से पहले बताओ न मुझे ।
दादी ने हरि को बताया कि श्री के जन्म से पहले मैने और तेरी माँ  सीता ने ये  तह किया था कि अगर गीता और कृष्ण के लड़की हुईं तो मैं उसकी शादी  तुमसे कराउंगी।😶‍🌫️

किस्मत से उनके लड़की ही हुईं उसका नाम श्री रखा गया।
लेकिन जब हमने उसे देखा वो शरीर के रोग के साथ पैदा हुई थी ।😔 मैने इस फैसले वो वही रोक दिया मैने बहुत सोचा कि एक बार वो ठीक हो जाए तो मैं उसकी और तुम्हारी  शादी की बात फिर शुरू करूंगी।🥲
लेकिन वो ठीक नहीं हुई बेटा अब उसके मन में ये हीन भावना तो आएगी ही अगर वो ठीक होती तो उससे तुम्हारी शादी हो चुकी होती बेटा। 😔
लेकिन अब ये अहसास होता है कि शरीर की सुंदरता कुछ नहीं होती बेटा मन की सुंदरता मायने रखती है । श्री का मन सच में सुंदर है वो सब के लिए अच्छा सोचती है सबका अच्छा चाहती है वो श्री तुम्हारे लिए बिल्कुल परफेक्ट है☺️ हरि  लेकिन ये सब अब जो तुम कहे रहे हो कि तुम उससे प्यार करते हो क्या यही तुम्हारा आखरी फैसला है बेटा ?😐

हरि ने कहा दादी आपने मुझे ये सब पहले क्यूं नहीं बताया मैं श्री से प्यार करता हु मुझे उसके शरीर से कोई मतलब नहीं वो जैसी है मुझे वैसे ही पसंद है😌 उसका मन पवित्र है दादी ये मेरा आखरी फैसला है दादी कृपा करो मम्मी पापा से बात करो दादी श्री को समझाओ वो अपने अंदर ऐसी हीन भावना न रखे मैं उससे बहुत प्यार करने लगा हु दादी।☺️

दादी ने उसके सर पर हाथ फेरा और कहा ठीक है बेटा मैं कोशिश करूंगी श्री को समझाने की लेकिन अपने मन की बात तो तुम्हे ही बतानी होगी न उसको।
दादी मैं कोशिश करूंगा उसे अपने मन की बात बताने की हरि  ने कहा 

दादी चली गई 
हरि को दादी से बात करने के बाद अच्छा लग रहा था। वो बाहर आया श्री के कमरे की ओर गया श्री एकदम उसे देखकर ठिठक गई। अपने आप को संभालते हुए उसने कहा हरि जी आप यहां कुछ कहना है मेरा मतलब आपको कुछ चाहिए 😳

हरि ने कुछ नहीं बोला वो बस उसे देखता रहा मुस्कुरा कर☺️ श्री ने जब देखा कि हरि उसे मुस्कुरा कर देखे जा रहा है वो झेप गई😳 । उसने कहा हरि जी आप ऐसे क्यूं देख रहे है कुछ कहना है तो बोलिए नहीं तो जाइए।🤨

हरि ने कहा श्री मैं कह तो रहा था तुमने सुना ही नहीं मुझे चुप कर दिया अब चली जाओगी तो मन की बात तो मन में ही रह जाएगी न ।😌
सुन लो न मेरी मन की बात 🙂‍↕️

श्री कही न कही जानती थी कि हरि क्या कहने वाला है उसने हरि को इग्नोर किया अपना बैग पैक करने लगी । 😐
हरि अब उसके करीब आया श्री की तो सांस ही अटक गई थी उसे समझ नहीं आया कि वो क्या कहे उससे 😳

हरि उसके करीब आकर बोला श्री तुम्हे सुनना तो पड़ेगा ही मेरी मन की बात नहीं तो मैं जी नहीं पाऊंगा श्री
अब श्री को कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हुई वो चुप चाप बैठ गई। बेड पर ..😔
हरि जमीन पर बैठ गया उसने श्री का हाथ पकड़ा । 
श्री अंदर तक हिल गई उसकी सांस अटक गई😳
हरि ने कहा श्री देखो मैं अपने मन की बात तुम्हे बताना चाहता हु क्यूंकि तुम्हारे जाने के बाद पता नहीं फिर कब मिलोगी इसलिए बोल रहा हु श्री शायद तुम भी मेरे मन की बात जानती हो पर बोलोगी नहीं इसलिए मैं ही बोल रहा हूं कि श्री मैं 
तुमसे बहुत प्यार करता हु 🥰🫶🏻और तुमसे शादी करना चाहता हु मुझे तुम्हारे शरीर से कोई फर्क नहीं पड़ता दुनिया क्या कहती है फर्क नहीं पड़ता मुझे तुम्हारे मन से प्यार है श्री मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु ।🫶🏻
श्री चुप रही उसे तो कुछ समझ ही नहीं आया कि वो क्या कहे उसकी आंखों से आंसू आ गए ।🥺
हरि ने जब देखा कि श्री की आंखों में आंसू है वो बोला मैं जानता हु श्री की तुम क्यूं रो रही हो ...🙂‍↕️


धन्यावाद 
🙏🏻🙌🏻🕉️