श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 10 Janshi Saroha द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 10

श्री का भाई उसे लेने आ गया था । दोनों भाई बहन अब अपने घर चले गए । हरि श्री को जाते हुए देख रहा था उसकी आंखों मे आंसू थे और वो यही सोच रहा था कि अब श्री और वो कब मिलेंगे।

कुछ दिन बाद...

श्री का रिजल्ट आ गया था उसके पापा उसका रिजल्ट देख रहे थे । श्री का ऑल इंडिया रैंक 10 आया अब उसे इंटरव्यू देना था वो अपने इंटरव्यू की तैयारी में लग गई । 

एक दिन ऐसा भी आया जब उसका इंटरव्यू हो गया । अब वो एक ias बन चुकी थी । लेकिन अब उसे ट्रेनिंग के लिए जाना था 1 साल के लिए LABSANA ....

उससे पहले श्री के मम्मी पापा ने सोचा कि वृंदावन और बरसाना घूमने चलेंगे साथ में सीता आंटी के परिवार वाले भी चले ।

अब दोनों परिवार के लोग पैकिंग कर रहे थे एक हफ्ते का प्लान बनाया वृन्दावन बरसाना घूमने का ।
श्री का मन भटक रहा था क्योंकि उसे पता था कि हरि भी साथ में जा रहा है वृंदावन 🥲
वृंदावन तो श्री का पसंदीदा जगह है 🥰लेकिन जब अब उसे ये पता चला कि हरि भी साथ जा रहा है तो वो परेशान हो गई उसने भगवान को यही कहा प्रभु आप हमारी इतनी परीक्षा क्यूं ले रहे है ।आप जानते है न कितनी मुश्किल से हमने अपनी भावनाओं पर काबू पाया है और आप है कि बार बार हमे उससे मिला रहे है हम नहीं मिलना चाहते उनसे  नहीं करना चाहते किसी की जिंदगी बर्बाद 🥺। नारायण आप हमारी बात क्यूं नहीं सुनते प्रभु😭 श्री की आंखों में फिर आंसू थे अब वो रो  रही थी । 

उसने अपने आपको संभाला और अपना बैग पैक करने लगी वृंदावन जाने के लिए।

अगले दिन श्री के परिवार ने अपनी गाड़ी बुक करी
और हरि के परिवार वाले अपनी कार में गए । दोनों परिवार एक साथ निकल पड़े वृंदावन की ओर प्रेम का सबसे अच्छा उदाहरण जहां (कृष्ण राधा) का प्रेम अमर हो गया शायद वही से हरि और श्री का प्रेम शुरू होना था 😌🫶🏻 । लेकिन भगवान की मर्जी के आगे तो किसी की नहीं टिकी। 🙂

श्री तो शादी और प्रेम  करना ही नहीं चाहती किसी से भी क्योंकि उसे लगता है किसी का जीवन उसकी वजह से बर्बाद हो जाएगा उसकी स्किन प्रॉब्लम की वजह से🥲। और हरि तो उससे प्यार करने ही लग गया है क्योंकि उसे श्री के शरीर से नहीं उसकी आत्मा से प्रेम है । 😌

खैर अब दोनों ही परिवार वृंदावन की और निकल पड़े। ..🫶🏻

वृंदावन पहुंच कर जब दोनों परिवार अपने गाड़ी से निकले श्री ने सीता आंटी और राम अंकल के पैर छुए। उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया। हरि ने भी श्री के पापा मम्मी के पैर छुए । हरि श्री को देखकर मुस्कुरा रहा था मन ही मन खुश हो रहा था कि अब तो एक हफ्ता साथ रहना पड़ेगा मेरी श्री को मेरे साथ मन ही मन खुश हो रहा था बिचारा 🥰। और श्री ने एक बार भी हरि की तरफ देखा तक नहीं 😏
ये देख तो बिचारे हरि का मुंह ही लटक गया । लेकिन खुश भी था कि श्री साथ में है उसके।


वृंदावन पहुंचने के बाद श्री का परिवार  और हरि का परिवार कार से निकलकर चल दिए सीधे बिहारी जी (कृष्ण) के दर्शन के लिए जिनकी एक झलक के लिए दुनिया तरसती है ।  🥰

श्री के पिता के कारण सभी को बिहारी जी के vip दर्शन हो गए। क्योंकि श्री के पिता IB ऑफिसर है तो इस वजह से सब उन्हें अच्छे से जानते है और उन्हीं की वजह से सभी को vip दर्शन करा दिए गए माने की बिना किसी भीड़ भाड़ के दिनों परिवार को बिहारी जी के अच्छे दर्शन हो गए।🫶🏻🥰

हालांकि श्री को ऐसे दर्शन करना बिल्कुल भी नहीं पसंद🙃 क्योंकि वो यही सोचती है कि vip दर्शन से ज्यादा अच्छा तब माना जाता है जब हम भीड़ में उन्हें (भगवान ) को देखे🥲  । क्योंकि श्री ने कही सुन लिया था कि भगवान की कृपा समझो तब जब तुम भाग भाग कर दर्शन के लिए जाओ और भगवान तुम्हारे साथ खेले अपने दर्शन भी न कराए 🥹और तुम फिर विरह की अग्नि में जलो नेत्रों से आंसू आ जाए तब समझो कृष्ण कृपा हुई है । 🥹🥺

खैर अब तो उन्होंने दर्शन कर लिए बिहारी जी के .. 🥰
फिर दोनों ही परिवार चल दिए होटल की तरफ .. 
दोनों परिवार होटल पहुंच गए थे तीन कमरे बुक किए गए जिनमें दो कमरे लड़कों के लिए और एक कमरा लड़कियों के लिए थे। 

एक कमरे में श्री के पिता और हरि के पिता रुके ।
दूसरे कमरे में हरि , उसका भाई शेष और श्री का भाई शंख और श्री का एक और छोटा भाई अनंत रुके । 
तीसरे कमरे में सीता आंटी श्री की मम्मी गीता जी और श्री रुके।

होटल पहुंच कर अपने कमरे चुन कर सभी कमरे से बाहर आए खाना खाने के लिए । सभी खाना खाने के लिए रेस्टोरेंट पहुंचे वहां पर भी हरि अपनी आदत से मजबूर न चाहते हुए भी श्री को देखे ही जा रहा था 🥲। श्री को आभास हुआ कि हरि उसे देख रहा है तो उसने हरि की आंखों में घूर कर देखा🤨। बिचारा हरि तो उसके घूरने की वजह से ही अपनी आंखे नीचे करने लगा। 😳
सीता आंटी और राम अंकल तो देख ही रही थे हरि की हरकतों को उन्हें तो अच्छा लग रहा था क्योंकि वो चाहते थे कि हरि श्री को पसंद करे 😌
क्योंकि उन्होंने तो पसंद थी श्री अपने बेटे के लिए🫶🏻

लेकिन श्री को ऐसे देखकर सीता अंटी को अच्छा नहीं लगा क्योंकि आज भी श्री हमेशा की तरह अपने साध्वी वाले भेष में ही थी माथे पर त्रिपुंड और गले में रुद्राक्ष की माला ।
उसे अब ऐसा ही रहना पसंद था वैसे तो अब वो एक ias officer बनने वाली थी लेकिन अब उससे ट्रेनिंग के लिए जाना है
उसने पहले ही सोच लिया था कि वो अपनी प्रोफेशनल लाइफ और पर्सनल लाइफ को अलग ही रखेगी। 

खाना खा कर सब अपने कमरे में आ गए थोड़ी देर आराम करने के लिए क्योंकि उसके बाद उन्हें राधावल्लभ और राधारमण के दर्शन करने भी जाना था । सफर बहुत लंबा था इसलिए सब थक गए थे । सो सब पहुंच गए अपने कमरे में । 

कमरे में आ कर सीता आंटी ने श्री को समझाने का विचार किया ....


धन्यावाद 
🙏🏻🙌🏻🕉️