श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 18 Shiv putri द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 18

अब श्री का मन तो बस भगवान नारायण के लिए भारी हो रहा था वो किसी भी कीमत पे बस अपने प्रभु से दूर नहीं होना चाहती थी  🙏🏻

गुरुदेव ने सब को एक नजर देखा अब गुरुदेव बोले — 
श्री पुत्री यहां आइये हमारे पास 
श्री:— जी गुरुदेव 🥲
गुरुदेव — पुत्री सबसे पहले तो आपको बहुत बहुत बधाई आप अब अपने जीवन में अपने सपनों को पूरा कर चुकी है और कामयाब हो चुकी हैं 🙌🏻
श्री — जी गुरुदेव धन्यवाद आपके आशीर्वाद से ही संभव हो पाया है आपका आशीर्वाद न होता प्रभु नारायण की कृपा न होती तो कभी न कर पाती अपने सपनों को पूरा 🙏🏻🥹
गुरुदेव— मुस्कुराते हुए पुत्री आपकी मेहनत भी तो थी 😌
श्री— गुरुदेव आपके आशीर्वाद से ही मुझे मेहनत करने की प्रेरणा प्राप्त हुई ही आपके आशीर्वाद के बिना तो मेरा कोई अस्तित्व नहीं गुरुदेव 🙌🏻🥹
गुरुदेव— हँसते हुए 😂 पुत्री ये तो आपका मेरे प्रति समर्पण भाव है इसलिए आप अपनी मेहनत का आश्रय मुझे दे रही है पुत्री 😌
श्री— गुरुदेव मेरा तो सम्पूर्ण जीवन आपको समर्पित है आप ही मेरा अच्छा बुरा सब जानते है गुरुदेव 🥹
गुरुदेव — हँसते हुए 😂 जी पुत्री आपके समर्पण के भाव से हम भली भांति परिचित है और पुत्री आपसे बहस में कौन जीत सकता है आप हमारी पुत्री जो है 
श्री — सर झुकाये जी गुरुदेव 🥲 

हरि और सार्थक दोनों श्री और गुरुदेव की बात सुन रहे थे 😌
हरि का अपनी श्री के लिए सम्मान का भाव और बढ़ गया जब उसने देखा कि श्री इतनी तरक्की के बाद भी खुद को आश्रय न देकर अपने गुरुदेव को दे रही है ....
सार्थक भी श्री की इसी बात से बहुत प्रभावित था कि श्री कुछ भी करे उन सब का आश्रय अपने गुरुदेव को ही देती है 🙌🏻 

गुरूदेव— पुत्री श्री 
श्री— जी गुरुदेव 
गुरुदेव— पुत्री अभी आप की ज्वाइनिंग से पहले कुछ समय यही रहिएगा अब आपके आगे के जीवन के बारे में भी बहुत से निर्णय लेने है पुत्री 
श्री — जी गुरुदेव जैसी आज्ञा 

गुरुदेव सार्थक की तरफ देखते हुए— पुत्र सार्थक 
सार्थक – जी गुरुदेव 
गुरुदेव — आप राम जी और कृष्ण जी के परिवार वालों का रहने का इंतजाम करवाए 
सार्थक — जी गुरुदेव जो आज्ञा 

सार्थक दोनों परिवार का रहने का इंतजाम करने चला जाता है 

गुरुदेव हरि की तरफ देखते हुए — पुत्र हरि आप हमारे साथ चलिये ज़रा बाकी सब अभी भोजन करके विश्राम करे 🙏🏻 
बाकी सब से शाम के भोजन के बाद बात की जाएगी 😶‍🌫️

गुरुदेव की बात सुन सभी लोग भोजन पाने चले गए 
और हरि गुरदेव के सामने खड़ा था 
गुरुदेव— पुत्र हरि आईये हमारे पास बैठिये 
हरि — जी स्वामी जी 
गुरुदेव — पुत्र हरि यहां आने का कारण तो अवश्य बड़ा ही होगा आपका ...
हरि— स्वामी जी आपके बारे में श्री से बहुत सुना है आप तो दूरदर्शी है सब कुछ जानते है मेरे हृदय की बात भी आप जानते ही है 🥲 हम यहाँ क्यू आए है और मैं क्या चाहता हु इसका भान आपको हो ही गया है स्वामी जी 🙌🏻 

गुरुदेव— मुस्कुराते हुए ☺️ पुत्र हरि हमारी पुत्री श्री तो हमारे लिए सब अच्छा ही बोलेगी वो मेरी शिष्या बाद में मेरी पुत्री पहले है 🥰
आपकी खुशी का तो मुझे भान है ही लेकिन अपनी शिष्या की प्रसन्नता भी मेरे लिए आवश्यक है वो कभी दुखी न रहे मैं तो बस यही चाहता हु
हरि — जी स्वामी जी  श्री की प्रसन्नता मेरे लिए भी महत्वपूर्ण है उसकी खुशी के बिना कोई काम नहीं होगा जो वो चाहेगी वही होगा स्वामी जी 🙌🏻 
गुरुदेव हल्के से मुस्कुराते हुए — पुत्र हरि यही बात तो सबसे अच्छी लगी हमे आपमे की आपने श्री की प्रसन्नता को महत्व दिया है और हम ये भी जानते है पुत्र की आप हमारी पुत्री से प्रेम करते है उसके शरीर से नहीं उसकी आत्मा से प्रेम किया है उसकी अच्छाई से प्रभावित होके प्रेम किया है 😌 ये बात हर किसी में नहीं होती पुत्र आप श्रेष्ठ हो सकते है मेरी पुत्री के लिए परन्तु फिर भी हम आपकी परीक्षा लेंगे आपको हमारी परीक्षा में सफल होना पड़ेगा तभी श्री का साथ आपको मिल सकता है .... 
लेकिन याद रखे पुत्र अगर हमारी पुत्री संन्यास लेना चाहेगी तो हम उसे नहीं रोकेंगे 

हरि— स्वामी जी श्री आपकी आज्ञा के बिना कुछ नहीं करेगी ये बात मैं अच्छे से समझ चुका हु जो आपकी आज्ञा होगी वही होगा स्वामी जी 🙌🏻 

गुरुदेव मुस्कुराते हुए — 😌 पुत्र हरि अब आप जाइए भोजन कर के विश्राम कीजिए शाम को बात करेंगे इस बारे में 

हरि — जी स्वामी जी बस जैसा आशीर्वाद सार्थक जी और श्री पे है वैसा ही आशीर्वाद मेरे पे भी बनाए रखियेगा स्वामी जी ... 

गुरुदेव — अवश्य पुत्र हम आप में सार्थक में श्री में या अपने किसी भी बच्चे में कोई भेदभाव नहीं करते जो सबके लिए अच्छा होगा और जो भगवान की आज्ञा होगी हम वही करेंगे पुत्र 😌

हरि — जी स्वामी जी श्री के कारण हमे भी आप पे पूरा विश्वास है आप जो निर्णय लेंगे वही सर्वश्रेष्ठ होगा 🙌🏻

गुरुदेव मुस्करा रहे है
हरि अपनी बात कह के भोजन करने चला गया 
जब तक हरि वहां पहुँचा सब जा चुके थे श्री अभी भी धीरे धीरे खाना खा रही थी हरि श्री के साथ खाना खाने बैठ गया 
खाते हुए हरि बोला — श्री क्या लगता है गुरुदेव का क्या निर्णय होगा 
श्री— हरि जी भोजन करते हुए बात नहीं करनी चाहिए आपको जो बात करनी है बाद में करियेगा 
हरि — ठीक है प्रिय 
श्री ने हरि को घूरा — हरि जी हमने आपको मना किया है न प्रिय और प्रियतमा जैसे शब्दों का प्रयोग मेरे लिए मत कीजिए 

हरि— प्रिय आपने मुझे खुद को छूने से मना किया था वो हम कर भी नहीं रहे आपने सबके सामने प्रिय और प्रियतमा बोलने से मना किया था हम वो भी नहीं कर रहे 
परन्तु अकेले में मैं आपसे कैसे भी बात कर सकता हु प्रियतमा क्यूंकि आप हमारी होने वाली धर्मपत्नी है .... और अगर आप संन्यासी भी बनी तब भी मेरे लिए तो आप मेरी प्रियतमा ही रहेंगी प्रिय 🫶🏻🥰 भले ही तुम मेरे से कभी प्यार न करो लेकिन मैं तुमसे हमेशा प्यार करूंगा और तुम्हारा इंतजार भी कभी तो होगा तुम्हे मुझ से प्यार प्रिय 

श्री की आंखों ने लगभग आँसू से आ गए हरि की बात सुन के 
श्री ने मन में सोचा – मैने हरि जी को कल न जाने क्या क्या बोल दिया था यहां तक कि मैं हमेशा उन्हें मना करती रहती हु और ये है कि बार बार प्रेम करता हु तुम्हीं से शादी करूंगा बोलते है 🥹 क्या करूं मैं आपका हरि जी सत्य तो ये है कि मैं भी आपसे बहुत प्रेम करती हु लेकिन कही न कही मुझे मेरे शरीर की आत्मग्लानि होती है और गुरुदेव की भी आज्ञा के बिना मेरा कोई वजूद नहीं उनकी जो आज्ञा होगी हम वही करेंगे हरि जी मत सोचिए न मेरे लिए अगर गुरुदेव ने मेरे लिए संन्यास मार्ग चुना तो आप सह नहीं पाएंगे हरि जी 🥺

हरि श्री की सामने चुटकी बजाते हुए — कहा खो गई आप देवी 
श्री —  कही नहीं ... आप खाना खा के विश्राम करे अब रात्रि में बात करेंगे 
हरि— जैसी आपकी इच्छा प्रिय 🫶🏻🥰 तुम भी आराम करो सब 
श्री – जी 😞 


अब देखते है कि रात्रि के भोजन के बाद गुरुदेव क्या निर्णय लेने वाले है 🙃 बने रहिये मेरी कहानी (श्री) में 
धन्यवाद 🫶🏻