श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 20 Shiv putri द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 20

श्री— हरि जी कहा खो गए आप क्या सोच रहे है ?
हरि— अरे नहीं नहीं बस कुछ काम का टेंशन था मैं आता हु एक जरूरी कॉल कर के 🙂
श्री— जी ठीक है...

हरि वहां से चला जाता है ... 
अब श्री और सार्थक साथ साथ चल रहे थे 
हरि के परिवार को ये बात अच्छी नहीं लग रही थी 

सीता जी श्री की माँ गीता जीता जी से — गीता ये श्री के साथ ये लड़का सार्थक हर वक्त अच्छा नहीं लग रहा यार
गीता जी — हा पर क्या करे गुरुदेव ने साथ भेज दिया वैसे ऐसा कुछ नहीं है सार्थक बहुत अच्छा बच्चा है श्री और सार्थक तो बहुत पुराने और अच्छे दोस्त है 😌
सीता जी —हाँ ठीक है दोस्ती तक ही ठीक है  कही हरि कुछ गलत न समझ जाए 
गीता जी — हाँ सीता शायद तुम ठीक कहती हो मैं श्री से भी बोलूंगी सार्थक से थोड़ा दूर ही रहे .... हरि गलत न समझे कुछ 
सीता जी— हाँ वही तो

सब बात करते करते आश्रम पहुंच चुके थे 
आश्रम पहुंचने के बाद सबने शाम का भोजन किया 🙌🏻
भोजन के बाद गुरुदेव ने श्री को अपने पास बुलवाया 

श्री— गुरुवर अपने बुलाया था
गुरुदेव– जी पुत्री आइये बैठिए 
श्री— जी गुरुदेव 

श्री गुरुदेव के पास आ के बैठ गई थी 

गुरुदेव — पुत्री ! श्री हम जानते है कि आपका और हरि का परिवार यहां क्यों आया है 
श्री— जी गुरुदेव 
गुरुदेव— पुत्री हमने आपको यहां इसलिए बुलाया है क्यूंकि हम आपके मन की बात जानना चाहते है 
श्री— गुरुदेव आप तो ये भी जानते है कि हम यहां क्या बात करने आए है .... तो अवश्य ही आप हमारे मन की बात भी जानते है गुरुदेव 🙂‍↕️
गुरुदेव — पुत्री हम जानते है लेकिन आपके मुख से सुनना चाहते है 
श्री— गुरुदेव ! मन तो हमे बहकाता है मन तो वो बहरूपिया है गुरूवर जो सदैव पल पल स्वांग रचता रहता है अगर हम मन की बात सुनने लगे तो इच्छाओं का नाश तो कभी होगा ही नहीं गुरुदेव 🥲 इसलिए हे गुरुदेव मैं अपने मन का कुछ नहीं जानती आपका निर्णय ही मेरा फैसला है  🥹 

गुरुदेव— पुत्री ☺️ आप आज तो हम है आपके पास आपके जीवन के फैसलों के लिए परन्तु पुत्री अब तो हमारी भी उमर हो गई है कब तक है हम आप के साथ...

श्री की आंखों में आँसू आ गए वो एक दम से — नहीं........ नहीं गुरुदेव 😭 आप आप को कुछ नहीं होगा आप सदैव हमारे साथ रहेंगे हमारे जीवन के सारे निर्णय आप लेंगे गुरुवर 😭 
जहां आप होंगे हम भी वहां अगर आप को कुछ हुआ तो हम भी प्राण त्याग कर देंगे गुरुदेव 😭 आप गुरु ही नहीं हमारे लिए आप हमारे पिता है हमारे भगवान है गुरुदेव 😭 आज के बाद आप ऐसी बात नहीं करोगे गुरदेव कृपा कर मत कहिये न ये हम नहीं रह सकते आप के बिना गुरुवर 😭😭

गुरुदेव श्री के शीश पे हाथ फेरते हुए— शांत पुत्री शांत आप रो क्यों रही है पुत्री हम आपके साथ है हमेशा परंतु आप तो शस्त्रों का अध्ययन करती है इतना तो विचार करिए पुत्री की मृत्यु अटल सत्य है हम मनुष्य ही तो है और हर मनुष्य को एक न एक दिन मृत्यु की गिरफ्त में आना ही पड़ता है पुत्री 
श्री – 😭नहीं  गुरुदेव😭 आप जो कहोगे करूंगी लेकिन आप ऐसी बात मत करिए 😭
गुरुदेव— पुत्री पहले आप रोना बंद कीजिए और हम जो कहे रहे है वो सुनिये
श्री— 🥺 जी गुरुदेव 
गुरुदेव— पुत्री क्या आप सार्थक के मन की बात जानती है 
श्री 😳— जी...  जी गुरुदेव 😔
गुरुदेव— और आप हरि के मन की बात भी जानती है और हरि ने तो अपने मन की बात भी आपको बताई है
श्री — 😳 जी गुरुदेव 😔 
गुरुदेव— पुत्री आप ये भी जानती है कि सार्थक अपने मन की बात क्यों नहीं बोल रहे 
श्री — 😔 जी गुरुदेव क्यूंकि वह हमारी मित्रता टूटने से डरते है 
गुरुदेव — हाँ पुत्री ! लेकिन हम ये समझे है कि हरि और सार्थक दोनों ही आपसे प्रेम करते है और दोनों ही आप की खुशी चाहते है और दोनों ही आपकी खुशी के लिए अपनी खुशी का त्याग करने को तत्पर है 🙌🏻☺️
श्री — जी गुरुदेव 😔 
गुरुदेव — पुत्री सार्थक और हरि अपने मन की बात जानते है इसलिए अब ये बात जानना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है कि आप क्या चाहती है ?
श्री — गुरुदेव हम... हम कुछ नहीं चाहते 😔🥺 आप जो मार्ग चुन देंगे मैं आँख बंद कर के उसी मार्ग पे चल दूंगी चाहे आप मेरे लिए सन्यास मार्ग  चुने या गृहस्थी मार्ग  🥺
आपकी पुत्री आपको शिकायत का मौका नहीं देगी गुरुदेव 🥺

गुरुदेव — पुत्री ये तो हम जानते है कि हमारी पुत्री दोनों ही मार्ग में उत्तम है अगर आप संन्यास चुनेगी तो उसमें भी प्रवक्त और अगर आप गृहस्थी चुनेंगी तब भी प्रवक्त है आप ☺️ परंतु मैं खुद आपको आज्ञा दे रहा हु आप अपने मन की बात मुझे बताए यहां तो कोई भी नहीं और मुझसे तो आप अपने मन की बात कर सकती है पुत्री 

श्री — गुरुदेव 🥺 आप तो जानते है मुझे बचपन से ही ये शरीर का रोग है 🥺 बचपन में जब मां (गीता जी)के मुख से सुना था कि उनकी सखी (सीता जी) दोनों ने मित्रता को रिश्तेदारी में बदलने का सोचा था 😔 जब से ये बात पता चली तब से हमारे मन में हरि जी के लिए भावना उत्पन हुई थी गुरुदेव 😔लेकिन मेरा जन्म इस रोग के साथ हुआ और मैं बहुत आत्मग्लानि में थी🥺 फिर न जाने कैसे हरि जी को भी हमसे प्रेम हो गया 😔 और उन्होंने हमे अपने मन की बात बताई 🥺 लेकिन मैं हर बार उन्हें मना कर देती हु क्यूंकि मैं स्वयं को उनके योग्य नहीं समझती 🥺गुरुदेव डॉक्टर ने कहा कि अगर आने वाली संतान हुई तो उसे भी ये समस्या हो सकती है अब आप ही बताए कि हम अपनी खुशी के कारण किसी और की पूरी जिंदगी कैसे खराब कर सकते है इसलिए हमने संन्यास मार्ग चुनने का निश्चय किया था 😔 परंतु अब हरि जी हमारी बात समझने को तैयार नहीं वे बहुत जिद्दी है क्या समझाए हम उन्हें और अब बात अलग है अब हम अपना मार्ग नारायण और आपको शोप चुके है और अब भक्ति का मार्ग इतना प्रबल हो गया है कि हम प्रभु नारायण से दूर नहीं रह सकते उनकी पूजा उनकी भक्ति के बिना मुझे कही चैन नहीं गुरुदेव 🥺 कुछ भी हो आप जो भी चुने बस हम प्रभु नारायण से दूर नहीं होना चाहते बाकी सब मंजूर है 

गुरुदेव श्री के सर को सहलाते हुए – पुत्री आप अपने आप को हरि के योग्य क्यों नहीं समझती ? क्या मनुष्य को केवल उसके शरीर से देखना उचित है पुत्री और हरि तो बहुत बार ये बोल चुके है कि वो आपके शरीर से नहीं आपसे प्रेम करते है आपकी आत्मा से आप के संस्कार से तब भी आप अपने मन की बात को स्वीकार नहीं करना चाहती ? आप हर तरह से योग्य है कोई कमी नहीं है आपमें पुत्री 🙌🏻
पुत्री हम एक बहुत अच्छे डॉक्टर को जानते है अगर आप हमारी बात माने तो एक बार वहां भी अपना इलाज करवाइये हो सकता है आप ठीक ही हो जाए 😌

श्री — गुरुदेव अब हमें खुद के ठीक होने की कोई उम्मीद तो नहीं परन्तु आपने आज्ञा की है तो अवश्य जाऊंगी 😔 
गुरुदेव — हाँ वहां तो जाना ही है पर उसे पहले अपनी जिंदगी के बारे में भी सोचना है 
श्री — प्रयास करूंगी गुरुदेव 🥺 


आगे क्या होगा जानने के लिए बने रहिये मेरी कहानी (श्री )में  🫶🏻