श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 27 Shiv putri द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 27

अब श्री गुरुदेव से बात कर रही थी .....
गुरुदेव— पुत्री आप हमे हरि के बारे में पहले ही बता चुकी है अब हम आपका निर्णय सुनना चाहते है और आपको आदेश भी दे रहे है कल तो आप हमे अपना निर्णय सुनायेगी 
सवाल ये नहीं है कि आप हरि को चुनेंगी या सार्थक को क्यूंकि अगर आपको इन दोनों में से चुनना पड़े तो आप हरि को ही चुनेगी ये आपकी बातों से स्पष्ट होता है
अब हमारा प्रश्न ये है कि आप गृहस्थी चुनेंगी हरि के साथ  या संन्यास मार्ग सनातन धर्म की स्थापना और विकाश में अग्रसर होंगी 🙌🏻🙏🏻
कल तक हमें आपका उत्तर चाहिए पुत्री 

श्री— 🙇🏻🥺जी गुरुदेव ..... 

श्री वहाँ से अपने बाबा महादेव के पास गई ... 
श्री भगवान से— हे पिता महादेव ये कैसा धर्मसंकट है , अब आप ही हमारा मार्गदर्शन करे आपकी कृपा से ही नारायण भक्ति प्राप्त हुई है और अब इस स्थिति में हु कि नारायण के शिवाय किसी और के बारे में सोच ही नहीं सकती समर्पण करना ही है तो भगवान को ही क्यूँ न करूं  बाबा 🥺🙇🏻
और हरि जी वो प्रेम करते है हमसे और 
हमने ये भी माना कि मेरे मन में भी उनके लिए भावनाएं है शायद अभी भी हम उन भावनाओं का नाश नहीं कर पाए और चलिए ये भी मान लिया हमने की हरि जी हमारी आत्मा को देख के हमसे प्रेम करते है परंतु इसका अर्थ ये तो नहीं कि हम भगवत्प्राप्ति का मार्ग त्याग कर गृहस्थी अपना ले 🥺 आप ही बोलो पिता महादेव  क्या करे हम 😥हमे तो कुछ समझ नहीं आ रहा अच्छा भला सोचा था मैने कि जो गुरुदेव कह देंगे वही करूंगी गुरुदेव ने कहा संन्यास तो आंख बंद कर के संन्यास मार्ग पे चल दूंगी गुरुदेव ने अगर कहा विवाह तो गृहस्थी अपना लूंगी परन्तु अब अब तो गुरुदेव ने सारा निर्णय मुझपे ही छोड़ दिया और और कल तक का समय दिया है क्या बोले हम उनसे क्या है मेरा जवाब ये खुद नहीं जानती मैं 😔🥺 क्या करूं पिता महादेव कृपा कर मार्गदर्शन कीजिए 🥺🙏🏻

यू ही दिन बीत गया .. 
रात्रि में भोजन के पश्चात सभी शयन कक्ष में गए ... 
श्री हमेशा की तरह भागवत का पाठ कर सो गई 
स्वप्न में... उसने कुछ देखा ....... (ये बाद में बताऊंगी.. क्यूंकि श्री अब उस सपने के हिसाब से अपना निर्णय गुरुदेव को कल सुनाएगी) 😁 

अगले दिन ...
सुबह 3 बजे .. 
आश्रम में रहने वाले सभी लोग 3 बजे तक उठ जाते थे 
सार्थक ध्यान अवस्था में लीन थे..
तभी प्रिया की आँख भी खुल चुकी थी 😐 श्री इतने समय इनके साथ रही कि प्रिया को भी अब श्री के कारण जल्दी उठने की आदत हो चुकी थी 😏 अब उठने के बाद प्रिया बाहर अधखुली आंखों से चल रही थी चलते चलते वो किसी से टकरा गई .. वो चिल्लाने ही वाली थी कि उसने अपनी आँखें अच्छे से खोली तब देखा सामने सार्थक थे ।
प्रिया अपने मन में:- दिखने में तो कितने हैंडसम है लेकिन दिमाग ज़रा सा भी नहीं है बुद्धू है एक दम 😏

सार्थक को आभास हुआ कोई है उसके समीप उसने आंख खोल के देखी तो सामने प्रिया था 🤪
सार्थक अपने मन में — हे भगवान सुबह सुबह ये tape recorder ही मिली थी आपको मेरे से टकरवाने के लिए 😐 

सार्थक प्रिया से — क्या है ?? आप सुबह सुबह यहां कुछ काम है 
प्रिया — नहीं काम तो कुछ नहीं है बस श्री के साथ रहते रहते जल्दी उठने की आदत हो गई है 😅 
सार्थक — अच्छी बात है
प्रिया — हां ये तो है .. अच्छा आपको ध्यान लगाना आता है 
सार्थक— अभी क्या कर रहे थे हम 😒
प्रिया— आंख बंद कर के बैठे थे बस 😂
सार्थक— ध्यान ऐसे ही लगाते है 😑कभी श्री को नहीं देखा क्या ध्यान करते हुए 😒
प्रिया — देखा है 🤪 लेकिन मैने श्री को कितनी बार बोला ध्यान करना सिखा दो लेकिन उनके पास समय ही नहीं मेरे लिए पूरे दिन पढ़ाई और भक्ति करवा लो उनसे तो 😏 कोई नहीं अब आप सिखा दो मुझे ध्यान करना 😅 
सार्थक — मेरे पास नहीं है इतना समय बहुत काम है एक तो पहले ही ध्यान भंग कर दिया मेरा बेमतलब के 😒
प्रिया — हमने कोई आपकी आंखे ज़बरदस्ती पकड़ के खोली है क्या जो हमे बोल रहे कि मैने ध्यान भंग कर दिया आए बड़े 😒😏
सार्थक — तुमसे बात करना मतलब अपना सर दीवार पे मारना 
प्रिया — ज्यादा मत बोलो अब आप ध्यान करना सिखायेंगे कि नहीं 
सार्थक— नहीं सिखा रहा क्या कर लोगी 😒
प्रिया— श्री से शिकायत कर दीजिए 
सार्थक— तुमसे पहले मेरी मित्र है श्री , जो बोलना है बोल दो 😒 डरता नहीं किसी से 
प्रिया— आपके  गुरुदेव से शिकायत कर दूंगी 
सार्थक — क्या बोल दोगी 😒😏 

अब इतना हंगामा सुन श्री आई.. 
श्री  दोनों को लड़ते देख 
श्री— सार्थक जी ये क्या कर रहे आप 
सार्थक श्री के आते ही  एकदम चुप ... क्या बोले क्या नहीं उसको समझ नहीं आया श्री के आगे 
श्री— प्रिया ये क्या बचपना है यहां सुबह सुबह 'ब्रह्म मुहूर्त में लड़ रहे है आप दोनों जरा बताएंगे हमे क्यों और किस बात पे इतनी बहस हो रही है 😑 
सार्थक— सखी आपकी ये tape recorder... 🥲 मेरा मतलब प्रिया जी ये हमें परेशान कर रही थी 

श्री— सार्थक जी हमे आपसी ऐसी उम्मीदें तो नहीं है 😒 अभी अगर गुरुदेव ये सब देख ले उन्हें भी अचम्भा हो जाए कि आप सत्य में वही शिष्य है जो गुरुदेव के प्रिय शिष्य में से एक है ये क्या तरीका है ?? सब सुना मैने प्रिया ने बस आपको कहा था कि ध्यान करना सिखा दीजिए आप चाहते तो सिखा देते लेकिन आप तो लड़ने लगे प्रिया से...  क्या हो गया है आपको सखा हम हैरान है ?? आपका ये रूप देख 😐
आपने ही हमे भी ध्यान लगाना सिखाया था तो प्रिया को सिखाने में क्या जाता है आपका? 
और प्रिया तुम  ऐसे सुबह सुबह बच्चों की तरह  लडऩा तो अच्छी बात नहीं होती और किस इंसान से कैसे बात करनी चाहिए ये तो आपको भी पता है ... प्रिया सार्थक जी गुरुदेव के प्रिया शिष्य तो है ही मेरे सखा भी है और इसके साथ ये ब्राह्मणीस्थ ज्ञानी है अगर आप सीखना  चाहे तो सार्थक जी आपको बहुत कुछ सिखा सकते है लेकिन आपको ये पता होना चाहिए कि आपको कुछ सीखने के लिए झुकना पड़ता है और सामने वाला आपके गुरु के समान हो जाता है 😌 इसलिए आपको विनम्र भाव से सार्थक जी से प्रार्थना करनी चाहिए अगर सत्य में कुछ सीखना चाहती है आप तब ... 




अब श्री के ऐसा बोलने पे सार्थक और प्रिया का क्या हाल रहेगा और अब श्री ने सपने में ऐसा क्या देखा और क्या जवाब योग श्री का जानने के लिए बने रहे मेरी कहानी श्री में 🫶🏻