श्री और सार्थक आपस में बात कर रहे थे अब तक सार्थक अपने मन की बात श्री को बता चुका था । और ये एहसास भी दिल चुका था कि मनुष्य को शरीर के आकर्षण से नहीं बल्कि मन की सुंदरतावसे देखा जाता है 😌
इसके बाद श्री सार्थक से कहती है — सार्थक जी तो क्या आप इसलिए पूरी रात रोते रहे 🥺 क्यूंकि आज आपको लगा कि अगर आप अपने मन की बात मुझे बताएंगे तो कही मैं नाराज न हो जाऊं और मित्रता समाप्त न हो जाए 😔
सार्थक— श्री आप हमे कितना अच्छे से समझती है 😊 माफी चाहता हु सखी 😔 मैं स्वयं के भाव को रोक ही नहीं पाया आपके प्रति प्रेम भाव और भी तीव्र होता चला गया 😔 कल गुरुवर ने आदेश दिया तो मुझे ये करना पड़ा नहीं तो शायद मैं कभी आपको ये बाते न बता पाता
श्री — सार्थक जी आप माफी मत मानिए 😔 मैं आपके हर भाव का सम्मान करती हु 🙌🏻 आप हमारे सखा थे , है और हमेशा रहेंगे 😊
सार्थक— धन्यवाद सखी 🥹
श्री— जी 😊
श्री सार्थक से बात कर के अपने नित्य कार्यों में व्यस्त हो जाती है वही सार्थक भी वहां से चला जाता है चलते चलते वो हरि से टकराता है
हरि — अरे ! सार्थक जी संभल के कहा ध्यान है भाई
सार्थक — 😅 कुछ नहीं हरि जी वो एक महत्वपूर्ण विषय पे श्री जी से बात करने गया था । चलते चलते आप से टकरा गया
हरि — अच्छा श्री से बात करने गए थे आप लेकिन इतनी सुबह क्या जरूरी बात थी
सार्थक— बस गुरुदेव की एक आज्ञा थी वही पूरी करने गया था 😊 आज मन से बहुत बोझ उतर गया एक दम शांत हो गया मेरा मन श्री से बात करके
हरि — अच्छा 😅 लेकिन ऐसी क्या बात थी
सार्थक — कुछ खास नहीं हरि जी बस उनके भविष्य को लेके गुरुदेव थोड़ा चिंतित थे तो अब सब ठीक होने वाला है मे अभी गुरुदेव के पास ही जा रहा था 😊
हरि — अच्छा 🤔 तो आपको क्या लगता है स्वामी जी(गुरुदेव) क्या निर्णय लेंगे श्री के लिए
सार्थक— गुरुदेव का जो भी निर्णय को श्री के हित में ही होगा
वैसे हरि जी एक बात कुछ आपसे
हरि— जी पूछिये न
सार्थक — हरि जी क्या आप श्री से प्रेम करते है 😊 मैं बस उनके सखा होने के नाते पूछ रहा हु 😊 आप गलत मत समझना
हरि ,— नहीं मैं गलत क्यों समझूंगा आप और श्री बहुत अच्छे मित्र है जानता हु मैं 😊 और रही बात श्री से प्रेम करने की तो हाँ सार्थक जी मैं अपनी श्री से बहुत प्रेम करता हु अपनी जान से भी ज्यादा श्री को हमेशा खुश देखना चाहता हु 😊
सार्थक— हरि जी आप क्या करेंगे अगर गुरुदेव ने श्री को संन्यास मार्ग दिया तो 😔
हरि— 😊 अगर श्री खुश तो मैं भी खुश 🥹 श्री अगर संन्यास मार्ग लेगी और नारायण की भक्ति में अग्रसर होगी तो मैं उसका इस मार्ग पे पूरा प्रोत्साहन करूंगा एक सच्चे मित्र की तरह 🥹
मैं भी फिर श्री का मार्ग चुन लूंगा सार्थक जी जो मार्ग मेरी श्री ने चुना वही मार्ग मेरे लिए भी होगा 😊
सार्थक— 🥹 आप बहुत अच्छे है हरि जी और हमारी सखी के लिए एकदम उचित साथी 🙌🏻
हरि— क्या सच मे आपको ऐसा लगता है 🥹
सार्थक— हां बिल्कुल
हरि— परंतु श्री तो कुछ मानने को तैयार नहीं
सार्थक— 😅 मान जाएंगी अब शायद कुछ दिनों में 😉
हरि— क्या क्या सच में 🥹
सार्थक — मैने शायद बोला हरि जी 😅
हरि — हां 😅 😁 मैं तो उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहा हु जब श्री मुझे हाँ बोलेगी अपने मन की बात बतायेगी
सार्थक — जी बिल्कुल संयम रखे और ईश्वर पे विश्वास सब ठीक होगा 😊
हरि— धन्यवाद सार्थक जी 🥹
सार्थक — जी अब हमें गुरुदेव से कुछ बात करनी है आप नाश्ता कर लीजियेगा
हरि — जी बिल्कुल 🙌🏻
सार्थक वहां से गुरुदेव से बात करने को चला गया
और यहां हमारे हरि जी 🫶🏻 इनके मन मे लड्डू फूट रहे थे 🤣🤭
हरि मन में — अरे यार मैं भी न जाने क्या क्या सोच रहा था 😅 सार्थक जी तो श्री को बस मित्र ही मानते है और वो भी श्री की खुशी ही चाहते है 🙂 और मैं यहां सार्थक जी को गलत मान रहा था सोच रहा था कि कही सार्थक श्री से प्रेम तो नहीं करते
लेकिन ये तो मेरे से ही पूछ रहे है कि मैं श्री से प्यार करता हु या नहीं और ये भी कहा उन्होंने कि बस मित्र होने के नाते पूछ रहे है 😅 और मैं यहां चिंता में पूरी रात सो नहीं पाया आंखें दर्द कर रही है
हरि अब श्री को आश्रम में ढूंढ रहा था
श्री नित्य कार्य पूरे करके मंदिर मे थी
हरि ने श्री को ढूंढ ही लिया ...
हरि श्री से — अरे श्री तुम यहां बैठी हो मैने पूरा आश्रम छान मारा कहा गई मेरी श्री कहा गई 😊
श्री— जी
हरि — इतना सब बोला मैं और तुम बस (जी ) अरे कुछ बोलो प्रिय
श्री— हरि आप हमे तंग करने आए हो क्या जब देखो प्रिय प्रियतमा कोई सुन लेगा तो क्या सोचेगा हमारे बारे में
हरि— क्या सोचेगा ? यही कि मैं आपके प्यार में गिर चुका हु 🤣
श्री—बस कीजिए आप और बंद कीजिए ये बेतुकी बाते बहुत काम है हमे जाए आप नाश्ता कर लीजिये
हरि—बेतुकी बात अरे प्रिय मेरी बाते बेतुकी नहीं होती समझी आप 😉 मैं तो बस अपना प्यार दिखाता हु आपको 🥰 और नाश्ता मैं कर चुका हु सार्थक जी ने पहले ही मुझे नाश्ते के लिए बोल दिया था 😊 तुम नहीं करोगी नाश्ता मेरी श्री 🙈
श्री— हरि जी कोई और काम नहीं है क्या आपको हमें परेशान करने के अलावा मेरी श्री प्रिय कभी कुछ बोलते है कभी कुछ थकते नहीं आप 🥲 और हमारा आज व्रत है नाश्ता नहीं करेंगे हम
हरि— 🥰 ठीक है प्रियतमा तुम्हे परेशान नहीं कर रहा बस
लेकिन आज व्रत क्यूं है तुम्हारा कुछ नहीं खाओगी 😔
श्री— नहीं खायेंगे एकादशी है हमारी आज
हरि — पहले बताती न मेरी प्रियतमा नहीं खाएगी तो मैं कैसे खा लूँ अब तो खा लिया अब आज आगे दिन में नहीं खाऊंगा 😔🥹
श्री– अरे आप पागल है क्या हरि जी हमारा व्रत है आप क्यों नहीं खायेंगे खाना ऐसा नहीं करना आप समझे
हरि— मेरी श्री भूखी रहेगी पूरे दिन और मैं खाना खा लूँ ये नहीं हो सकता 🥲
श्री— हम आपको कैसे समझाए हरि जी 🤦🏻 हे भगवान कितने जिद्दी है ये
हरि— हाँ जिद्दी तो हु तुमसे ही सीखा है
श्री— क्या मुझसे ?
हरि— बिल्कुल तुमसे जैसे तुम जिद्दी हो अपने मन की बात नहीं सुनती मेरे मन की बात स्वीकार नहीं करती जब देखो ना ना प्रिय प्रियतमा बोलने पे नाराज हो जाती हो 🥲 बस ऐसे ही मैं भी जिद्दी बन गया तुम्हे देख के
श्री — आपका न कुछ नहीं हो सकता 🥲 आपको जो करना है कीजिये बस भूखे नहीं रहना बीमार हो जाएंगे
व्रत का कुछ खा लेना आप समझे कि नहीं
हरि — तुम खाओगी व्रत का खाना?
श्री— जी नहीं हम व्रत में कुछ नहीं लेते लेकिन आप को लेना है
हरि — न अगर तुम नहीं लोगी कुछ तो मैं भी नहीं लूंगा बात खत्म प्रिय
श्री — हे भगवान क्या करूं मैं इनका 🤦🏻 कुछ नहीं हो सकता आपका
हरि — नहीं 😜
🤣🤣 देखते है आगे की कहानी में क्या होगा बने रहे मेरी कहानी ( श्री)में 🫶🏻