काम की धुन Ved Prakash Tyagi द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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काम की धुन

काम की धुन

“डॉ तनेजा की दावा से मुझे बिलकुल भी आराम नहीं आ रहा है, आप थोड़ा सा अपने काम से समय निकाल कर मुझे अस्पताल मे दिखा दो, पूरे दिन डॉक्टरों की इतनी सेवा करते हो तो क्या वे मुझे अच्छी दावा नहीं देंगे? या तुम दिखाना ही नहीं चाहते, कंही ऐसा तो नहीं कि मेरे से पीछा छुड़ाने की सोच रहे हो? अगर ऐसा है तो मैं बताए देती हूँ, मेरे बिना तुम इन बच्चों को पाल नहीं पाओगे और तुम्हारा घर बरबाद हो जाएगा, मैं ही हूँ जो दुःखम सुःखम किसी तरह हर हाल में तुम्हारे घर को चला रही हूँ, मेरे बिना दो दिन में पागल हो जाओगे।” आज उर्मिला ने श्रीकांत पर अपनी पूरी भड़ास निकाल दी थी, बच्चे भी सुन रहे थे और सहमे से अलग कमरे में जाकर बैठ गए थे जबकि उनको बड़ी तेज भूख लगी थी, खाना बन भी गया था, मगर माँ के गुस्से के कारण खाना मांगने की हिम्मत नहीं हो रही थी, सोच रहे थे कि अभी तो पापा कि आरती उतार रही है माँ, अगर हमने खाना मांगा तो उन्हे छोड़ कर हमारी आरती उतर जाएगी, और पापा की आरती तो सिर्फ बातों से ही उतार रही है, हमारे लिए तो थप्पड़ का भी प्रयोग होने लगेगा, इसलिए दोनों बच्चे शांत बैठे घर में शांति होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। तभी माँ का ध्यान बच्चों की तरफ गया और वह सब कुछ छोड़ कर बच्चों को खाना परोसने लगी। घर में शांति हो चुकी थी, उर्मिला की भड़ास निकाल चुकी थी, अब श्रीकांत ने कहा कि कल बच्चों के स्कूल की छुट्टी है, सुबह मेरे साथ चलना, डॉ अजय मैडिसिन के बहुत बड़े और अच्छे डॉ हैं उनको ही दिखा दूंगा और सारे टेस्ट भी करवा दूंगा, सुबह जल्दी तैयार हो जाना और हाँ कुछ खाना मत क्योंकि कोई-कोई टेस्ट तो खाली पेट ही होते हैं।

अगले दिन सुबह श्रीकांत बच्चों को समझाकर घर को अंदर से बंद करवा कर और यह हिदायत देकर कि अगर कोई भी आए दरवाजा मत खोलना, मैं तुम्हारी माँ को अस्पताल में दिखा कर टेस्ट करवा कर घर पर छोड़ जाऊंगा। श्रीकांत सुबह-सुबह पत्नी को लेकर डॉ अजय के पास पहुँच गया, डॉ अजय ने निरीक्षण करके एक्सरे, खून की जांच वगैरह लिख दी और श्रीकांत से कहने लगे “मेरे घर का एसी खराब है, समय निकाल कर देख लेना”। श्रीकांत अस्पताल के विद्युत विभाग मे मैकेनिक था और सभी एसी के रख रखाव का काम देखता था। डॉ अजय कॅम्पस में ही रहते थे और कॅम्पस के घरों में लगे हुए एसी भी श्रीकांत ही देखता था। कभी-कभी कॅम्पस के बाहर रहने वाले डॉ भी अपने घर के ए सी सुधारवाने के लिए या सर्विस के लिए भी श्रीकांत को कह देते थे, श्रीकांत कभी भी किसी के काम को मना नहीं करता था चाहे वह शहर के किसी भी कोने में क्यो न हो इसीलिए डॉ भी उसका लिहाज करते थे। श्रीकांत ने उर्मिला का एक्सरे और खून की जांच कारवाई एवं उसको वहीं अस्पताल के कम्पाउण्ड में एक नीम के पेड़ के नीचे बैठा दिया। सुबह से कुछ नही खाया था अतः उर्मिला को खाने के लिए ब्रैड पकोड़ा और चाय कैंटीन से लाकर दे दी और डॉ अजय का एसी देखने के लिए चला गया। चलते-चलते श्रीकांत ने उर्मिला से बोला कि यहीं बैठे रहना, मैं अभी थोड़ी देर में आ जाऊंगा, फिर तुम्हें घर लेकर चलूँगा। नीम के पेड़ के नीचे एक चबूतरा बना था उस चबूतरे पर बैठ कर उर्मिला श्रीकांत की प्रतीक्षा करने लगी। गर्मी अपने पूरे जोरों पर थी और एसी के बिना तो घर में टिकना भी मुश्किल था, श्रीकांत ने डॉ अजय का एसी खोल कर देखा उसका बटन खराब था, जो श्रीकांत ने बदल दिया और एसी चल पड़ा। बराबर में डॉ चन्द्रा रहते थे, उनका एसी भी खराब था, जैसे ही डॉ चन्द्रा की नजर श्रीकांत पर पड़ी तो उन्होने भी अपना एसी ठीक करने को कह दिया। अब श्रीकांत उसमे लग गया और इस तरह श्रीकांत वहीं पर एक से दूसरे, दूसरे से तीसरे, तीसरे से चौथे डॉ का एसी ठीक करता रहा। श्रीकांत को डॉक्टर्स के एसी ठीक करते-करते वहीं पर शाम हो गयी, काम करते-करते श्रीकांत यह भी भूल गया कि वह अपनी पत्नी को वहीं अस्पताल में नीम के पेड़ के नीचे बैठा कर आया था, जो पूरे दिन से उसके आने की प्रतीक्षा कर रही होगी। शाम हो गयी, आज का काम खत्म हो गया, घर जाने का समय हो गया तो श्रीकांत साइकल उठा कर सीधा घर की ओर चल पड़ा। बच्चों ने दरवाजा खोला, श्रीकांत घर के अंदर आ गया , उसे उर्मिला कंही दिखाई नहीं दी तो श्रीकांत ने बच्चों से पूछा, “तुम्हारी माँ कहाँ गयी है।” इस सवाल को सुनकर बच्चे हैरान हुए और कहने लगे, “पापा, आज सुबह आप माँ को लेकर अस्पताल गए थे डॉ को दिखाने के लिए, कहाँ छोड़ आए माँ को?” तब श्रीकांत को याद आया और अपनी गलती का अहसास हुआ कि वह तो उर्मिला को अस्पताल में ही नीम के पेड़ के नीचे चबूतरे पर बैठा कर प्रतीक्षा करने को कह कर आया था। श्रीकांत तुरंत ही उल्टे पैर साइकल लेकर अस्पताल की तरफ दौड़ पड़ा जहां उर्मिला उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी जिसे श्रीकांत अपने काम की धुन में वहीं भूल आया था।

एक तो भयंकर गर्मी, पूरे दिन की भूखी प्यासी उर्मिला का क्रोश सातवें आसमान पर था। शाम को पूरा अस्पताल भी सुनसान सा हो गया था, उर्मिला को बच्चों की चिंता भी सताये जा रही थी और सोच रही थी की मीन इनको कहाँ जाकर देखूँ, पता नहीं किस दो के घर के एसी में लगे होंगे, और अस्पताल में ही होंगे या कहीं बाहर तो बही चले गए होंगे। इन विचारों में खोई उर्मिला पेड़ के नीचे बैठी काफी परेशान हो रही थी की तभी श्रीकांत उसके सामने आकार खड़ा हो गया और माफी मांगने लगा। अब नारी मन क्या करे, सारा क्रोध एकदम शांत हो गया एवं चल पड़ी श्रीकांत के साथ उसकी साइकल के डंडे पर बैठ कर। ट्रेफिक से गुजरते हुए साइकल के डंडे पर उर्मिला को पहली बार रोमांटिक लगा और अब तो उसके दिल मे बस प्यार ही प्यार था। घर पहुँच कर श्रीकांत और उर्मिला ने दिन भर की सारी घटना जब बच्चों को बताई तो बच्चे बड़े जोरे से हँसे और साइकल सवारी वाली रोमांटिक बात पर अपनी मम्मी की चिकोटी काटी यह कह कर, "आज तो हेमा मालिनी को धर्मेंद्र साइकल पर उड़ा कर लाया है, बड़ा मजा आया होगा।" उर्मिला ने धीरे से प्यार की चपत दोनों बच्चों को लगाई और चली गयी रसोई में खाना बनाने।