लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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तोड़ी दोस्ती By Mukteshwar Prasad Singh

"तोड़ी दोस्ती"          -----------------मुक्तेश्वर मुकेश अब फिर भेंट नहीं होगी। उसने क्यूं इतनी जल्दबाजी की ? क्यों छोड़ गया अपने यार दोस्त और परिवार को ? बड़ी निष्ठुरता दिखायी।हा...

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पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-3 By Anil Kundal

                  ¶¶ उसका स्पर्श ¶¶                         कहानी                            - १-माँ बहुत दिनों से रुग्ण चल रहीं थीं और बहुधा काम पर से छुट्टी मार लिया करतीं थीं। प...

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बरगद के पेड़ का भूत By Anil Kundal

                          - एक -मैंने उस गली का फिर से एक और चक्कर लगाया। मुझे कल रात के जैसे कोई भ्रम हुआ था। वो बात संभवतः संभव नहीं हो सकती थी। फिर भी लाख बार चाहने पर भी दिल नह...

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सजा.....बिना कसूर की - 3 By Soni shakya

भूमि सब कुछ इतना आसान नहीं होता बेटा। हमारा समाज आज भी इतना विकसित नहीं है जो घटनाओं को सुनकर आसानी से समझ लें। उन्हें तो बस बाल की खाल निकालनी आती है।वही डर तो मुझे भी सता रहा है...

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गुरु की नगरी और विमान अपहरण By Devendra Kumar

गुरु की नगरी, अमृतसर  ने जितने अच्छे बुरे अनुभव उतराव चढाव देखे है,  विश्व के बिरले ही नगरों  ने देखे होंगें. ज्यादा पुराना नहीं है यह नगर  केवल साढ़े चार वर्ष पुराना ही तो है, जब इ...

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मुक्त - भाग 14 By Neeraj Sharma

 (एक लकीर का धारावाहिक) परसुत करने को हूँ, मगर ये बात कहने को याद आ गयी बिलकुल टाइम पर।                                  (एक लकीर ) कहने को जो मर्ज़ी कह लो, खुली छूट है। महत्मा ज़ी न...

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गांव का हीरो महेश By Vandna Sharma

एक समय की बात है। यूपी के अमरोहा जिले के एक छोटे से गाँव (मोहिदीनपुर) में 15 जनवरी 1953 को महेश नामक बालक का जन्म हुआ। पिता का नाम श्री छोटेलाल शर्मा एवं माता का नाम श्रीमती गुलाब...

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कामिनी कथा By Rajkumar Mahato

कामिनी कथा नगेंद्र साहित्य पुरस्कार 2020 के नामांकित एवं द्वितीय पुरस्कार विजेता---(1)“अरे देखो, कामिनी भी कैसी झुलस-सी गई है!”“शायद हमारा विरह सह नहीं पाई।”कामिनी के पेड़ के नीचे...

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The Silent Witness By Priya Chaudhary

एक बार दो शैतान बच्चे जंगल के दोनों तरफ बाँध रहे थे, सबको बड़े अच्छे से प्रसाद दिया तभी उन्होंने एक बूढी बाघिन को देखा और सोचा एक बदमाशी सूझी। वो दोनों उसके पीछे लग गए बाघिन को थोड़ा...

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Childhood Friends - Episode 3 By unknownauther

सच, झूठ और फैसलासुबह का समय था।शिवाय बालकनी में खड़ा था। भोपाल की हल्की ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन उसके अंदर सब कुछ उथल-पुथल था। उसके दिमाग में बस एक ही बात बार-बार घूम रही थी —“अनन...

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प्रेरणास्पंदन - 10-11 By Bhupendra Kuldeep

अध्याय:10 अमर सपने और सेवा का संकल्प                   मनुष्य के जीवन में सपनों का महत्व केवल एक लक्ष्य तकपहुँचने का नहीं, बल्कि व्यक्तित्व को गढ़ने का होता है। अक्सर ऐसा होताहै कि ...

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अनुसूया सदन By Deepak sharma

                    लखनऊ से जब आप कस्बापुर की ओर आते हैं,तो कस्बापुर शुरू होते ही अनुसूया रोड पड़ती है— खूब  चौड़ी और व...

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आपदा By Deepak sharma

                  “हैप्पी बर्थडे,” सुबह सात बजे बहन ने मुझे मोबाइल किया था, “अपने स्कूल से मैं सीधे तुम्हारे पास पहुं...

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मैं बेवकूफ हूँ By Sudhir Srivastava

हास्य मैं बेवकूफ हूँ              आज सुबह-सुबह मित्र रमराज ने मुझे फोन करके कहा- प्रभु! आप बेवकूफ हैं।   मैंने हँसते हुए पूछा -यह बात तुझे आज इतने दिनों बाद समझ में आई? कैसा यार है...

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कुएँ में पुरा आसमान By kunal kumar

_______________________________गाँव के पश्चिम छोर पर एक कुआँ था। वह पुराना, गोल और काई से भरा था। इतना गहरा था कि दोपहर की धूप भी उसके तल तक पहुँचते-पहुँचते बूढ़ी पड़ जाती। किसने ब...

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बाबूजी की दुकान By Deepak sharma

                मेरा गणित का पर्चा अच्छा हुआ था. पर्चा देते ही मैं बाबूजी की दुकान पर आ गया.             &nbsp...

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शरीक़-ए- ज़िंदगी By Shree Kriti

कॉलेज रियूनियन की पार्टी अपने पूरे शबाब पर थी। पुरानी यादों की महक के बीच घुलने सब आये थे...वाणी भी आई थी...आखिर पुराने दोस्तों से मिलने की बात ही कुछ और होती है। कुछ ही देर बाद उस...

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देवकी का आशीर्वाद By Rajkumar Mahato

चिन्मयी देवी ने गहनों का डिब्बा बहुत धीरे-धीरे खोला। एक-एक करके उन्होंने गले का हार, कानों के झुमके, माथे का टीका और नाक की नथ निकाली। सबसे अंत में उन्होंने एक जोड़ी चूड़ियाँ निकाल...

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आमंत्रण By Ramesh Desai

                                               प्रतिकात्मक तसवीर                                           एक सच्ची कथा         ऊस ने मुझे पहली मुलाकात में यही बताया था।       "मेर...

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चोर पर मोर By Veena Vij

     लोह पर मक्की की मोटी-मोटी रोटियां थापती वीरों के दिमाग में विचारों के अंधड़ चल रहे थे। नीचे से लोह को तपाता हुआ आग के बवंडर का सेंक उसके गालों को लाल करने की अप...

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भगवान गणेश By Ram Make

**प्रथम पूज्य श्री गणेश: जन्म, लीला और महिमा की विस्तृत कथा**सनातन हिंदू धर्म में भगवान गणेश का स्थान अत्यंत विशिष्ट और सर्वोच्च है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, विवाह, या अनुष्ठान की...

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मंजिले - भाग 46 By Neeraj Sharma

--------" कब्ज " एक हैरत अंदाज की कहानी --- " न मुराद ये बीमारी हमें ही नहीं, मेरे जिगर को भी है। मेरी बेगम सलमा को भी है, और बेटी नसीबा को भी है। " जैसे नबाब पिता अब्दुल रो पड़ा। ह...

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कलयुगी तपस्वी - यूनिकॉर्न By Veena Vij

 "ओए रोशन, ट्यूबवेल का पानी बंद करा कि नहीं? स्कूल जाने से पहले बंद कर देना याद से। "  कहते हुए रोशन के बापूजी ने साइकिल आगे बढ़ा दी और अपने ऑफिस चले गए।  रोशन ने नज...

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मैग्नोलिया जैसी खिली By Veena Vij

जाड़ों में जब वृक्ष एकदम रूखे और नंगे हो जाते हैं यहां तक कि उनकी चमड़ी भी उधड़ने लगती है, तब झील की ओर से ठंडी तेज हवा वैसे ही हाहाकार करती हुई उठती है जैसे बर्फ से जमी  हुई...

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मूक क्रंदन By Veena Vij

    "कुछ चाय वाय पी हो कि नहीं?-सुबह उठते ही रियाज़ करने बैठ जाती हो बिटिया! " दद्दा के पूछने पर मेरे हाथ की उंगलियां सितार के तारों पर वहीं रुक गईं और उनकी लाड़ भरी परवा...

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काण विवाह By Veena Vij

(यह कहानी छत्तीसगढ़ी भाषा में ना लिखकर साधारण भाषा में लिखी गई है)  छत्तीसगढ़ में सबसे घने जंगल को नंदनवन कहते हैं। यहां कुठामुड़ा गांव में हाथी बहुत होते हैं । यहां के लोग रा...

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जीएसटी और इनकम टैक्स भ्रष्टाचार By JUGAL KISHORE SHARMA

नियमों के नाम पर डर का कारोबार देखा है,हमने सिस्टम में खुला भ्रष्टाचार देखा है।नोटिस भी अब यहाँ न्याय नहीं, हथियार बने,हर कदम पर शोषण का विस्तार देखा है।कानून की हर पंक्ति अलग मतलब...

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मुनक्का के बीज By राज बोहरे

कहानी : राजनारायण बोहरे   मुनक्का के बीज   वैद्य जी ने सिल्ली  की नब्ज पर उँगली रखी। आँखें बंद करके चुप हो के बैठ गये, जैसे किसी गहरे गणित में डूब गए हों। वैद्य जी उम्र से अधेड़ थे...

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मिठास ज़िंदगी की By Rakesh Kaul

मिठास ज़िंदगी की बीना के जाने के बाद आज मैं ख़ुद को बिलकुल तन्हा महसूस कर रहा हूँ | इतना लम्बा वक़्त साथ गुज़ारने के बाद पति-पत्नी एक-दूसरे के इस कद्र आदी हो जाते हैं कि वे उनके बिना र...

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साँझ का करघा By राज बोहरे

साँझ का करघा उस घर की लय घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि करघे की उस निरंतर होने वाली 'खट-खट' से तय होती थी जो कभी रुकती नहीं थी। दीनू के उस संकरे और नीची छत वाले कमरे की हवा कभी साफ...

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कारखाना By राज बोहरे

कहानी: कारखाना    “आप अगर मेरा साथ दोगे तो मैं अपने कारखाने को मिला इतना बड़ा ऑर्डर स्वीकार कर पाऊंगा… नहीं तो मैं मना कर देता हूँ।” तरुण भल्ला की आवाज़ में एक अजीब-सी सधी हुई नरमी...

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घर लौटती पगडंडी By राज बोहरे

कहानी: घर लौटती पगडंडी मचान पर खड़ा ज्ञान सिंह दूर तक फैले खेत को देख रहा था। गेहूं की सुनहरी फसल अब कटकर ढेरों में बदल चुकी थी। हवा में भूसे की हल्की गंध तैर रही थी। उसने आंखें मि...

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खलनायक By Ramesh Desai

                           खलनायक ??  रंजन कुमार देसाई                                 कल उस ने दोबारा ख़ुदकुशी करने का प्रयास किया था. उस वजह से भरत समेत कोई रात को सो नहीं पाया था...

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गंगा की पुकार By Shivraj Bhokare

गंगा की पुकार(“यह एक सच्ची घटना पर आधारित चेतावनी है, कोई काल्पनिक कहानी नहीं।”)भाइयों और बहनों,ज़रा ठहरकर सोचिए। एक 86 साल का वृद्ध। कोई साधारण व्यक्ति नहीं—आईआईटी कानपुर का पूर्व...

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जड़ें By राज बोहरे

जड़ें  सावित्री देवी अक्सर खिड़की के पास बैठ जातीं। बाहर लगे नीम के पेड़ को देखतीं और सोचतीं— “जैसे इस पेड़ की जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं, वैसे ही इंसान की जड़ें उसके परिवार से जुड़...

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हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया By Devendra Kumar

हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया उस दिन लोधी रोड श्मशान घाट में खाकी वर्दी में बहुत लोग उपस्थित थे, विद्युत् शवदाह अर्थात  इलेक्ट्रिक क्रेमेटोरियम के पास ही एक तरफ दो बिगुलर भी चुपच...

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सेंध By राज बोहरे

                                              सेंध धूप की एक धार मंदिर के अधबने प्रांगण में तिरछी कटती हुई गिर रही थी। हवा में महीन धूल तैर रही थी—इतनी हल्की कि दिखती नहीं, पर सांस...

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इन गुड फ़ेथ By Deepak sharma

                   सन उन्नीस सौ उनसठ के उस दिन किशोर अपने पैतृक गांव से लौटा था।जहां वह दसवीं की अपनी परीक्षा के बाद हुई लंबी छुट्...

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कर्ज़ By राज बोहरे

                                                           कर्ज़ हेड क्लर्क नागर ने अपनी मेज़ पर रखी पीतल की पुरानी घंटी को उँगलियों से दो बार थपथपाया—“टन्… टन्…”। दफ्तर की दीवारों...

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टूटकर भी मुस्कुराती रही By aakanksha

पूर्वांचल के एक छोटे से गाँव में नंदिनी रहती थी—मिट्टी के घर, कच्ची गलियाँ और सपनों से भरी आँखें। घर में गरीबी थी, लेकिन उसके इरादे बहुत अमीर थे। माँ अक्सर कहतीं—“बेटी, जिंदगी आसान...

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डर By राज बोहरे

                                                          डर   शाम उतर रही थी—धीरे-धीरे, जैसे किसी बूढ़े लेखक की कलम थककर कागज़ पर रेंग रही हो। दफ्तर की घड़ी ने पाँच बजाए, और दिनेश...

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डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 By Std Maurya

मैंने हल्के गुस्से और मज़ाकिया अंदाज़ में कहा,“अभी जाकर शिकायत कर ले, चुड़ैल।”अंकिता भी पीछे हटने वाली कहाँ थी, वह तुरंत बोली,“अभी तो बोलोगे ही, जब घर से दूर हो तो।”मैंने हँसते हुए...

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तोड़ी दोस्ती By Mukteshwar Prasad Singh

"तोड़ी दोस्ती"          -----------------मुक्तेश्वर मुकेश अब फिर भेंट नहीं होगी। उसने क्यूं इतनी जल्दबाजी की ? क्यों छोड़ गया अपने यार दोस्त और परिवार को ? बड़ी निष्ठुरता दिखायी।हा...

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पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-3 By Anil Kundal

                  ¶¶ उसका स्पर्श ¶¶                         कहानी                            - १-माँ बहुत दिनों से रुग्ण चल रहीं थीं और बहुधा काम पर से छुट्टी मार लिया करतीं थीं। प...

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बरगद के पेड़ का भूत By Anil Kundal

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सजा.....बिना कसूर की - 3 By Soni shakya

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गुरु की नगरी और विमान अपहरण By Devendra Kumar

गुरु की नगरी, अमृतसर  ने जितने अच्छे बुरे अनुभव उतराव चढाव देखे है,  विश्व के बिरले ही नगरों  ने देखे होंगें. ज्यादा पुराना नहीं है यह नगर  केवल साढ़े चार वर्ष पुराना ही तो है, जब इ...

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मुक्त - भाग 14 By Neeraj Sharma

 (एक लकीर का धारावाहिक) परसुत करने को हूँ, मगर ये बात कहने को याद आ गयी बिलकुल टाइम पर।                                  (एक लकीर ) कहने को जो मर्ज़ी कह लो, खुली छूट है। महत्मा ज़ी न...

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गांव का हीरो महेश By Vandna Sharma

एक समय की बात है। यूपी के अमरोहा जिले के एक छोटे से गाँव (मोहिदीनपुर) में 15 जनवरी 1953 को महेश नामक बालक का जन्म हुआ। पिता का नाम श्री छोटेलाल शर्मा एवं माता का नाम श्रीमती गुलाब...

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कामिनी कथा By Rajkumar Mahato

कामिनी कथा नगेंद्र साहित्य पुरस्कार 2020 के नामांकित एवं द्वितीय पुरस्कार विजेता---(1)“अरे देखो, कामिनी भी कैसी झुलस-सी गई है!”“शायद हमारा विरह सह नहीं पाई।”कामिनी के पेड़ के नीचे...

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                    लखनऊ से जब आप कस्बापुर की ओर आते हैं,तो कस्बापुर शुरू होते ही अनुसूया रोड पड़ती है— खूब  चौड़ी और व...

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आपदा By Deepak sharma

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मैं बेवकूफ हूँ By Sudhir Srivastava

हास्य मैं बेवकूफ हूँ              आज सुबह-सुबह मित्र रमराज ने मुझे फोन करके कहा- प्रभु! आप बेवकूफ हैं।   मैंने हँसते हुए पूछा -यह बात तुझे आज इतने दिनों बाद समझ में आई? कैसा यार है...

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बाबूजी की दुकान By Deepak sharma

                मेरा गणित का पर्चा अच्छा हुआ था. पर्चा देते ही मैं बाबूजी की दुकान पर आ गया.             &nbsp...

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**प्रथम पूज्य श्री गणेश: जन्म, लीला और महिमा की विस्तृत कथा**सनातन हिंदू धर्म में भगवान गणेश का स्थान अत्यंत विशिष्ट और सर्वोच्च है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, विवाह, या अनुष्ठान की...

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--------" कब्ज " एक हैरत अंदाज की कहानी --- " न मुराद ये बीमारी हमें ही नहीं, मेरे जिगर को भी है। मेरी बेगम सलमा को भी है, और बेटी नसीबा को भी है। " जैसे नबाब पिता अब्दुल रो पड़ा। ह...

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मुनक्का के बीज By राज बोहरे

कहानी : राजनारायण बोहरे   मुनक्का के बीज   वैद्य जी ने सिल्ली  की नब्ज पर उँगली रखी। आँखें बंद करके चुप हो के बैठ गये, जैसे किसी गहरे गणित में डूब गए हों। वैद्य जी उम्र से अधेड़ थे...

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मिठास ज़िंदगी की By Rakesh Kaul

मिठास ज़िंदगी की बीना के जाने के बाद आज मैं ख़ुद को बिलकुल तन्हा महसूस कर रहा हूँ | इतना लम्बा वक़्त साथ गुज़ारने के बाद पति-पत्नी एक-दूसरे के इस कद्र आदी हो जाते हैं कि वे उनके बिना र...

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साँझ का करघा By राज बोहरे

साँझ का करघा उस घर की लय घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि करघे की उस निरंतर होने वाली 'खट-खट' से तय होती थी जो कभी रुकती नहीं थी। दीनू के उस संकरे और नीची छत वाले कमरे की हवा कभी साफ...

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कारखाना By राज बोहरे

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घर लौटती पगडंडी By राज बोहरे

कहानी: घर लौटती पगडंडी मचान पर खड़ा ज्ञान सिंह दूर तक फैले खेत को देख रहा था। गेहूं की सुनहरी फसल अब कटकर ढेरों में बदल चुकी थी। हवा में भूसे की हल्की गंध तैर रही थी। उसने आंखें मि...

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खलनायक By Ramesh Desai

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गंगा की पुकार By Shivraj Bhokare

गंगा की पुकार(“यह एक सच्ची घटना पर आधारित चेतावनी है, कोई काल्पनिक कहानी नहीं।”)भाइयों और बहनों,ज़रा ठहरकर सोचिए। एक 86 साल का वृद्ध। कोई साधारण व्यक्ति नहीं—आईआईटी कानपुर का पूर्व...

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जड़ें By राज बोहरे

जड़ें  सावित्री देवी अक्सर खिड़की के पास बैठ जातीं। बाहर लगे नीम के पेड़ को देखतीं और सोचतीं— “जैसे इस पेड़ की जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं, वैसे ही इंसान की जड़ें उसके परिवार से जुड़...

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हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया By Devendra Kumar

हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया उस दिन लोधी रोड श्मशान घाट में खाकी वर्दी में बहुत लोग उपस्थित थे, विद्युत् शवदाह अर्थात  इलेक्ट्रिक क्रेमेटोरियम के पास ही एक तरफ दो बिगुलर भी चुपच...

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सेंध By राज बोहरे

                                              सेंध धूप की एक धार मंदिर के अधबने प्रांगण में तिरछी कटती हुई गिर रही थी। हवा में महीन धूल तैर रही थी—इतनी हल्की कि दिखती नहीं, पर सांस...

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इन गुड फ़ेथ By Deepak sharma

                   सन उन्नीस सौ उनसठ के उस दिन किशोर अपने पैतृक गांव से लौटा था।जहां वह दसवीं की अपनी परीक्षा के बाद हुई लंबी छुट्...

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कर्ज़ By राज बोहरे

                                                           कर्ज़ हेड क्लर्क नागर ने अपनी मेज़ पर रखी पीतल की पुरानी घंटी को उँगलियों से दो बार थपथपाया—“टन्… टन्…”। दफ्तर की दीवारों...

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टूटकर भी मुस्कुराती रही By aakanksha

पूर्वांचल के एक छोटे से गाँव में नंदिनी रहती थी—मिट्टी के घर, कच्ची गलियाँ और सपनों से भरी आँखें। घर में गरीबी थी, लेकिन उसके इरादे बहुत अमीर थे। माँ अक्सर कहतीं—“बेटी, जिंदगी आसान...

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डर By राज बोहरे

                                                          डर   शाम उतर रही थी—धीरे-धीरे, जैसे किसी बूढ़े लेखक की कलम थककर कागज़ पर रेंग रही हो। दफ्तर की घड़ी ने पाँच बजाए, और दिनेश...

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डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 By Std Maurya

मैंने हल्के गुस्से और मज़ाकिया अंदाज़ में कहा,“अभी जाकर शिकायत कर ले, चुड़ैल।”अंकिता भी पीछे हटने वाली कहाँ थी, वह तुरंत बोली,“अभी तो बोलोगे ही, जब घर से दूर हो तो।”मैंने हँसते हुए...

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