सुबह से ही ऑफिस में कुछ अलग माहौल था.
हर कर्मचारी के चेहरे पर उत्सुकता दिखाई दे रही थी. मैनेजर लगातार Meeting Room में आ- जा रहे थे और बडे अधिकारियों से फोन पर बात कर रहे थे.
राहुल अपनी सीट पर बैठा सामान्य तरीके से काम कर रहा था.
उसे अभी तक पता नहीं था कि आज का दिन उसकी नौकरी के लिए कितना महत्वपूर्ण होने वाला है.
करीब ग्यारह बजे अचानक मैनेजर ने सभी कर्मचारियों को Meeting Room में बुलाया.
सब लोग जल्दी आइए. एक जरूरी घोषणा करनी है।
राहुल भी अपनी फाइल बंद करके Meeting Room में पहुँच गया.
अंजलि पहले से वहाँ मौजूद थी.
कुछ ही देर में मैनेजर ने प्रोजेक्टर ऑन किया.
स्क्रीन पर कंपनी के एक नए project की जानकारी दिखाई देने लगी.
कंपनी को एक बहुत बडा project मिला है।
कमरे में हलचल शुरू हो गई.
मैनेजर ने आगे कहा,
अगर हम इस project को समय पर और सही तरीके से पूरा कर लेते हैं, तो कंपनी को बहुत बडा फायदा होगा।
सभी कर्मचारी ध्यान से सुनने लगे.
लेकिन यह project आसान नहीं है. इसमें डेटा, रिपोर्टिंग, क्लाइंट मैनेजमेंट और टेक्निकल काम—सब कुछ शामिल है।
राहुल चुपचाप स्क्रीन देख रहा था.
उसकी नजर project की जानकारी पर टिक गई.
उसे लगा कि इस काम में वह अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकता है.
मैनेजर ने टीम के कुछ सदस्यों के नाम बताए.
फिर अचानक बोले—
और इस टीम में राहुल भी रहेगा।
राहुल ने चौंककर सिर उठाया.
कुछ कर्मचारियों ने भी उसकी तरफ देखा.
एक कर्मचारी ने धीमे से दूसरे से कहा,
इतने बडे project में राहुल?
राहुल ने कुछ नहीं कहा.
मैनेजर ने स्पष्ट किया,
राहुल ने हाल ही में जो रिपोर्टिंग और टेक्निकल समस्या सुलझाई थी, उससे हमें उसकी क्षमता का पता चला है. इसलिए हमने तय किया है कि उसे इस project में शामिल किया जाए।
राहुल के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई.
अंजलि उसे देखकर खुश थी.
लेकिन उसे पता था कि यह जिम्मेदारी आसान नहीं होगी.
Meeting खत्म होने के बाद सभी अपनी- अपनी जिम्मेदारियों में लग गए.
राहुल को project की शुरुआती फाइलें दी गईं.
उसने फाइल खोली तो उसकी आँखें कुछ पल के लिए ठहर गईं.
डेटा बहुत ज्यादा था.
सैकडों दस्तावेज.
कई अलग- अलग रिपोर्ट.
क्लाइंट की अलग- अलग मांगें.
और सबसे बडी बात—प्रोजेक्ट को एक निश्चित समय सीमा में पूरा करना था.
राहुल ने गहरी साँस ली.
मुश्किल है.
फिर खुद से कहा,
लेकिन नामुमकिन नहीं।
उसने काम शुरू कर दिया.
शाम तक राहुल लगातार काम करता रहा.
वह सिर्फ दिए गए काम को पूरा नहीं कर रहा था, बल्कि पूरे project की संरचना समझने की कोशिश कर रहा था.
कहाँ गलती हो सकती है?
कहाँ समय बचाया जा सकता है?
Kiss काम को पहले करना चाहिए?
Kiss रिपोर्ट को Kiss तरह व्यवस्थित करना चाहिए?
वह हर चीज को ध्यान से लिख रहा था.
अंजलि कुछ दूरी से उसे देख रही थी.
उसने देखा कि बाकी लोग काम खत्म करके धीरे- धीरे जाने लगे, लेकिन राहुल अभी भी अपनी सीट पर बैठा था.
वह उसके पास गई.
राहुल।
जी मैम?
तुम अभी तक इसी में लगे हो?
जी. मैं पूरा सिस्टम समझने की कोशिश कर रहा हूँ।
आज के लिए इतना काफी है।
राहुल ने सिर उठाया.
लेकिन मैम, अगर शुरुआत में सब समझ गया तो आगे काम आसान रहेगा।
अंजलि कुछ पल उसे देखती रही.
तुम्हें पता है, तुम जरूरत से ज्यादा मेहनत करते हो?
राहुल मुस्कुराया.
शायद।
और अगर थक गए तो?
तो थोडा आराम कर लूँगा।
अंजलि ने कहा,
चलो, आज घर जाओ।
राहुल ने फाइल सेव की.
जी मैम।
अगली सुबह project की पहली बडी समस्या सामने आ गई.
क्लाइंट ने कुछ ऐसी जानकारी माँग ली थी, जो कंपनी के पुराने रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थी.
पूरी टीम परेशान हो गई.
मैनेजर ने कहा,
अगर यह डेटा नहीं मिला तो हमारी रिपोर्ट अधूरी रह जाएगी।
सभी लोग अलग- अलग जगह खोजने लगे.
राहुल भी पुराने रिकॉर्ड खंगालने लगा.
कई घंटे बीत गए.
अचानक राहुल की नजर एक पुराने दस्तावेज पर पडी.
उसने उसे खोला.
फिर दूसरा रिकॉर्ड देखा.
फिर तीसरा.
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई.
शायद मिल गया.
वह तुरंत मैनेजर के पास गया.
सर, ये देखिए।
मैनेजर ने दस्तावेज देखा.
ये तो बहुत पुराना रिकॉर्ड है।
जी सर. लेकिन इसमें वही जानकारी है जिसकी क्लाइंट को जरूरत है।
मैनेजर ने ध्यान से दस्तावेज पढा.
तुमने ये कहाँ से खोजा?
पुराने सर्वर में।
मैनेजर कुछ पल उसे देखते रहे.
Good.
राहुल ने पूछा,
सर, अब काम आगे बढ सकता है?
हाँ।
पूरी टीम को राहत मिली.
अंजलि दूर से यह सब देख रही थी.
उसके चेहरे पर गर्व साफ दिखाई दे रहा था.
कुछ दिनों तक project तेजी से आगे बढता रहा.
राहुल हर दिन कुछ नया सीख रहा था.
कभी वह डेटा संभालता.
कभी टेक्निकल समस्या हल करता.
कभी टीम के दूसरे सदस्यों की मदद करता.
धीरे- धीरे टीम में उसकी अहमियत बढने लगी.
लेकिन इसी दौरान एक नई समस्या पैदा हुई.
क्लाइंट ने अचानक project की अंतिम तारीख पहले कर दी.
अब टीम के पास काम पूरा करने के लिए पहले से लगभग आधा समय बचा था.
ऑफिस में तनाव फैल गया.
मैनेजर ने पूरी टीम को बुलाकर कहा,
हमें अब दिन- रात मेहनत करनी होगी।
एक कर्मचारी ने कहा,
सर, इतने कम समय में यह संभव नहीं है।
दूसरे ने भी कहा,
हमें कम से कम दो हफ्ते और चाहिए।
मैनेजर परेशान हो गए.
तभी राहुल ने धीरे से कहा,
सर।
हाँ राहुल?
अगर हम काम को दो हिस्सों में बाँट दें तो शायद समय बच सकता है।
सभी उसकी तरफ देखने लगे.
राहुल ने बोर्ड पर जाकर पूरा प्लान समझाना शुरू किया.
पहले डेटा को अलग टीम संभालेगी. दूसरी टीम उसी समय रिपोर्ट तैयार करेगी. जो काम बाद में होना था, उसे हम पहले शुरू कर सकते हैं।
मैनेजर ध्यान से सुन रहे थे.
राहुल ने आगे कहा,
और जो टेक्निकल काम है, उसे मैं संभाल सकता हूँ।
कुछ लोग हैरान रह गए.
मैनेजर ने पूछा,
तुम अकेले?
जरूरत पडी तो टीम की मदद ले लूँगा।
अंजलि ने राहुल की तरफ देखा.
उसे पहली बार लगा कि राहुल सिर्फ मेहनती नहीं था.
उसके अंदर नेतृत्व करने की क्षमता भी थी.
मैनेजर ने आखिरकार कहा,
ठीक है. हम राहुल के प्लान के हिसाब से काम करेंगे।
अगले कुछ दिन बेहद कठिन रहे.
सुबह से रात तक पूरी टीम काम करती रही.
राहुल सबसे ज्यादा मेहनत कर रहा था.
लेकिन वह सिर्फ खुद काम नहीं करता था.
वह दूसरों की गलतियाँ भी ठीक करता, किसी को समस्या आती तो उसकी मदद करता और हर रात अगले दिन का प्लान तैयार करके जाता.
अंजलि कई बार उसे देखती और सोचती—
इस लडके के अंदर इतनी ताकत आती कहाँ से है?
एक रात ऑफिस में लगभग सभी लोग जा चुके थे.
राहुल अभी भी कंप्यूटर के सामने बैठा था.
अंजलि उसके पास आई.
बस करो राहुल।
मैम, थोडा काम बाकी है।
तुम पिछले तीन दिनों से ठीक से सोए भी नहीं हो।
राहुल ने उसकी तरफ देखा.
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद सो जाऊँगा।
अंजलि ने हल्की नाराजगी से कहा,
काम जरूरी है, लेकिन तुम उससे ज्यादा जरूरी हो।
राहुल कुछ पल चुप रहा.
उसने अंजलि की आँखों में देखा.
दोनों के बीच कुछ सेकंड तक खामोशी रही.
फिर राहुल ने धीरे से कहा,
ठीक है मैम. आज जल्दी चला जाऊँगा।
अंजलि मुस्कुरा दी.
लेकिन उसके दिल में राहुल के लिए चिंता पहले से कहीं ज्यादा बढ चुकी थी.
आखिर वह दिन भी आ गया जब कंपनी को क्लाइंट के सामने पूरा project प्रस्तुत करना था.
पूरी टीम तैयार थी.
राहुल ने अंतिम बार सभी रिपोर्ट Check कीं.
अंजलि ने उसकी तरफ देखा.
तैयार?
राहुल ने मुस्कुराकर कहा,
जी।
Presentation शुरू हुई.
एक- एक करके सभी हिस्से समझाए गए.
जब राहुल की बारी आई तो उसने पूरे आत्मविश्वास के साथ project का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रस्तुत किया.
क्लाइंट लगातार सवाल पूछता रहा.
राहुल हर सवाल का शांतिपूर्वक जवाब देता रहा.
आखिर में क्लाइंट ने कहा—
Excellent work.
Meeting खत्म होते ही कमरे में राहत की साँस सुनाई दी.
मैनेजर ने राहुल की तरफ देखा.
तुमने बहुत अच्छा काम किया।
राहुल ने सिर्फ मुस्कुराकर कहा,
ये पूरी टीम की मेहनत है, सर।
अंजलि उसे देख रही थी.
उसके चेहरे पर गर्व था.
उसे महसूस हो रहा था कि राहुल अब सिर्फ नौकरी नहीं कर रहा था.
वह अपनी नई जिंदगी की नींव खुद बना रहा था.
और अंजलि.
वह अनजाने में उस नींव का एक हिस्सा बन चुकी थी.
लेकिन उसे अभी यह नहीं पता था कि इस बडे project की कामयाबी राहुल के लिए सिर्फ करियर की शुरुआत नहीं थी.
इस कामयाबी के बाद कंपनी राहुल को एक ऐसी जिम्मेदारी देने वाली थी, जो उसकी पूरी जिंदगी बदल सकती थी.