अंजलि के कमरे में उस वक्त ऐसी खामोशी थी, जैसे हवा भी किसी जवाब का इंतजार कर रही हो.
उसके सामने बैठा राहुल लगातार जमीन की तरफ देख रहा था.
कुछ घंटे पहले तक अंजलि को उम्मीद थी कि शायद दाढी हटने के बाद सब कुछ बदल जाएगा.
शायद राहुल उसे देखते ही पहचान लेगा.
शायद उसकी आंखों में वही पुराना प्यार लौट आएगा.
शायद वह मुस्कुराकर कहेगा—
अंजलि. तुम?
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.
राहुल उसे देख रहा था.
मगर पहचान नहीं रहा था.
अंजलि ने कांपती आवाज में पूछा—
राहुल. तुम्हें मेरा नाम याद नहीं?
राहुल ने धीरे से सिर हिलाया.
नहीं।
अंजलि की आंखों में आंसू भर आए.
और. हमारा घर?
नहीं।
कॉलेज?
नहीं।
वो जगह जहां हम पहली बार मिले थे?
राहुल ने अपनी आंखें बंद कर लीं.
मुझे कुछ याद नहीं।
अंजलि के अंदर कुछ टूट गया.
वह कुर्सी से उठकर खिडकी के पास चली गई.
बाहर रात गहरी हो चुकी थी.
शहर की रोशनियां चमक रही थीं, लेकिन अंजलि की जिंदगी में अचानक सब कुछ अंधेरा लगने लगा था.
छह साल तक उसने जिस इंसान को अपनी यादों में जिंदा रखा था.
वह आज उसके सामने खडा था.
लेकिन उसकी यादों से अंजलि गायब थी.
अंजलि ने अपने आंसू पोंछे और खुद को संभाला.
तुम्हें कुछ भी याद नहीं?
राहुल ने कुछ सोचते हुए कहा—
कुछ चीजें याद हैं।
अंजलि तुरंत उसकी तरफ मुडी.
क्या?
मुझे अपना नाम राहुल याद है।
अंजलि की सांस रुक गई.
और?
मुझे पता है कि मैं पढा- लिखा हूं।
और?
राहुल ने माथे पर हाथ रखा.
एक सडक. बहुत तेज बारिश. फिर एक तेज आवाज. उसके बाद सब अंधेरा।
अंजलि का चेहरा सफेद पड गया.
हादसा.
राहुल ने उसकी तरफ देखा.
शायद।
तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ था?
मुझे नहीं पता।
अंजलि उसके सामने बैठ गई.
कब?
राहुल ने सिर हिलाया.
पता नहीं।
कहाँ?
पता नहीं।
तुम्हारे परिवार में कौन- कौन है?
राहुल चुप हो गया.
काफी देर तक कोई जवाब नहीं आया.
फिर उसने बहुत धीमे से कहा—
मुझे नहीं पता।
अंजलि ने उसकी आंखों में देखा.
अब उसे यकीन होने लगा था कि राहुल झूठ नहीं बोल रहा.
वह सचमुच कुछ याद नहीं कर पा रहा था.
लेकिन एक सवाल फिर भी उसके दिल को परेशान कर रहा था.
अगर राहुल को सब कुछ भूल गया था.
तो फिर उसे अपना नाम कैसे याद था?
और अंजलि का नाम क्यों नहीं?
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.
अंजलि?
यह उसके पिता की आवाज थी.
अंजलि चौंक गई.
उसने तुरंत राहुल की तरफ देखा.
राहुल शांत बैठा था.
हाँ पापा?
दरवाजा खुला.
अंजलि के पिता कमरे में आए.
उनकी नजर राहुल पर पडी.
बस एक पल के लिए.
उनके चेहरे पर ऐसा डर आया, जिसे अंजलि ने साफ देख लिया.
लेकिन अगले ही पल उन्होंने खुद को संभाल लिया.
ये यहाँ क्या कर रहा है?
अंजलि ने जवाब दिया—
यही वो आदमी है जिसने मेरी जान बचाई थी।
उसके पिता ने राहुल को ध्यान से देखा.
राहुल ने भी उनकी तरफ देखा.
कुछ सेकंड तक दोनों की आंखें मिली रहीं.
फिर राहुल ने नजरें हटा लीं.
अंजलि के पिता ने पूछा—
नाम?
राहुल।
यह नाम सुनते ही अंजलि के पिता के हाथ में पकडा फोन हल्का- सा कांप गया.
राहुल.
उन्होंने खुद से कहा.
अंजलि ने गौर किया.
पापा, आप इसे जानते हैं?
नहीं।
जवाब बहुत जल्दी आया.
अंजलि को शक हुआ.
तो फिर आप इतने परेशान क्यों हुए?
मैं परेशान नहीं हुआ।
मैंने देखा था।
उसके पिता ने राहुल की तरफ देखा.
तुम्हें अपना घर याद है?
राहुल ने सिर हिलाया.
नहीं।
कोई परिवार?
नहीं।
कोई लडकी?
राहुल कुछ पल चुप रहा.
उसके दिमाग में अचानक एक तस्वीर चमकी.
एक लडकी हंस रही थी.
उसके बाल हवा में उड रहे थे.
हाथ में लाल रंग की चूडियां थीं.
राहुल ने आंखें बंद कर लीं.
मुझे. कुछ दिखाई देता है।
अंजलि आगे बढी.
क्या?
एक लडकी।
अंजलि का दिल जोर से धडकने लगा.
कौन लडकी?
राहुल ने आंखें खोलीं.
पता नहीं।
अंजलि ने अपने आंसू रोकते हुए पूछा—
क्या उसका चेहरा दिखता है?
नहीं।
वो तुमसे कुछ कहती है?
राहुल ने माथा पकड लिया.
कुछ सेकंड तक वह दर्द में बैठा रहा.
फिर अचानक उसके मुंह से एक शब्द निकला—
मत जाओ.
अंजलि की आंखों से आंसू निकल पडे.
यही तो वह बात थी.
जो उसने राहुल से छह साल पहले आखिरी बार कही थी.
मत जाओ राहुल. मुझे छोडकर मत जाओ।
राहुल ने अचानक आंखें खोल दीं.
किसी ने मुझे यही कहा था।
अंजलि का दिल जैसे रुक गया.
किसने?
राहुल ने उसकी तरफ देखा.
मुझे नहीं पता।
अंजलि कुछ बोल नहीं पाई.
उसके पिता ने तुरंत बात बदल दी.
बस बहुत हो गया. इसे आराम करने दो।
राहुल उठने लगा.
लेकिन उसके पिता ने अंजलि को अलग बुलाया.
मेरे साथ बाहर आओ।
अंजलि कमरे से बाहर आई.
उसके पिता ने धीमी आवाज में कहा—
इसे यहाँ ज्यादा दिन मत रखना।
क्यों?
क्योंकि हम इसके बारे में कुछ नहीं जानते।
लेकिन इसने मेरी जान बचाई है।
अंजलि, हर एहसान का बदला घर में किसी अजनबी को जगह देकर नहीं चुकाया जाता।
वो अजनबी नहीं है।
अंजलि के मुंह से अचानक निकल गया.
उसके पिता ने उसे घूरकर देखा.
क्या मतलब?
अंजलि चुप हो गई.
वह खुद नहीं जानती थी कि वह राहुल को अजनबी क्यों नहीं मान पा रही थी.
क्योंकि उसका चेहरा राहुल का था.
उसकी आवाज राहुल जैसी थी.
उसकी आंखें राहुल जैसी थीं.
और सबसे बडी बात.
उसका दिल अब भी कह रहा था—
ये वही राहुल है.
लेकिन अगर वही राहुल था.
तो छह साल तक वह कहाँ था?
और उसे कुछ याद क्यों नहीं था?
अंजलि रात में अपने कमरे में अकेली बैठी राहुल की पुरानी तस्वीर देखने लगी.
तस्वीर में राहुल मुस्कुरा रहा था.
उसने तस्वीर पर उंगली रखी.
तुम्हें सब कुछ भूल गया राहुल.
उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे.
लेकिन मुझे तुम्हारे साथ बिताया एक- एक पल याद है।
उसी वक्त बाहर कमरे में राहुल सोने की कोशिश कर रहा था.
अचानक उसे फिर वही सपना आया.
बारिश हो रही थी.
एक लडकी उसके सामने खडी थी.
उसके हाथ में लाल छतरी थी.
लडकी रो रही थी.
राहुल. वापस आना।
राहुल उसकी तरफ बढा.
तुम कौन हो?
लडकी ने कुछ कहने की कोशिश की.
लेकिन उसका चेहरा धुंधला था.
अचानक पीछे से किसी आदमी की आवाज आई—
इसे खत्म कर दो।
राहुल पलटा.
उसने एक काली कार देखी.
फिर—
धडाम!
तेज टक्कर की आवाज हुई.
राहुल चीखते हुए नींद से जाग गया.
उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा था.
अंजलि उसकी आवाज सुनकर कमरे में दौडी आई.
राहुल!
राहुल ने उसकी तरफ देखा.
कुछ पल तक वह उसे घूरता रहा.
फिर उसके मुंह से अचानक निकला—
अंजलि.
अंजलि की आंखें फैल गईं.
तुमने. मेरा नाम लिया?
राहुल खुद हैरान था.
मैंने. क्या कहा?
अंजलि उसके बिल्कुल पास आ गई.
तुमने मेरा नाम लिया राहुल!
राहुल ने आंखें बंद कर लीं.
उसके दिमाग में दर्द फिर उठने लगा.
और तभी उसे एक धुंधली तस्वीर दिखाई दी—
अंजलि उसकी बांह पकडे हुए थी.
दोनों बारिश में खडे थे.
और राहुल उससे कह रहा था—
मैं वापस जरूर आऊंगा।
अगले ही पल तस्वीर गायब हो गई.
राहुल ने आंखें खोल दीं.
अंजलि उसके सामने खडी थी.
लेकिन इस बार राहुल के चेहरे पर डर था.
अंजलि.
हाँ?
राहुल ने कांपती आवाज में पूछा—
मैं तुमसे पहले कब मिला था?
अंजलि के पास इस सवाल का जवाब था.
लेकिन वह जवाब राहुल की पूरी जिंदगी बदल सकता था.
और उसी रात.
अंजलि के पिता ने अपने फोन से एक नंबर मिलाया.
वो जिंदा है।
दूसरी तरफ से कुछ सेकंड खामोशी रही.
फिर आवाज आई—
तो अब उसे दोबारा गायब करना पडेगा।