एकतरफा प्यार है ये - भाग 1 Ankit Khatri द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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एकतरफा प्यार है ये - भाग 1

एक अनजान मुलाकात

शहर की भीड़ हमेशा की तरह अपने काम में व्यस्त थी।

सड़कों पर गाड़ियों का शोर था। लोग जल्दी-जल्दी अपने ऑफिस जा रहे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई अपने काम के लिए भाग रहा था।

लेकिन उसी भीड़ के बीच सड़क के किनारे एक आदमी चुपचाप बैठा था।

उसके कपड़े पुराने और गंदे थे। बाल बिखरे हुए थे और चेहरे पर इतनी घनी दाढ़ी और मूंछ थी कि उसकी असली शक्ल पहचानना मुश्किल था।

उसका नाम राहुल था।

लेकिन राहुल को खुद अपने बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं था।

उसे बस इतना पता था कि वह कई सालों से इसी शहर में अपनी जिंदगी किसी तरह गुजार रहा है।

कभी कोई खाना दे देता।

कभी कोई पैसे दे देता।

और कभी पूरा दिन बिना खाना खाए ही गुजर जाता।

राहुल ने सड़क की तरफ देखा।

उसकी आंखों में थकान थी।

वह धीरे से खुद से बोला,

“पता नहीं मैं कौन हूं... मेरा अपना कौन है... और मैं यहां कैसे पहुंचा?”

उसे इन सवालों का कोई जवाब नहीं मिलता था।

कुछ साल पहले उसकी याददाश्त चली गई थी।

उस दिन के बाद उसकी जिंदगी जैसे वहीं रुक गई थी।

उसे अपना घर याद नहीं था।

अपना परिवार याद नहीं था।

और सबसे बड़ी बात...

उसे अपना अतीत याद नहीं था।

लेकिन उसकी जिंदगी में एक नाम कहीं बहुत गहराई में छिपा हुआ था।

अंजलि।

कभी-कभी बिना वजह यह नाम उसके दिल में आता था।

लेकिन वह नहीं जानता था कि अंजलि कौन है।

वह उसके लिए इतनी खास क्यों थी।

और उसके नाम से उसके दिल को अजीब-सी बेचैनी क्यों होती थी।

---

दूसरी तरफ शहर के एक बड़े घर से अंजलि अपनी कार में निकली।

अंजलि एक समझदार और शांत लड़की थी।

उसके पिता शहर के बड़े बिजनेसमैन थे।

अंजलि की जिंदगी में पैसे और सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी।

लेकिन उसके दिल में एक खालीपन था।

वह खालीपन कई सालों से था।

उस खालीपन का नाम था...

राहुल।

अंजलि ने राहुल को कभी भुलाया नहीं था।

वह उसके बचपन से ही बहुत करीब था।

दोनों एक-दूसरे को चाहते थे।

लेकिन अंजलि के पिता को उनका रिश्ता बिल्कुल पसंद नहीं था।

उन्हें लगता था कि राहुल उनकी बेटी के लायक नहीं है।

फिर एक दिन राहुल अचानक उसकी जिंदगी से गायब हो गया।

अंजलि ने उसे बहुत ढूंढा।

लेकिन उसे सिर्फ एक खबर मिली।

राहुल अब इस दुनिया में नहीं रहा।

उस दिन अंजलि पूरी तरह टूट गई थी।

समय गुजरता गया, लेकिन वह राहुल को अपने दिल से निकाल नहीं पाई।

आज भी उसके कमरे में राहुल की कुछ पुरानी तस्वीरें रखी थीं।

वह अक्सर उन्हें देखकर चुपचाप रोती थी।

---

अंजलि की कार एक सुनसान सड़क के पास पहुंची।

अचानक दो बाइक उसके सामने आकर रुक गईं।

ड्राइवर ने तुरंत ब्रेक लगाया।

“मैडम!”

अंजलि घबरा गई।

बाइक से तीन लड़के नीचे उतरे।

उनमें से एक ने कार का दरवाजा खोलने की कोशिश की।

अंजलि डर गई।

“तुम लोग कौन हो?”

लड़का हंसते हुए बोला,

“बहुत सवाल करती हो। चलो हमारे साथ।”

अंजलि ने दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया।

“मुझे जाने दो!”

लेकिन उन लड़कों ने कार को घेर लिया।

अंजलि ने मदद के लिए फोन निकालना चाहा।

तभी उसका फोन हाथ से गिर गया।

वह घबरा गई।

उसी समय सड़क के दूसरी तरफ बैठा राहुल यह सब देख रहा था।

उसने कुछ पल तक उस तरफ देखा।

फिर धीरे से खड़ा हो गया।

उसके पास न कोई हथियार था और न कोई ताकत।

लेकिन किसी लड़की को मुसीबत में देखकर वह खुद को रोक नहीं पाया।

राहुल तेजी से उनकी तरफ बढ़ा।

“उसे छोड़ दो।”

तीनों लड़के उसकी तरफ देखने लगे।

एक लड़का हंस पड़ा।

“तू हमें रोकेगा?”

राहुल ने शांत आवाज में कहा,

“हां।”

अगले ही पल एक लड़के ने राहुल पर हमला कर दिया।

राहुल लड़खड़ाया लेकिन गिरा नहीं।

उसने खुद को संभाला और उस लड़के को पीछे धकेल दिया।

बाकी दोनों भी राहुल पर टूट पड़े।

कुछ देर तक सड़क पर लड़ाई होती रही।

राहुल को चोट लगी।

उसके चेहरे से खून निकलने लगा।

लेकिन वह पीछे नहीं हटा।

आखिरकार तीनों लड़के वहां से भाग गए।

अंजलि कुछ पल तक अपनी जगह पर खड़ी राहुल को देखती रही।

उसके दिल में अचानक एक अजीब-सी हलचल हुई।

उसे समझ नहीं आया कि इस अनजान आदमी को देखकर उसका दिल इतना बेचैन क्यों हो रहा है।

वह धीरे-धीरे राहुल के पास आई।

“आप ठीक हैं?”

राहुल ने उसकी तरफ देखा।

“हां... मैं ठीक हूं।”

अंजलि ने उसकी आंखों में देखा।

उसकी आंखें कुछ जानी-पहचानी लग रही थीं।

लेकिन चेहरे पर इतनी घनी दाढ़ी-मूंछ थी कि वह कुछ समझ नहीं पाई।

अंजलि ने पूछा,

“आपका नाम क्या है?”

राहुल कुछ सेकंड चुप रहा।

फिर बोला,

“राहुल।”

अंजलि का दिल अचानक जोर से धड़कने लगा।

राहुल।

वही नाम...

जिसे वह सालों से अपने दिल में संभालकर बैठी थी।

उसने कांपती आवाज में पूछा,

“क्या कहा आपने?”

राहुल ने फिर कहा,

“मेरा नाम राहुल है।”

अंजलि की आंखें नम होने लगीं।

लेकिन सामने खड़ा आदमी उसे पहचान नहीं रहा था।

उसकी हालत देखकर अंजलि को उस पर दया भी आई।

उसने धीरे से कहा,

“आप मेरे साथ चलिए।”

राहुल ने सिर हिलाया।

“नहीं मैडम, मैं आपके घर कैसे जा सकता हूं?”

अंजलि ने पहली बार उसे ध्यान से देखा।

“पता नहीं क्यों... लेकिन मुझे लगता है कि मैं आपको अकेला नहीं छोड़ सकती।”

राहुल कुछ नहीं बोला।

अंजलि ने कार का दरवाजा खोला।

“बैठिए।”

राहुल कार में बैठ गया।

अंजलि ड्राइविंग सीट पर बैठी।

लेकिन उसका पूरा ध्यान राहुल पर था।

वह बार-बार पीछे लगे शीशे से उसका चेहरा देख रही थी।

उसके दिल में एक ही सवाल घूम रहा था—

“क्या ये सच में वही राहुल है?”

कार घर की तरफ बढ़ रही थी।

और अंजलि के दिल में सालों बाद पहली बार एक उम्मीद जागी थी।

लेकिन राहुल के लिए यह सिर्फ एक अनजान लड़की की मदद थी।

उसे क्या पता था कि जिस लड़की की जान उसने आज बचाई है...

वही लड़की कभी उसकी पूरी दुनिया हुआ करती थी।

और अंजलि को अभी यह पता नहीं था कि उसकी जिंदगी में राहुल दोबारा लौट चुका है।

लेकिन इस बार राहुल उसे पहचानता नहीं था।