एकतरफा प्यार है ये - भाग 2 Ankit Khatri द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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एकतरफा प्यार है ये - भाग 2


अंजलि की कार शहर की सडकों पर तेजी से आगे बढ रही थी.

सडक पर गाडियों की भीड थी, लेकिन अंजलि का ध्यान सिर्फ पीछे बैठे राहुल पर था.

राहुल चुपचाप खिडकी से बाहर देख रहा था. उसके चेहरे पर चोट के निशान थे. कपडे पुराने थे और घनी दाढी- मूंछ के कारण उसका चेहरा पूरी तरह बदल चुका था.

अंजलि बार- बार कार के शीशे में उसका चेहरा देख रही थी.

उसका दिल कह रहा था कि इस आदमी से उसका कोई गहरा रिश्ता है.

लेकिन दिमाग कुछ समझ नहीं पा रहा था.

कुछ देर बाद अंजलि ने धीरे से पूछा,

आपको अपना घर याद है?

राहुल ने कुछ पल सोचा.

फिर धीरे से सिर हिला दिया.

नहीं।

आपके परिवार में कौन- कौन है?

राहुल ने फिर सोचने की कोशिश की.

उसकी आंखों में परेशानी दिखाई देने लगी.

मुझे नहीं पता।

अंजलि ने कार की रफ्तार थोडी कम कर दी.

आपको कुछ भी याद नहीं?

बस अपना नाम याद है. राहुल।

राहुल ने शांत आवाज में कहा.

अंजलि के हाथ स्टीयरिंग पर कस गए.

राहुल.

यह नाम सुनते ही उसके दिल में पुरानी यादें जाग गईं.

कभी राहुल उसके लिए सिर्फ एक नाम नहीं था.

वह उसकी पूरी दुनिया था.

वह राहुल के साथ घंटों बातें करती थी. छोटी- छोटी बातों पर उससे लडती थी और फिर खुद ही उसे मना लेती थी.

राहुल भी उससे बहुत प्यार करता था.

लेकिन उनकी जिंदगी में सब कुछ ठीक नहीं था.

अंजलि के पिता को उनका रिश्ता बिल्कुल पसंद नहीं था.

उन्होंने दोनों को अलग करने की पूरी कोशिश की थी.

फिर एक दिन राहुल अचानक उसकी जिंदगी से चला गया.

अंजलि ने उसे बहुत ढूंढा.

लेकिन उसे बताया गया कि राहुल अब इस दुनिया में नहीं रहा.

उस दिन के बाद अंजलि के दिल का एक हिस्सा हमेशा के लिए खाली हो गया.

आज वही नाम उसके सामने बैठा था.

लेकिन राहुल की आंखों में अंजलि के लिए पहचान का एक भी भाव नहीं था.

अंजलि ने मन ही मन कहा,

अगर तुम वही राहुल हो. तो तुम्हारे साथ क्या हुआ?

लेकिन उसने यह सवाल अपने तक ही रखा.

कुछ देर बाद कार एक बडे से घर के सामने जाकर रुकी.

अंजलि कार से उतरी और राहुल की तरफ देखते हुए बोली,

चलिए।

राहुल कुछ देर वहीं बैठा रहा.

फिर उसने पूछा,

मैडम. हम यहां क्यों आए हैं?

आपको चोट लगी है. पहले आपका इलाज होगा।

लेकिन मैं आपके घर कैसे आ सकता हूं?

अंजलि ने उसकी तरफ देखा.

आपने आज मेरी जान बचाई है. अगर आप वहां नहीं आते तो पता नहीं मेरे साथ क्या होता।

राहुल चुप हो गया.

अंजलि ने कहा,

इसलिए आज मेरी बात मान लीजिए।

राहुल धीरे से कार से उतर गया.

दोनों घर के अंदर चले गए.

घर बहुत बडा था.

राहुल ने चारों तरफ देखा.

इतना बडा घर देखकर वह थोडा असहज हो गया.

अंजलि समझ गई कि वह इस माहौल का आदी नहीं है.

आप आराम से बैठिए।

राहुल सोफे पर बैठ गया.

अंजलि ने घर के कर्मचारी से फर्स्ट एड बॉक्स मंगवाया.

फिर वह राहुल के सामने बैठ गई.

उसने राहुल के माथे की चोट साफ करनी शुरू की.

राहुल दर्द से थोडा सिकुडा.

अंजलि ने तुरंत पूछा,

दर्द हो रहा है?

थोडा।

थोडा?

अंजलि ने उसे घूरकर देखा.

इतनी चोट लगी है और आप कह रहे हैं थोडा?

राहुल हल्का- सा मुस्कुरा दिया.

आप बहुत डांटती हैं।

अंजलि का हाथ वहीं रुक गया.

एक पल के लिए वह राहुल को देखती रह गई.

उसे पुराना समय याद आ गया.

राहुल भी अक्सर उससे यही कहता था.

तुम मुझे बहुत डांटती हो।

और वह जवाब देती थी,

क्योंकि तुम मेरी बात कभी सुनते ही नहीं हो।

अंजलि की आंखें नम होने लगीं.

लेकिन उसने तुरंत अपनी भावनाओं को संभाल लिया.

दवा लगने दीजिए।

राहुल चुपचाप बैठा रहा.

चोट पर दवा लगाने के बाद अंजलि ने राहुल को पानी दिया.

राहुल ने पानी पिया और बोला,

मैडम, अब मैं चलता हूं।

अंजलि ने हैरानी से पूछा,

कहां जाएंगे?

राहुल चुप हो गया.

उसके पास कोई जवाब नहीं था.

अंजलि ने फिर पूछा,

आपके पास रहने के लिए जगह है?

राहुल ने नजरें झुका लीं.

नहीं।

खाने के लिए?

राहुल कुछ नहीं बोला.

उसकी खामोशी ही उसका जवाब थी.

अंजलि का दिल भर आया.

वह सोचने लगी कि कोई इंसान इतनी परेशानी में कैसे जी सकता है.

उसने धीरे से कहा,

आज रात आप यहीं रुकिए।

राहुल ने तुरंत उसकी तरफ देखा.

नहीं मैडम, मैं आपको परेशानी नहीं देना चाहता।

आप परेशानी नहीं हैं।

लेकिन.

कोई लेकिन नहीं।

अंजलि ने उसकी बात रोक दी.

जब तक आपको रहने की कोई अच्छी जगह नहीं मिल जाती, आप यहां रह सकते हैं।

राहुल कुछ देर उसे देखता रहा.

फिर बोला,

आप मेरे लिए इतना क्यों कर रही हैं?

अंजलि के पास इस सवाल का असली जवाब था.

क्योंकि तुम मेरे राहुल हो.

लेकिन वह यह बात कह नहीं सकती थी.

उसने बस इतना कहा,

क्योंकि आपने मेरी जान बचाई है।

राहुल ने सिर झुका लिया.

धन्यवाद।

अंजलि ने घर के एक खाली कमरे में राहुल के रहने का इंतजाम करवा दिया.

राहुल कमरे में गया.

वह कुछ देर तक चारों तरफ देखता रहा.

कमरे में एक बडा आईना लगा था.

वह आईने के सामने खडा हो गया.

उसने खुद को ध्यान से देखा.

घनी दाढी.

बडी मूंछ.

बिखरे बाल.

चेहरे पर थकान.

वह खुद को देखकर सोचने लगा,

मैं ऐसा कब से हूं?

उसने अपने चेहरे को हाथ से छुआ.

उसे कुछ याद नहीं आया.

उसने आंखें बंद कर लीं.

अचानक उसके दिमाग में एक धुंधली- सी तस्वीर आई.

एक लडकी उसके सामने खडी थी.

लडकी मुस्कुरा रही थी.

उसकी आवाज बहुत प्यारी थी.

राहुल. तुम हमेशा मेरे साथ रहोगे ना?

राहुल ने अचानक आंखें खोल दीं.

उसका सिर दर्द करने लगा.

वह कुछ देर तक अपना सिर पकडकर बैठा रहा.

वो लडकी कौन थी?

उसे चेहरा याद नहीं आया.

नाम याद नहीं आया.

बस उसके दिल में एक अजीब- सी हलचल होने लगी.

जैसे उस लडकी का उसके जीवन में बहुत बडा स्थान था.

दूसरी तरफ अंजलि अपने कमरे में पहुंची.

उसने अलमारी खोली.

अंदर से एक पुरानी फोटो निकाली.

फोटो में अंजलि और राहुल साथ खडे थे.

दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी.

अंजलि ने तस्वीर को हाथ में लेकर राहुल की तरफ देखा.

फिर उसने कमरे की खिडकी से बाहर देखा.

कुछ ही दूरी पर राहुल के कमरे की लाइट जल रही थी.

उसकी आंखों में आंसू आ गए.

तुम वापस आ गए राहुल।

वह धीरे से बोली.

लेकिन तुम मुझे पहचानते क्यों नहीं?

उसने फोटो को सीने से लगा लिया.

मैंने इतने साल तुम्हारा इंतजार किया।

उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे.

लोगों ने कहा था कि तुम मर चुके हो. लेकिन मेरा दिल कभी नहीं माना।

अंजलि कुछ देर तक रोती रही.

फिर उसने तस्वीर को वापस संभालकर रख दिया.

उसके मन में एक बात साफ थी.

अगर राहुल सच में वही है.

तो वह उसे दोबारा अकेला नहीं छोडेगी.

चाहे उसे राहुल को सब कुछ दोबारा समझाना पडे.

चाहे उसे उसके दिल में अपना पुराना प्यार फिर से जगाना पडे.

वह पीछे नहीं हटेगी.

सुबह होने वाली थी.

अंजलि पूरी रात ठीक से सो नहीं पाई.

उसके मन में राहुल ही था.

सुबह वह राहुल के कमरे के बाहर पहुंची.

दरवाजा खुला था.

राहुल आईने के सामने खडा था.

वह अपनी दाढी को देख रहा था.

अंजलि कुछ पल दरवाजे पर खडी रही.

फिर उसने पूछा,

आपने कभी अपनी दाढी कटवाने के बारे में सोचा है?

राहुल ने पीछे मुडकर देखा.

बहुत समय हो गया।

अंजलि ने कहा,

अगर आप चाहें तो आज शेव करवा सकते हैं।

राहुल मुस्कुराया.

ठीक है मैडम।

अंजलि का दिल तेजी से धडकने लगा.

उसे खुद नहीं पता था कि वह इतनी बेचैन क्यों हो रही है.

लेकिन उसके दिल में एक उम्मीद पैदा हो चुकी थी.

आज राहुल की घनी दाढी हटने वाली थी.

और अंजलि पहली बार उसके असली चेहरे को देखने वाली थी.

वह चेहरा.

जिसे उसने सालों पहले अपने दिल में बसाया था.

अंजलि ने मन ही मन कहा,

राहुल. अगर तुम सच में वही हो, तो आज मुझे मेरा प्यार वापस मिल जाएगा।

लेकिन राहुल के लिए यह सिर्फ दाढी कटवाने की एक छोटी- सी बात थी.

उसे क्या पता था कि कुछ घंटों बाद.

एक चेहरा उसकी पूरी जिंदगी बदलने वाला था.