एकतरफा प्यार है ये - भाग 3 Ankit Khatri द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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एकतरफा प्यार है ये - भाग 3

सुबह की हल्की धूप खिडकी से कमरे के अंदर आ रही थी.

अंजलि रातभर ठीक से सो नहीं पाई थी.

उसके दिमाग में सिर्फ राहुल था.

कल तक उसके लिए राहुल सिर्फ एक पुरानी याद था.

एक ऐसा इंसान जिसे वह अपनी जिंदगी से खो चुकी थी.

लेकिन कल अचानक एक आदमी उसकी जिंदगी में आया था.

उसने उसका नाम बताया था—राहुल.

और सबसे अजीब बात यह थी कि उस आदमी को देखकर अंजलि के दिल में एक अजीब- सा अपनापन महसूस हो रहा था.

वह खुद नहीं समझ पा रही थी कि ऐसा क्यों हो रहा है.

अंजलि अपने कमरे से बाहर आई.

उसकी नजर राहुल पर पडी.

राहुल आंगन में बैठा चुपचाप चाय पी रहा था.

अंजलि कुछ कदम दूर खडी होकर उसे देखने लगी.

राहुल ने उसे देखा और मुस्कुराकर कहा,

गुड मॉर्निंग, मैडम।

अंजलि भी हल्का- सा मुस्कुराई.

गुड मॉर्निंग।

राहुल ने चाय का कप नीचे रखा.

आप इतनी सुबह उठ गईं?

अंजलि ने कहा,

मैं रोज जल्दी उठती हूं।

राहुल हंसते हुए बोला,

कल तो आप काफी परेशान थीं।

अंजलि कुछ पल चुप रही.

फिर बोली,

आपकी वजह से नहीं. आपकी हालत देखकर परेशान थी।

राहुल ने अपनी तरफ देखा.

मेरी हालत तो ऐसी ही है।

अंजलि ने उसकी आंखों में देखा.

लेकिन हमेशा ऐसी नहीं रहनी चाहिए।

राहुल कुछ नहीं बोला.

अंजलि ने नाश्ता तैयार करवाया.

उसने राहुल को भी खाने के लिए बुलाया.

राहुल थोडा झिझका.

मैडम, मैं यहां बैठकर कैसे खा सकता हूं?

अंजलि ने कहा,

क्यों नहीं?

मैं इस घर का हिस्सा तो हूं नहीं।

अंजलि ने उसकी तरफ देखा.

उसके मुंह से अचानक निकल गया,

आपको पता नहीं है कि आप मेरे लिए कितने खास हैं।

राहुल चौंक गया.

अंजलि भी अपनी बात सुनकर चुप हो गई.

कुछ सेकंड तक दोनों एक- दूसरे को देखते रहे.

अंजलि ने तुरंत बात बदल दी.

मेरा मतलब. आपने मेरी जान बचाई है।

राहुल ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,

समझ गया।

लेकिन अंजलि के दिल में एक अलग ही बात चल रही थी.

काश मैं तुम्हें बता पाती कि तुम मेरे लिए सिर्फ मेरी जान बचाने वाले इंसान नहीं हो।

नाश्ता करने के बाद राहुल बाहर जाने लगा.

अंजलि ने उसे रोक लिया.

कहां जा रहे हैं?

बस थोडा घूमने।

आपकी चोट अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई।

मैं ठीक हूं।

अंजलि ने उसकी तरफ देखा.

आप मेरी बात नहीं मानेंगे?

राहुल मुस्कुराया.

ठीक है मैडम, नहीं जाऊंगा।

अंजलि फिर मुस्कुरा दी.

राहुल ने उसे देखा और बोला,

आप जब मुस्कुराती हैं तो अच्छी लगती हैं।

अंजलि के दिल की धडकन बढ गई.

कभी राहुल भी उससे यही कहा करता था.

उसने धीरे से पूछा,

आपने ये बात पहले भी किसी से कही है?

राहुल ने सिर हिलाया.

पता नहीं।

मतलब?

मुझे कुछ याद नहीं है।

अंजलि चुप हो गई.

उसे फिर राहुल की याददाश्त का ख्याल आया.

वह मन ही मन सोचने लगी,

तुम्हें कुछ याद नहीं. लेकिन मुझे सब याद है।

कुछ देर बाद अंजलि राहुल को डॉक्टर के पास लेकर गई.

डॉक्टर ने राहुल की चोट देखी और कहा,

ज्यादा चिंता की बात नहीं है. कुछ दिन आराम कीजिए।

अंजलि ने पूछा,

और उनकी याददाश्त?

डॉक्टर ने राहुल की तरफ देखा.

कभी- कभी किसी चोट या मानसिक परेशानी के कारण इंसान को पुरानी बातें याद नहीं रहतीं. समय के साथ कुछ यादें वापस आ सकती हैं।

अंजलि की आंखों में उम्मीद आ गई.

क्या वह सब कुछ याद कर सकते हैं?

संभव है।

राहुल चुपचाप डॉक्टर की बात सुन रहा था.

वह धीरे से बोला,

अगर मुझे सब याद आ गया तो?

अंजलि ने उसकी तरफ देखा.

तो शायद आपको अपनी जिंदगी वापस मिल जाएगी।

राहुल मुस्कुराया.

और अगर मुझे कुछ याद ही नहीं आया?

अंजलि ने बिना सोचे जवाब दिया,

तो भी आप अकेले नहीं होंगे।

राहुल ने उसकी तरफ देखा.

कुछ पल तक वह कुछ नहीं बोला.

फिर धीरे से कहा,

आप बहुत अच्छी हैं।

अंजलि की आंखें नम हो गईं.

घर लौटते समय कार में दोनों चुप थे.

अंजलि गाडी चला रही थी.

राहुल बाहर देख रहा था.

कुछ देर बाद राहुल ने पूछा,

मैडम, आप मुझे इतनी मदद क्यों कर रही हैं?

अंजलि ने सडक पर नजर रखते हुए कहा,

क्योंकि आपको मदद की जरूरत है।

बस इतनी सी बात?

अंजलि कुछ पल चुप रही.

हां।

लेकिन उसके दिल में जवाब कुछ और था.

क्योंकि मैं तुम्हें प्यार करती हूं।

राहुल ने फिर पूछा,

क्या हम पहले कभी मिले हैं?

अंजलि का हाथ स्टीयरिंग पर रुक गया.

उसने धीरे से पूछा,

आपको ऐसा क्यों लगा?

राहुल ने कहा,

पता नहीं. आपके साथ बैठकर मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं आपको बहुत पहले से जानता हूं।

अंजलि की आंखों में आंसू आ गए.

उसने तुरंत दूसरी तरफ देखा ताकि राहुल उसके आंसू न देख सके.

उसके दिल ने कहा—

क्योंकि तुम मुझे जानते हो राहुल. बस तुम्हें याद नहीं।

शाम को अंजलि राहुल के लिए नए कपडे लेकर आई.

राहुल ने कपडे देखकर कहा,

ये मेरे लिए?

हां।

लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी।

आपके पुराने कपडे बहुत खराब हो चुके हैं।

राहुल ने कपडे हाथ में लिए.

धन्यवाद।

अंजलि ने कहा,

आप मुझे हर बात पर धन्यवाद मत कहा कीजिए।

राहुल हंस पडा.

तो क्या कहूं?

अंजलि कुछ पल सोचकर बोली,

कुछ मत कहिए।

राहुल मुस्कुरा दिया.

उसकी मुस्कान देखकर अंजलि के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई.

उसे लगा जैसे पुराने दिनों का राहुल उसके सामने वापस आ गया हो.

वही मुस्कान.

वही आंखें.

वही आवाज.

बस एक चीज बदल गई थी.

राहुल उसे भूल चुका था.

रात में अंजलि अपनी बालकनी में खडी थी.

राहुल नीचे बगीचे में बैठा था.

वह आसमान की तरफ देख रहा था.

अंजलि उसे दूर से देखती रही.

उसके दिल में प्यार और दर्द दोनों थे.

वह धीरे से बोली,

तुम्हें शायद कुछ याद नहीं राहुल. लेकिन मुझे तुम्हारी हर बात याद है।

उसने आंखें बंद कर लीं.

उसे अपने पुराने दिन याद आने लगे.

राहुल के साथ बिताया हर पल.

उसकी बातें.

उसकी हंसी.

उसका प्यार.

अंजलि के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई.

मैंने तुम्हें कभी नहीं भुलाया।

उसकी आंखों से एक आंसू निकल गया.

और अब जब तुम मेरे सामने वापस आ गए हो. मैं तुम्हें दोबारा खोना नहीं चाहती।

नीचे बैठे राहुल ने अचानक ऊपर देखा.

अंजलि को बालकनी में देखकर वह मुस्कुराया.

मैडम, आप सोई नहीं?

अंजलि ने आंसू छिपाते हुए कहा,

बस. नींद नहीं आ रही।

राहुल बोला,

आपको आराम करना चाहिए।

अंजलि ने मुस्कुराकर कहा,

आप भी।

राहुल वहां से चला गया.

अंजलि उसे जाते हुए देखती रही.

उसका दिल धीरे- धीरे एक फैसले पर पहुंच रहा था.

वह राहुल को उसकी पुरानी जिंदगी याद दिलाने की कोशिश नहीं करेगी.

वह उसे मजबूर नहीं करेगी.

वह बस उसके साथ रहेगी.

क्योंकि उसके लिए राहुल का वापस आना ही बहुत बडी खुशी थी.

लेकिन उसके दिल में एक डर भी था.

अगर राहुल को कभी कुछ याद नहीं आया तो?

क्या वह उसे फिर से प्यार कर पाएगा?

या अंजलि को जिंदगी भर अपने पुराने प्यार की यादों के साथ ही रहना पडेगा?

उसने आसमान की तरफ देखा.

और धीरे से कहा,

राहुल. तुम मुझे भूल गए हो, लेकिन मैं तुम्हें फिर से अपना बना कर रहूंगी।

अंजलि को अभी नहीं पता था कि आने वाले दिनों में उसकी जिंदगी में राहुल के साथ एक नई शुरुआत होने वाली थी.

और यह शुरुआत उसके पुराने प्यार को फिर से जिंदा करने वाली थी.