एकतरफा प्यार है ये - भाग 7 Ankit Khatri द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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एकतरफा प्यार है ये - भाग 7


सुबह के करीब पाँच बज रहे थे.

पूरी हवेली नींद में डूबी हुई थी.

लेकिन अंजलि की आंखों में नींद का नाम तक नहीं था.

वह बालकनी में अकेली बैठी थी.

उसके हाथ में एक पुरानी तस्वीर थी.

तस्वीर में दो लोग मुस्कुरा रहे थे.

एक राहुल.

और दूसरी अंजलि.

छह साल पहले की तस्वीर.

अंजलि ने तस्वीर को सीने से लगा लिया.

उसकी आंखों के सामने अचानक वही पुराना समय घूमने लगा.

छह साल पहले.

Collage का आखिरी साल था.

अंजलि हमेशा की तरह Collage के गेट से अंदर आई थी.

तभी पीछे से आवाज आई—

मैडम, इतनी जल्दी?

अंजलि ने पलटकर देखा.

राहुल हाथ में दो कप चाय लिए खडा था.

मैं तुम्हारी मैडम कब से हो गई?

जब से तुमने मुझे असाइनमेंट पूरा करने के लिए तीन दिन दिए और मैंने तीन घंटे में कर दिया।

अंजलि हंस पडी.

तीन घंटे में?

हाँ।

झूठ बोल रहे हो।

तो Check कर लो।

राहुल ने फाइल आगे कर दी.

अंजलि ने फाइल खोली.

सारा काम पूरा था.

तुमने सच में कर दिया?

मैंने कहा था ना।

तुम कभी- कभी अच्छे भी बन जाते हो।

कभी- कभी?

राहुल ने नाराज होने का नाटक किया.

अंजलि मुस्कुराने लगी.

यही छोटी- छोटी बातें.

धीरे- धीरे उनके बीच एक खूबसूरत रिश्ता बना रही थीं.

पहले दोस्ती हुई.

फिर दोनों एक- दूसरे के सबसे करीब हो गए.

और फिर.

कब दोस्ती प्यार में बदल गई.

दोनों को पता ही नहीं चला.

एक शाम Collage की छत पर दोनों बैठे थे.

सूरज डूब रहा था.

अंजलि चुपचाप आसमान देख रही थी.

राहुल ने पूछा—

क्या सोच रही हो?

कुछ नहीं।

झूठ।

तुम्हें कैसे पता?

क्योंकि जब तुम कुछ छिपाती हो ना, तो अपनी चूडी घुमाने लगती हो।

अंजलि ने तुरंत अपनी चूडी रोक दी.

तुम मुझे इतना जानते हो?

राहुल मुस्कुराया.

तुम्हें जितना तुम खुद को नहीं जानतीं, उससे ज्यादा।

अंजलि ने उसकी तरफ देखा.

अगर मैं तुम्हें हमेशा के लिए अपने साथ रखना चाहूं तो?

राहुल कुछ पल शांत रहा.

फिर उसने उसका हाथ पकड लिया.

तो मुझे भी कोई ऐतराज नहीं।

अंजलि की आंखों में खुशी आ गई.

लेकिन वह खुशी ज्यादा दिन तक नहीं टिकने वाली थी.

क्योंकि अंजलि के पिता को उनके रिश्ते के बारे में पता चल चुका था.

उस रात घर में पहली बार अंजलि और उसके पिता के बीच बडा झगडा हुआ.

तुम उस लडके से मिलना बंद करोगी।

क्यों?

क्योंकि वो तुम्हारे लायक नहीं है।

आपने उसे जाना भी नहीं।

मुझे जानने की जरूरत नहीं।

मैं राहुल से प्यार करती हूं।

कमरे में अचानक खामोशी छा गई.

अंजलि के पिता ने उसे घूरकर देखा.

तुम्हें अंदाजा भी है तुम क्या कह रही हो?

हाँ।

मैं इस रिश्ते को कभी मंजूरी नहीं दूंगा।

अंजलि ने आंखों में आंसू लिए कहा—

तो मुझे आपकी मंजूरी नहीं चाहिए।

उस रात अंजलि ने पहली बार अपने पिता के खिलाफ जाने का फैसला किया था.

उसे क्या पता था.

यही फैसला राहुल की जिंदगी पर भारी पडने वाला था.

वर्तमान

अंजलि की आंखों से आंसू गिरने लगे.

उसने तस्वीर को फिर देखा.

तुम्हें याद है राहुल?

उसकी आवाज कांप रही थी.

तुमने कहा था कि चाहे पूरी दुनिया हमारे खिलाफ हो जाए. तुम मेरा हाथ नहीं छोडोगे।

उसने आंखें बंद कर लीं.

फिर उसे वह आखिरी दिन याद आया.

बारिश बहुत तेज थी.

राहुल उससे मिलने आया था.

उसके चेहरे पर चिंता थी.

अंजलि, मुझे कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर जाना पडेगा।

क्यों?

कुछ जरूरी काम है।

कितने दिन?

राहुल ने मुस्कुराकर कहा—

बस कुछ दिन।

अंजलि ने उसका हाथ पकड लिया.

जल्दी वापस आना।

वादा।

पक्का?

पक्का।

राहुल ने उसकी हथेली पर अपनी उंगली से एक छोटा- सा दिल बनाया.

मैं वापस आऊंगा।

अंजलि मुस्कुराई.

मैं इंतजार करूंगी।

वह उनकी आखिरी मुलाकात थी.

उसके बाद.

राहुल वापस नहीं आया.

एक दिन.

दो दिन.

एक हफ्ता.

फिर एक महीना.

अंजलि लगातार उसका फोन मिलाती रही.

लेकिन फोन बंद था.

उसने उसके दोस्तों से पूछा.

किसी को कुछ पता नहीं था.

फिर एक रात.

एक खबर आई.

राहुल का एक्सीडेंट हो गया था.

कार खाई में गिर गई थी.

कार बुरी तरह जल गई थी.

लाश की पहचान मुश्किल थी.

लेकिन पुलिस को कुछ सामान मिला था.

राहुल का वॉलेट.

उसकी घडी.

और एक अंगूठी.

अंजलि को बताया गया—

राहुल मर चुका है.

उस दिन अंजलि की दुनिया खत्म हो गई थी.

वह कई दिनों तक कमरे से बाहर नहीं निकली.

उसने खाना छोड दिया.

लोग उसे समझाते रहे.

लेकिन वह सिर्फ एक ही बात कहती—

राहुल वापस आएगा।

सबने उसे समझाया कि अब राहुल नहीं आएगा.

लेकिन उसका दिल मानने को तैयार नहीं था.

छह साल.

छह साल तक अंजलि ने राहुल को अपनी यादों में जिंदा रखा.

और आज.

वही राहुल उसके सामने था.

जिंदा.

लेकिन उसे पहचानता तक नहीं था.

अंजलि ने आंखें खोलीं.

उसके सामने खडा राहुल उसे देख रहा था.

आप रो रही हैं?

अंजलि ने जल्दी से आंसू पोंछे.

नहीं।

आपकी आंखों में आंसू हैं।

बस. पुरानी बात याद आ गई थी।

राहुल कुछ पल उसे देखता रहा.

मेरी?

अंजलि चौंक गई.

क्या?

क्या आपको मेरे बारे में कुछ पता है?

अंजलि ने जवाब नहीं दिया.

राहुल उसके पास आया.

कल रात मुझे सपना आया था।

कैसा सपना?

मैं किसी लडकी के साथ था।

अंजलि का दिल तेजी से धडकने लगा.

कौन लडकी?

शायद. तुम।

अंजलि की सांस रुक गई.

राहुल ने अपनी जेब से एक छोटी- सी चीज निकाली.

एक पुरानी धातु की चाबी.

ये मुझे कल रात अपने पुराने कपडों में मिली।

अंजलि ने चाबी को देखा.

उसकी आंखें अचानक फैल गईं.

वह चाबी वह पहचानती थी.

क्योंकि छह साल पहले.

राहुल ने उसे यही चाबी दी थी.

ये. तुम्हारे पास कहाँ से आई?

राहुल ने कहा—

मुझे नहीं पता।

अंजलि ने कांपते हाथों से चाबी पकड ली.

उसके दिमाग में पुरानी याद बिजली की तरह कौंधी.

एक छोटा कमरा.

एक लोहे की अलमारी.

और राहुल की आवाज—

अगर कभी मैं तुम्हारे पास न रहूं, तो इसे खोलना।

अंजलि का चेहरा पीला पड गया.

राहुल ने पूछा—

इस चाबी से क्या खुलता है?

अंजलि ने उसकी तरफ देखा.

उसके पास जवाब था.

लेकिन वह जवाब छह साल पुराने उस राज तक पहुंचता था.

जिसे उसके पिता ने दुनिया से छिपाकर रखा था.

उसी समय नीचे से अंजलि के पिता की आवाज आई—

अंजलि!

अंजलि ने चाबी मुट्ठी में कस ली.

राहुल ने उसकी तरफ देखा.

क्या हुआ?

अंजलि ने पहली बार राहुल से एक बात छिपाई.

कुछ नहीं।

लेकिन उसके मन में सिर्फ एक सवाल था—

अगर राहुल सच में मर चुका था. तो उसकी ये चाबी छह साल बाद उसके पास कैसे आई?

और सबसे बडा सवाल—

उस रात राहुल के साथ असल में हुआ क्या था?