नामुमकिन इश्क - एपिसोड 36 kajal jha द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

नामुमकिन इश्क - एपिसोड 36

एपिसोड 36— पंद्रह साल पुरानी तस्वीर
गौरव का फोन कटने के बाद अर्जुन कुछ सेकंड तक बिल्कुल चुप खड़ा रहा।
उसके चेहरे पर पहली बार ऐसा भाव था, जिसे आयत ने पहले कभी नहीं देखा था।
वह हमेशा शांत रहता था। किसी भी मुश्किल परिस्थिति में उसका चेहरा ज्यादा नहीं बदलता था।
लेकिन इस वक्त...
उसकी आँखों में साफ बेचैनी थी।
आयत ने धीरे से पूछा,
"क्या हुआ, अर्जुन?"
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
कुछ पल के लिए उसे लगा कि उसे सब कुछ बता देना चाहिए।
लेकिन फिर उसके दिमाग में गौरव की कही बात घूम गई—
"फाइल में तुम्हारे परिवार का नाम लिखा है।"
वशिष्ठ परिवार।
उसका अपना परिवार।
और आयत...
इन दोनों का रिश्ता आखिर क्या था?
अर्जुन ने अपनी उलझन छिपाते हुए कहा,
"कुछ नहीं। मुझे हॉस्पिटल में एक जरूरी काम है।"
आयत ने उसकी आँखों में देखा।
"आप झूठ बोल रहे हैं।"
अर्जुन रुक गया।
आयत धीरे से बोली,
"जब आप परेशान होते हैं ना... तो आपकी आँखें बता देती हैं।"
अर्जुन हल्का-सा मुस्कुराया।
"तुम मुझे इतनी जल्दी पढ़ना सीख गई?"
आयत भी हल्का मुस्कुराई।
"शायद..."
कुछ पल दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर अर्जुन ने कहा,
"मैं वापस आकर तुमसे बात करूँगा।"
आयत ने सिर हिलाया।
"ठीक है।"
अर्जुन वहाँ से चला गया।
लेकिन जाते-जाते उसने एक बार पलटकर आयत को देखा।
उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि अगले कुछ घंटों में उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा राज़ उसके सामने आने वाला है।
रिकॉर्ड रूम में छुपा सच
अर्जुन तेजी से रिकॉर्ड रूम पहुँचा।
गौरव वहाँ पहले से मौजूद था।
उसके हाथ में एक पुरानी फाइल थी।
अर्जुन ने आते ही पूछा,
"कहाँ है?"
गौरव ने फाइल उसकी तरफ बढ़ा दी।
"यही है।"
अर्जुन ने फाइल खोली।
पहले पन्ने पर वही नाम था—
आयत खान।
उसके नीचे जन्म की तारीख।
फिर उसकी माँ का नाम।
लेकिन तीसरे पन्ने पर जो लिखा था...
उसे पढ़कर अर्जुन की आँखें कुछ पल के लिए स्थिर हो गईं।
"गार्जियन — वशिष्ठ परिवार।"
अर्जुन ने फाइल को दोबारा देखा।
"ये क्या है?"
गौरव ने कहा,
"मैंने भी पहली बार देखा तो यही सोचा।"
"इसका मतलब?"
"पता नहीं।"
अर्जुन ने अगला पन्ना पलटा।
वहाँ एक पुराने अस्पताल का नाम था।
"सेंट मेरीज़ चैरिटी हॉस्पिटल — लखनऊ।"
तारीख—
पंद्रह साल पहले।
अर्जुन के माथे पर बल पड़ गए।
"इस अस्पताल में..."
गौरव ने कहा,
"हाँ।"
"मेरे दादा का उस वक्त यहाँ कोई काम था?"
गौरव ने कहा,
"मुझे नहीं पता। लेकिन एक चीज और है।"
"क्या?"
गौरव ने फाइल के बीच से एक फोटो निकाली।
अर्जुन ने फोटो हाथ में ली।
फोटो पुरानी थी।
एक कमरे के बाहर कुछ लोग खड़े थे।
उनमें से एक आदमी को देखकर अर्जुन की आँखें फैल गईं।
वह उसके दादा के साथ काम करने वाले पुराने ट्रस्टी थे।
और उनके बगल में...
एक छोटी बच्ची थी।
अर्जुन ने फोटो को गौर से देखा।
"ये..."
गौरव ने धीरे से कहा,
"आयत।"
अर्जुन के हाथ से फोटो लगभग छूट गई।
"ये आयत है?"
"हाँ। मैंने रिकॉर्ड से उसका चेहरा मिलाया है।"
अर्जुन कुछ बोल नहीं पाया।
पंद्रह साल पहले आयत लखनऊ में थी।
लेकिन उसके पिता ने कहा था कि आयत बचपन से मुंबई में रही है।
तो फिर...
वह यहाँ क्यों थी?
एक और नाम
अर्जुन ने फोटो पलटकर देखा।
पीछे कुछ लिखा हुआ था।
स्याही काफी पुरानी हो चुकी थी।
लेकिन शब्द अभी भी पढ़े जा सकते थे।
"बच्ची को सुरक्षित रखना। किसी भी कीमत पर।"
नीचे सिर्फ दो अक्षर थे—
A.V.
गौरव ने पूछा,
"ये किसके initials हो सकते हैं?"
अर्जुन ने कुछ सोचकर कहा,
"अविनाश वशिष्ठ।"
गौरव चौंक गया।
"तुम्हारे दादा?"
अर्जुन ने धीरे से सिर हिलाया।
उसके चेहरे पर विश्वास और अविश्वास दोनों थे।
"अगर ये सच है... तो मेरे दादा आयत को जानते थे।"
"लेकिन क्यों?"
अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसी समय बाहर किसी के कदमों की आवाज़ आई।
दोनों तुरंत चुप हो गए।
दरवाजा थोड़ा खुला।
अर्जुन ने आगे बढ़कर दरवाजा खोला।
बाहर कोई नहीं था।
सिर्फ एक लिफाफा फर्श पर पड़ा था।
अर्जुन ने उसे उठाया।
उस पर लिखा था—
"अर्जुन वशिष्ठ के लिए।"
गौरव ने कहा,
"इसे मत खोल।"
अर्जुन ने लिफाफा खोल दिया।
अंदर एक छोटा-सा कागज था।
उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—
"जिस सच को तुम ढूँढ रहे हो, उसे जानने से पहले सोच लेना कि तुम किसका साथ दोगे—अपने परिवार का या आयत का।"
अर्जुन की मुट्ठी कस गई।
गौरव ने कहा,
"ये कोई तुम्हें डराने की कोशिश कर रहा है।"
अर्जुन ने कागज को देखते हुए कहा,
"नहीं।"
"तो?"
"उसे मेरे परिवार के बारे में पता है।"
आयत को मिला पुराना लॉकेट
उधर आयत अपने कमरे में वापस जा रही थी।
रास्ते में उसे अस्पताल की एक नर्स ने रोका।
"आप आयत खान हैं?"
"जी।"
नर्स ने अपनी जेब से एक छोटा-सा डिब्बा निकाला।
"ये आपके लिए है।"
आयत हैरान हो गई।
"मेरे लिए?"
"हाँ। किसी ने रिसेप्शन पर दिया था। कहा था कि आपको दे दूँ।"
नर्स वहाँ से चली गई।
आयत ने डिब्बा खोला।
अंदर एक पुराना लॉकेट था।
आयत ने उसे हाथ में लेते ही अजीब-सा महसूस किया।
उसे लगा जैसे यह चीज़ वह पहले भी देख चुकी है।
उसकी आँखों के सामने अचानक बचपन का एक धुंधला दृश्य आया।
एक महिला उसे गोद में लिए हुए थी।
महिला रो रही थी।
और उसके गले में...
बिल्कुल ऐसा ही लॉकेट था।
आयत ने घबराकर लॉकेट नीचे गिरा दिया।
"मम्मी..."
उसके मुँह से अपने आप निकला।
उसी वक्त पीछे से आवाज़ आई—
"आयत?"
आयत ने पलटकर देखा।
अर्जुन खड़ा था।
उसकी नजर जमीन पर पड़े लॉकेट पर गई।
वह तुरंत उसे पहचान गया।
वही निशान।
आधा चाँद और उसके बीच तीर।
अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।
"ये तुम्हें कहाँ मिला?"
आयत ने कहा,
"अभी किसी ने मुझे दिया।"
अर्जुन ने लॉकेट उठाया।
"किसने?"
"मुझे नहीं पता।"
अर्जुन ने लॉकेट को गौर से देखा।
उसके दिमाग में रिकॉर्ड रूम वाला आदमी घूम गया।
"आयत, इसे अभी अपने पास मत रखना।"
"क्यों?"
"बस मेरी बात मानो।"
आयत ने गंभीर होकर पूछा,
"अर्जुन, मुझे लगता है आप मुझसे बहुत कुछ छिपा रहे हैं।"
अर्जुन चुप हो गया।
आयत ने कहा,
"अगर इस लॉकेट का मेरे अतीत से कोई संबंध है, तो मुझे जानना है।"
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
"मुझे भी।"
रोहन ने देख लिया
कॉरिडोर के दूसरे छोर पर खड़ा रोहन दोनों को देख रहा था।
उसकी नजर लॉकेट पर पड़ी।
उसका चेहरा अचानक बदल गया।
"ये लॉकेट..."
समर ने पूछा,
"क्या हुआ?"
रोहन ने तुरंत कहा,
"कुछ नहीं।"
लेकिन उसके मन में एक पुरानी बात घूमने लगी।
उसे याद आया कि बचपन में उसके पिता ने एक बार यही निशान एक पुराने दस्तावेज़ पर देखा था।
उस दिन उसके पिता ने कहा था—
"इस निशान से दूर रहना।"
रोहन ने कभी उसका मतलब नहीं समझा था।
लेकिन आज वही निशान आयत के हाथ में था।
उसने तुरंत फोन निकाला और एक नंबर मिलाया।
"मुझे तुमसे मिलना है।"
दूसरी तरफ से आवाज आई,
"क्यों?"
रोहन ने कहा,
"आयत के पास वो निशान है।"
कुछ पल खामोशी रही।
फिर आवाज आई—
"तो अब समय आ गया है।"
रोहन ने पूछा,
"किस बात का?"
"सच सामने आने का।"
रात का सबसे बड़ा खुलासा
रात में अर्जुन अपने कमरे में बैठा था।
उसने अपने दादा की पुरानी अलमारी खोली।
उसे उम्मीद थी कि शायद वहाँ उस पुराने अस्पताल या आयत से जुड़ी कोई जानकारी मिले।
काफी देर तक पुराने दस्तावेज़ देखने के बाद उसे एक डायरी मिली।
डायरी के पहले पन्ने पर लिखा था—
"अविनाश वशिष्ठ — निजी डायरी"
अर्जुन ने डायरी खोली।
कई पन्नों पर परिवार और बिजनेस से जुड़ी बातें थीं।
लेकिन लगभग पंद्रह साल पुराने एक पन्ने पर उसकी नजर टिक गई।
उसमें लिखा था—
"आज एक बच्ची मेरी जिंदगी में आई है। उसका नाम आयत है। उसकी माँ ने मुझसे सिर्फ एक वादा लिया है—उसे सुरक्षित रखना।"
अर्जुन की साँस रुक गई।
उसने अगली लाइन पढ़ी।
"अगर कभी रहमान वापस आया, तो बच्ची को उसके हवाले मत करना। क्योंकि रहमान जिस चीज़ की तलाश में है, वह सिर्फ बच्ची नहीं है..."
अर्जुन ने जल्दी से अगला पन्ना पलटा।
लेकिन वह पन्ना फाड़ दिया गया था।
उसने डायरी बंद कर दी।
उसका दिमाग सुन्न हो चुका था।
रहमान... आयत... उसके दादा... और वह रहस्यमयी निशान।
इन सबके बीच कोई बहुत पुराना रिश्ता था।
और अब अर्जुन को सिर्फ एक बात समझ आ रही थी—
आयत की जिंदगी में जो राज़ छिपा था, वह उसके अपने परिवार तक पहुँच चुका था।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी था—
आयत की माँ ने मरने से पहले अर्जुन के दादा से आखिर ऐसा कौन-सा वादा लिया था, जिसे निभाने के लिए पूरी सच्चाई पंद्रह साल तक छिपाई गई?
और अगर वह सच सामने आया...
तो क्या अर्जुन और आयत का रिश्ता उसी पल खत्म हो जाएगा?
क्रमशः...