एपिसोड 35— रहमान खान का सच
इंस्पेक्टर के मुँह से "रहमान खान" नाम सुनते ही आयत जैसे अपनी जगह पर जम गई।
उसके चेहरे पर सवाल साफ दिखाई दे रहे थे।
वह धीरे से अर्जुन के पास आई।
"अर्जुन... रहमान खान कौन हैं?"
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा, लेकिन उसके पास भी इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।
इंस्पेक्टर ने कहा,
"हमें अभी पूरी जानकारी नहीं मिली है। लेकिन इतना जरूर पता चला है कि रहमान खान का नाम करीब पंद्रह साल पुराने एक केस से जुड़ा हुआ है।"
आयत की धड़कन अचानक तेज हो गई।
"पंद्रह साल?"
"हाँ।"
"और मेरा जन्म भी लगभग उतने ही साल पहले हुआ था..."
इंस्पेक्टर कुछ कह पाते, उससे पहले अर्जुन ने आयत की तरफ देखा।
"तुम अभी अपने रूम में जाओ।"
आयत ने तुरंत सिर हिला दिया।
"नहीं। इस बार नहीं।"
अर्जुन थोड़ा हैरान हुआ।
आयत की आवाज़ काँप रही थी, लेकिन उसके अंदर एक अजीब-सी मजबूती थी।
"अगर बात मेरे परिवार की है, तो मुझे जानने का हक है।"
अर्जुन चुप हो गया।
आयत ने इंस्पेक्टर की तरफ देखा।
"आपको रहमान खान के बारे में जो भी पता है... मुझे बताइए।"
इंस्पेक्टर ने गहरी साँस ली।
"हमें जितना पता चला है, उसके मुताबिक रहमान खान करीब पंद्रह साल पहले लखनऊ में रहते थे।"
आयत की आँखें फैल गईं।
"लखनऊ में?"
"हाँ।"
"लेकिन मेरे पापा तो कहते हैं कि मैं बचपन से मुंबई में रही हूँ।"
इंस्पेक्टर ने कहा,
"यही बात इस मामले को रहस्यमय बना रही है।"
आयत कुछ बोल नहीं पाई।
एक पुरानी तस्वीर
इंस्पेक्टर ने अपनी फाइल से एक पुरानी तस्वीर निकाली।
तस्वीर काफी पुरानी थी।
उसमें एक आदमी खड़ा था।
हल्की दाढ़ी, गंभीर चेहरा और आँखों में अजीब-सी सख्ती।
आयत ने तस्वीर को देखते ही अपना हाथ मुँह पर रख लिया।
"ये..."
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
"क्या हुआ?"
आयत की आँखों में आँसू आ गए।
"मुझे नहीं पता ये कौन हैं..."
वह कुछ पल तस्वीर को देखती रही।
फिर अचानक बोली,
"लेकिन मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैंने इन्हें पहले कहीं देखा है।"
इंस्पेक्टर ने पूछा,
"कहाँ?"
आयत ने अपना सिर पकड़ लिया।
"मुझे याद नहीं..."
अचानक उसके दिमाग में एक धुंधली-सी तस्वीर चमकी।
एक छोटा-सा कमरा...
एक आदमी उसे गोद में लिए हुए...
और कोई महिला रोते हुए कह रही थी—
"मेरी बच्ची को मुझसे दूर मत करो..."
आयत ने आँखें बंद कर लीं।
"आह..."
अर्जुन तुरंत उसके पास आया।
"आयत!"
वह लड़खड़ाई तो अर्जुन ने उसे संभाल लिया।
"तुम ठीक हो?"
आयत ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे।
"मुझे... कुछ याद आया।"
"क्या?"
"एक आदमी..."
"कौन?"
"शायद... यही।"
उसने तस्वीर की तरफ इशारा किया।
अर्जुन की बेचैनी
अर्जुन का दिल तेजी से धड़कने लगा।
अगर आयत की याद सच थी, तो रहमान खान सिर्फ कोई अनजान आदमी नहीं था।
उसका आयत के बचपन से संबंध था।
लेकिन कैसे?
और क्यों?
अर्जुन ने इंस्पेक्टर से पूछा,
"रहमान खान अभी कहाँ है?"
इंस्पेक्टर ने कहा,
"पुलिस उसे तलाश रही है।"
"क्या वो आदित्य के साथ था?"
"हाँ। लेकिन गोदाम से निकलते समय वो भाग गया।"
अर्जुन की आँखों में गुस्सा आ गया।
"मतलब वो जानता है कि हम उसके पीछे हैं।"
इंस्पेक्टर ने सिर हिलाया।
"और शायद अब वो आयत तक पहुँचने की कोशिश करेगा।"
अर्जुन का चेहरा तुरंत सख्त हो गया।
"ये नहीं होगा।"
आयत ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखों में डर था।
अर्जुन ने धीरे से कहा,
"जब तक मैं हूँ, कोई तुम्हारे पास नहीं आएगा।"
इस बार आयत ने कुछ नहीं कहा।
बस उसे देखती रही।
दूसरी तरफ — रोहन
हॉस्पिटल के पीछे की पार्किंग में रोहन अकेला खड़ा था।
उसका फोन लगातार बज रहा था।
उसने कॉल उठाई।
"हाँ?"
दूसरी तरफ से आवाज़ आई—
"तुमने आयत को लेकर बहुत बड़ी गलती कर दी।"
रोहन चिढ़कर बोला,
"मैंने क्या किया?"
"तुमने उसका नाम उस आदमी तक पहुँचा दिया।"
रोहन का चेहरा बदल गया।
"तुम रहमान की बात कर रहे हो?"
कुछ पल खामोशी रही।
फिर आवाज़ आई—
"अब तुम्हें इस मामले से दूर रहना होगा।"
रोहन ने गुस्से में कहा,
"मैं किसी के आदेश पर नहीं चलता।"
"रोहन..."
"मुझे आयत चाहिए।"
दूसरी तरफ से ठंडी हँसी सुनाई दी।
"तुम्हें लगता है ये सिर्फ एक लड़की का मामला है?"
रोहन चुप हो गया।
"अगर तुम्हें सच पता चल गया, तो तुम खुद आयत से दूर भागोगे।"
कॉल कट गया।
रोहन के चेहरे पर उलझन साफ थी।
वह खुद से बोला,
"आखिर आयत में ऐसा क्या है?"
आयत और उसके पिता
शाम को आयत ने फिर अपने पिता को फोन किया।
इस बार उसकी आवाज़ में पहले वाली मिठास नहीं थी।
"पापा, मुझे आपसे सच जानना है।"
दूसरी तरफ खामोशी थी।
"आप रहमान खान को जानते हैं?"
फोन के दूसरी तरफ अचानक साँसों की आवाज़ तेज हो गई।
आयत समझ गई।
"आप उन्हें जानते हैं..."
उसके पिता ने धीमे स्वर में कहा,
"आयत, ये सब बातें तुम्हारे लिए ठीक नहीं हैं।"
"क्यों?"
"क्योंकि तुम्हारी जिंदगी बहुत मुश्किल से सामान्य हुई है।"
आयत की आँखों में आँसू आ गए।
"मेरी जिंदगी सामान्य थी ही कब, पापा?"
उसके पिता चुप रहे।
आयत ने कहा,
"आज मुझे एक पुरानी फाइल मिली। उसमें मेरा नाम था। मेरी माँ का नाम था। और अब रहमान खान का नाम भी सामने आ रहा है। आप मुझसे क्या छिपा रहे हैं?"
कुछ सेकंड बाद उसके पिता ने कहा,
"तुम्हें अपनी माँ के बारे में जितना बताया गया है... उससे ज्यादा जानने की जरूरत नहीं है।"
"तो आप कुछ छिपा रहे हैं?"
"आयत..."
"पापा!"
उसकी आवाज़ टूट गई।
"अगर मेरे बारे में कोई सच्चाई है तो मुझे जानना है। मैं बच्ची नहीं हूँ।"
उसके पिता ने बहुत धीमे स्वर में कहा,
"अगर तुमने सच जान लिया... तो शायद तुम हमें कभी माफ़ नहीं करोगी।"
आयत का दिल बैठ गया।
"क्यों?"
लेकिन कॉल कट चुका था।
अर्जुन के सामने आयत
कुछ देर बाद अर्जुन ने आयत को हॉस्पिटल के गार्डन में अकेले बैठे देखा।
वह उसके पास जाकर बैठ गया।
कुछ देर दोनों चुप रहे।
फिर आयत ने कहा,
"अर्जुन..."
"हूँ?"
"क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि आपका अपना परिवार आपसे कोई बहुत बड़ी बात छिपा रहा हो?"
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
"हाँ।"
आयत ने हैरानी से पूछा,
"आपको?"
अर्जुन हल्का-सा मुस्कुराया।
"हर परिवार में कुछ ऐसी बातें होती हैं जिन्हें लोग बच्चों से छिपाकर रखते हैं।"
"लेकिन अगर वही बात हमारी पूरी जिंदगी बदल दे तो?"
अर्जुन कुछ नहीं बोला।
आयत ने उसकी तरफ देखा।
"मुझे डर लग रहा है।"
अर्जुन ने धीरे से कहा,
"डरने की जरूरत नहीं है।"
"आपको कैसे पता कि सब ठीक होगा?"
अर्जुन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
"क्योंकि मैं तुम्हारे साथ हूँ।"
आयत की आँखें नम हो गईं।
"आप मेरे लिए इतना क्यों करते हैं?"
अर्जुन इस बार मुस्कुराया नहीं।
उसने बस कहा,
"शायद... मुझे खुद नहीं पता।"
दोनों कुछ देर एक-दूसरे को देखते रहे।
उनके बीच का रिश्ता अब दोस्ती से कहीं आगे निकल चुका था।
लेकिन दोनों में से कोई भी अभी उस रिश्ते को नाम देने की हिम्मत नहीं कर रहा था।
तभी आया एक फोन
अर्जुन का फोन बजा।
उसने कॉल उठाई।
गौरव की आवाज़ थी—
"अर्जुन! तुरंत रिकॉर्ड रूम में आ।"
"क्या हुआ?"
"मुझे कुछ मिला है।"
"क्या?"
"वही पुरानी फाइल... उसमें एक और नाम है।"
अर्जुन तुरंत खड़ा हो गया।
"किसका?"
गौरव कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला—
"वशिष्ठ परिवार का।"
अर्जुन के कदम वहीं रुक गए।
"क्या?"
"हाँ... फाइल में तुम्हारे परिवार का नाम लिखा है।"
आयत ने अर्जुन का चेहरा देखा।
"क्या हुआ?"
अर्जुन के पास जवाब नहीं था।
उसने फोन काट दिया।
उसके सामने अब सिर्फ़ एक सवाल था—
आयत के अतीत और वशिष्ठ परिवार का क्या संबंध था?
क्या रहमान खान सिर्फ आयत के अतीत का हिस्सा था?
या फिर...
पंद्रह साल पहले हुई उस घटना में वशिष्ठ परिवार भी शामिल था?
अर्जुन ने पहली बार महसूस किया कि जिस सच की तलाश वह आयत को बचाने के लिए कर रहा था...
शायद वही सच एक दिन उसे आयत के सामने खड़ा कर देगा।
और उस दिन उसे फैसला करना होगा—
अपने परिवार का साथ दे... या उस लड़की का, जो धीरे-धीरे उसके दिल का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुकी थी।
क्रमशः...