एपिसोड 34— आयत की असली पहचान का रहस्य
रात के करीब ग्यारह बज चुके थे।
सिटी हॉस्पिटल का ज्यादातर हिस्सा अब शांत हो चुका था। दिनभर मरीजों और मेडिकल स्टूडेंट्स से भरे रहने वाले कॉरिडोर में अब सिर्फ कुछ नर्सों के कदमों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
लेकिन अर्जुन के दिमाग में तूफान मचा हुआ था।
उसके हाथ में वही पुरानी फाइल थी।
"आयत खान की असली पहचान अभी तक दुनिया से छिपी हुई है।"
अर्जुन बार-बार उस लाइन को पढ़ रहा था।
उसके लिए सबसे मुश्किल बात यह थी कि जिस लड़की को वह पिछले कुछ दिनों से धीरे-धीरे समझने लगा था, उसके बारे में शायद उसे कुछ भी पता नहीं था।
आयत की सादगी...
उसकी शांत मुस्कान...
उसका अपने परिवार के लिए सम्मान...
सब कुछ अचानक एक सवाल बन चुका था।
आखिर आयत कौन थी?
अर्जुन ने फाइल का अगला पन्ना पलटा।
वहाँ आयत की जन्मतिथि लिखी थी।
उसके नीचे एक और नाम था।
"माता का नाम — नूरजहाँ खान।"
अर्जुन रुक गया।
उसने अगला पन्ना पलटा।
लेकिन वह पन्ना फटा हुआ था।
सिर्फ नीचे एक शब्द बचा था—
"रहमान..."
अर्जुन ने भौंहें सिकोड़ लीं।
"ये क्या है?"
उसी समय पीछे से आवाज़ आई—
"अर्जुन?"
अर्जुन ने तुरंत पलटकर देखा।
गौरव खड़ा था।
"तू अभी तक यहाँ क्या कर रहा है?"
अर्जुन ने फाइल बंद कर दी।
"कुछ नहीं।"
गौरव ने उसकी तरफ देखा।
"तू मुझसे कुछ छिपा रहा है।"
अर्जुन कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने फाइल उसकी तरफ बढ़ा दी।
गौरव ने फाइल खोली और कुछ पन्ने पढ़ते ही उसके चेहरे के भाव बदल गए।
"ये आयत की फाइल है?"
"हाँ।"
"लेकिन इसमें तो..."
"मुझे पता है।"
गौरव ने धीरे से पूछा,
"क्या आयत को इसके बारे में पता है?"
अर्जुन ने सिर हिलाया।
"नहीं।"
"तो फिर उसे बताना चाहिए।"
अर्जुन ने तुरंत कहा,
"अभी नहीं।"
"क्यों?"
"क्योंकि हमारे पास आधी जानकारी है। आधी सच्चाई किसी को बताना उसे और परेशान करना होगा।"
गौरव चुप हो गया।
अर्जुन ने फाइल वापस लेते हुए कहा,
"पहले मुझे पता करना है कि ये फाइल यहाँ किसने रखी और इस 'रहमान' नाम का इस कहानी से क्या संबंध है।"
दूसरी तरफ आयत
अपने कमरे में आयत सोने की कोशिश कर रही थी।
लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी।
बार-बार उसे अर्जुन का चेहरा याद आ रहा था।
उसकी आवाज़...
"जब तक मैं हूँ, कोई तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाएगा।"
आयत के होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई।
लेकिन अगले ही पल उसे दिन की घटनाएँ याद आ गईं।
पुरानी मेडिकल फाइल।
उसकी जन्मतिथि।
और अर्जुन का अचानक उससे कुछ छिपाने लगना।
आयत उठकर खिड़की के पास चली गई।
"आखिर मेरे साथ ऐसा क्या हुआ था, जो मुझे खुद नहीं पता?"
उसी समय उसके फोन पर कॉल आया।
स्क्रीन पर नाम देखकर आयत मुस्कुरा दी।
पापा।
उसने तुरंत कॉल उठाया।
"हैलो, पापा।"
दूसरी तरफ से उसके पिता की आवाज़ आई।
"कैसी हो बेटा?"
"मैं ठीक हूँ। आप कैसे हैं?"
कुछ सामान्य बातें हुईं।
फिर आयत ने अचानक पूछा,
"पापा... मैं आपसे एक बात पूछूँ?"
"हाँ, पूछो।"
"मेरे बचपन के बारे में आपको सब कुछ याद है ना?"
दूसरी तरफ कुछ सेकंड के लिए खामोशी छा गई।
आयत ने तुरंत पूछा,
"पापा?"
उसके पिता ने अपनी आवाज़ संभालते हुए कहा,
"हाँ बेटा... क्यों?"
"बस ऐसे ही। आज हॉस्पिटल में मेरा एक पुराना मेडिकल रिकॉर्ड मिला। उसमें मेरी जन्मतिथि और मम्मी का नाम लिखा था।"
फोन के दूसरी तरफ फिर सन्नाटा हो गया।
आयत की धड़कन बढ़ गई।
"पापा... आप चुप क्यों हो गए?"
उसके पिता ने जल्दी से कहा,
"बेटा, वो पुरानी बातें हैं। तुम्हें उन चीज़ों के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है।"
"लेकिन—"
"आयत, मुझ पर भरोसा करो।"
आयत कुछ पल चुप रही।
"मैं आप पर भरोसा करती हूँ, पापा।"
"बस यही याद रखना।"
कॉल कट गया।
लेकिन आयत के मन में अब पहले से ज्यादा सवाल पैदा हो चुके थे।
रोहन को मिला रहस्यमयी संदेश
दूसरी तरफ रोहन अपने कमरे में बैठा था।
उसका फोन अचानक बजा।
एक मैसेज आया—
"फाइल अर्जुन तक पहुँच चुकी है।"
रोहन के चेहरे का रंग उड़ गया।
उसने तुरंत जवाब दिया—
"तुमने ऐसा क्यों किया?"
कुछ सेकंड बाद जवाब आया—
"अब खेल तुम्हारे हाथ में नहीं है।"
रोहन ने गुस्से में फोन टेबल पर पटक दिया।
समर कमरे में आया।
"क्या हुआ?"
रोहन ने कोई जवाब नहीं दिया।
"रोहन?"
"मुझे अकेला छोड़।"
समर जाने लगा, तभी रोहन ने उसे रोक लिया।
"समर।"
"हाँ?"
"अगर कोई तुमसे आयत के बारे में पूछे तो कुछ मत कहना।"
समर हैरान रह गया।
"आयत के बारे में? लेकिन क्यों?"
रोहन ने उसकी तरफ देखा।
"बस मेरी बात मान।"
समर चला गया।
रोहन अकेला बैठा रहा।
उसके दिमाग में एक बात घूम रही थी—
अगर अर्जुन को आयत की असली पहचान पता चल गई, तो सब कुछ खत्म हो जाएगा।
सुबह का नया दिन
अगली सुबह हॉस्पिटल में फिर वही चहल-पहल शुरू हो गई।
आयत वार्ड की तरफ जा रही थी।
अचानक सामने अर्जुन दिखाई दिया।
दोनों की नजरें मिलीं।
कुछ सेकंड तक दोनों सिर्फ एक-दूसरे को देखते रहे।
आयत ने धीरे से पूछा,
"आप मुझसे कुछ छिपा रहे हैं?"
अर्जुन थोड़ा चौंका।
"क्यों?"
"कल से आप कुछ अलग लग रहे हैं।"
अर्जुन ने नजरें हटा लीं।
"ऐसी कोई बात नहीं है।"
आयत उसके करीब आई।
"अर्जुन, मैं आपको दोस्त मानती हूँ। अगर कोई बात है तो आप मुझसे कह सकते हैं।"
अर्जुन ने उसकी आँखों में देखा।
वह उसे सच बताना चाहता था।
लेकिन वह यह भी जानता था कि उसके पास अभी पूरी सच्चाई नहीं थी।
"जब सही समय आएगा, मैं तुम्हें सब बता दूँगा।"
आयत की आँखों में निराशा दिखाई दी।
"मतलब कुछ है।"
अर्जुन चुप रहा।
आयत ने धीमे से कहा,
"ठीक है। जब आपको सही लगेगा तब बता दीजिएगा।"
वह वहाँ से जाने लगी।
अर्जुन ने उसका हाथ पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन फिर रोक लिया।
उसे पहली बार महसूस हुआ कि शायद किसी को बचाने के लिए उससे सच छिपाना भी उसे चोट पहुँचा सकता है।
सनाया और करण
उधर हॉस्पिटल के दूसरे कॉरिडोर में सनाया अपनी फाइल लेकर जा रही थी।
अचानक करण सामने आ गया।
सनाया ने उसे देखते ही कहा,
"तुम फिर मेरे रास्ते में आ गए?"
करण ने मुस्कुराकर कहा,
"तुम्हें लगता है मैं जानबूझकर तुम्हारे सामने आता हूँ?"
"हाँ।"
"इतना भी फ्री नहीं हूँ मैं।"
सनाया ने आँखें घुमाईं।
"तुम्हारी सबसे बड़ी समस्या यही है।"
"क्या?"
"तुम्हें लगता है तुम बहुत मज़ेदार हो।"
करण ने कहा,
"और तुम्हें लगता है तुम बहुत खास हो।"
सनाया रुक गई।
"मैं खास हूँ।"
करण ने सिर हिलाया।
"इस बात पर हम दोनों सहमत हैं।"
सनाया को उम्मीद नहीं थी कि करण ऐसा जवाब देगा।
वह कुछ पल चुप रही।
फिर बोली,
"तुम आजकल कुछ ज्यादा ही बोलने लगे हो।"
करण मुस्कुराया।
"तुम्हारे साथ रहकर आदत हो रही है।"
सनाया ने उसे घूरकर देखा।
लेकिन इस बार उसके चेहरे पर गुस्से के बजाय हल्की मुस्कान थी।
दोनों अपने-अपने रास्ते चले गए।
अस्पताल में बड़ा खुलासा
दोपहर के करीब अचानक हॉस्पिटल में पुलिस की गाड़ी आकर रुकी।
इंस्पेक्टर तेजी से अंदर आए।
अर्जुन ने उन्हें देखते ही पूछा,
"क्या हुआ?"
इंस्पेक्टर ने कहा,
"आदित्य मिल गया।"
सब चौंक गए।
"कहाँ?"
"लखनऊ के बाहर एक पुराने गोदाम से।"
अर्जुन ने तुरंत पूछा,
"वो अकेला था?"
इंस्पेक्टर ने गंभीर होकर कहा,
"नहीं।"
"उसके साथ कौन था?"
इंस्पेक्टर ने चारों तरफ देखा।
फिर धीमे स्वर में कहा—
"एक आदमी और था।"
"कौन?"
इंस्पेक्टर ने जेब से एक फोटो निकाली।
फोटो देखकर अर्जुन के चेहरे के भाव बदल गए।
वह आदमी...
वही था जिसे उसने पिछली रात रिकॉर्ड रूम से भागते हुए देखा था।
लेकिन फोटो के नीचे लिखा नाम देखकर अर्जुन की साँस रुक गई—
"रहमान खान।"
आयत कुछ दूरी पर खड़ी यह सब सुन रही थी।
उसने जैसे ही अपना सरनेम सुना, उसके कदम वहीं रुक गए।
"खान...?"
अर्जुन ने तुरंत उसकी तरफ देखा।
इंस्पेक्टर ने कहा,
"हमें शक है कि रहमान खान का संबंध आयत खान के परिवार से है।"
आयत का चेहरा सफेद पड़ गया।
"रहमान खान... कौन हैं?"
इंस्पेक्टर ने कोई जवाब नहीं दिया।
तभी अर्जुन उसके पास आया।
आयत की आँखों में डर था।
"अर्जुन..."
अर्जुन ने सिर्फ़ इतना कहा,
"मैं पता लगाऊँगा।"
लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में पहले से ज्यादा बेचैनी थी।
क्योंकि उसे एहसास हो चुका था—
आयत के अतीत का राज़ अब सिर्फ़ एक पुरानी फाइल नहीं रहा था।
और शायद बहुत जल्द वह राज़ खुद आयत के सामने आने वाला था।
क्रमशः...