नामुमकिन इश्क - एपिसोड 33 kajal jha द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

नामुमकिन इश्क - एपिसोड 33

एपिसोड 33– आयत के अतीत का पहला राज़

अगली सुबह सिटी हॉस्पिटल में बाकी दिनों जैसी ही हलचल थी।

कहीं मरीजों की आवाज़ें थीं, कहीं नर्सें जल्दी-जल्दी एक वार्ड से दूसरे वार्ड की तरफ़ जा रही थीं और कहीं डॉक्टर अपने-अपने केस में व्यस्त थे।

लेकिन इस भीड़ के बीच एक इंसान ऐसा था जिसके दिमाग में रात से एक ही सवाल घूम रहा था।

आयत खान के मेडिकल रिकॉर्ड की फाइल आखिर किसने निकाली थी?

वह व्यक्ति रिकॉर्ड रूम में खड़ा था।

उसने एक बार पीछे मुड़कर देखा और फिर जेब से वही फोटो निकाली, जो उसने रात को फाइल से निकाली थी।

फोटो में आयत अपने परिवार के साथ खड़ी थी।

उसने फोटो को कुछ सेकंड तक देखा और धीमी आवाज़ में कहा,

"अगर ये सच सामने आ गया... तो बहुत सारे रिश्ते बिखर जाएंगे।"

फिर उसने फोटो वापस जेब में रखी और वहाँ से निकल गया।

लेकिन उसे यह नहीं पता था कि रिकॉर्ड रूम के बाहर से कोई उसे जाते हुए देख चुका था।

अर्जुन को मिला पहला सुराग

उधर अर्जुन अस्पताल के कॉरिडोर में गौरव के साथ चल रहा था।

गौरव ने पूछा,

"भाई, कल जो टैटू वाला आदमी था... उसका कुछ पता चला?"

अर्जुन ने सिर हिलाया।

"अभी नहीं।"

"और आदित्य?"

"पुलिस उसकी तलाश कर रही है।"

गौरव कुछ सोचकर बोला,

"मुझे अब भी लगता है कि ये सिर्फ़ चोरी का मामला नहीं है।"

अर्जुन रुक गया।

"मुझे भी।"

"तुझे क्या लगता है?"

अर्जुन ने कुछ पल चुप रहने के बाद कहा,

"किसी ने जानबूझकर रोहन की किट का इस्तेमाल किया। फिर स्टोर रूम में मेडिकल सामान गायब किया। उसके बाद आदित्य का नाम सामने आया।"

गौरव ने कहा,

"मतलब कोई तीसरा आदमी सबको एक-दूसरे के खिलाफ़ खड़ा कर रहा है?"

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।

"यही तो पता लगाना है।"

तभी पीछे से आवाज़ आई—

"अर्जुन!"

दोनों ने पलटकर देखा।

आयत तेज़ी से उनकी तरफ आ रही थी।

उसके हाथ में कुछ कागज़ थे।

"क्या हुआ?" अर्जुन ने पूछा।

आयत ने कागज़ उसकी तरफ बढ़ाए।

"ये मुझे रिकॉर्ड रूम के बाहर मिले।"

अर्जुन ने कागज़ लिए।

वे कुछ पुराने मेडिकल रिकॉर्ड थे।

उन पर नाम लिखा था—

आयत खान।

अर्जुन का चेहरा तुरंत गंभीर हो गया।

"ये तुम्हारे रिकॉर्ड हैं?"

आयत ने सिर हिलाया।

"लेकिन मैंने इन्हें पहले कभी नहीं देखा।"

गौरव ने दोनों की तरफ देखा।

"ये यहाँ कैसे आए?"

आयत की आवाज़ थोड़ी घबराई हुई थी।

"मुझे नहीं पता।"

अर्जुन ने कागज़ों को ध्यान से देखा।

एक रिपोर्ट पर तारीख लगभग पंद्रह साल पुरानी थी।

आयत ने उसे देखा तो उसके चेहरे का रंग थोड़ा बदल गया।

"ये तारीख..."

अर्जुन ने पूछा,

"क्या हुआ?"

"मैं... उस समय बहुत छोटी थी।"

"तुम्हें उस समय कुछ हुआ था?"

आयत ने सिर हिलाया।

"नहीं। मुझे कुछ याद नहीं।"

अर्जुन ने धीरे से कहा,

"फिर ये रिकॉर्ड यहाँ क्यों हैं?"

आयत के पास कोई जवाब नहीं था।

रीवा की चिंता

रीवा वहाँ पहुँची तो उसने आयत को परेशान देखा।

"क्या हुआ?"

आयत ने उसे कागज़ दिखाए।

रीवा ने पढ़ते ही कहा,

"ये तो बहुत पुराने हैं।"

"हाँ।"

"लेकिन तुम्हारा रिकॉर्ड यहाँ किसने निकाला?"

आयत ने धीरे से कहा,

"यही तो समझ नहीं आ रहा।"

अर्जुन ने कहा,

"तुम दोनों अभी अपने कमरे में जाओ। मैं इसका पता लगाता हूँ।"

आयत ने उसकी तरफ देखा।

"लेकिन..."

"कोई लेकिन नहीं।"

उसकी आवाज़ सख्त थी, लेकिन उसमें चिंता साफ दिखाई दे रही थी।

आयत ने धीरे से सिर हिलाया।

"ठीक है।"

वह रीवा के साथ चली गई।

अर्जुन उसे जाते हुए देखता रहा।

गौरव ने मुस्कुराकर कहा,

"तुझे एहसास है कि तू उसकी कितनी चिंता करता है?"

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।

"गौरव..."

"ठीक है भाई, मैं चुप।"

रिकॉर्ड रूम में छिपा कैमरा

अर्जुन सीधे रिकॉर्ड रूम पहुँचा।

उसने वहाँ मौजूद स्टाफ से पूछा,

"कल रात यहाँ कौन-कौन था?"

एक कर्मचारी ने कहा,

"सर, रात की शिफ्ट में सिर्फ़ दो लोग थे।"

"और CCTV?"

"सर, रिकॉर्ड रूम का कैमरा पिछले तीन दिन से खराब है।"

अर्जुन के चेहरे पर शक और गहरा गया।

"तीन दिन से?"

"जी।"

अर्जुन ने तुरंत गौरव की तरफ देखा।

"बहुत सुविधाजनक है।"

गौरव ने कहा,

"मतलब?"

"जिस दिन से ये सब शुरू हुआ, उसी समय से रिकॉर्ड रूम का कैमरा बंद है।"

अर्जुन कुछ और पूछता, उससे पहले उसकी नजर एक छोटी-सी चीज़ पर पड़ी।

टेबल के नीचे एक काला धागा।

उस पर एक छोटा-सा मेटल का लॉकेट लगा था।

अर्जुन ने उसे उठाया।

लॉकेट पर एक अजीब निशान बना हुआ था—

एक आधा चाँद और उसके बीच एक छोटा-सा तीर।

गौरव ने पूछा,

"ये क्या है?"

अर्जुन ने सिर हिलाया।

"पता नहीं।"

उसने लॉकेट जेब में रख लिया।

दूसरी तरफ़ रोहन

रोहन अकेला बैठा था।

उसके हाथ में मोबाइल था।

तभी फोन पर मैसेज आया—

"तुम्हें चेतावनी दी थी। अर्जुन को ज्यादा करीब मत आने देना।"

रोहन ने तुरंत जवाब दिया—

"मैं अपना काम कर रहा हूँ। लेकिन अब आदित्य गायब है।"

कुछ सेकंड बाद जवाब आया—

"आदित्य से ज्यादा जरूरी आयत है।"

रोहन की आँखें सिकुड़ गईं।

उसने तुरंत पूछा—

"तुम आयत को क्यों निशाना बना रहे हो?"

इस बार कोई जवाब नहीं आया।

रोहन कुछ देर तक मोबाइल स्क्रीन देखता रहा।

पहली बार उसके मन में भी सवाल उठा—

"आखिर आयत है कौन?"

उसे तो अब तक सिर्फ़ इतना पता था कि आयत खान, लखनऊ के एक सम्मानित परिवार की बेटी है और मुंबई से यहाँ आई है।

लेकिन अगर कोई अजनबी उसे निशाना बना रहा था...

तो जरूर उसके अतीत में कुछ ऐसा था जिसे वह खुद नहीं जानती थी।

अर्जुन और आयत

शाम को आयत अस्पताल की छत पर अकेली बैठी थी।

अर्जुन वहाँ पहुँचा।

"यहाँ अकेली क्यों बैठी हो?"

आयत ने उसकी तरफ देखा।

"बस... कुछ सोच रही थी।"

अर्जुन उसके पास बैठ गया।

कुछ देर दोनों चुप रहे।

फिर आयत ने धीरे से पूछा,

"अर्जुन... क्या आपको लगता है कि मेरे अतीत में कुछ ऐसा है जो मुझे नहीं पता?"

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।

"मुझे नहीं पता।"

"लेकिन आज जो रिकॉर्ड मिले..."

"उनका मतलब कुछ भी हो सकता है। अभी हम अंदाज़ा नहीं लगा सकते।"

आयत की आँखें थोड़ी नम हो गईं।

"मुझे डर लग रहा है।"

अर्जुन ने पहली बार बिना सोचे अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया।

"मैं हूँ ना।"

आयत ने उसकी तरफ देखा।

अर्जुन ने कहा,

"जब तक मैं हूँ, कोई तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाएगा।"

आयत ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।

कुछ पल दोनों वैसे ही बैठे रहे।

उनके बीच कोई बड़ी बात नहीं हुई।

लेकिन उस खामोशी में बहुत कुछ कह दिया गया था।

आयत ने धीमे से पूछा,

"आप हमेशा मेरे साथ रहेंगे?"

अर्जुन उसकी आँखों में देखते हुए बोला,

"अगर तुम चाहोगी... तो हाँ।"

आयत के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

उसी रात...

हॉस्पिटल के पुराने रिकॉर्ड रूम का दरवाज़ा धीरे से खुला।

एक आदमी अंदर आया।

उसने वही आधे चाँद वाला लॉकेट पहना हुआ था।

वह सीधे एक पुराने बॉक्स के पास गया।

बॉक्स खोला।

अंदर एक पुरानी फाइल रखी थी।

उसने फाइल निकाली।

फाइल पर लिखा था—

"आयत खान – जन्म संबंधी रिकॉर्ड"

उसने फाइल खोली।

अंदर एक पुराना दस्तावेज़ था।

उसकी नजर एक लाइन पर जाकर रुक गई।

"बच्ची को उसके असली परिवार से अलग करके मुंबई भेज दिया गया था।"

उस आदमी के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

"तो अब वक्त आ गया है..."

वह फाइल बंद करने ही वाला था कि अचानक पीछे से आवाज़ आई—

"फाइल वहीं रख दो।"

वह आदमी ठिठक गया।

धीरे-धीरे पलटा।

दरवाज़े पर अर्जुन खड़ा था।

उसकी आँखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।

"तुम कौन हो?"

वह आदमी कुछ नहीं बोला।

अर्जुन एक कदम आगे बढ़ा।

"और आयत के बारे में तुम्हें क्या पता है?"

अजनबी ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—

"जिस लड़की को तुम आयत खान समझ रहे हो..."

वह एक पल रुका।

"...वो सिर्फ़ आयत खान नहीं है।"

अर्जुन की आँखें फैल गईं।

"क्या मतलब?"

अजनबी ने पीछे की खिड़की खोली और अंधेरे में छलांग लगा दी।

अर्जुन दौड़कर खिड़की तक पहुँचा।

लेकिन तब तक वह गायब हो चुका था।

अर्जुन ने नीचे देखा।

फिर उसकी नजर उस फाइल पर गई जो टेबल पर छूट गई थी।

उसने फाइल उठाई।

पहले पन्ने पर सिर्फ़ एक लाइन लिखी थी—

"आयत खान की असली पहचान अभी तक दुनिया से छिपी हुई है।"

अर्जुन की धड़कन तेज़ हो गई।

अब उसके सामने सिर्फ़ एक सवाल था—

आखिर आयत कौन है?

और क्यों कोई उसकी पहचान को दुनिया से छिपाना चाहता है?

क्रमशः...