Muhabbat Ek Sabaq - 20 Afariya Faruqui द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Muhabbat Ek Sabaq - 20

"फुप्पो मुझे मार्केट से कुछ चीज़े लानी हैं आप फ्री हों तो चलें"….…

उसने आमना बेगम के कमरे में दाखिल होते हुए कहा। 

"मार्केट तो मुझे भी जाना है , परसों शेरी का बर्थ डे है उसके लिये गिफ्ट लाना है मुझे" …. . …

उनको भी याद आया था। 

"ओनली गिफ्ट क्यों फुप्पो ,कोई फंकशन नही करेंगी आप उनके बर्थ डे का" ??

वह हैरान हुई। 

"नही बेटा उसको यह शोर हंगामा पसंद नही है। बस वह अपने दोस्तों के साथ बाहर जा कर सेलिब्रेट कर लेता है वह हर साल" …. .. …. . ..

वह बताने लगीं। 

"फुप्पो यह शहरयार को हुआ क्या है अचानक , वह तो पहले से भी ज़्यादा खामोश हो गए" ..???

उसने अचानक पूछा। 

"हां हो तो गया है" … ..

उन्होंने ठण्डी सासं भर कर कहा। 

"क्यों क्या बात है "???

वह यह बात कई दिन से पूछना चाह रही थी लेकिन मौक़ा नही मिल सका था। 

"पता नही बाहर की होगी कोई टेंशन , वह बताता कब है किसी को कुछ" ….

उनहोंने कह कर उसे टाल दिया। 

"आप पार्टी का अरेंजमेंट करें इस बार फुप्पो, बाक़ी सब मैं देख लूंगी "……..

उसने कुछ सोच कर कहा। 

" लेकिन तुम कैसे बेटे, वह नही मानेगा इस के लिये"

उन को भरोसा नही हो रहा था , क्योंकि वह अपने बेटे को जानती थीं। 
"बिल्कुल , बस आप पार्टी की तैयारी करें, और बताएं फिर कब चलना है मार्केट "???

उसने पूछा। 

"खाने से फारिग़ हो जाएं फिर चलते हैं, तुम तैयार हो जाओ बस खाना खाते ही फौरन चलेंगे मैं भी बुआ को कह देती हूं खाना लगवा दें" 

वह कहती खड़ी हो गईं तो वह भी तैयार होने के लिये उठ गई। 

☆ ☆ ☆

"क्या मैं अन्दर आ सकती हूं" ??? 
दरवाज़े पर नॉक हुई तो शहरयार ने सर उठा कर देखा वह दुशमनें जां दरवाज़े में खड़ी अंदर आने के लिये उसकी इजाज़त के इंतेज़ार में थी। 

"आ जाएं "

 शहरयार ने एक नज़र उसकी तरफ देखा। हमेशा वाले अपने हुलिये के बजाए आज वह आसमानी रंग के शलवार सूट में हमरंग दोपट्टा सर पर लिये सादे से हुलिये में भी ग़ज़ब ढा रही थी उसने फौरन अपनी नज़रें नीचे झुका ली। 

"खैरियत , तबियत ठीक है आपकी" ?

शिफ़ा को उसकी हालत देख कर फिक्र हुई। बिखरे बाल और सुर्ख आँखे उसके रत जगे की गवाही दे रहे थे। 


" ठीक है , आप बताएं कोई काम था" ???

 वह अपने लिये उसकी फिक्रमंदी पर खुश हुआ था मगर अगले ही पल उसके निकाह का ख्याल उसके जज्बातों पर हावी हो गया। 

"जी हां वह मुझे मार्केट जाना था और मैं यहां की मार्केट्स नहीं जानती नही हूं इसलिये अगर आप थोड़ा सा वक़्त निकाल सकें तो" …. . … .. 

"मेरा ख्याल है आप अम्मी के साथ चली जाएं" 

वह ज़्यादा से ज़्यादा उससे दूर रहना चाहता था। 
"उनको कुछ ज़रूरी काम है इसलिये ही आप से बोला है मैंने"

 उसने डिटेल बताई। 

"ठीक है , बताएं कब चलना है" … .. ??? 

शहरयार ने बात को ज़्यादा लम्बी करना मुनासिब ना समझा। 

"आप फ्रैश हो कर आ जाएं पहले, आप ने अभी तक नाशता भी नही किया। फिर चलते हैं"

वह रवानी में (speedly) बोली। 

"आप को किस ने कहा कि मैंने नाशता नही किया" ??

उसने कुछ चौंक कर पूछा

"आप सुबह टेबल पर नही थे ना "

उसने इतमीनान से बताया। 
"ठीक है आप चलें , मैं भी आता हूं थोड़ी देर में "… .. …

 वह उसके अंदाज़ पर हैरान होते हुए खामोशी के साथ उठ खड़ा हुआ। 

"ओके",

वह भी कहती उठ गयी। 

☆ ☆ ☆

ड्राइव के दौरान वह मुसलसल खामोश था। 

"बात सुनें क्या मैं कुछ पूछ सकती हूं "..... ??? 

शिफ़ा ने उसकी खामोशी से उकता कर पूछा। 

"जी कहें मैं सुन रहा हूं" .......

वह ड्राइव करते हुए एक सवालिया नज़र उस पर डाल कर फिर से उसी तरफ मुतवज्जह हो गया। 

"आप इतने साइलेंट क्यों रहने लगे" ??? 

उसने डरते डरते भी पूछ ही लिया। 

"मैं तो शुरू से ऐसा ही हूं ,लेकिन आप ने यह क्यों पूछा" ???? 

उसने जवाब देकर सवाल किया था। 

"हैं ,लेकिन इतने भी नहीं हैं आप खामोश आइ मीन बहुत स्टरेंज लगने लगे हैं आप निकाह वाले फकंशन में भी नही आए" .......... 

उसने पूछा तो जवाब में वह होंट भींच कर रह गया। 

"कुछ अरजैंट काम आ गया था" .......

वह कुछ देर बाद बोला। 

"आपको मालूम है फुप्पो भी आपकी वजह से परेशान हैं काफ़ी" .......... 

"आप से अम्मी ने कहा है कुछ" ???? 

उसके बताने उसने कुछ चौंक कर पूछा। 

"नहीं , बताया तो कुछ नही है बस वह आपको ले कर इन दिनों कुछ ज़्यादा ही परेशान रहती हैं" !!! 

वह बता रही थी। 

"आपको कहां पर जाना हैं" ???

उसने ट्रन लेते हुए बात का टॉपिक चेंज कर दिया। 

"मॉल चलें"......

वह शॉर्ट सा जवाब दे कर बाहर की तरफ देखने लगी उसके बाद मॉल पहुंचने तक उनके बीच कोई बात नही हुई थी। 

"आप यहीं वेट करें मैं गाड़ी पार्क कर के आता हूं" ......

मॉल पहुंच कर वह गाड़ी साइड में रोक कर बोला तो वह खामोशी के साथ उतर कर एक साइड खड़ी हो गई। 

"चलें ".....

वह वापस आया तो शिफ़ा आस पास देखते हुए वहां के माहौल को ऑबज़र्व कर रही थी। 

"जी"......

उसने शहरयार की आवाज़ पर पलट कर देखा फिर उसके साथ क़दम मिलाती हुई मॉल में ऐंटर हो गई। 

अपनी शॉपिंग कम्पलीट कर के अब उसने क्लॉथ सेक्शन का रूख किया था। 

"शेरी लिसन, यह देखें" ......

उसने आवाज़ दे कर उसे मुतवज्जह किया लेकिन शहरयार उसके शुरू के दो लफ्ज़ों में ही अटक कर रह गया।