उसे पटरी से उतरते देख कर उसने मुस्कुराते हुए उसी के लहजे में जवाब दिया था।
"क़सम से बहुत ही अनरोमांटिक हो तुम यार " … .. ….
वह अपनी बात का इस क़दर रूखा फीका जवाब पा कर बहुत ही बदमज़ा हो गया था।
"नही तो क्या फूल बिछाउं तुम्हारे क़दमों में" … .. .. ???
उस ने खिलखिला कर पूछा।
"बिछाने तो चाहिये आखिर को तुम्हारा शौहर ए नामदार जो हूं" …. . ..
उसने फर्ज़ी कॉलर अकड़ाए।
"शौहर ए नामदार तो नही शौहर ए नामुराद ज़रूर लग रहे हो इस वक़्त बिल्कुल" …. . ….
उसने बात को एक बार फिर हवा में उड़ा दिया।
"अच्छा छोड़ो यह फिज़ूल बातें वीडियो कॉल पर आओ" !!
उसने पहली बार यह फरमाइश की थी।
"दिमाग ठीक है तुम्हारा , वक़्त देखो और अपनी फरमाइशें भी"…… ..
उस ने हैरत से पहले मोबाइल को घूरा फिर साफ मना कर दिया।
"हां तो कुछ नही होता , कोई पूछे तो बता देना किस से बात कर रही थीं" ……
वह बड़े इतमीनान से बोल रहा था।
"अनस रहने देते हैं ना प्लीज़ , वैसे भी मुझे नींद आ रही है" …… .. .
उसने मिनमिनाते हुए बहाना किया था।
"कोई नींद नही आ रही और ना ही कोई सो रहा है जब तक मैं जाग रहा हूं तुम भी नही सोओगी शाबाश आओ फटाफट वीडियो कॉल पर" …… .. .
उसने शिफ़ा की बात सुने बग़ैर ही फोन काट दिया।
"ओफ्फोह क्या मुसीबत है भई , हुक्म तो देखो कैसे चला रहा है यह और मुझे क्या हो गया है मैं क्यों इसकी हर बात मानती जा रही हूं पहले की तरह प्रोटेस्ट ही नही किया जा रहा बिलकुल" ……..
वह खुद पर बुरी तरह झुंझला रही थी।
कॉल आ चुकी थी सो उसे पिक करना भी पड़ी।
"क्या मुसीबत है इस वक़्त बात करने की , हम कल भी तो बात कर सकते थे" …… .
वह पहले वाले मूड में आ चुकी थी।
"हां तो कल भी कर लेंगे ना कौन सा टैक्स लग रहा है तुम्हारा ही तो हूं मैं सो कर लेना कल भी" …….
अनस ने कहा तो वह बुरी तरह पज़ल हो गई।
"तुमने अगर यह बकवास ही करनी है तो मैं फोन रख रही हूं" ……
. उसे पटरी से उतरते देख कर वह जल्दी से बोली।
"अच्छा ठीक है यह बकवास नही करते , तुम बताओ फिर कौन सी बकवास करें" ……. ???
उसने बड़े इतमीनान से पूछा था।
"मैं कुछ नही बता रही , तुम बताओ क्या बात करनी थी विश ही तो करना था बर्थ डे वह कर दिया तो रख दो फोन अब" ….…..
वह जानती थी कि अनस को एक पर्सेंट छूट देने का अंजाम था उसे सर पर चढ़ाना।
"मैंने तो यह बताना था कि तुम से जो मुहब्बत थी ना मुझे" …….
वह बात बीच में ही रोक कर उसके रिएक्शन का वेट करने लगा।
"वह खत्म हो गई है ?? शुक्र अल्हमदोलिल्लाह" …… .
उसने उसके बात पूरी करने से पहले ही sentence खुद पूरा कर दिया।
"जी नही मैं यह कह रहा था कि वह डबल हो गई है। "…… ..
उसने शोख से लहजे में जवाब दिया।
"बहुत अच्छी बात है , अब तो बता दिया ना जो बताना था अब रख दो फोन" …..
वह जल्दी से जल्दी फोन रखना चाह रही थी पता नही आज क्या हुआ ऐसा पहले तो नही हुआ कि वह अनस से बात करते हुए नर्वस हो रही हो।
"शिफ़ा अगर अब एक और बार तुमने यह बोला होगा ना तो अच्छा नही होगा" ………
इस बार वह कुछ गुस्से से बोला था
"अच्छा ठीक है नही बोलती , यह बताओ घर में सब कैसे हैं" ….???
शिफ़ा ने उस का मूड सही करने के लिये पूछा।
"सब ठीक हैं बस मैं ही ठीक नही हूं तुम्हारे बग़ैर , पता नही किस ने मशवरा दिया था तुम्हें वहां जा कर रहने का"….
वह कहते कहते झुंझलाया।
"किसी ने भी दिया हो अब रहना तो तुम्हें पड़ेगा ही वहां पर" …….
वह खिलखिलाई।
"हँसो मत, हसँती हुई ज़हर लग रही हो इस बात पर "…….
उसने घूर कर कहा।
"ओह्हो बहुत देर कर दी यह बात समझने में तो आपने , पहले समझ जाते तो निकाह भी ना करना पड़ता" …..
वह उसे जलाने में कोई कसर नही छोड़ती थी।
"निकाह तो मैंने हर सूरत करना था ताकि तुम बॉन्ड हो जाओ मेरे लिये परमानेंटली"………. .
वह इतमीनान के साथ बेबाकी से बोला।
"क्यों तुम्हें इतना खतरा किस से था??…. . .
आज उसने पूछ ही लिया।
"मुझे था तो नहीं लेकिन हो गया था जब से तुम्हारे उस लाडले माहिद ने तुम्हारे नखरे उठाने शुरू किये थे तब से मुझे Insecurity होने लगी थी तुम्हें ले कर और अब भी उस से दूर ही रहना तुम ज़रा छ: फीट"……..
उसने रोअब से कहा
"माहिद भाई से क्यों मसला है तुम्हें ,उन्होंने क्या कह दिया है अब "….???
उसको अनस की बात बिलकुल समझ नही आई थी।
“माहीद भाई” ???
उस ने अंदाज़ पर अनस ने कुछ चौंक कर पूछा।
"हाँ माहिद भाई , मुझे वह अपनी दोनों बहनों नादिया और सबीन की तरह ही समझते हैं बिलकुल बल्कि कभी कभी तो जब वह नादिया को लेने आते हैं यूनिवर्सिटी से तो मुझे भी ड्रॉप कर देते हैं रास्ते में" …….
उसने बताया तो अनस ने शुक्र की साँस ली थी।
"चलो ठीक है अच्छा सो जाओ तुम"….. .. .
अनस ने आखिरकार उस पर तरस खा कर कहा।
"ठीक है अल्लाह हाफिज़ सुबह बात करते हैं" ….. .. ..
उसने कह कर फौरन ही फोन रख दिया कि कहीं उसका इरादा कैंसिल ना हो जाए फोन रखने का।
☆ ☆ ☆
उसके निकाह को पूरे तीन महीनें हो चुके थे और इन तीन महीनों में अनस ने उसे क़दम क़दम पर यह ही एहसास दिलाया कि उसके लिये हां कर के शिफ़ा ने कोई ग़लती नही की थी।
रोज़ सुबह उसकी आँख उस के फोन से ही खुलती। अनस के उसकी ज़िंदगी में आने के बाद से उसका हर दिन ईद का दिन होता था
उसको हल्का सा बुखार भी हो जाता तो दूर बैठा वह बुरी तरह परेशान हो जाता वक़्त वक़्त से फोन करके उस से मेडिसिन का पूछता था। सारी सारी रात उसे जागते गुज़र जाती बार बार वीडियो कॉल्स करके देखता।
नेक्सट सेमेस्टर शुरू हुए तो वह दिन रात पढ़ाई में लगी रहती ऐसे में भी अनस उसे एक पल के लिये नही भूला था। उसे पता था कि एग्ज़ाम में वह दुनिया यहां तक की अपने आप को भी भूल जाती है इसलिये वह बार बार उसे कुछ ना कुछ खाने का याद दिलाता रहता। एग्ज़ाम में जाने से पहले कॉल करके ऑल दा बैस्ट कहना वह कभी ना भूलता था और जाने से पहले हमेशा उसे बिलकुल टेंशन ना लेने नॉर्मल रहने की ताकीद करता था अपनी डेली की रूटीन भी हमेशा उस से शेयर करता रहता था।
आज भी रात को देर से सोने की वजह से वह सुबह काफ़ी देर से उठी थी फ्रैश होकर वह बुआ को नाशते का कहने आई थी कि वह उसके कमरे में ही ले आएं कि फुप्पो लाउंज में ही मिल गईं।
"अस्सलामु अलेयकुम फुप्पो" ……
वह उनके सामने ही सोफे पर बैठ गई।
"वालेयकुम अस्सलाम , आज बहुत देर हो गई उठने में , तबियत ठीक है "???
उनकी मुहब्बत हमेशा वाला अंदाज़ लिये हुए थी।
"जी आज छुट्टी थी ना इसलिये रात इतमीनान से पढ़ाई की थी काफी देर तक सो उठने में भी देर हो गई"……
बुआ को चाय का कहने के बाद वह उसने फुप्पो को तफसील के साथ जवाब दिया
"अनस से बात होती रहती है तुम्हारी"…? ? ?
उन्होंने पूछा।
" जी वह पापा के साथ यहां आने का बोल रहे थे दादू की तबियत पूछने के लिये" ……. .
उस के नाम से ही शिफ़ा के चेहरे पर एक खूबसूरत सी मुस्कुराहट आ गई।
"अच्छा"…..
उन्होंने उसके बात करने के अंदाज़ पर भतीजी को ग़ौर से देखा था वह अब पहले से ज़यादा खूबसूरत हो गई थी हर वक़्त मुस्कुराना और खुश रहना तो जैसे उसकी आदत बन गई थी।
"ऐसे क्या देख रही हैं फुप्पो "…??
उनको यूं ध्यान से देखती पाकर वह झेंप कर पूछने लगी।
"कुछ नही , तुम खुश हो तुम्हारे निकाह से बच्चे"…? ??
उन्होंने यूं ही पूछ लिया।
"जी बहुत , मुझे अंदाज़ा भी नही था फुप्पो कि अनस इतने अच्छे हैं बल्कि मुझे अपने बिहेवियर पर शर्मिंदगी है कि मैनें हमेशा ही उनके साथ रूडली बिहेव किया …… . ..
वह अपने चेहरे पर आते खुशी के रंगो छुपाने की नाकाम कोशिश करती उनको बता रही थी और आमना बेगम का दिल बेटे की मुहब्बत से डूबा जा रहा था।
"अल्लाह तुम दोनों हमेशा खुश रखे मेरी जान, और मेरे मुहब्बतों से महरूम बेटे को को भी उसके हिस्से की खुशियां अता करे आमीन सुम्मा आमीन"……..
उनहोंने दिल ही दिल में उसे दुआ दी थी।
"फुप्पो शहरयार का बता रही थीं आप कि वह आज आने वाले हैं लंदन से" … ???
उसने याद आने पर पूछा।
"हाँ वह दोपहर तक पहुँचेगा 2 बजे है उसकी फ्लाइट" …….
उन्होंने बताया।
"लेकिन वह गये क्यों थे मुझे समझ में नही आया वह भी फंक्शन के वक़्त ही , अब तो उनकी पढ़ाई भी पूरी हो चुकी है तो अब कौन सा ज़रूरी काम आ गया था उन्हें" ???
उसने अंजाने में उनके ज़ख्मों को छेड़ दिया।
"पता नही , बताया नही उसने मुझे" …..
उन्होंने छोटा सा जवाब दे कर बात खत्म कर दी थी।
☆ ☆ ☆