Muhabbat Ek Sabaq - 6 Afariya Faruqui द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Muhabbat Ek Sabaq - 6

“शिफ़ा बीबी, आपको छोटे साहब ने बुलाया है। वह कह रहे हैं आप किताबें ले कर लॉन में आ जाएं”,
मुलाज़िमा ने आकर इत्तेला दी।
“ठीक है, तुम चलो आ रही हूं मैं”,
उसने जवाब दे कर उसे जाने का इशारा किया|
“हैरत है वैसे, मुझे तो लगा था कि मेरे कल के डंडा मारने वाले इंसीडेंट के बाद अब वह मेरी शक्ल भी नही देखेंगे पढ़ाना तो दूर रहा या फिर अपनी इंसल्ट का बदला लेने का इरादा होगा कल की। चल भई शिफ़ा हो जा रेडी इंसल्ट करवाने के लिये अपनी”,
सोचती हुई वह किताबें और पैन उठा कर एक नज़र अपने हुलिये पर डालती बाहर निकल गई।
“अस्सलामु अलेयकुम”, वह सलाम करती बैठ गई।
“वालेयकुम अस्सलाम“, उसने सुर्ख आंखो को रूमाल से रगड़ते हुए जवाब दिया।
“तबियत ठीक है आपकी ???”,
उसकी आंखे और नाक दोनो सुर्ख हो रही थी और आखों से बार बार पानी भी आ रहा था तो वह पूछे बग़ैर ना रह सकी।
“जी हां बस कोल्ड हो गया है। शायद यह मौसम की वजह से”,
खिलाफे उम्मीद उसने रसानियत से जवाब दिया।
“कोई मसला नही है तो, हम कल पढ़ लेंगे। आप रेस्ट कर लें आज”,
वह वैसे भी बहुत काइंड हार्ट थी। किसी की तकलीफ उससे देखी नही जाती थी।
“इटस ओके आई विल मैनेज, आप मुझे वह प्रेज़ेंटेशन दिखाए जो कल बनाने के लिए बोला था आपको”,
वह कह कर किताब की तरफ मुतवज्जह हो गया तो वह भी खामोशी के साथ उसे प्रेज़ेंटेशन दिखाने लगी।
“लिसन”,
फारिग़ हो कर वह किताबें समेट कर उठी तो उसकी आवाज़ पर रूकना पड़ा था।
जी” , कहिए ???”,
उसने सवालिया नज़रों से शहरयार को देखा।
“बुआ से कहिएगा चाय और पेन किलर भिजवा दें मेरे रूम में”,
वह एक हाथ से सर को दबाते हुए बोला तो वह भी हाँ में सर हिला कर चली गई।

☆ ☆ ☆

दरवाज़ा नॉक हो रहा था
“आ जाएं”, वह चकराते सर के साथ उठ बैठा।
“आप “???
वह ट्रॉली के साथ शिफ़ा को देख कर थोड़ा हैरान हुआ।
“जी हां क्यों ,कोई मसला है ???”
, वह ट्रॉली उसके आगे करती पूछने लगी।
“नही , वह मेरा मतलब है बुआ या किसी सर्वेंट के साथ भिजवा देतीं। आप क्यों परेशान हुई हैं!!!!”
, उसने कुछ तकल्लुफ से कहा।
“काढ़ा बनाया था आपके कोल्ड के लिए इसलिए खुद लाई हूं”,
उसने वज़ाहत दी।
“आपने ????”,
वह एक बार फिर हैरान हुआ था क्योंकि इस लड़की का एक ही रूप देखा था उसने अब तक, बदतमीज़ और मुंह फट वाला।
“जी , पापा यही बनवाते हैं घर पर हम लोगों में से अगर किसी को कोल्ड हो तो मेडिसिन्स नही लेने देते हैं। यह काफी इफ्फेक्टिव है और इंस्टेंट रिलीफ भी हो जाता है इससे”,
उसने तफसील के साथ काढ़े की खूबियां बताई।
“वालिद (बाप )ऐसे भी होते हैं ,कमाल है!!!!”,
वह मुंह ही मुंह में बड़बड़ाया।
“आपकी चाय,और यह मेडिसिन भी”,
बता कर वह बाहर जाने के लिए मुड़ गई तो शहरयार उस पल में तोला पल में माशा लड़की को देख कर रह गया।

☆ ☆ ☆


"यार पौने बारह बज रहे हैं और बारह बजे तक मेल करनी है मुझे और लैप्टाप खराब हो गया है",
वह फोन पर यासिर को बता रहा था। जो बैस्टबड्डी होने के साथ साथ उसका हर मसला भी हल किया करता था।
"तो परेशान होने वाली कौन सी बात है इसमे। नया ले आ नही तो इसे सही करा ले",
उसने आगे से जवाब दिया तो शहरयार का बेसाख्ता उसकी अक़ल पर मातम करने को जी चाहा था।
"कौन से नौकर बैठे है डैड के, जो 15 मिन्ट में लैप्टाप रिपेयर कर देंगे और बाज़ार जाने में भी वक़्त लगता है।"
उस ने तंज़ से जवाब दिया।
"तो भाई मेरे पास तो इस के अलावा कोई और solution नहीं है"
यासिर बेचारगी से बोला
"ठीक है, मैं बाद में बात करता हुं। अरेंज कर लुंगा कुछ खुद ही खुदा हाफ़िज़",
उसने फोन बंद करते हुए दरवाज़े की तरफ देखा, जहां शिफ़ा लैप्टाप लिये अन्दर आने के इंतेज़ार में थी।
"आ जाएं",
उसने उसके पूछे बग़ैर ही गर्दन के इशारे से उसे अंदर आने कहा था ।
"लेकिन आप शायद बिज़ी हैं",
वह अंदर आते हुए पता नही पूछ रही थी या बता रही थी।
"आप यह रख दें थोड़ी देर बाद ले जाइएगा मैं चैक कर लूंगा थोड़ी देर में",
उसने लैप्टाप की तरफ इशारा किया।
"आप का लैप्टाप खराब हो गया है क्या?"
उस ने कुछ रूक कर पूछा
"जी हाँ ,लेकिन ऐसे किसी बातें सुनना मैनर्स नही होते"
शहरयार ने जताया।
" देखें मैंने कोई इंटैंशनली बातें नही सुनी आप की, वह तो मैं प्रेज़ेटेशन चैक कराने आई थी तो सुन लिया",
उस ने सफाई दी।
"इट्स ओके"
"आप मेरा लैप्टाप यूज़ कर सकते हैं"
, शिफ़ा ने सजस्ट किया।
"लेकिन डेटा तो सब मेरे लैप्टाप में है उसका",
आइडिया शहरयार को सही लगा था लेकिन डेटा तो उसके अपने ही वाले लैप्टाप में था।
"आप ने अपना डाटा गूगल ड्राइव में तो सेव किया हुआ होगा ना?"
शिफ़ा ने पूछा।
"हां किया हुआ तो है …."
उस ने भी कुछ ध्यान आने पर कहा
"तो आप जी मेल इस लैप्टाप में ऑन कर लें ड्राइव से डेटा ले कर मेल कर दीजियेगा ",
शिफ़ा ने उसके मसले का हल निकाला तो वह उसकी ज़हानत के साथ साथ अपनी बेवक़ूफी का भी क़ाइल हो गया। जिस वजह से टेंशन में वह तो यह बिल्कुल ही भूल गया था।
"थैंक्यू ……", 
उसने लैप्टाप लेते हुए शुक्रिया अदा किया।
"आपका लैप्टाप कहां है???
शिफ़ा ने पूछा।
"वह रखा है टेबल पर….. लेकिन आप क्या करेंगी उसका?",
उसने जवाब देने के साथ साथ सवाल किया था।
"रिपेयरिंग",!!!
वह जवाब देने के साथ लैप्टाप उठा कर निकल गयी तो शहरयार उसके एक हरूफ के जवाब पर बेसाख्ता मुस्कुरा उठा।

☆ ☆ ☆

"शुक्र अल्हमदो लिल्लाह",
उसने सारा डेटा मेल करने के बाद सुकून की सांस ले कर शुक्राना अदा किया था।
"अब यह फोल्डर डिलीट कर देता हूं",
सोचते हुए उसने फोलडर ओपन करना चाहा लेकिन गलती से उस फोल्डर के बजाए बराबर में पड़े फ़ोल्डर पर क्लिक हो गया।
पिक्चरस के नाम से वह फोल्डर बना हुआ था जिसमें शायद फैमिली फोटोज़ थे। वह विंडो क्लोज़ करने ही वाला था कि एक फाइल पर नज़र पड़ी। जिसके आइकन में शिफ़ा की फोटो शो हो रही थी।
उसने बे इरादा ही ओपन कर लिया काफी सारी पिक्चरस थी। सब फैमिली मेम्बरस के साथ सबसे ज़्यादा उसके पापा के साथ वह हैरत के साथ स्वाइप करने लगा तो एक पिक्चर पर नज़र ठहर गई।
पर्ल वर्क वाले व्हाइट गाउन के साथ हाथों में मोतिया के गजरे पहने हल्के हल्के मेकअप के साथ लम्बे खुले बालों में किसी बात पर खिलखिला कर हँस्ती हुई वह रोज़ से बिल्कुल अलग लग रही थी।
"यह क्या वाक़ई यही है"
, वह बेखुद सा होकर उसे देखते हुए दिल ही दिल में खुद से बोला।
"यह मैनर्स में नही आता है और यह हरकत तुम्हे सूट भी नही करती शहरयार अहमद",
उसने फाइल क्लोज़ करते हुए दिल ही दिल में खुद को डाँटा था।

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