"लो जी हो गया हिटलर 2 का लैप्टाप स्टैबल",
उसने नहा कर आने के बाद बाल सुखाते हुए ऐक नज़र लैप्टाप पर डाली जहां विन्डो इन्स्टालेशन प्रौसेस पूरा हो चुका था।
कंघा करने के बाद उसने थोड़े से बालों में कल्च लगा कर बाक़ी बालों को ऐसे ही खुला छोड़ दिया। फिर बेड पर पड़े टी शर्ट के मैचिंग दोपट्टे को सलीक़े के साथ ओढ़कर लैप्टॉप उठाए लॉन में आ गई, क्योंकि शहरयार इस वक़्त लॉन में ही होता था और उसका अंदाज़ा सही साबित भी हुआ ,वह वही था।
"बात सुनें"!!!
वह चाय पीने के साथ साथ मोबाइल पर कुछ देख रहा था कि उसकी आवाज़ पर उसकी तरफ देखने लगा।
"सुनाइये" ???
आज उसके हमेशा वाले जी के बजाए ‘सुनाइये’ कहने पर शिफ़ा को उसकी दिमाग़ी हालत पर शक हुआ था।
"यह लें",!!!
उसने लैप्टाप पकड़ाया।
"बैठ जाएं आप",
शहरयार ने उसे बैठने का इशारा किया तो वह उसके सामने ही चेयर पर टिक गई ।
"कर दिया रिपेयर आपने?",
यह उसने ऑन करके चैक किया।
"जी",
उसने भी छोटा सा जवाब दिया। उसे आज उसका लहजा समझ में ही नही आ रहा।
"इतना खुशग्वार लहजा कि लग ही नही रहा कि यह वही हमेशा वाला खड़ूस हिटलर है",
वह दिल ही दिल में सोच रही थी।
"यह तो आपने शायद न्यू विंडो इंस्टॉल की है?"
शहरयार थोड़ा सा परेशान दिखने लगा।
"जी हां की तो है"
उस ने जवाब दिया
"लेकिन मेरा इम्पोर्टेड डाटा भी था इसमें"
उस के माथे पर शिफ़ा की बात सुन कर बल पड़ गए।
"यह लें"!!!
उसने एक पैन ड्राइव शहरयार की तरफ बढ़ाई।
"यह क्या है?"
, शहरयार ने सवालिया नज़रों से उसको देख कर पूछा।
"आपका इम्पोर्टेड डाटा",
उस ने गोलमोल सा जवाब दिया।
"क्या मतलब ???",
वह और ज़्यादा उलझ गया।
“मतलब यह कि न्यू विंडो इंस्टॉल करने से पहले मैंने एक बार रिपेयर की थी विंडो और तब आपका सारा डाटा इसमें कॉपी कर लिया था”
, उसने तफसील के साथ जवाब दिया तो शहरयार एक बार फिर उसकी ज़हानत का क़ाइल हो गया।
"आपकी प्रेज़ेंटेशन भी चैक हो गई है। जबरदस्त बनाई है आपने। जो पॉइंटस अपनी साइड से एड किये हैं वह भी बहुत अच्छे हैं !!!!"
इतने अच्छे से बात करता वह एक बार फिर शिफ़ा को हैरत के समंदर में डुबो गया था।
"थैंक्स!!!!!!",
वह हैरान हैरान सी उसका शुक्रिया अदा करती लैप्टॉप ले कर उठ गई।
☆ ☆ ☆
वह बैग में कपड़े सैट कर रही थी कि फोन रिंग हुआ।
"फरमाओ????",
उम्मीद के मुताबिक़ अनस का ही कॉल था।
"क्या कर रही हो ??",
उस पर हमेशा की तरह कोई असर नही हुआ था उसकी बेगानगी का।
"बैग सैट कर रही हूं ,तुम बताओ फोन क्यों किया है ???",
उसका लहजा वही हमेशा वाला रूड था।
"यही पूछना था कि किस टाईम की है फ्लाईट तुम्हारी ???"
, अनस ने हमेशा की तरह अपनाइयत भरे लहजे में पूछा।
"पता नही , फुप्पो को मालूम है उन्होंने ही कराए हैं टिक्टस",
उसने बेज़ारी से जवाब दिया।
"पता नही क्या मतलब है भई?, पूछो उनसे जाकर",
उसने ऐसे कहा जैसे वह कोई छोटी सी बच्ची हो ।
"अभी मैं पूछने ही जा रही थी उनसे कि तुम्हारा फोन आ गया। अब तुम फोन बंद करोगे तो ही तो मैं जा कर पूछूंगी उनसे",
उसने चिढ़ कर जवाब दिया।
"अच्छा सॉरी , ठीक है तुम जा कर पूछ लो फिर मुझे टैक्सट कर देना। ऐअरपोर्ट पर मैं खुद आ जाउंगा तुम्हे लेने"
अनस ने उस की बात का बुरा माने बग़ैर कहा।
"ठीक है अल्लाह हाफिज़ बाकी़ बात घर ही आकर कर लेना वहीं आ रही हूं मैं" !!!!
कह कर उसने फोन बंद कर दिया उसे हमेशा अनस के इस मुहब्बत भरे अंदाज़ से चिढ़ होती थी।
"अल्लाह तेरा शुक्र, हो गई पैकिंग" !!!
उसने बैग बंद करते हुए शुक्राना अदा किया।
"अब फुप्पो से पूछ लेती हूं किस वक़्त निकलना है",
सोचते हुऐ वह बाहर निकल गई।
"बुआ बात सुनें , फुप्पो कहां हैं???? "
उसने लाउंज से गुज़रती बुआ को आवाज़ दी।
"बेटा वह लॉन में बैठी हैं आपकी चाय भी वहीं भिजवा दूं ???"
"जी भिजवा दें… .. .",
वह लॉन में आई तो वहां फुप्पो के साथ हिटलर उर्फ शहरयार भी मौजूद था।
"आओ बैठो शिफ़ा हो गई पैकिंग तुम्हारी?",
फुप्पो ने उसे बैठने का इशारा करते हुए पूछा।
"जी पैकिंग तो हो गई है वह फ्लाइट का पूछ रही थी मैं किस टाईम की है ??"
उस ने उन के पास बैठते हुए पूछा
"अम्मी कहीं जा रही हैं आप?",
शहरयार ने उन दोनो की बातो से अंदाजा लगाया।
"हाँ मैने तुम्हें बताया तो था, मुझे करीम नगर जाना है तुम्हारे बड़े मामु के बेटे अदील की इंगेजमेंट है। वहां सब शिफ़ा के सेमेस्टर खत्म होने का इंतेज़ार कर रहे थे। अब इसकी छुट्टियां हुई है तो उनहोंने अगले जुमे की डेट फाइनल की है",
फुप्पो ने तफसील बताई।
"लेकिन अम्मी अभी तो पूरा हफ्ता है जुमे में, इतने दिन पहले जा कर आप क्या करेंगी??? "
वह हैरान हुआ
"घर का पहला फकंशन है बेटे, ऐसे थोड़ी अच्छा लगता है कि मैं टाईम टू टाईम जाउं। और फिर पहले से जा कर थोड़ी तैयारियां भी देखनी होती हैं और शिफ़ा को भी अपनी शॉपिंग करनी है थोड़ी"
उन्होंने कहा तो वह बस सर ही हिला सका।
"क्या शॉपिंग होगी लोवर टी शर्ट ही तो लेना होगा और क्या ", ???
वह सिर्फ सोचकर रह गया।
"अब तुम क्या सोचने लगे ???"
"कुछ नही , आप लोगों की फ्लाईट किस टाईम की है ??"
उसने जवाब देने के साथ ही पूछा।
"कल सुबह नौ बजे की….. तुम फकंशन में तो आओगे ???"
फुप्पो ने उम्मीद से पूछा।
"जी देखता हूं शायद आ सकूं"
जवाब उन्हे उनकी उम्मीद के मुताबिक़ ही मिला था। वह मन मसोस कर रह गईं।
"आपकी पैकिंग हो गई फुप्पो?",
उसने चाय का आखिरी घूंट खत्म करते हुए सवाल किया।
"नही ,बस वह बुआ को कहा है वह फारिग़ होती हैं तो फिर करेंगी वह आ कर"
"चलें मैं करा देती हूं आपकी पैकिंग, बुआ का क्या वेट करना…. .".
अरे तुम क्यों परेशान हो रही हो? करा देंगी ना बुआ खुद !!"
"कोई परेशान नही हो रही हूं , चलें आप !!!!",
उसने ज़बरदस्ती उनका हाथ पकड़कर उठाया था।
"यह अपने बालों का क्या हाल कर रखा है आज तुमने?" फुप्पो ने एक नज़र उसके बालों पर डाली जहां खुश्क बालों को ज़बरदस्ती उलटे सीधे लपेट कर जूड़ा बनाया गया था।
"ऑयलिंग नही हुई है काफी दिन से, टाईम ही नही मिला। यूनिवर्सिटी के चक्करों में और फिर मुझसे होती भी नही है खुद से तो घर पर भी अम्मी करती हैं !!!!",
उसने मासूमियत से बताया तो शहरयार के होंठो पर बेसाख्ता मुस्कुराहट आई थी।
"तो इसमें कौन सी बड़ी बात है। तुम मुझसे कह देतीं मैं कर देती। चलो आओ अब कर देती हूं !!!!
उन्होंने बेहद मुहब्बत से कहा तो वह इंकार ना कर सकी और उनके पीछे कमरे की तरफ चल पड़ी।
☆ ☆ ☆
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