Muhabbat Ek Sabaq - 8 Afariya Faruqui द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Muhabbat Ek Sabaq - 8

अदील की मंगनी की तैयारियां ज़ोरो शोरो पर थीं कौसर बेगम कभी देवरानी तो कभी नन्द के साथ शॉपिंग में बिज़ी थीं। उनका एक पैर घर में होता तो अगला बाज़ार में।
घर का पहला फंकशन था इसलिये यंग जेनरेशन भी काफी एक्साइटेड थी। 
आज भी तीनो लेडीज़ दोपहर से बाज़ार गई हुई थीं। और ऐसे में सारी ज़िम्मेदारी शिफ़ा के उपर आ गई ,हालांकि मुलाज़िमा थी लेकिन खाना उसे खुद को ही बनाना था क्योंकि मुलाज़िमा के हाथ का खाना किसी को पसंद नही आता था अभी भी वह सबके लिये चाय बना कर लाउंज में ले आई जहां सारे कज़िन्ज़ इकट्ठा थे। 

“जियो बहना जियो , बहुत सही टाईम पर चाय लाई हो क़सम से इस टाईम शदीद दर्द हो रहा है सर में एक तो गर्मी उपर से यह बाज़ारों के चक्कर उफ्फ हालत खराब हो गई है”
   रज़ा ने ट्रॉली में से चाय का कप उठाते हुए कहा 
“जियो नही भाई एयरटेल है आपकी इस बहन का”…… .   अनस ने लुक़मा दिया
“क्यों , क्या सिर्फ मेरी ही बहन है तुम्हारी नही “???
रज़ा ने अनस को घूर कर देखा 
‘अल्लाह ना करें’   
वह मुंह ही मुंह में बड़बड़ाया जो कि शिफ़ा ने बखूबी सुन लिया था। 
“क्या शॉपिंग करके आए हैं आप भाई “???
शिफ़ा अपना चाय का कप ले कर सोफे पर आज़मीन के बराबर ही टिक गई 
“मेरी कहां शॉपिंग, अभी तो यह दुल्हे राजा की शॉपिंग ही नही निमट रही है क्योंकि  इनके ससुराल वालों ने कहा है कि हर चीज़ लड़के की पसंद की होनी चाहिये और लड़के को ऑफिस से ही फुर्सत नही है ऐसे में मैं बेचारा ही पिस रहा हूं”……..  
रज़ा ने दुहाई दी 
“कोई बात नही आप की बारी में अदील भाई हिसाब बराबर कर देंगे”   
उसने मुस्कुराते हुए कहा
“हां यही तो मैं भी कह रहा हूं इनको कि जल्दी से अपना भी नम्बर लगाएं”   
अनस की ज़ुबान में फिर खुजली हुई थी
“तुम्हे क्यों इतनी जल्दी है मेरे नम्बर की यह बताना ज़रा” ??? 
क्यों का क्या मतलब है भई , आपके बाद मेरा ही तो नम्बर है
वह ढिटाई से बोला 
“तुम्हारे इरादे कुछ नेक नही लग रहे मुझे अनस , कहीं कोई पसंद तो नही कर रखी तुमने” ???
रज़ा को इस बार उस पर शक हुआ 
“जी हां यह शिफ़ा…..  
बात अधूरी छोड़ कर उसने चाय पीनी शुरू कर दी तो सब उसको घूरने लगे थे और शिफ़ा की तो शर्मिंदगी से हालत ही अजीब थी। उसके हाथ से घबराहट के मारे चाय छलक कर हाथ जला गई। 
“सोच समझ कर बोला करो तुम…..
रज़ा ने शिफ़ा की हालत देख कर अनस को गुस्से घूरा 
“अरे भाई मेरा मतलब है यह शिफ़ा...से पूछिये आप ,इस को पता है कि मैं किसको पसंद करता हूं “ 
उसने गड़बड़ा कर बात बनाई 
“तुम्हारी फिज़ूल बातों की ग्वाह बनने का मुझे कोई शौक़ नही है समझे” !!!
वह उसे खा जाने वाली नज़रों से घूरती अपना जला हुआ हाथ सहलाते हुए बाहर निकल गई तो अनस भी एक पल को शर्मिंदा हो गया। 

☆ ☆ ☆


वह ईशा की नमाज़ पढ़ कर आई थी कि सहन में चलते ठंडी हवा के झोंको ने उसका वापस अंदर  जाने का इरादा केंसिल कर दिया तो वह पंखा चला कर वही रखे तख्त पर आराम करने के इरादे से बैठ गई। 
“हैलो ब्यूटी  , क्या हो रहा है” ?  उसे बैठे कुछ ही देर हुई थी कि अनस वहीं आ गया
“क्या मुसीबत है भई तुम क्यों साये की तरह मेरे सर पर सवार रहते हो हर जगह”???
वह बुरी तरह चिढ़कर बोली
“और तुम क्यों हर वक़्त मिर्चे चबाए रखती हो बंदा कभी तो सुकून से बात कर लेता है”
अनस ने उसी की टोन में कहा तो जवाब में वह खामोश रही
“अच्छा गुस्सा छोड़ो और यह लो”
उसने हाथ में पकड़े दो आइस क्रीम के ग्लासो में से एक शिफ़ा की तरफ बढ़ाया था
“यह किस खुशी में” ????  

फ्लेवर उसका फेवरिट था इसलिये वह इंकार ना कर सकी 
“अब ऐसा भी कोई ग़रीब नही हुं मैं कि इतनी छोटी सी चीज़ के लिए भी किसी खुशी का इंतेज़ार करूं”

  अनस ने उसका मूड सही करना चाहा
“ओह हो तुम लाए हो क्या बात है” !!!
“हां भई , तुम्हें नही पता पार्ट टाइम जॉब करने लगा हुं मैं और यह अपनी सैलेरी से ही लाया हूं”   

अनस ने फर्ज़ी कॉलर अकड़ाए
“वॉव कांग्रेचुलेशन्स!! कब से स्टार्ट की जॉब” ?

उसे उसकी जॉब का सुन कर वाक़ई खुशी हुई थी

“तुम्हारे हैदराबाद जाने के बाद से ही कर दी थी स्टार्ट तो ,वह एक दोस्त की जानकारी में थे इंस्टिट्यूट वाले वहां पर अकाउटेंट की पोस्ट खाली थी तो मैं ने अप्लाई कर दिया”

उस ने हल्के फुल्के लहजे में तफसील बताई
“अच्छी बात है ,सैलेरी के साथ साथ एक्सपीरिएंस भी आएगा “

वह बात करने के साथ आइसक्रीम भी एंजॉय कर रही थी
“तुम्हारी वजह से ही किया है मैने यह” !!!

अनस ने उसे ग़ौर से देखते हुए कहा था
“क्यों मैने कब कहा तुम्हे यह करने के लिये”???

उसने आइब्रो चढ़ाई 
“तुमने नही कहा लेकिन तुम्हारे लिये चचा जान से बात करनी है मुझे और उसके लिये अच्छी जॉब तो ज़रूरी है ना और अच्छी जॉब के लिए एक्सपीरिएंस चाहिये होता है , बस उसी के लिये किया मैने यह सब”!!!

वह बात पूरी करने के बाद ही सांस लेने के लिये रूका था 
“यार तुम्हारी सुईं मुझ पर  ही क्यों अटकी हुई है दुनिया में और भी लड़कियां हैं”  ???

आज उसने गुस्से के बजाए सुकून से मुआमला हल करने का सोचा था
“हां हैं लेकिन मुझे वह सब नही पसंद  है तुम हो” !!!

अनस ने अपनी बात पर ज़ोर दिया
“लेकिन मैने कभी तुम्हारे बारे में ऐसा नही सोचा है”

“तो अब सोच लो कोई जल्दी नही है यू कैन टेक यौर टाईम    , अच्छा वह छोड़ो यह बताओ तुम्हारी शॉपिंग हो गई कम्प्लीट”???? 
अनस ने टॉपिक चेंज कर दिया।
“नही अभी सोचा ही नही मैने क्या लाना है”!!!!

उसने बेपरवाही से कहा

“एक्सक्यूज़मी मैडम दो दिन रह गए हैं जुमा में और तुम कह रही हो सोचा ही नही क्या लाना है “ ???

अनस ने उसे याद दिलाया।

“हां तो क्या करूं समझ में ही नही आ रहा है क्या ले कर आउं”…..

“कल मेरे साथ चलना मार्किट तब ले लेना ड्रैस दोनो दिन के लिये”………..

उसने शिफ़ा का मसला चुटकियों में हल कर दिया

“दोनो दिन “???

उसने ना समझी से उसे देखा था

“हां भई ऐक दिन तो हम जाऐंगे और एक दिन वह लोग आऐंगे तो हो गए ना दो दिन , क्यों तुम्हें नही पता था”???

उसने तफसील बताने के बाद पूछा

“बताया होगा अम्मी ने शायद, याद नही रहा मुझे”……

“ठीक है चलो जो भी है कल सुबह रेडी रहना, चलते हैं कल तुम्हारे ड्रैसेस लेने”……

अनस ने हल्के फुल्के अंदाज़ में कहा तो उसने भी हाँ में सर हिला दिया। 
☆ ☆ ☆

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