Muhabbat Ek Sabaq - 13 Afariya Faruqui द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • त्रिपिंड चित्त-दर्शन

    त्रिपिंड चित्त-दर्शन(The Tri-Pinda Consciousness Model)प्रस्...

  • राहें - 6

    पुत्र सुखमनु खाना खाने बैठा - थाली की सब्जी में बाल उसे फिर...

  • तेरी मेरी खामोशियां। - 15

    सुबह की ताज़ा धूप जब सुल्तान मेंशन के आँगन में उतरी, तो घर मे...

  • WAIT FOR WET - 1

    मध्य रात्रि का समय था. सन्नाटे से घिरी बीच सडक पर एक लंबे कद...

  • शिव

    मैं वो हूँ जो नहीं है ,जो नहीं है वो मैं हूँ।जो अस्तित्व के...

श्रेणी
शेयर करे

Muhabbat Ek Sabaq - 13

कुछ नही हटो साइड में और मुझे जाने दो" !!! 

वह उसे साइड को धकेलती जाने लगी। 

"मैंने कहा ना चेंज करो फिर जाना वहां" !!! 

अनस ने ज़बरदस्ती उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया था। 

"यह कुछ ज़्यादा ही हो रहा है अब" !! 

 वह गुस्से से अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली। 

"ज़्यादा है या कम है , मैंने कह दिया ना तुम वहां ऐसे नही जाओगी बस " !!! 

इस बार उसने बहुत सख्ती से कहा तो शिफ़ा को भी ताव आ गया। 

"देखती हूं आज कैसे नही जाने देते तुम मुझे ऐसे ही वहां" !!! 

वह अंगारे बरसाती निगाहों से उसे देखती एक झटके से अपना हाथ छुड़ा कर बोली। 

"ठीक है फिर अंजाम की तुम खुद ज़िम्मेदार होगी" !!! 

वह गुस्से से कह कर बड़े बड़े क़दम उठाता बाहर चला गया। 

"हुंह आया बड़ा कहीं का अफलातून" !!! 

वह भी सर झटक कर उसके पीछे पीछे बाहर निकल ली। 

"अस्सलामु अलेयकुम..... 

ड्राइंग रूम में जा कर वह बड़ा जानदार सलाम करती नादिया की अम्मी के पास बैठ गई। 
"वालेयकुम अस्सलाम... 

उनहोंने जवाब देते हुए उठ कर उसके सर पर प्यार किया था। 
सबकी खैर खैरियत पूछने के बाद उसने बारी बारी उनसे सब का इंट्रोडक्शन कराया था अनस की बारी आई तो उसकी शक्ल पर बारह बज रहे थे। 
उसने इशारे से उसे नॉर्मल रहने को कहा लेकिन वह जान बूझ कर मुंह दूसरी तरफ करके बैठ गया। 
चाय सर्व करते हुए जब वह माहिद के पास पहुंची तो उसे मुस्कुराकर चाय पकड़ाते हुए उसने जाने क्या कहा था कि वह बेसाख्ता मुस्करा दिया और यह मुस्कुराहट अनस से छुपी नही रह सकी थी। 
सबको चाय सर्व करने के बाद अनस की बारी आई तो उसने जिस आग उगलती नज़रों से उसे देखा था शिफ़ा के दिल में दूर तक ठंडक पड़ गई। 

"हमेशा ही मुझे किलसाता रहता है आज भुगते थोड़ा खुद भी.... 
वह दिल ही दिल में अपने कारनामें पर खुद को दाद दे रही थी। 

☆ ☆ ☆


"अम्मी मुझे शादी करनी है"

अनस ने मां के बराबर बैठते हुए इतमीनान से कहा तो मैग्ज़ीन पढ़ती बेगम असद ने चेहरे के आगे से किताब हटा कर एक नज़र बेटे को देखा था। 

"ऐसे क्या देख रही हैं, कोई अनोखी बात तो नही की मैंने" ??? 

उस ने माँ को यूं हैरत से अपनी तरफ देखते पा कर कहा। 

आज टैम्प्रेचर क्या है बाहर ???

उनहोंने उसके सवाल के जवाब में सवाल पूछा 

"बहुत हाई है, लेकिन यहां टैम्प्रेचर का क्या सीन है, मैं आप से क्या कह रहा हूं और आप क्या बात कर रही हैं" ????

वह झुंझलाया। 

"क्योंकि बेटा जी मुझे लगता है कि आज हाई टैम्प्रेचर की वजह से गर्मी तुम्हारे दिमाग़ की तरफ चढ़ गई है इसीलिये ऐसी बहकी बहकी बातें कर रहे हो तुम"

वह सुकून से बेटे को जवाब देकर दोबारा मैग्ज़ीन में बिज़ी हो गईं। 
"ओफ्फोह अम्मी , क्या है !! यह मैग्ज़ीन छोड़ें ना, मैं आप से इतनी इम्पोर्टेड बात कर रहा हूं और आप हैं कि इस मैग्ज़ीन में लगी हुई हैं"  
उस ने किलस कर माँ के हाथ से मैग्ज़ीन ले कर एक तरफ रख दी। 
"जी पता है आपकी इम्पोर्टेड बात और वह यह है कि तुम्हें शादी करनी है बेटा यह शादी है तुम्हारा फेवरिट फ्रूट नही कि बाज़ार से जा कर ले आए"

उन्होंने लापरवाही से जवाब दिया। 

"तो प्रॉबलम क्या है इसमें अम्मीं" ??? 

उस ने किलस कर माँ से पूछा । 

"प्रॉबलम बेटे शादी करने में नही है , प्रॉबलम यह है कि तुम्हारी जॉब नही है और ऐक बेरोज़गार को बेटी देगा कौन" ?? 

उन्होंने उसे उपर से नीचे तक देख कर पूछा। 

“चचा जान देंगे" !!! 

माँ के सवाल पर जितना इतमीनान से उस ने जवाब दिया था बेगम असद को उतना ही शॉक लगा था। 

"क्यों भई ऐसी कौन सी मजबूरी है उन की के वह अच्छे अच्छे रिश्ते छोड़ कर इस वेले बेरोज़गार स्टूडेंट को अपनी बेटी दें" ??

उनहोंने आइब्रो चढ़ाई । 
"अच्छे अच्छे रिश्ते , मतलब उसके और भी रिश्ते आ रहे हैं ????

उसने फिक्रमंदी से पूछा। 

"हां बिल्कुल आ रहे हैं और सब ऐक से बढ़ कर ऐक हैं ऐसे में मुझे कोई शौक़ नही है यह रिशता दे कर अपनी बेइज़्ज़ती कराने का" !!! 

वह भी उसी की टोन में जवाब दे कर दोबारा से मैग्ज़ीन की तरफ मुतवज्जह हो गईं। 

"और चचा जान ने अब तक किया क्यों नही फिर कोई रिश्ता एक्सेप्ट" ???

उस ने कुछ अचंभे से पूछा । 

"वह कहते हैं शिफ़ा की पढ़ाई पूरी हो जाए एक बार फिर मंगनी और शादी जल्दी जल्दी कर देंगे"

उनहोंने तफसील से बताया तो उसे थोड़ी तसल्ली हुई थी 

"फिर भी अम्मी आप प्लीज़ बात तो कर के देखें ना कभी उन्हें और कोई रिशता अच्छा मिल जाए और वह हां कर दें"

उस ने फिक्रमंदी से बोला। 

" अनस परेशान मत करो , मैंने कह दिया है ना कि मैं बात नही करूंगी और फिर अभी रज़ा बैठा है तुमसे बड़ा , मैं बड़े को छोड़कर पहले छोटे की फिक्र करूं क्या" ??? 

उनहोंने दो टूक अंदाज़ में कह कर बात खत्म कर दी तो वह भी अपना सा मुंह ले कर वहां से उठ गया। 


☆ ☆ ☆

"हैलो गर्ल्ज़ क्या हो रहा है" ??? 
शिफ़ा और आज़मीन दोनो किसी बात पर डिस्कस कर रही थीं कि अनस भी वहीं चला आया । 
"फरमाओ" ???

उस ने आज़मीन से बात करते रोक कर बेज़ारियत से पूछा। 
"कैसा लग रहा हूं आज मैं" ?? 
उसने हाथो से बाल सैट करते हुए उससे पूछा। 
" हमेशा ही ज़हर लगते हो मुझे तो जब ज़बरदस्ती अपनी यूं तारीफे कराते हो , आगे बोलो " ??? 

शिफ़ा की शायद आदत बन गई थी उस पर टोन्ट करना। 
"तुम्हारी तो खैर च्वॉइस ही खराब है , तुम बताओ मीनू" ??
उसने अब रूख आज़मीन की तरफ किया था। 

"आपी झूट नही बोलती हैं कभी" !! 

आज़मीन ने भी दाँत दिखाते हुए बहन की साइड ली थी। 

"अच्छा , ठीक है अब आना तुम अनस भाई आइसक्रीम खाने चलें प्लीज़, आपी की चम्ची" !!!! 

उसने उसे घूरते हुए तक़रीबन उसी के स्टाइल में नक़ल उतारी थी। 
"आपी ले कर ही जा रही हैं हमे आइसक्रीम खिलाने आज शाम को"। 
  आज़मीन ने अपना प्रोग्राम बताया 
"अच्छा!! तो इसीलिये इतनी चम्चा गिरी हो रही है तुम्हारी आपी की " ??? 

उसने अच्छा को लंबा खींचा। 

"अब जहां फायदा होता है वहां थोड़ा बहुत तो करना पड़ता ही है" !! 

वह शरारत से मुंह ही मुंह में बोली थी लेकिन आवाज़ बाका़यदा उन दोनों तक पहुंच चुकी थी । 

"अच्छा बस करें ना दोनो मिल कर डराने शुरू हो गये नन्ही सी जान को"

 आज़मीन ने उन दोनों के घूरने पर मिस्कीन सा मुहं बना कर कहा । 
"अच्छा चलो ज़रा सीधी हो इधर से , मुझे तुम्हारी बहन से ज़रूरी बात करनी है एक" !!! 

अनस ने कहते हुए आज़मीन को वहां से भगाना चाहा। 
“जी नही कोई ज़रूरत नही है कहीं जाने की यह यहीं बैठेगी , क्योंकि मुझे पता है तुम्हारी ज़रूरी बात" !!! 

उसने अनस को घूरते हुए आज़मीन का बाज़ू पकड़ कर उसे उठती उठती को फिर से बैठा लिया। 

" तुम उठ रही हो या नही" ???

अनस ने आज़मीन को घूरा था । 

"पहले आप दोनों डिसाइड कर लें मैं रूकूं या जाउं" ??

वह परेशान होकर बोली। 

"अरे तुम जा कर अपना काम कर लो यह तुम्हारी बहन तो टाईम वेस्ट करा रही है तुम्हारा" !!! 

अनस किसी भी तरह उसे वहां से भगाना चाह रहा था। 

"भाई आप शाम में कर लेना बात आपी से " !! 

आज़मीन ने कहा तो उस ने सवालिया नज़रों से दोनों की तरफ देखा था। 

"क्यों शाम में कौन सा मुहुर्त है" ??? 

"मुहुर्त नही है वह अस्ल में हम लोग आइस क्रीम खाने जा रहे हैं ना और नादिया बाजी यह लोग भी जा रहे हैं हमारे साथ क्योंकि परसो उनको वापस जाना है हैदराबाद। तो आप भी जवॉइन कर लें हमें , ऐसे माहिद भाई को भी कम्पनी मिल जाएगी वरना वह भी बोर हो जाएंगे हम गर्लस के बीच" !! 

आज़मीन ने एक ही सेन्टेंस में बात कम्प्लीट की थी। 

"वह किस खुशी में जा रहा है" ???

इस बार उसने त्यौरी चढ़ा कर शिफ़ा से पूछा। 

"कार वही ड्राइव करेंगे इसलिये" !!! 

जवाब उसके बजाए आज़मीन ने दिया था। 

"मुझे नही जाना , तुम लोग ही जाओ बस" !! 

वह गुस्से से कहते हुए उठा खड़ा हुआ। 

"क्या हुआ भाई , आपको क्या मसला है माहिद भाई से इतने स्वीट से तो हैं वह" ?? 

आज़मीन ने अंजाने में उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया। 

"बस यह माहिद पुराण मेरे सामने मत शुरू करो , तुम लोगो को ही मुबारक वह मुझे तो ज़हर लगता है" !!! 

"हमें तो नही लगता ना इसलिये हम जा रहे हैं तुम्हें नही जाना तो मत जाओ" !! 

शिफ़ा का सब्र भी जवाब दे गया था।