हैरानी - Ateet ki Yaadein - 14 vishnupriya pandit द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

हैरानी - Ateet ki Yaadein - 14

Episode -14 (डर दहशत और धोखा)


अस्पताल के गलियारों में आज सन्नाटा नहीं, बल्कि जूतों की भारी और डरावनी आवाज़ें गूँज रही थीं।

पुलिस की 'इन्वेस्टिगेशन टीम' चप्पे-चप्पे को खंगाल रही थी। फोरेंसिक दस्ता दीवारों की दरारों से लेकर फर्श पर पड़े खून के धब्बों तक की बारीकी से जांच कर रहा था। अस्पताल का हर कोना अब एक संदिग्ध अपराध स्थल बन चुका था। हवलदार और सिपाही अस्पताल के एक-एक कर्मचारी—चाहे वो डॉक्टर हो, नर्स हो या वार्ड बॉय—सबको लाइन में खड़ा कर पूछताछ कर रहे थे।

हर किसी के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ रही थीं, और माहौल में एक अजीब सी घुटन थी।


डॉक्टर सिन्हा एक कोने में खड़े थे, लेकिन उनका दिमाग वहां नहीं था। उनकी आँखें पागलों की तरह हर चेहरे में रिया को ढूंढ रही थीं। वह चीख... वह रिया की ही थी।

डॉक्टर सिन्हा के कानों में आज भी वह आवाज़ गूँज रही थी। उनका दिल किसी गहरे कुएं में गिरता जा रहा था। "रिया कहाँ गई? क्या उस नकाबपोश मास्कमैन ने उसे अगवा कर लिया? या फिर उस साये ने उसे अपने अंधेरे में निगल लिया?" ये सवाल उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रहे थे।

तभी पुलिस की एक टुकड़ी डॉक्टर सिन्हा के केबिन में दाखिल हुई। टॉर्च की रोशनी जब सफेद दीवार पर पड़ी, तो वहां मौजूद हर शख्स के रोंगटे खड़े हो गए। खून जैसे लाल रंग से बड़ी-बड़ी लिखाई में वहां मौत का फरमान लिखा था:

"डॉक्टर... तुम्हारी मौत की उल्टी गिनती शुरू!"


इंस्पेक्टर प्रताप ने जब यह पढ़ा, तो उनकी भवें तन गईं। उन्होंने तुरंत डॉक्टर सिन्हा को केबिन में बुलाया। इंस्पेक्टर की आँखों में शक की तेज़ चमक थी। उन्होंने दीवार की ओर इशारा करते हुए दहाड़कर पूछा, "मिस्टर सिन्हा! यह क्या तमाशा है? यह धमकी किसने दी और कब? आपने इसके बारे में पुलिस को पहले क्यों नहीं बताया? क्या आप हमारी जांच का इंतज़ार कर रहे थे या किसी और के मरने का?"

डॉक्टर सिन्हा का चेहरा सफेद पड़ गया। उनके माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगीं। उन्होंने कांपते हुए हाथ से पसीना पोंछा और लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, "इंस्पेक्टर साहब... पिछले कुछ दिनों से... सिर्फ मुझे ही नहीं बल्कि मेरे साथ काम करने वाली एक नर्स को भी ऐसी ही धमकियां मिल रही थीं। हम... हम बहुत बुरी तरह डर गए थे। हमने सोचा था कि शायद यह किसी का मजाक है, लेकिन फिर खौफ इतना बढ़ गया कि हमारी आवाज़ हलक में ही दब गई।"

डॉक्टर सिन्हा ने एक लंबी सांस ली और आगे कहा, "अगर हम किसी को बताने की कोशिश करते या यहाँ से भागने का सोचते, तो वह साया हमें जान से मारने की कोशिश करता। हम कई बार मरते-मरते बचे हैं इंस्पेक्टर! आप यकीन मानिए, पिछले दो साल से हम उसकी अदृश्य कैद में रहकर काम कर रहे हैं। वह हर वक्त हम पर नज़र रखता है।"

इंस्पेक्टर प्रताप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने अपनी भारी आवाज़ में चिल्लाते हुए कहा, "डॉक्टर सिन्हा! आप एक डॉक्टर हैं, यह बात आप भूल कैसे सकते हैं? एक पढ़ा-लिखा इंसान ऐसी बचकानी बातें कर रहा है? अगर आप डर के साये में काम करेंगे, तो मरीज क्या खाक ठीक होंगे? आपकी इसी लापरवाही की वजह से आज डॉक्टर राकेश खुराना की जान गई है! और अब आप कह रहे हैं कि दो साल से आप कैद में हैं? आपको क्या लगता है, मैं आपकी बनाई इस फिल्मी और झूठी कहानी पर यकीन कर लूंगा?"

डॉक्टर सिन्हा ने भी अब अपनी घबराहट को दबाया और इंस्पेक्टर की आँखों में आँखें डालकर घूरते हुए बोले, "हाँ! मैं एक डॉक्टर हूँ और यह बात मैं कभी नहीं भूला। लेकिन इंस्पेक्टर साहब, डॉक्टर होने से पहले मैं एक इंसान हूँ। क्या एक इंसान को अपनी जान का डर नहीं लग सकता? मैंने कभी अपने फर्ज में ढिलाई नहीं बरती। डॉक्टर खुराना मेरे सबसे करीबी दोस्त थे, उनकी मौत का गम मुझसे ज़्यादा किसी को नहीं है। लेकिन उनकी मौत मेरी वजह से नहीं हुई... मैं खुद इस खूनी खेल से अनजान हूँ। यह कोई कहानी नहीं, यह एक कड़वा सच है जो किसी भी दिन मुझे भी खुराना की तरह लाश बना सकता है!"

इंस्पेक्टर प्रताप कुछ पल के लिए शांत हुए। उन्होंने अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाए और बोले, "डॉक्टर सिन्हा, अगर आपकी बात में एक प्रतिशत भी सच्चाई है, तो भी सवाल खड़ा होता है कि खूनी ने आपको ही क्यों चुना? इस अस्पताल में और भी स्टाफ है, डॉक्टर हैं, नर्सें हैं। क्या वह खूनी आपसे कोई गैर-कानूनी काम करवाना चाहता था? क्या आपने किसी की जान के साथ खिलवाड़ किया है? अगर आप अब भी कुछ छिपा रहे हैं, तो याद रखिएगा, आप बहुत बड़ी मुसीबत में फंसने वाले हैं।"

डॉक्टर सिन्हा ने फिर से अपना पसीना पोंछा। उनका गला पूरी तरह सूख चुका था। "न... नहीं! मैंने अभी तक ऐसा कोई काम नहीं किया जो कानून के खिलाफ हो। और न ही मैं कभी करूँगा। लेकिन... वह लड़..."
अभी डॉक्टर सिन्हा अपनी बात पूरी करने ही वाले थे कि इंस्पेक्टर का फोन ज़ोर-ज़ोर से बज उठा। इंस्पेक्टर ने डॉक्टर सिन्हा को हाथ के इशारे से रुकने को कहा और खुद बात करने में मसरूफ हो गए।

उधर डॉक्टर सिन्हा का दिल भी धक-धक कर रहा था। तभी अचानक सिन्हा की जेब में रखा फोन भी वाइब्रेट होने लगा।
उन्होंने डरते-डरते फोन निकाला। अननोन नंबर था। वह थोड़ा दूर जाकर बोले, "हेलो... हेलो? कौन है?" दूसरी तरफ सन्नाटा था। सिर्फ किसी के भारी सांस लेने की आवाज़ आ रही थी। फोन कट गया। डॉक्टर सिन्हा जैसे ही मुड़कर इंस्पेक्टर की तरफ जाने लगे, फोन फिर बज उठा।

"हेलो! कौन है? बोलो!" डॉक्टर सिन्हा चिल्लाए।
इस बार दूसरी तरफ से एक भारी आवाज आई वह मास्कमैन था। 

डॉक्टर सिन्हा के पैर जम गए। वह बेजान बुत की तरह खड़े रह गए। उन्होंने फोन जेब में रखा, एक लंबी, बोझिल सांस ली और वापस इंस्पेक्टर के पास आए। इंस्पेक्टर ने फोन रखकर पूछा, "हाँ मिस्टर सिन्हा, आप कुछ कह रहे थे। वह बात पूरी कीजिए।"

डॉक्टर सिन्हा ने अपनी बात घुमाते हुए कहा, "नहीं... मुझे जितना पता था, मैंने बता दिया है। मुझे और कुछ नहीं कहना।"
इंस्पेक्टर की पारखी नज़रें डॉक्टर सिन्हा के चेहरे को पढ़ रही थीं। "झूठ! मिस्टर सिन्हा, आप कुछ कहने वाले थे, लेकिन फोन आने के बाद आपके तेवर बदल गए। वह अधूरी बात क्या है?"

डॉक्टर सिन्हा घबरा गए, "नहीं सर, ऐसा कुछ नहीं है। मैं बस... बस डर गया था।"
इंस्पेक्टर ने शक में सिर हिलाया। "अच्छा ठीक है। तो क्या आप उस खूनी के बारे में कुछ और बता सकते हैं? कोई हुलिया? कोई निशान?"

डॉक्टर सिन्हा बोले, "नहीं, वह सिर्फ धमकी देता है। मैंने उसे कभी नहीं देखा। वह मेरे सामने कभी नहीं आया।"

इंस्पेक्टर ने अपने एक हवलदार को इशारा किया, "जाओ, उस नर्स को यहाँ लेकर आओ!"
कुछ देर बाद हवलदार नर्स डेजी को लेकर वहां पहुँचा। नर्स डेजी की हालत डॉक्टर सिन्हा से भी बदतर थी। इंस्पेक्टर ने सीधा सवाल किया, "सिस्टर, क्या आप इस खूनी के बारे में कुछ जानती हैं? क्या आपको किसी पर शक है?"

नर्स डेजी ने पहले डॉक्टर सिन्हा की तरफ देखा, उसकी आँखों में ढेर सारे सवाल और खौफ था। इंस्पेक्टर गुस्से में दहाड़े, "सिस्टर! मेरी तरफ देखिए! जो पूछ रहा हूँ उसका सीधा जवाब दीजिए!"

नर्स डेजी पूरी तरह पसीने में भीग चुकी थी। उसने कांपती आवाज़ में कहा, "जी... मुझे एक इंसान पर शक है।"
इंस्पेक्टर की आँखों में चमक आई, "कौन है वो? क्या वो इसी अस्पताल में है?"
नर्स डेजी ने गहरी सांस ली, "नहीं! वह बाहर से आता है। आते ही हमें धमकाना शुरू कर देता है। उसने हमें अपना गुलाम बना रखा है। वह हम पर हर पल नज़र रखता है। अगर हम इस अस्पताल से बाहर कदम रखने की या किसी को सच बताने की कोशिश करते हैं, तो वह हमें मौत की धमकी देता है।"

"कौन है वो?" इंस्पेक्टर ने कड़ाई से पूछा।

नर्स डेजी बोली, "मैं उसका नाम नहीं जानती। मुझे नहीं पता वह कौन है और कहाँ से आता है।"

"उसका हुलिया कैसा है?"

नर्स डेजी ने याद करने की कोशिश की, "वह हमेशा एक लंबे काले कोट में होता है। आँखों पर बड़ा काला चश्मा और चेहरे पर हमेशा एक डरावना मास्क रहता है। उसकी आवाज़... उसकी आवाज़ बहुत भारी और खौफनाक है।"
इंस्पेक्टर ने डायरी में नोट किया। "और कुछ? वह आपसे क्या करवाना चाहता है? क्यों आप लोगों को गुलाम बनाया है?"

नर्स डेजी जैसे ही सच उगलने वाली थी, डॉक्टर सिन्हा ने उसकी तरफ देखा और आँखों ही आँखों में उसे चुप रहने का सख्त इशारा किया। नर्स डेजी की नज़रें डॉक्टर सिन्हा से टकराईं। उसकी आँखों में गुस्सा था, लेकिन डर कहीं ज़्यादा बड़ा था। उसने अपनी बात बदली और कहा, "नहीं... बस इतना ही जानती हूँ।"

पुलिस ने अस्पताल की सघन तलाशी ली, हर कर्मचारी का बयान दर्ज किया और अंत में वहां से चली गई। लेकिन पुलिस के जाते ही अस्पताल में फिर वही भारी सन्नाटा छा गया।
इधर, अस्पताल के एक गुप्त और अंधेरे कमरे में, जहाँ जल्दी कोई आता जाता नहीं था... वहां पड़ी रिया की पलकें धीरे से झपकीं। उसे होश आ रहा था। लेकिन जैसे ही उसकी आँखें खुलीं, उसने अपने सामने जो देखा, उसे देखकर उसके गले से चीख निकलने ही वाली थी कि किसी के ठंडे हाथ ने उसका मुंह दबा दिया। 


प्रिय पाठकों, उम्मीद है आपको आज का अध्याय- डर दहशत और धोखा जरूर पसंद आया होगा। कौन है वह जो रिया के साथ है? और कॉल पर मास्कमैन ने डॉक्टर सिन्हा को ऐसा क्या कहा जिससे वह डर गए? जानने के लिए बने रहे । कहानी पसंद आए तो रेटिंग जरूर करें और अपना सुझाव कॉमेंट में जरूर बताएं।