Episode- 13 (सफेद दीवार का काला सच)
रिया जब गहरी नींद से जागी, तो कमरे का सन्नाटा उसे डराने लगा। खुद को अकेला पाकर उसने वहाँ से भागने की एक नाकाम कोशिश की, पर कमज़ोरी ने उसे फिर बिस्तर पर पटक दिया।
उधर, डॉक्टर खुराना के घर में पसरा सन्नाटा किसी आने वाले तूफान की आहट दे रहा था। उनकी पत्नी नीलिमा बार-बार फोन मिला रही थीं, पर हर बार वही बेजान मशीन जैसी आवाज़ गूंजती— "आपके द्वारा डायल किया गया नंबर अभी बंद है।" उनका 22 साल का बेटा राज ड्राइंग रूम में पागलों की तरह टहल रहा था।
"माँ, पापा कल सुबह अस्पताल के लिए निकले थे, तब से कोई खबर नहीं है। सिन्हा अंकल कह रहे हैं कि उनकी गाड़ी पार्किंग में ही खड़ी है, फिर पापा हैं कहाँ?" राज की आवाज़ में घबराहट और गुस्सा साफ झलक रहा था।
"बस बहुत हुआ! अब मैं पुलिस के पास जा रहा हूँ," राज ने हिम्मत जुटाकर कहा।
रात के ढाई बज रहे थे। कोतवाली पुलिस स्टेशन के पुराने पंखे की चरमराहट के बीच राज और नीलिमा पसीने से तर-बतर वहाँ पहुँचे। राज ने मेज पर हाथ मारकर चिल्लाते हुए कहा, "सर! मेरे पापा डॉक्टर राकेश खुराना कल शाम से लापता हैं। अस्पताल में उनकी गाड़ी खड़ी है, पर वो कहीं नहीं मिल रहे। प्लीज आप एफ.आई.आर. लिखिए!"
ड्यूटी पर मौजूद इंस्पेक्टर ने बिना ऊपर देखे फाइल पलटते हुए कहा, "बेटा, डॉक्टर आदमी हैं, कहीं इमरजेंसी में फंस गए होंगे। 24 घंटे होने दो, फिर आना।"
नीलिमा जी रोते हुए बोलीं, "नहीं साहब! उनका फोन बंद है, वो कभी ऐसा नहीं करते। अस्पताल में सबका व्यवहार अजीब है, मुझे लग रहा है वो किसी मुसीबत में हैं।" इंस्पेक्टर अब गंभीर हुआ और राज के कांपते हाथों से लिखे विवरण के आधार पर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की। राज को क्या पता था कि जिसे वह ढूंढ रहा है, वह अस्पताल की ही एक दीवार के पीछे हमेशा के लिए खामोश हो चुका है।
इधर अस्पताल की मद्धम रोशनी में रिया ने कांपती उंगलियों से अपनी ड्रिप की सुई निकाली। उसे बस यहाँ से निकलना था। वह दबे पाँव गलियारे में बढ़ी, पर तभी डॉक्टर सिन्हा की नज़र उस पर पड़ गई। "रिया! रुको, तुम इस हालत में बाहर नहीं जा सकती!" डॉक्टर सिन्हा चिल्लाए, पर रिया पर तो घर जाने का जुनून सवार था। वह एक झटके में हाथ छुड़ाकर सीढ़ियों की तरफ भागी।
अंधेरे कोने में खड़ा वह कातिल शख्स इसी पल का इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही रिया पिछले गलियारे की तरफ मुड़ी, उसे पीछे भारी जूतों की आवाज़ सुनाई दी। एक काली परछाईं तेज़ी से उसकी तरफ बढ़ रही थी। डर के मारे रिया का दम फूलने लगा। भागते हुए अचानक उसका पैर फिसला और वह पूरी ताकत से उस कच्ची दीवार से जा टकराई जहाँ मरम्मत चल रही थी।
धड़ाम! दीवार की ऊपरी ईंटें ताश के पत्तों की तरह नीचे गिरीं। रिया दर्द से कराहते हुए उठने ही वाली थी कि उसकी नज़र सामने पड़ी। ईंटों के मलबे के बीच से डॉक्टर खुराना का नीला पड़ चुका चेहरा बाहर झाँक रहा था। उनकी पथराई आँखें जैसे रिया को ही देख रही थीं।
"आअआहहहह...!" रिया की एक ऐसी चीख निकली जिसने पूरे अस्पताल की रूह कंपा दी।
चीख सुनते ही वह साया अंधेरे में ओझल हो गया। इधर, राज पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुँच चुका था। जैसे ही सब रिया की आवाज़ की तरफ भागे, मास्कमैन बिजली की गति से वहाँ पहुँचा। उसने बेसुध रिया और दीवार से झाँकती डॉक्टर खुराना की लाश देखी। वह अंदर तक हिल गया, पर बिना समय गंवाए उसने रिया को उठाया और वहाँ से गायब हो गया।
जब पुलिस और स्टाफ वहाँ पहुँचे, तो नज़ारा देख सबके होश उड़ गए। सफेद दीवार के पीछे दफन डॉक्टर खुराना की नीली पड़ चुकी लाश ने सबको सन्न कर दिया। राज ने जब अपने पिता का वह हाल देखा, तो उसकी जान निकल गई। वह बौखला गया और पागलों की तरह स्टाफ से भिड़ गया।
"तुम सब ज़िम्मेदार हो! यह अस्पताल बंद करो! यहाँ जान बचाई नहीं, ली जाती है! मेरे पापा को मार डाला इन लोगों ने... पापाअआआ...!" राज की चीखें अस्पताल की दीवारों से टकराकर वापस आ रही थीं।
दूर अंधेरे में खड़ा मास्कमैन यह सब देख रहा था। उसके दिल में राज के लिए गहरी सहानुभूति थी, पर दिमाग में एक ही सवाल कौंध रहा था— "आखिर डॉक्टर खुराना की दुश्मनी किससे थी? क्या यह वही साया है जिसकी बात डॉक्टर सिन्हा कर रहे थे? मैं उसे ढूंढ के रहूंगा जिसने भी इतने नेक दिल डॉक्टर को मारा है!"
राज पूरी तरह पागल हो गया था वह सबसे मार-पीट करने लगा पुलिस वाले उसे संभाल रहे थे।
सबके चेहरे पर खौफ साफ दिख रहा था।
प्रिय पाठकों, उम्मीद है आपको आज का अध्याय- सफेद दीवार का काला सच जरूर पसंद आया होगा। क्या मास्कमैन रिया को उस साए से बचा पाएगा? क्या डॉक्टर खुराना का हत्यारा पकड़ा जाएगा? जानने के लिए बने रहे। अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर कहानी पसंद आए तो रेटिंग जरूर करें।"