Bhayanak Yatra - 5 books and stories free download online pdf in Hindi

भयानक यात्रा - 5 - तिब्बतन कुत्ते ।

पिछले भाग में हमने देखा की प्रेमसिंह की पत्नी को पैरालिसिस हो जाता है और ये खबर गोखले रमनसिंह को बताता है, प्रेमसिंह को अस्पताल ले जाया जाता है, वहां वो अपनी पत्नी की हालत देख के टूट जाता है।
वो बच्चो के मृत्यु के बारे में अपनी पत्नी को बताता है और कुछ उसको हौसला देने की कोशिश भी करता है ।
अब आगे....
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रमनसिंह किल्ले के पीछे भाग की तरफ तहकिकात कर रहा होता है ,ठंड सा मौसम है और वहां ठंडे से पवन के साथ साथ कुछ विचार रमनसिंह के दिमाग को खाए जा रहे है।

थैले को देखकर तो उसको ऐसा ही लग रहा होता हैं की ये कोई इंसान को मार के उसको ऐसे बांध दिया गया हो।
थैले के बंद होने के बाद भी उसके अंदर से इतनी बदबू आ रही थी की आसपास के सब लोगों ने अपने मुह पे रुमाल रख दिया था । खून का लगे होना और उसमे से बदबू आना एक लाश के होने की तरफ इशारा कर रहा था ।

रमनसिंह ने विद्यासिंह को पास बुलाकर उसको थैले को खोलने का ऑर्डर दिया,थैले के ऊपर का हिस्सा रस्सी से बांधा गया था और उसके इतनी मजबूरी से बांधा गया था की उसको खोलने के लिए चाकू का इस्तेमाल किया गया।

एक सामान्य इंसानी बॉडी को मरने के बाद खराब होने में १० दिन का समय लग जाता है ,और अगर वो जमीन के अंदर होती है तो लगभग १ साल तक वो धीरे धीरे सड़ने लगती है ।
थैला खोल ते ही उसमे से २ अलग अलग प्लास्टिक के थैले मिले जो वैसे ही बंद किए थे जैसे पहले वाला थैला बंद किया गया था ।

चरणसिंह ये देखकर बोला– साब, ये तो २ लाशे लग रही है, और वो भी सड़ी हुई । ठंड के मौसम में भी जैसे गर्मी का माहोल बन गया था । विद्यासिंह ने फटाफट से वो थैले को काटना चालू किया, पहले थैला काटने के बाद विद्यासिंह ने रमनसिंह की तरफ देखा और वहां से हलका सा हट गया।
थैले के अंदर से निकली लाश को देखकेे उन सबकी आंखे जैसे बड़ी बड़ी होने लग गई थी, उन्हों ने जो सोचा था उससे ये कुछ बिल्कुल ही अलग था।

उनकी उम्मीद से परे थैले में से लाश निकली थी वो कोई इंसान की नही थी, वो एक जानवर की लाश थी , उसके बाद दूसरे थैले को भी खोला गया तो उसमे भी एक जानवर की लाश मिली । रमनसिंह ने ये देखा तब फोरेंसिक डिपार्टमेंट को आगाह किया और खुद भी लाशों की जांच करने लग गया।

लाशों को बहुत ही बेरहम तरीके से काटा गया था , और उनके हर एक भाग को काटा गया था, बस मिसिंग था तो उनका सिर । थोड़े ही देर में फोरेंसिक डिपार्टमेंट के लोग आए और उन्होंने जांच करना चालू करा।
रमनसिंह भी जानवर की ऐसी हालत देखकर अंदर ही अंदर हील गया था । दूसरी तरफ ऐसा करने वालो की तरफ उसको गुस्सा भी आ रहा था ।
दोनो लाशों को ऐसे काट के बांधा गया था की उनके शरीर की हर एक चमड़ी को शरीर से अलग कर दिया गया था, शरीर में हाड़ – मांस को छोड़ दिया गया था इसीलिए जानवर की पहचान करना भी पुलिस के लिए मुश्किल था।

थोड़े जांच पड़ताल के बाद फोरेंसिक ऑफिसर ने रमनसिंह को बोला – ये कुत्ते के शव है, लेकिन ये भारत के कुत्ते नही है । ये तिब्बतन मस्टिफ है जो वाकई में बहुत महंगा कुत्ता है , इसमें से एक मेल है और दूसरा फीमेल । ये कुत्ते बहुत ही आक्रामक होते है और इसे पालना आसान नहीं होता । और उनको भारत में लाना इतना आसान नहीं है। ये कुत्ते तिब्बत में पाए जाते है जो लामा और सोल्जर के द्वारा पाला जाता है।
रमनसिंह ने पूछा– ये कुत्तों को मरे हुए कितना दिन हुआ है?

ऑफिसर ने बोला – लगभग बॉडी के हिसाब से ३ से ४ दिन।
रमनसिंह ने कुछ सोचा और ऑफिसर से हाथ मिलाया और उनको जाने का इशारा किया।
विद्यासिंह ने पूछा– क्या लगता है सर?
रमनसिंह ने जवाब दिया – ऐसा काम कोई सनकी ही कर सकता है, जो दिमाग से और दिल से दोनो जगह से क्रूर हो।
कुत्तों को मारने के पीछे का रहस्य रमनसिंह को कुछ समझ नही आ रहा था।

तभी उसी समय रमनसिंह का फोन बज उठा । रमनसिंह ने फोन की तरफ देखा तो स्क्रीन पर गोखले का नाम दिखा रहा था, रमनसिंह ने झट से फोन उठा लिया।

गोखले ने बोला– साब, यहां प्रेमसिंह की पत्नी की हालत ठीक नहीं है, पैरालिसिस का अटैक आया है,बच्चो के मरने की खबर सुनके ज्यादा आहत हुई है, डॉक्टर बता रहे है की उन्हें अच्छी अस्पताल में भेजना पड़ेगा । उसकी पत्नी की हालत खराब होती जा रही है, समय नही है और इलाज जरूरी है।

रमनसिंह ने जैसे अफसोस के साथ बोल दिया– उनको बड़े अस्पताल में भेज दो और उनका इलाज जल्दी से करवाओ, प्रेमसिंह को लेके किल्ले पे आ जाओ ।
गोखले ने ओके सर कहकर फोन काट दिया ।

गोखले ने अपने साथ आए एक इंस्पेक्टर शेखावत से कहा – तुम इनकी पत्नी को गोएंका हॉस्पिटल में एडमिट करवा दो । मुझे प्रेम सिंह को लेकर किल्ले पर जाना है । सर का ऑर्डर है ।

ठीक है सर – इंस्पेक्टर शेखावत ने कहा और डॉक्टर से बात करने चला गया ।

गोखले प्रेमसिंह को लेकर किल्ले की तरफ निकल पड़ा ।
क्या हुआ साब,, मुझे किल्ले पर क्यों बुलाया है ? क्या बच्चों के बारे में कुछ पता चला है ? – प्रेम सिंह ने बहुत बेचैनी के साथ गोखले से सवाल किया ।

अब ये तो सर ही बता सकते है कि उन्होंने तुम्हे वहां क्यों बुलाया है । जल्दी हम पहुंच जायेंगे । तुम खुद ही पूछ लेना – गोखले ने प्रेम सिंह की बात का जवाब देते हुए कहा । उसकी नजर अब भी रोड पर थी और हाथ स्टीयरिंग पर घूम रहे थे ।
प्रेम सिंह अपने बच्चों के बारे में सोच रहा था और उसे अपनी जोरु की भी चिंता बहुत थी ।

क्यों बुलाया था रमन सिंह ने प्रेमसिंह को किल्ले पर ? किसने मारा था उन तिब्बतन कुत्तों को ? क्या चल रहा था किल्ले पर ? जानने के लिए पढ़िए अगला भाग ।


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