साउंडलेस लव - 1 Sarvesh Saxena द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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साउंडलेस लव - 1








कहते हैं इस दुनिया में प्यार ईश्वर का बनाया हुआ सबसे अनमोल जज्बात है अगर किसी रिश्ते में प्यार नहीं तो वह रिश्ता, रिश्ता नहीं बल्कि बोझ बन जाता है, ईश्वर ने प्यार करने का अधिकार सबको दिया है लेकिन उसी ईश्वर के बनाए हुए इंसान ने, इस समाज ने, अपनी झूठी सामाजिकता की दुहाई देकर, खोखले रीती रिवाज और मान मर्यादा की दुहाई देकर और इस प्यार को जाति, धर्म, लिंग, रंग और रूप मे बाँधकर कई लोगों से यह हक छीन लिया है | क्या सच में ऐसा होता है कि प्यार करने का हक भी सिर्फ कुछ लोगों को है?







ये प्रकृति तो कभी किसी से भेदभाव नही करती तो फिर क्युं हमारे समाज मे जी रहे कुछ प्रेमियों का प्यार समाज और इसी भेद भाव की बली चढ जाता है |



















कुछ ऐसे ही दुर्भाग्यपूर्ण प्रेमियों की कहानी है “साउंडलेस लव - एक अनसुनी प्रेम गाथा” जो दुनिया के शोर में कहीं गुम हो जाती है और जिन्हें ना ही तो उनका प्यार मिलता है और ना ही समाज में प्यार का अधिकार, मिलता है तो सिर्फ दर्द और इंत्ज़ार वो भी कभी ना खत्म होने वाला दर्द और इंतज़ार |







रात के दस बज चुके थे, बरसात अभी भी धीरे-धीरे हो रही थी, हवा के झोंके धीरे धीरे से इस कदर कमरे मे आ रहे थे कि मानो कोई हरे घावों को बार-बार कुरेद रहा हो |















ये बरसात की रात गर्मी मे भी धीरे-धीरे एक सर्द रात में बदल रही थी |







इसी कमरे में जमीन पर बैठा आकाश नशे में चूर कांच की मेज पर कुछ चीजें रख रहा था | वो मेज पर कुछ और रखता कि तभी उसकी डोर बेल बजी |







“ ट्रीन ......ट्रीन....” |







उसने दरवाजे की तरफ घूर कर देखा और नशे में बोला,



“ कौन मरने आ गया इस समय? साले न चैन से जीने देते हैं और ना ही मरने देते हैं” |







ये कहकर उसने फिर मेज पर कुछ सामान रखना शुरू कर दिया लेकिन डोर बेल फिर बजी तो न चाहते हुये ही उसने गुस्से में जाकर दरवाजा खोला तो देखा सामने एक आठ नौ साल की बच्ची मुस्कुराते हुये एक टिफिन लिये खडी थी, लेकिन नशे की हालत में उसे पहचानना मुश्किल हो रहा था उसने खुद को संभालते हुये कहा,







“ कौन.....??? ज....जिया....तुम”???





आकाश को ऐसे देखकर वो कुछ परेशान सी हो गई लेकिन फिर भी मुस्कुराती हुई बोली,







“ ओह....अंकल मै अवनी......आपसे नीचे वाले फ्लैट में ही तो रहती हूं, आप के लिये मम्मी ने केक भेजा है, आज मेरा बर्थडे है, लेकिन आप.........कुछ ठीक नही लग रहे” |







आकाश इतनी देर तक खडा न रह सका, वो दरवाजे पे ही बैठ गया और अवनी को प्यार से देखता हुआ नशे में बोला,







“ ओह.....अवनी... तुम कितनी प्यारी बच्ची हो, लाओ केक दे दो, और जाओ, रात बहुत हो चुकी है” |







उसने अवनी को गले से लगाना चाहा लेकिन न जाने क्या सोचकर उसने ऐसा नही किया, लेकिन अवनी की नजर अंदर कमरे में रखी मेज पर पडी तो वो चिल्ला उठी |







उसकी चीख सुनकर आकाश घबरा गया और अपने होंठों पर उंगली रखकर बोला,







“ प्लीज किसी को मत बताना, तुमने क्या देखा अब जाओ...तुम अच्छी बच्ची हो ना.....गुड नाइट....” |







अवनी वहां से भाग गई पर न जाने क्युं उसे डर से ज्यादा आकाश पर दुख लग रहा था |







उसने उठकर दरवाजा बन्द किया और टिफ़िन लेकर अन्दर आया |







बाहर बारिश और तेज हो चली थी लेकिन आकाश की आंखों से बहने वाली बारिश से ये कहीं कम थी |







अन्दर आकर वो मेज के पास बैठ गया और बोला,







“ ये मेरे बैंक के पेपर, मैंने इन पर साइन कर दिया है, तुम सारे पैसे निकाल लेना, आखिरकार तुम्हारे सिवाय मेरा है ही कौन, ये मेरी गाडी और फ्लैट की चाभियां........और ये.....” |







इतना कहकर वो खामोश हो गया और सामने की दीवार पर लगी एक अधूरी पेंटिंग को देखकर मुस्कुराते हुये बोला,







“ ये मेरी गन जो दो दिन पहले ही मैनें मंगवाई है, ये रहा ब्लेड, ये है रस्सी और ये जहर.........अब तुम ही बताओ मै इनमें से किसकी मदद लूं” |







इतना कहकर उसने गन उठाई और अपने मुंह मे रखकर उसे चलाने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसकी नजर उस पेंटिंग से हट ही नही रही थी, उसने बडी देर तक कोशिश की लेकिन उसके हांथ कांप रहे थे, उसने गन बिस्तर पर फेंक दी और रोने लगा |







उसने मेज पर रखी रस्सी को उठाकर पंखे से बांधा और कहा,



“ आज मुझे मरने से कोई नही रोक सकता, कोई नही....”







रस्सी अपने गले में फंसाने के लिए वो बेड पर रखे स्टूल पर चढा, लेकिन नशे के कारण वो स्टूल से बेड पर गिर पडा |







उसने एक बार फिर बेड पर अपना सिर पटकते हुये कहा,



“ क्युं.....क्युं.....आखिर क्युं.....तुम मुझे मरने नही देते.....अगर तुम जिद्दी हो तो मै भी आज तुम्हारे पास आकर रहूंगा भगवान” |







ये कहकर उसने स्टूल पर लात मारी जो कमरे के दूसरी ओर गिरा जाकर |







बारिश और तेज होने लगी थी और रह रह कर बिजली कौंध रही थी |







कमरे में बिल्कुल सन्नाटा पसरा हुआ था, आकाश की आंखे गुस्से और आंसुओं से भरी हुई थीं, उसने ब्लेड उठाया और अपनी कलाई पर रखकर एक बार उस अधूरी पेंटिंग को फिर देखा, वो बस अपनी कलाई पर ब्लेड मारने ही वाला था कि तभी सन्नाटे को चीरती हुई मेज पर रखे मोबाइल की घंटी बज उठी, मोबाइल की घंटी लगातार बजती ही जा रही थी, आकाश को मोबाइल की घंटी सुनाई तो दे रही थी लेकिन वह मोबाइल की घंटी को बार बार अनसुना कर रहा था, लेकिन मोबाइल की घंटी थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी, उसके हांथ अब कांप रहे थे और हार कर उसने गुस्से में मोबाइल उठाया और फर्श पर पटकना चाहा लेकिन स्क्रीन पर नमन का नाम देख कर वो रुक गया, ये नाम देखकर उसने ना चाहते हुए भी मोबाइल उठाया और गला साफ करते हुये कहा - "हेलो" |



















फोन के दूसरी ओर से आवाज आई - "अरे यार आकाश.... कहां था? कितनी देर से फोन कर रहा हूं, मुझे तो घबराहट होने लगी थी, अब तूने मोबाइल भी स्वीच ऑफ रखना शुरु कर दिया, कम से कम अपनों का तो फोन उठा ही लेना चाहिए, खैर वह सब छोड़ो कैसे हो तुम? खाना खाया था या नहीं और हां मुझे पता है तुमने अब बहुत ज्यादा शराब पीना शुरू कर दिया है प्लीज यार अपनी हेल्थ का ध्यान रखो, अगर ऐसे ही चलता रहा तो तुम अपने आप को भी खो दोगे, चलो वो सब छोड़ो पहले यह बताओ क्या तुमने आज न्यूज देखी"?

" न्यूज..... न.... नहीं..... क्या हुआ"? आकाश ने खिड़की के बाहर बारिश को देखते हुए कहा ।

नमन बोला, "ओ हो... मैं भी तुमसे क्या पूछ रहा हूं, तुम्हें तो अपना मोबाइल तक देखने से मतलब नहीं तुम क्या न्यूज़ देखोगे, पता है, मै तुम्हे दोपहर से कॉल कर रहा हूं पर तुम्हारा फोन ही बन्द जा रह था, अरे यार आज मै तुम्हे ऐसी खबर सुनाने वाला हूं कि तुम भी उछल पडोगे ये खबर सुनकर, सच में बहुत बढ़िया हुआ…मुझे तो यह सुनकर रहा ही नहीं गया इसीलिए पता लगते ही सीधा तुम्हारे पास फोन किया, आकाश... आकाश ...तू सुन तो रहा है ना या मोबाइल बिस्तर पर फेंक दिया, बोल यार, तू इतना चुप क्यों है यार? कुछ तो बोल, कब से मैं ही बोले जा रहा हूं, तेरी तबीयत तो ठीक है ना?"







ये कहकर नमन चुप हो गया |











आकाश ने गंभीर और अलसाई आवाज में कहा “ हां मैं बिल्कुल ठीक हूं, बस आंख लग गई थी, मौसम अच्छा था तो नींद भी जल्दी आ गई, तू बता क्या खबर सुनाना चाह रहा था” |











नमन ने हंसते हुए कहा " शुक्र है तू सुन रहा है, मुझे तो लगा बस मैं बोले जा रहा हूं और तू घोडे बेच के सो गया, दरसल बात कुछ ऐसी है ना कि मै तो तुझे आकर ये खबर सुनाना चाह रहा था पर क्या करूं मुझे दो दिन पहले घर आना पडा कुछ काम से, तुझे पता है आज एक ऐतिहासिक बात हुई है जिससे तुम्हारे जैसे लोगों को एक आजादी मिली है काश ये आजादी पहले ही मिल गई होती, आज ……….. "|















आकाश का सबसे अच्छा दोस्त नमन मोबाइल के दूसरी ओर कुछ बराबर बोलता रहा जिस की बातें सुनकर आकाश के हाथ से मोबाइल छूट गया, उसके हाथ पैर कांपने से लगे, लेकिन नमन तो कह रहा था यह खबर सुनकर वह खुशी से उछल पड़ेगा उसे तो खुश होना चाहिए था पर उसके मन में बार-बार दुख का सागर उमडने लगा था और यह खबर सुनकर उसके कानों में तो किसी और की ही आवाज सुनाई दे रही थी, वो न जाने किस कशमकश में खो गया, फर्श पर पडे मोबाइल पर बात कर रहे नमन ने कई बार आकाश को आवाज दी और हेलो हेलो करता रहा लेकिन आकाश फर्श पर बैठा बेसुध सा न जाने क्या सोच रहा था, कॉल कुछ देर बाद कट गई |















बारिश अब और जोर हो चली थी, और खिडकी से उसकी ठंडी बौछारें आकाश को भिगो रहीं थीं | आकाश की आंखें नम हो चलीं, वह फर्श पर बैठकर ठंडी आहें भरने लगा और बोला," काश... काश... ऐसा पहले ही हो गया होता, तो आज तुम मेरे पास होते, हम दोनों एक साथ होते, आखिर क्यों??? क्यों हमारे साथ ऐसा हुआ" ?? कितनी देर कितनी देर् कर दी.... भगवान कितनी देर कर दी .....” |











उसके दिल में यादों का गुबार छा गया जो आंखों से आंसू बनकर बह पड़ा, उसके हाथ पैर अभी भी कांप रहे थे, उसके कानों में किसी की दर्दनाख चीखें अभी भी गूंज रहीं थीं, उसका दम घुटने सा लगा इसलिए वो खिड़की से आती हुई बारिश की बौछार और धीमी धीमी ठण्डी हवा मे साँस लेने के लिए खिड़की के पास खड़ा होकर आसमान देखने लगा, चारों ओर खामोशी सी छाई हुई थी |



उसका चेहरा बारिश से पूरा गीला हो चुका था | वो अक्सर ही ऐसा करता था जब बारिश होती थी तो वो जी भर कर रोता ताकि उसके बहते आंसू दूसरों के अलावा उसे खुद भी दिखाई ना दें |















ये वही आकाश था जिसे कभी बारिश बिल्कुल भी पसन्द नही थी, पर अब ...अब तो ये बारिश उसकी हमसफर बन चुकी है, जिसकी मौजूदगी मे वो जी भर कर रोता है, ठंडी हवा के झोंकों से उसका मन कुछ शांत हुआ, चेहरे के साथ साथ उसकी टी शर्ट भी पूरी तरह भीग चुकी थी, उसने अपनी गीली टी शर्ट उतार कर फेंक दी और मेज पर रखे सारे सामान को फर्श पर गिराकर अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया और कमरे की उस धीमी सी रोशनी में वह अपनी बनाई हुई उस अधूरी पेंटिंग को बार-बार देखने लगा जो मानो उससे कुछ कह सी रही थी |











उसके कानों में बार-बार उन दर्दनाख चीखों के अलावा नमन की बोली हुई बातें गूंज रही थी लेकिन वो एक टक उस अधूरी तस्वीर को देखे जा रहा था, ऐसा लग रहा था कि उसका दिल और दिमाग शून्य हुआ जा रहा हो, उसकी आंखें धीरे धीरे बंद होती जा रहीं थीं और आंखों के आगे अन्धेरा सा छा रहा था | उसकी आंखें बिल्कुल बंद हो चुकी थी बारिश और जोर हो चुकी थी लेकिन आकाश का अंतर्मन अभी भी जाग रहा था |



















उसको आज बार बार वो दिन याद आ रहा था जिस दिन से उसकी जिंदगी बिल्कुल बदल गई थी, और इन्हीं यादों का बवंडर उसके मन में तेजी से उमड़ने लगा जो बाहर के बवंडर के मुकाबले बहुत तेज था और कुछ ही पलों में आकाश उस बवंडर में न जाने कहां गुम हो गया ।