आँगन की चाँदनी - आखिरी भाग Sabreen FA द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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आँगन की चाँदनी - आखिरी भाग

दोपहर होगयी थी जब आरोही वापस हॉस्पिटल आयी तो राहुल के घरवालों में से कोई भी वहां मौजूद नही था।
आरोही दरवाज़ा खोल कर चुपके से अंदर चली गयी, अंदर जाने के बाद आरोही ने देखा मेज़ पर खाने का टिफ़िन और फल रखा था, आरोही सोचने लगी लगता है कोई अभी आ कर गया है सोचते से सोचते करोहि बैठने लगी तो आहट हुए,राहुल ने अपनी आंखें खोली लेकिन गहरे अंधेरे के इलावा उसे कुछ भी नज़र नही आया।
राहुल ने पूछा, कौन है यहां पर??
आरोही: आप तो मेरी आहट भी पहचान जाते है।
राहुल: अच्छा तो आप है।
आरोही: जी हाँ
राहुल झल्लाते हुए बोला, मेरे मना करने के बावजूद आप क्यों चली आती है।
आरोही: राहुल आप यह नही सोचते आपके यह शब्द मुझे कितना दुखी करते है।
राहुल: तो यहां मत आया करो।
आरोही: राहुल आपकी यह हालत देख कर मैं पहले ही दुखी हूं आप मुझे और दुखी क्यों करते है।
राहुल गुस्से से बोला, आरोही आप यह कहना चाहती है मेरे अंधेपन पट आप दुखी है और दुख का इज़हार करने के लिए आप यहां आती है इसिलए मैं आप से कहता हूं यहां मत आया करो।
उसके गुस्सा करने की वजह से आरोही रोने लगी,
राहुल ज़ोर से बोला, अब रोने का क्या मतलब है??
आरोही: आप मुझे इतना गलत समझ थे है तो रोना तो आएगा ही न।
राहुल थोड़ा सख्त हो कर बोला,आप ऐसा करे जाए यहां से आप यहां रुकेंगी बातें करेंगी मैं आपको जैब दूंगा आपको लगेगा मैं आपको गलत समझ रहा हु इससे अच्छा है आप यहां से चली जाएं।

आरोही सिसक सिसक कर रोने लगी राहुल कुछ देर तक कठोर बना उसकी सिसकियां सुनता रहा।
राहुल उसके आंसुओं को महसूस करते हुए बोला,आरोही आप चाहती क्या है?
हिचकियों के बीच से आरोही बोली, आप मेरे साथ अपना रवय्या बदल लें बस इतना ही चाहती हु।
राहुल: पहले तुम इन सिसकियों को रोको जो तलवार की तरह मेरे दिल को काठ रही है, वोह आरोही के सामने अपने जज़्बातों को छुपा नही पाया।
आरोही रोते हुए बोली, और आपका रवैय्या जो इतने दिनों से मेरे दिल को चीर रहा था उसका क्या??
राहुल: मैं ने इरादा तो यही किया था आपके साथ ऐसा ही रवैय्या रखूंगा लेकिन आपके आँसूओं ने मेरे इरादे तो तोड़ दिया।
अरोहिया सिसकते हुए बोली, राहुल आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे है।
राहुल: ताकि आप मुझ से नाराज़ हो कर अलग हो जाये और आपको अपना फैसला बदलने में आसानी हो।
आरोही: अब मैं समझी आप इतने दिनों से मुझे इतनी कठोरता से क्यों बात कर रहे थे।
राहुल: मैं क्या करूँ आरोही इसके इलावा मेरे पास कोई और रास्ता ही नही था मैं अपने जीवन के अंधेरे में तुम्हारी ज़िन्दगी को अंधेरो से नही भर सकता हु, मैं ने तुमसे प्यार किया है बेइंतेहा और बेपनाह तुम किसी और कि हो जाओगी तो मैं अपने दिल संभाल तो लूंगा लेकिन मैं यह बर्दाश्त नही कर सकता तुम्हारी आँखों मे ज़िन्दगी भर मेरे लिए आंसू हो।
आरोही उसके पास जा कर उसके चेहरे को अपने हितों में लिए हुए बोली, मैं भी आपसे प्यार करती हूं राहुल बेपनाह प्यार करती हूं।
राहुल उसके हातों को हटाते हुए बोला, लेकिन अब मैं वो राहुल नही हु मैं एक अपाहिज इंसान हु।
आरोही: ऐसा कह कर आप मेरे प्यार की तौहीन कर रहे है।
राहुल: आरोही जज़्बात में मत बहो उम्र भर अंधेरो में रहना मेरा नसीब बन चुका है मैं नही चाहता वो तुम्हारा मुकदर बन जाये। तुम ऐसा समझ लेना तुम्हरी ज़िन्दगी में कोई राहुल आया ही नही मैं गए वालो से कह कर इससे रिश्ते को खत्म कर दूंगा।
आरोही अपने चेहरे पर एक दर्द भरी मकान लिए हुए बोली, राहुल अगर आपकी और मेरी सगाई हुई होती और मैं आप से प्यार नही भी करती तो भी मैं उम्रभर आपके साथ रहने का फैसला करती, राहुल मैं ने तुम्हे चाहा है तुमसे मोहब्बत की है मैं ना तो आप छोड़ सकती हूं ना आपको भुला सकती हूं आप वादा कीजिये आप मिझे कभी खुद से दूर नही करेंगे।
राहुल बस गहरी सोच में डूबा रहा।
आरोही आगे बोली, मैं आपकी आंखें बन जाऊंगी प्लीज मुझे खुद से डोर मत करो अगर तुमने ऐसा किया तो मैं जीते जी मर जाऊंगी।
जैसे ही राहुल ने यह सुना उसने अपने हाथ पर रखे आरोही के हाथ को कस कर थाम लिया उसकी पकड़ बता रही थी वो ज़िन्दगी भर आरोही का साथ नही छोड़ेगा।
आरोही की आंखे खुशी से चमक उठी,
राहुल मज़ाक करते हुए बोला, अब बातों से पेट भरोगी क्या मुझे बहोत ज़ोर से भूख लगी है।
आरोही: मैं अभी खाना लाती हु।
राहुल: लाती नही खिलाती हु।
आरोही: ठीक है आज मैं आपको अपने हाथों से खाना खिलाऊँगी।


कुछ दिनों बाद राहुल ठीक हो कर वापस घर गया।वोह अब पुलिस की नौकरी तो नही कर सकता था इसीलिए उसने बिज़नेस करने का फैसला किया इस बारे में उने अपने पापा और भाई से बात की वो दोनों इसके लिए खुशी खुशी तैयार हो गए। जैसे जैसे दिन बीतते गए राहुल को उन अंधेरो के साथ रहने की आदत पड़ गयी और अब पहले की तरह हसी मज़ाक करने लगा था उसका वोह हँसी जो पिछले दिनों कहि खो गया था अब फिर से पूरे घर मे गूंजने लगी थी।
सब लोग ड्राइंग रूम में बैठे हुए थे तभी सामने से अर्जुन जी आते हुए बोले, हम अंदर आ जाये।
जब सब लोगो ने अंजलि ही और अर्जुन जी को दरवाज़े पर खड़े देखा तो जल्दी से उठ कर खड़े हो गए।
राहुल के पापा अंदर आईये ना आप लोग वहां क्यों खड़े है। वोह लोह अंदर आये तो उनके पीछे से आरोही भी चलती हुई अंदर आयी।
अर्जुन जी राहुल के सर पर हाथ फेरते हुए बोले, कैसे हो बेटा।
राहुल: मैं ठीक हु
रोहित थोड़ा नाराज़ होते हुए बोला, क्या पापा आप तो सिर्फ राहुल को ही प्यार करते हो।
आरोही मुस्कुराते हुए बोली, इतने सालों से बस आपको ही प्यार करते आये है आज इनको प्यार कर लिया तो आपको जलन होने लगी।
आरुषि: देख रहे है पापा अपने मंगीतर की कितनी तरफदारी हो रही है।
उसकी बात सुन कर सब लोग हसने लगे।
अर्जुन जी: अरे भाई साहब हम यहां इसलिये आये थे कि अब तो आरोही की पढ़ाई पूरी हो गयी है शादी की डेट कब की फाइनल कर रहे है।
राहुल के पापा बोले, भाई साहब आप तो जानते है हमारा बीटा अब देख नही सकता है ऐसी हालत में कही आप रिश्ते से इनकार न करदे इसी सोच ने हमे आपसे बात करने से रोक रखा था।
अर्जुन जी: अरे भाई साहब आप कैसी बातें कर रहे है हम अपनी जुबान के पक्के है और आपने ऐसा सोच कैसे लिया आपकी सोच बिल्कुल गलत है, अगर यही हादसा शादी के बाद होता तो क्या हम अपनी बेटी को गबर बिठा लेते, आरोही की मंगनी के बाद यह आपकी आपकी हो चुकी थी और आज भी यह आपकी ही अमानत है।
अंजलि जी: भाई साहब आरोही तो आपके आँगन की चाँदी है यह तो यह तो आपके आँगन में ही उतरेगी।

रोहित मुस्कुराते हुए बोला, राहुल नई मुसीबत झेलने के लिए तैयार हो जाओ।
आरुषि रोहित को गुस्से से घूरते हुए बोली, अगर हम लोग आपकी ज़िंदगी मे नही आते ना तो आपकी फरमाइशें पूरी कौन करता हर काम के लिए हम पर निर्बहर रहते है और हमें ही मुसीबत बोल रहे है।
रोहित कान पकड़ कर माफी मांगते हुए बोला, सॉरी मेरी माँ
आरुषि: मैं आपकी माँ कब बन गयी
रोहित: ठीक है ठीक है
उन दोनों की नोक झोंक देख कर सब हसने लगे।
आरुषि राहुल से बोली,राहुल तुम दूल्हा बनने और आरोही तुम दुल्हन बनने के लिए तैयार रहो बहोत जल्द तुम दोनों की शादी होने वाली है।
कुछ दिनों के बाद दोनों की शादी हो गयी आरोही राहुल की हर छोटी छोटी चीजों का खयाल भी रखती और साथ ही साथ उसके बिज़नेस में हेल्प भी करने लगी।



हैप्पी एंडिंग😊
सीख: इंसान जिससे से मोहब्बत करता है वह बुरे वक्त में भी उस इंसान का साथ नही छोड़ता है।

बहोत बहोत शुक्रिया इस कहानी को इतना प्यार देने के लिए फिर मिलेंगे एक नही कहानी के साथ तब तक अपना अपने घरवालों और दोस्तों का खयाल रखे।
बाये बाये