आँगन की चाँदनी - 5 Sabreen FA द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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आँगन की चाँदनी - 5

अगली सुबह

आरोहि कपड़े प्रेस कर रही थी आरुषि तह लगा रही थी तभी डोर बेल बाजी, आरोहि प्रेस एक साइड में रखते हुए बोली में देखती हु,
आरोहि ने जैसे ही दरवाज़ा खोला बाहर रोहित के ममी पापा खड़े थे,
आरोहि खुशी से उन्हें गले लगाते हुए फूफी और फूफा जी आप दोनों आ गए,,,,,, वो आरुषि को आवाज़ देने लगी उसकी आवाज़ सुन कर आरुषि सर पर दुपट्टा रखते हुए बाहर आई, और उन दोने के आशीर्वाद लेने लगी।

वंश रावत(रोहित के पिता): खुशी से उसके सर पर हाथ फेरते हुए खुश रहो बेटी।

वंशिका रावत( रोहित की माँ): अरे मेरी बच्ची मेरे गले लगो, वो आरुषि को खुशी से गले लगते हुए बोली तुम तो बहोत पतली हो गयी है क्यों रोहित ने खयाल नही रखा क्या।

उनकी बात पर आरोहि हस्ते हुए बोली क्या मम्मी आप भी न, आप आ रही तो बता देती राहुल आपको लेने चला जाता।

वंश जी खुशी का कोई ठिकाना नही आ रहा क्या राहुल वापस आ गया है।

आरुषि: जी पापा वो पिछले हस्ते ही ट्रेनिंग खत्म करके वापस आया है।

वंशिका जी भावहीन होकर बोली, कहा है वो मेरी तो आंखे तरस गयी है उसे देखने के लिए।

आरुषि:वो तो बाहर गया है।

आरोहि: मैं पानी लेकर आती हु,वो किचन में गयी और पानी लेकर बाहर आई,
फूफी पानी लीजिये।

वंशिका जी: लाओ बेटी, यहां आओ मेरे पास बैठो और बताओ तुम कब आयी हम तो तुम्हे बुला बुला कर थक गए थे तुम तो आयी नही थी।

आरोहि:ऐसी बात नही है फूफी पहले पढ़ाई में बिजी थी अब दादी की देखभाल में वो तो दी ने जीजू को भेज कर यहां बुलाया था, क्यों कि वो अकेले बोर हो रही थी।

वंश जी: बहोत अच्छा किया बेटी जो तुम यहा आ गयी, और तुम्हारी दादी कैसी ही।
आरोहि: वो भी ठीक है।
वंशी जी: तुम्हारे मम्मी पापा कैसे है।
आरोहि: वो भी ठीक है।
इस वक़्त राहुल घर पर वापस आया और अपने पापा को देख कर दूर से चिल्लाया माँ पापा आप आ गए।

राहुल,,, राहुल की माँ उसे देखते ही खड़ी हो गयी।
वो भाग कर उनके नज़दीक आया।

वंश जी उसे गले लगा कर उनकी पीठ थपथपाते हुए, जीते रो मेरे चाँद,
फिर वो वंशिका जी के पास गया, वंशिका जी ने उसका चेहरे को अपनो दोनो हाथों में लेकर उसे प्यार किया, और बोली अगर मुझे खबर होती कि राहुल आ गया है तो मैं फौरन चली आती, तूने मुझे फ़ोन करके बताया क्यों नही।

राहुल: अगर मैं आपको फ़ोन करके बताता की मैं आ गया हूं तो आप फौरन चली आती और आपका इस तरह आना रोशनी दी और उनकी ससुराल वालो को अच्छा नही लगता।

वंशिका जी उसके सर पर चपेट लगते हुए तो क्या हुआ रोशनी की ससुराल वाले कोई गैर तो नही तेरे सगे चाचा जी ही तो है, नाराज़ होने का कोई सवाल ही पैदा नही होता।

राहुल: अच्छा यह सब छोड़िए अब यह बताईये रोशनी दी और मेरा भांजा कैसा है,,,?

वंशिका जी: रोशनी तो ठीक है और तुम्हारा भांजा जैसे चाँद का टुकड़ा है।
राहुल: फिर तो किसी रोज़ जा कर उसे देख आऊंगा।
वंशिका जी: हाँ हाँ ज़रूर जाओ रोशनी तुम्हे देख कर खुश हो जाएगी।

आरुषि: मम्मी आप नहाने के बाद नाश्ता करेंगी।
वंशिका जी: हाँ बेटी नाहा लुंगी तो थकावट कम हो जाएगी।
आरुषि:ठीक है,वो वहां से चली गयी आरोहि भी उसके पीछे अंदर चली गयी।

अगले दिन आरोहि अपने कमरे में अपना सामान पैक कर रही थी राहुल दौड़ते हुए उसके कमरे में आया, आरोहि उसे हैरानी से देखने लगी, आप यहां क्या कर रहे है।

राहुल हांफते हुए, सुना है आप जा रही है।

आरोहि: जी हाँ

राहुल: क्यों जा रही है,,,?

उसके इस बचकाने सवाल पर आरोहि हसने लगी।
में यहां इसलिए आयी थी क्योंकि मेरी बहन अकेली थी लेकिन अब सब लोग आ गए है इसीलिए मैं वापस अपने घर जा रही हु।

राहुल: आप खुद को मेहमान समझती है क्या????

आरोहि:तो और क्या समझू!!!!!!!!!
वो उसका जवाब देने के बजाए उसे से सवाल कर बैठी।

राहुल: मेरा मतलब था,,,,,,,नही मैं कह रहा था कुछ दिन और रुक जाईये अब देखिए न माँ पापा कल ही आये है, और आज ही आप जा रही है।

आरोहि: यहां आकर मुझे एक हफ्ता होगया है और यूनिवर्सिटी की स्ट्राइक भी खत्म होगयी है, मेरी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है, आरोहि अपना हैंड बैग एक तरफ रखने लगी।

राहुल: तो अब आप नही रुकेंगी,,,?????
आरोहि: आप मुझे रोकने की जिद्द क्यों कर रहे है?????????

वो जवाब देने के बजाए कुछ देर खड़ा रह कर आरोहि को देखने लगा, और फिर एक दम से पलट कर कमरे से निकल गया।

यह राहुल भी अजीब है आरोहि मन ही मन बड़बड़ाई,
आरोहि अपना हैंड बैग लेकर सीढ़ियों से नीचे आयी तो आरुषि उसे दरवाज़े के पास दिखी।

आरुषि: तैयार होगयी।
आरोहि: जी दी
आरुषि: अच्छा मैंने राहुल को बोली हु वो तुम्हे छोड़ आएगा।

आरोहि:उन्हें क्यों तकलीफ दे रही है मैं खुद चली जाऊंगी,

आरुषि: अरे इसमे तकलीफ की क्या बात एयर ज़रा सोचो अगर तुम अकेली चली गयी तो मम्मी पापा क्या सोचेंगे, इसीलिए राहुल तुम्हारे साथ जा रहा है।

आरोहि मुंह बना कर जैसा आप ठीक समझे।

वंशिका जी: आरोहि बेटी अपना ख्याल रखना।
आरोहि: जी फूफी।

जाओ राहुल आरोहि को छोड़ कर आओ और ध्यान से गाड़ी चलाना।

राहुल: ठीक है माँ।

एक घण्टे के सफर में दोनों में से किसी ने भी बात नही की एक घण्टे बाद जब वो घर पहोंचे आरोहि जल्दी से कार से उतर कर अंदर चली गयी।

आरोहि हॉल में आ कर चिल्लाते हुए, दादी
उसकी आवाज़ सुनकर अंजलि जी (आरोहि की माँ) ने उठ कर उसे गले लगा लिया।

अंजलि जी: अकेली आयी हो क्या आरोहि बेटा!!!!!

आरोहि: नही माँ राहुल के साथ आई हूं यह भी कितने अजीब इंसान है अंदर भी नही आये, रुकिए मैं लेकर आती हु।
आरोहि जब बाहर गयी तो देखा जीन्स की पॉकेट में हाथ डाले कंधे पर बैग लटकाए राहुल बाहर ही खड़ा था।
आरोहि जल्दी से उसके पास आई और बोली, यह कोई गैर का घर है क्या जो आप बाहर खड़े है अंदर चलिए।
राहुल थोड़ा कड़क अंदाज़ में बोला, मैं समझ आप मुझे अंदर बुलाना नही चाहती इसीलिए खुद अंदर चली गयी और मुझे पूछा तक नही।

आरोहि भी उसकी टोन में बोली, तो क्या पूछना ज़रूरी था यह घर भी आपका अपना था किसी अजनबी का तो था नही, अब अंदर चलो ज़्यादा नखरे न दिखाओ।

राहुल खुद की तरफ इशारा करते हुए मैं नखरे दिखा रहा हु,!!!!!!!!!!!!

जी अब अंदर चलिए।
वो उसके साथ अंदर चला गया उसके बाद सब लोग बैठ कर गप शप करने लगे।

रात को

रात को आरोहि जैसे ही सोने के लिए लेटी उसका फ़ोन बजा,
आरोहि ने फ़ोन उठाया, हेलो
सामने से राहुल की प्यारी सी आवाज़ आयी।
आरोहि थोड़ा छिड़ कर आपने मुझे इस वक़्त फ़ोन कैसे किया,,,?
राहुल थोड़ा मज़ाकिया अंदाज़ में बोला मेरे फ़ोन में बैलेंस है तो मैं किसी भी वक़्त फ़ोन कर सकता हु।

आरोहि: अच्छा हुआ आपने हमें बता दिया हमें तो पता ही नही था, वैसे इस वक़्त तो आपका मोड अच्छा, सुबह तो आप का मुंह लटका हुआ था।

राहुल: वो तो इस वजह से की मैं ने आपको रुकने के लिए कहा था और आपने मेरी बात नही मानी इसीलिए मेरा मोड खराब होगया था।

आरोहि:अच्छा यह बताओ तुमने मुझे फ़ोन क्यों किया था,,?
राहुल:तुम्हारा हाल जानने के लिए।
आरोहि: तो तो अब जान लिया न मैं ठीक हु अब एक काम करो फ़ोन रखो और सो जाओ।

राहुल:आरोहि मेरी बात सुनो,,,,,,,,,,,,,,
वो कहता ही रह गया और आरोहि ने फ़ोन कट कर दी।

कुछ दिन बाद

आरुषि और राहुल की माँ पापा आरोहि की दादी से मिलने आये।

वंशिका जी आरोहि की दादी से बोली, माँ जी हम आज यहां कुछ काम से आये है।

दादी: मैं तुम्हारी बात का मतलब नही समझी क्या काम है,,,???????
वंशिका जी: माँ जी असल मे बात यह है कि हम अपने बेटे राहुल की शादी करना चाहते है।

दादी: यह तो अच्छा किया तुमने अब उसके गले मे जंजीर डालने का वक़्त आ गया है, क्या कोई लड़की देखी है।

सब उनकी बात सुन कर हसने लगे,

वंशिका जी: हाँ माँ जी लड़की आपके घर मे ही है।
दादी हैरानी से कौन,,????

आरुषि:दादी माँ मम्मी आरोहि की बात कर रही है।

यह सुनकर दादी खामोश होगयी।
उनको खामोश देखकर वंशिका जी बोली क्या हुआ माँ जी आप खुश नही है।

वंश जी: देखिए माँ जी आरोहि हमें बहोत पसंद है, मैं तो बहोत पहले ही सोच लिया था आरोहि को अपनी बहू बनाऊँगा, लेकिन अगर आपको मंज़ूर नही है तो हम आप पर दबाव नही डालेंगे।

आरुषि अपनी माँ से बोली मम्मी आपने देखा तो है राहुल कितना अच्छा लड़का है और आरोहि और राहुल की जोड़ी भी अच्छी है मुझे नही लगता आपको इस रिश्ते के लिए मन करना चाहिए।

दादी: आरुषि बेटा तुम गलत समझ रही हो, राहुल अच्छा लड़का है और हमें पसंद भी है,लेकिन मैं यह सोच रही थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

उन्होंने बात पूरी नही की।

दादी क्या हुआ क्या प्रॉब्लम है आरुषि थोड़ा चिंता करते हुए बोली।

दादी वंश जी की तरफ देख कर बोली देखो दोनो बेटियां एक ही घर मे कैसे यह सोच मझे थोड़ा परेशान कर रही है।

वंशिका जी: अरे माँ जी यह तो खुशी की बात है दोनों बहनें एक साथ रहेंगी, पास रहेंगी और आपको भी इतमीनान रहेगा दोनो बेटियां सामने होंगी।
दादी: तुम ठीक कह रही हो।
वंशिका जी: माँ जी इसके इलावा कोई और बात तो नही है ना।

दादी: नही।
वंश जी: माँ जी मैं आपको यकीन दिलाता हूं आरुषि की तरह आरोहि भी हैमेरी बेटी बन कर रहेगी।
दादी: वंश बेटा हम जानते है तुम हमारी बेटी का बहोत खयाल रखते हो।
वंश जी: माँ जी क्या हम रिश्ता पक्का समझे।
दादी: हमें थोड़ा वक्त देदो हम सोच कर बताते है।
वंश जी: ठीक है माँ जी।

आरोहि जब यूनिवसिर्टी से वापस आयी तो वो सब लोग जा चुके थे।

आरोहि: मम्मी आज कोई मेहमान आये थे क्या,,?
अंजलि जी: नही मेहमान तो नही आये थे बल्कि आरुषि और उसके सास ससुर आये थे।

आरोहि: तो आप उनको मेरे आने तक रोक लेती में भी उनसे मिल लेती।

अंजलि जी: अरे आरुषि अपने सास ससुर के साथ आई थी मैं कैसे रोक लेती।

आरोहि गुस्से से वहां बैठ गयी।

अंजलि जी: अरे नाराज़ क्यों हो जब आरुषि आएगी तो उसके सामने नाराज़ होना।

आरोहि: तो ठीक है मैं दी से अभी फ़ोन करके पूछती हु वो मुझसे मिले बिना कैसे चली गयी।
आरोहि उठी और भाग कर अपने कमरे में आई फोन उठ गया, हेलो आरोहि
सामने से राहुल की मैगनेटिक आवाज़ आयी।
आरोहि के चेहरे के हाओ भाव ही बदल गए,
आरोहि खुद को संभालते हुए बोली हेलो,

राहुल: आरोहि तुम्हे एक गुड न्यूज देनी है।
आरोहि: आपकी पोस्टिंग इसी शहर में होगयी है यही न।
आरोहि: आपका गेस एक दम गलत है।
आरोहि: मेरे खयाल से आपके पास इसके इलावा कोई और गुड न्यूज नही है।
राहुल: आप अपना ख्याल अपने पास रखे, और अब मैं जो कहने जा रहा हु वो सुनो।
आरोहि: बोलो
राहुल: मेरी शादी फिक्स होने वाली है।
आरोहि चोंकते हुए क्या,????
राहुल हस्ते हुए बोला चोंक गयी न,,,
आरोहि:इसमे कोनसी नई बात है आप शुरू से ही मुझे चोंकते आ रहे है।
राहुल: अच्छा, छोड़िए यह सब पहले मेरी बात सुनिए, जिस लड़की से मेरी शादी होने वाली है न उस लड़की के बारे में मैं आपको बताता हूं, उसके बाल रेशम की तरह मुलायम और खूबसूरत है, उसका रंग गोरा, उसकी आंखें झील की तरह गहरी जैसे कि उनमें डूब जाने का दिल करता है, वो हस्ती है तो इतनी प्यारी लगती है क्या बताऊँ,
वो अपनी ही धुन में बोले जा रहा था।
आरोहि उसकी बात काटते हुए बोली आप तो ऐसे कहा रहे है जैसे वो दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत लड़की है।

जारी है...........

©"साबरीन"