आँगन की चाँदनी - 8 Sabreen FA द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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आँगन की चाँदनी - 8

खूबसूरत सुबहें और हस्ती हुए शामें बीत गयी देखते ही देखते आरोही के बीएससी के एग्जाम शुरू हो गए,आरोही एग्जाम की तैयारीयों में इतना बिजी हो गयी कि उसके पास राहुल से बात करने का भी वक़्त नही था, एग्जाम खत्म होगये आरोही को अब जा कर राहुल का खयाल आया उसने राहुल को कॉल की लेकिन राहुल ने फोन नही उठाया, आरोही ने से सोचा शायद वो बिज़ी है तो उसने आरूषि को कॉल की लेकिन इत्तेफाक से फ़ोन राहुल ने उठाया, फ़ोन उठाते ही वो गुस्से से बोला, तो आपको टाइम मिल ही गया।
आरोही: आपने इतने दिन से मुझे फ़ोन नही किये थे तो मैं ने सोचा मैं ही कॉल कर लेती हूं।
अब राहुल को और भी गुस्सा आ गया वो गुस्से से बोला,तुम यह कहना चाहती हो मैं ने तुम्हे फ़ोन नही किया?
आरोही: हा
राहुल: आरोही झूठ बोलना बंद करो मैं ने तुम्हे इतनी बार फोन किया लेकिन तुम्हारा फ़ोन बंद था।
आरोही: अच्छा तो आप मुझे रात में फ़ोन करते थे।
राहुल:जी क्यों कि मैं डयूटी से रात को ही वापस आता हूं।
आरोही: अच्छा ठीक है मेरी ही गलती है अब नाराज़ तो मत हो।
राहुल: ठीक है पहले वादा करो तुम दोबारा ऐसा नही करोगी।
आरोही: ठीक है मैं वादा करती हूं।
राहुल: अच्छा सुनो शाम को मिल रही हो न।
आरोही:हा
राहुल: अच्छा हुआ तुम मान गयी नही तो मुझे लग रहा था हर बार की तरह इस बार भी बहाना बनाओगी,
आरोही: ऐसा कुछ नही है।
राहुल:ठीक शाम को मिलते है अभी मुझे कुछ काम है।

अभी दोपहर थी शाम होने में अभी काफी वक्त था लेकिन आरोही अभी ही से तैयारियों में लग गयी थी, उसने अलमारी से सारे कपड़े निकाले और शीशे के सामने खड़ी हो कर एक के बाद ड्रेस ट्राय करने लगी,
आअंजलि जी जब आरोही के कमरे में आई तो बेड पर पड़े कपड़े को देख कर आरोही से बोली, कोई प्रोग्राम है क्या?
आरोही: जी माँ,
आरोही अभी भी एक के बाद एक ड्रेस अपने ऊपर रख कर देख रही थी, यह देख कर अंजलि जी बोली मैं तुम्हारी मदद करू।
आरोही: हा माँ, मुझे समझ नही आ रहा है मैं कौन सा ड्रेस पहनू,
अंजलि जी ने सब ड्रेस को देखने लगी फिर उस मे से एक रेड कलर की ड्रेस निकालते हुए बोली, यह तुम पर बहोत अच्छा लगेगा।
आरोही: ठीक है माँ मैं यही पहेनुगी।
उसके बाद अंजलि जी खड़ी होते हुए बोली, देखो बीटा मैं तुम्हे बाहर जाने के लिए मना नही करूँगी लेकिन तुम जल्दी वापस आ जाना नही तो तुम्हारे पापा गुस्सा करेंगे।
आरोही: ठीक है माँ मैं जल्दी वापस आ जाऊंगी।
उसके बाद अंजलि जी उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोली, केखुश रहो और वहां से चली गयी।


शाम हो चुकी थी और आरोही भी अब तैयार हो चुकी थी अपने रूम से निकलने से पहले वो शीशे के सामने जा कर खुद को देखने लगी, रेड पलाज़ो और वाइट कुर्ती में वोह बेहद खूबसूरत लग रही थी, खुद को शीशे में देखने के बाद जब उसे यकीन हो गया कि अब सब ठीक है तो वो अपने रूम से बाहर आई।
आरोही जब बाहर आ कर देखा कि अर्जुन जी वापस घर आ गए है।
आरोही को इतना तैयार देख कर अर्जुन जी बोले, आज तो हमारी बिटिया बहोत खूबसूरत लग रही है।
उनके कुछ बोलने से पहले ही अंजलि जी बोल पड़ी, आरोही बाहर जा रही है।
अर्जुन जी: वो तो आरोही को देख कर हमें पता चल ही गया था, फिर वोह आरोही के सर पर हाथ फेरते हुए बोले, जल्दी वापस आना।
आरोही: ठीक है पापा
इतना कह कर आरोही जैसे ही आगे बढ़ी उसके फ़ोन की रिंग बाजी, आरोही मन ही मन बड़बड़ाई, यह राहुल भी ना इनको ज़रा भी साबर नही हैै।
आरोही ने फ़ोन उठाया, सामने से आदमी बोला, आप आरोही है??
आरोही: जी
उसके बाद उस आदमी ने आरोही से कुछ ऐसा कहा कि उसके हाथ से फ़ोन छूट कर गिर गया, अर्जुन जी और बाकी सब दौड़ते हुए आरोही के पास आये क्या हुआ बेटा,
आरोही घबराते हुए बोली, पा,,,,पा,,पापा राहुल का एक्सीडेंट हो गया है उनकी हालत ठीक नही है वोह अभी हॉस्पिटल में है यह कहते हुए आरोही फुट फुट कर रोने लगी।
यह सुनकर अर्जुन जी परेशान होते हुए बोले तुम घबराओ मत बेटा हम अभी हॉस्पिटल जाते है।
आरोही खड़ी होते हुए बोली, नही पापा मैं भी आपके साथ जाऊंगी।
अर्जुन जी: अभी बहोत देर हो गयी है तुम सुबह जाना।
अंजलि जी: हाँ बेटा पापा ठीक कह रहे है तुम सुबह चली जाना।
उसके बाद अर्जुन जी हॉस्पिटल चले गए।
यहां घर पर आरोही का रोरो कर बुरा हाल था ऐसा लग रहा था जैसे यह रात क़यामत बन कर उस पर टूट पड़ी हो आखिर कार जैसे तैसे रात बीत गयी, सुबह अर्जुन जी घर आये तो अंजलि जी पूछने लगी क्या हुआ राहुल ठीक तो है ना?
अर्जुन जी: वोह अब खतरे से बाहर है उसकी एक छोटी से सर्जरी हुई है अभी बेहोश है डॉक्टर ने कहा है उसे कल तक होश आ जायेगा।
अर्जुन जी की आवाज़ सुनकर आरोही कमरे से बाहर आ कर बोली, पापा आ ब राहुल कैसे है?
अर्जुन जी: वोह ठीक है बेटा तुम तैयार हो जाओ और मेरे साथ हॉस्पिटल चलो।
उनकी बात सुनकर आरोही फटा फट तैयार होने के लिए ऊपर चली गयी जब वोह तैयार हो कर आई तो अर्जुन जी उसे ले मर हॉस्पिटल चले गए।
आरोही जब हॉस्पिटल पहोंची तो वहां कोई नही था सिर्फ रोहित वहां लगी चेयर पर बैठा था आरोही को देख कर रोहित अपबी जगह से खड़ा होगया, आरोही के आंखों से अब आंसू निकल रहे थे रोहित उसके पास जा कर उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोला, सर ठीक है तुम रोना बंद करो।
आरोही अपनी सीसीकीयों भारी आवाज़ में रोहित से बोली,क्या मैं एक बार राहुल को देख सकती हूं।
रोहित: हम अभी अंदर नही जा सकते ब।
आरोही: मैं उन्हें बाहर से ही द3कह लुंगी।
उसके बाद रोहित उसे राहुल के टॉम के पास ले गया।

आरोही ने दरवाज़े से पर बनी छोटी सी कांच की खिड़की से एक नज़र अंदर बेड पर पड़े राहुल पर डाली, राहुल का पूरा चेहरा पट्टियों से ढका हुआ था उसकी नाक और होंठ बस थोड़े से नज़र आ रहे थे,उसके सीने पर भी पट्टियां बधी थी, आरोही की आंखों से लगातार बस आंसू झलक रहे थे वो अपना हाथ अपने मुंह पर रख कर रोने लगी,
रोहित उसके सर पर हाथ रख कर बोला, आरोही मेरी तरफ देखो सब ठीक है बस थोड़ी सी चोट आई है और ज़ख्मों का क्या है वो तो वक़्त के साथ भर ही जाते है बस तुम्हे हिम्मत रखनी होगी।
आरोही खुद को सम्भालते हुए अपनी गर्दन हा में हिलाते हुए बोली, आप ठीक कह रहे है जीजू मैं ऐसे कमज़ोर नही पड़ सकती हु।
रोहित: अब की न तुमने मेरी आरोही जैसी बातें मेरी आरोही बहोत ही स्ट्रांग है।
आरोही हल्का से मुस्कुराते हुए बोली, बस जीजू मस्का लगाना बंद करो।





कहानी जारी है..........
©"साबरीन"