आँगन की चाँदनी - 3 Sabreen FA द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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आँगन की चाँदनी - 3

रोहित: आपने तो मेरे दिल की बात कह दी, छा महीना घर से दूर रह कर मुझे घर की अहमियत पता चल गई। में तो दिन गिन रहा था कब ट्रेनिंग खत्म हो कब घर जाऊं।

पता है आरूही जिस वक्त मेरी ओर रोहित की शादी हुई थी उस वक़्त राहुल ट्रेनिंग पर थे इसीलिए अपने एकलौते भी की शादी में नही आ पाए थे।

राहुल: अगर में शादी में होता तो हम दोनों एक दूसरे से मिले होते और हमारे बीच कोई गलतफहमी नही होती।
लेकिन भाभी मैं ने आपकी शादी की फोटेग देखी है उसमें आपकी बहन कहि नज़र नही आयी।

आरुषि:राहुल मेरी बहन इतना काम कर रही थी कि उसे शादी में सांस लेने की भी फुरसत नही थी फ़ोटो कहा से खिचवाती।

राहुल: ठीक है लेकिन विदाई के वक़्त तो यह आपके साथ होंगी लेकिन उन फोटोज में भी यह नही नज़र आई।

आरुषि:मेरी विदाई के वक़्त यह इतना रो रही थी कि इसे मेरे पास से हटा लिया गया था ताकि इसके आंखों से बहती गंगा जमुना रुक जाए, लेकिन मम्मी मुझे बता रही थी कि यह मेरी विदाई के बाद भी रोती रही और खाना भी नही खाया।

राहुल:यह आपसे बहोत मोहब्बत करती है, येह कहते हुए उसकी नज़र आरूही पर जमी थी।
आरोही के चेहरे पर पड़ने वाले डिंपल उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे,
फिर वो आरूही से बोला आप अभी तक मुझ से नाराज़ है।
आरोही: वो बात तो खत्म हो गयी अब किस बात की नाराज़गी।
राहुल मुस्कुराते हुए बोला फिर आप मुझसे बात क्यों नही कर रही है यह देख कर मुझे तो यही लगेगा आप मुझसे नाराज़ है।

फिर वो तीनो मिल कर देर तक बातें करते रहे।

अगली सुबह

आरोही ने नीचे आने के लिए जैसे ही सीढ़ी पर अपना पैर रखा, राहुल ने उसे आवाज़ लगाई आरोही ज़रा मेरे कमरे में आईये।

आरोही: जी क्या हुआ।
राहुल: मेरी शर्ट का बटन टूट गया प्लीज आप जल्दी सर लगा देंगी उसने अपना हाथ आरोहि की तरफ बढ़ा दिया,
हथेली से बटन उठते हुये आरोहि ने उस पर एक नज़र डाली,
शर्ट उतार कर दी जिये मैं बटन लगा देती हूं।
राहुल: मैं बाहर निकलने के लिए लेट हो रहा हु ऐसे ही लगा दीजिये।
आरोहि एक गहरी सांस भरते हुए बोली सुई धागा कहा है।
राहुल: वो अलमारी में रखा है।
आरोहि ने अलमारी से सुई धागा लिया और उसके पास आई वो दोनों हाथ पीछे बांध कर खड़ा हो गया,
आरोहि ने जल्दी जल्दी बटन लगाया और दांत से धागा काट कर पीछे हटी, जब वो सुई धागा रख कर पीछे मुड़ी तो देखा तो राहुल इसी की तरफ देख रहा था।

राहुल: थैंक्स
इट्स ओक आरोहि बोली ओर कमरे से बाहर निकल गयी वो भी उसके पीछे पीछे कमरे से बाहर आया।
आरुषि उन दोनों को सीढ़ियों के पास ही मिल गयी।
आरुषि: मैं ऊपर ही आ रही थी।
आरोहि: क्या बात है दी
आरुषि:पापा का फ़ोन आया था मम्मी वापस आ गयी है वो अपना फ़ोन आगे बढ़ाते हुए बोली यह लो मम्मी को तुमसे बात करनी है।
आरोहि ने फ़ोन लिया और जल्दी से वहां से चली गयी।

राहुल: भाभी भैया ऑफिस चले गए?
आरुषि: हा अभी अभी निकले है तुम कहि जा रहे हो?
राहुल: बाहर जा रहा हु कुछ काम है, दोपहर तक आ जाऊंगा।
फिर वोह आरोहि की तरफ से होता हुआ बाहर चला गया।

शाम के वक़्त

शाम के वक़्त गार्डन में कुर्सियां बिछी थी राहुल एक कुर्सी पर बैठा दूसरी कुर्सी पर पैर फैलाये गार्डन को देख रहा था।

आरोहि गार्डन में टहल रही थी यह देख कर उसने आरोहि को आवाज़ दी।
रानी कलर की पलाज़ो पे सफेद कलर की कुर्ती ओर रानी दुप्पटा आरोहि बहोत ही खूबसूरत नजर आ रही थी।
राहुल उसे देखता ही रह गया जब वो उसके पास आई तो वो सही से बैठ गया और बोला आओ बैठो।
उसके बैठने के बाद राहुल बोला, बहोत खूबसूरत लग रहा है।
आरोहि: क्या?
राहुल बात बदलते हुए बोला मौसम कितना खूबसूरत लग रहा है।
आरोहि: हा
कुछ देर उसे देखने के बाद राहुल बोला, आरोहि आपने कभी प्यार किया है?
आरोहि को ऐसे किसी सवाल की उम्मीद नही थी वो हैरानी से उसे देखने लगी,

राहुल उसका चेहरा देख कर हस्ते हुए बोला इसमे हैरान होने काली क्या बात है। तुम यूनिवर्सिटी में पढ़ती हो और आज कल तो गर्लफ्रैंड और बॉयफ्रेंड का फैशन चल रहा है आपका भी कोई बॉयफ्रेंड होगा जिससे आप प्यार करती होंगी, इसीलिए पूछ लिया।

आरोहि: मैं आपको जवाब देना ज़रूरी नही समझती।
राहुल: समझ गया आप अपने बॉयफ्रेंड के बारे में मुझे बता नही चाहती है।

आरोहि गुस्से से बोली, देखिए मिस्टर राहुल में यूनिवर्सिटी में पढ़ने जाती हु प्यार मोहब्बत करने नही और मुझे बॉयफ्रैंड रखने का कोई शौक नही है, न ही मेरे सर पर प्यार का बुखार चढ़ा है इसीलिए प्लीज आइंदा से मुझसे ऐसे सवाल मत करना वो खड़ी हो कर वहां से जाने लगी।

राहुल: अरे आप तो जाने लगी बैठिए।

आरोहि थोड़ा गुस्से से बोली , अगर आपके साथ बैठी तो क्या मालूम अगला सवाल आप प्यार के इतिहास के बारे में कर बैठे।

राहुल हसने लगा,
यह देख कर आरोहि को और गुस्सा आ गया वो वह से चली गयी,
उसने राहुल से यह भी नही पूछा की वो हस क्यों रहा है।

रात को आरोहि जब सोने के लिए लेटी तो किसी ने दरवाज़े पर नॉक किया और बोला, क्या मैं अंदर आ सकता है।
राहुल की आवाज़ सुन कर आरोहि बोली , कहि आप फिर से किसी बे तुके सवाल का जवाब लेने तो नही आये, ठीक है आ जाए।

राहुल: आप सोने जा रही थी।
आरोहि: ऊपर वाले ने रात सोने के लिए ही बनाई है।
राहुल मुस्कुरा कर बोला जनता हु।
आरोहि: कहिये क्या बात है
राहुल: कल आप एक नावेल पढ़ रही थी मुझे पढ़ने के लिए देंगी।
आरोहि पीछे मुढ़ी ओर नावेल उठा कर उसकी तरफ बढ़ा दिया।

शुक्रिया वो जाने के लिए आगे बढ़ा लेकिन दो कदम जाने के बाद वो पीछे मुड़ा और आरोहि की तरफ देखते हुए बोला,
आरोहि मुझे पता है मेरी शाम में कही हुई बातों से आपका मोड खराब हो गया है, अगर मैं उसके लिए माफी मांगू तो आपका मोड ठीक हो जयेगा।

उसका अंदाज़ इतना लुभावना था कि आरोहि के चेहरे पे मुस्कुराहट आ गयी

राहुल: बहोत बहोत शुक्रिया।
आरोहि: किस बात के लिए।
राहुल: आपने अपना मोड जो ठीक कर लिया।
आरोहि को एक दम से हसी आ गयी राहुल खुशी खुशी आरोहि के कमरे से बाहर निकल गया।

बारिश के मौसम में छुट्टियों का अपना ही एक मज़ा है खुले बरामदे में पड़ी कुर्सियों पर रोहित और राहुल बैठे थे राहुल आसमान में छाए बादलों और हल्की हल्की बारिश को देखते हुए कहा,
भैया मोसम कितना सुहाना लग रहा है।
रोहित:यह तो तुमने बिल्कुल ठीक कहा,
हल्की हल्की ठंडी हवा का दोनो मिल कर मजा ले रहे थे।
राहुल:भैया मैं ज़रा किचन से आता हूं।
रोहित:कुछ खाने का इंतेज़ाम करने जा रहे हो तो चाय के साथ पकौड़े बनाने के लिए भी बोल देना।

राहुल:ठीक है भाभी से फरमाइश करके आता हूं।

राहुल ने किचन में आ कर देखा तो आरुषि और आरोहि पकौड़े तल रही थी।

राहुल खुशी से आरुषि के पास आ कर बोला भाभी आपको कैसे पता मुझे पकौड़े खाने का मन कर रहा है।

आरुषि: तुम्हारे मन का तो पता नही आरोहि का मन कर रहा था और उसने पकौड़े बना लिए।

राहुल अपने होंटो पे मुस्कुराहट लिए आरोहि से बोला तुम्हारा और मेरा मूड एक जैसा क्यों है??

जी आरोहि ने नज़रे उठा कर उसे देखा तो वोह आरोहि के एक दम करीब था,
राहुल को इस बात का अहसास होते ही वो थोड़ा पीछे हटा, और फिर बोला, आरोहि आप मेरी बात पर इतना हैरान क्यों होती है।
आरोहि दबी हसी हस्ते हुए बोली आप बातें ही ऐसी करते है।

राहुल: अगर ऐसा है तो अब ज़ुबान बन्द रखता हूं और मुंह चलता हुआ।
आरुषि:इसका मतलब क्या हुआ।
राहुल:भाभी सीधा सा मतलब ही पकौड़े खाऊंगा तो मुंह तो चलना ही पड़ेगा न।

आरूषि प्लेट की तरफ इशारा करते हुए बोली ठीक है लेलो।
राहुल ने पकौड़े उठाये और खाते हुए बोला भाभी आपकी बहन पकौड़े बहोत टेस्टी बनाती है।

आरुषि गर्व से मुस्कुराते हुए बोली आखिर बहन किसकी है।

©"साबरीन"