हडसन तट का ऐरा गैरा - 16 Prabodh Kumar Govil द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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हडसन तट का ऐरा गैरा - 16

गजब हो गया।
रॉकी को क्या मालूम था कि सिर मुंडाते ही ओले पड़ेंगे। वह दमादम ऐश को चूमे जा रहा था कि उधर खिड़की में दो आंखें दिखाई देने लगीं। भारी हैरत और गुस्से से भरी ये आंखें उसी डॉगी की थीं जिसने कुछ देर पहले रॉकी को बताया था कि वो ऐश का मंगेतर है। वह तो बेचारा ऐश से मिलने आ रहा था मगर यहां तो माजरा ही कुछ और था।
माना कि चुंबन रॉकी ने ही लेना शुरू किया था और बेचारी ऐश की उसमें कोई गलती नहीं थी, पर ये सिद्ध कैसे होता कि गलती अकेले रॉकी की है। अगर आपके सामने कोई जोड़ा एक दूसरे के सामने मुंह से मुंह जोड़े चुंबनरत हो तो ये कैसे पता चलेगा कि ये किसकी मर्ज़ी से हो रहा है? ये भी तो हो सकता है कि ख़ुद ऐश ही अपने पूर्व प्रेमी से बिछुड़ते हुए उसे विदाई दे रही हो।
डॉगी समझ नहीं पाया कि उसे क्या करना चाहिए!
क्या वह नाराज़ होकर अभी ऐश के सामने खड़ा हो और उससे रिश्ता तोड़ने की बात करे? या फिर वो रॉकी से झगड़ा करे कि उसे सब कुछ मालूम होते हुए भी वह डॉगी के साथ विश्वासघात क्यों कर रहा है?
या फिर वह चुपचाप घर लौट जाए और ये सारी बात भूल ही जाए कि उसने कुछ देखा। ये भी हो सकता है कि वो ऐश की ज़िंदगी से निकल ही जाए और इस तरह खामोशी से उसे विश्वासघात की सज़ा दे।
लेकिन तभी डॉगी के दिमाग ने पलटा खाया। उसने सोचा कि ऐसा कुछ भी करने से तो यही लगेगा कि वह जलन, ईर्ष्या, प्रतिशोध, बदला जैसी पुरानी बातों को ही मानता है। इस तरह नई दुनिया कैसे बनेगी? ये सब तो वही पुरानी घिसी- पिटी इंसानी फितरत है। उसे कुछ नई मिसाल ही पेश करनी चाहिए।
उसने सोचा कि वह बड़े दिल वाला होने का परिचय देगा। वह ऐश से यथावत प्रेम करता रहेगा और रॉकी से भी दोस्ताना व्यवहार बनाए रखेगा।
ज़िंदगी इस सोच से कितनी आसान हो जाती है।
आख़िर हम सब इतने खुदगर्ज क्यों हो जाते हैं कि अपनी खुशी सिर्फ़ अपने ही लिए सुरक्षित रखें। क्या हम उसे दोस्तों के साथ बांट नहीं सकते?
यही सब सोचता हुआ डॉगी वापस अपने घर लौटने लगा। उसे ऐश से और भी गहरी मोहब्बत हो गई।
उधर उस रात रॉकी के साथ- साथ ऐश ने भी खाना नहीं खाया।
लेकिन सवेरे की धूप छन कर जब उनके तिनकों के आशियाने पर पड़ी तो ऐश और रॉकी दोनों ने ही देखा कि ये एक नया दिन था। पिछली बातें, पिछली रात के साथ ही बीत गई थीं।
ऐश ने बाहर की नरम घास पर टहलते हुए देखा कि रॉकी रात को परोसे गए फल और मकौड़े खाने में जुटा हुआ था। उसे ज़ोर की भूख लगी थी शायद। ऐश मन ही मन मुस्कुरा कर रह गई।
क्रोध के आवेश में हम थोड़ी देर भूखे रह सकते हैं, पर हमेशा के लिए अन्न - जल नहीं त्याग सकते। बल्कि यदि हम क्रोध के समय कुछ खा - पी लें तो इससे हमें सही और सकारात्मक सोच पाने में सुविधा होती है। हम गुस्से में अपना या किसी दूसरे का नुकसान करने से बच जाते हैं। हम नहीं जानते कि दूसरे का नुकसान भी कालांतर में अपना ही नुकसान बनता है। ये तनाव और दुश्मनी का कारण बन जाता है।
अगर हम अपने शरीर को ध्यान से देखें तो हमें दुनियादारी की ये तमाम बातें आसानी से समझ में आ जाएं। अब सिर से पैर तक अपने शरीर को देखो। ये ऐसा लगेगा जैसे कई सड़कों वाला एक सुंदर शहर हो।
एक सड़क सांस लेने की है, हवा आई, हवा गई। एक सड़क खाने- पीने की है। एक सड़क साफ़- सफ़ाई वाली। ठीक ऐसे ही एक मोहल्ला सोचने - विचारने का है। एक गली सुनने की, एक देखने की।
अब अगर देखने वाली गली ने कुछ गलत देख लिया तो क्या खाने- पीने वाली सड़क का ट्रैफिक जाम कर दोगे? ये तो कोई बुद्धिमत्ता नहीं है।
डॉगी ये सब सोचता हुआ अभी अपनी गली की ओर मुड़ने ही लगा था कि सामने वाले अपार्टमेंट से उसे कैटी आती हुई दिखी।
- कहां से आ रहा है रे? कैटी ने बुलंद आवाज़ में पूछा।
डॉगी के मुंह से निकल गया - अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने गया था।
- गर्ल फ्रेंड? ये सुनते ही कैटी ने अपने दिमाग़ पर ज़ोर डाला। उसे सब याद आ गया। ऐश ने उसे बताया तो था। वह खुश होती हुई बोली - अच्छा- अच्छा,अब वहां जब भी जाए तो अकेला मत जाना, मुझे भी साथ लेकर चलना।
- क्यों?
- तू नहीं जानता रे, मेरा बॉयफ्रेंड भी वहीं रहता है!