में और मेरे अहसास - 54 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 54

आश टूट रहीं हैं ख्वाइशों की l
साजिश हैं आझमाईशो की ll

बड़ी मुद्दतों के बाद मिले है तो l
लंबी सूची है फ़रमाइशों की ll

रेत सा तपिश हो गया है दिल मेरा l
इंतज़ार हैं प्यार की बारिशों की ll

हाथ-पाँव में बेड़ियाँ बंदिशों कीं l
क्यूँ परवाह करे नालिशों की?

कुछ खटक रहा है महफिल में l
थोड़ी सी कमी है आराइशों की ll
३-५-२०२२   

नालिशों -फ़रियादों
आराइशों – सजावटों

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आज नामा उनका आएगा l
आखों मे सैलाब लाएगा ll

दास्ताने मुहब्बत पढ़कर l
दिल चैन सुकून खोएगा ll

अह्सास ए कशमकश से l
जाने कब आराम पाएगा?

बेआरामी का नामा लेकर l
कसीदा वापस जाएगा ll

उनके आने की आहट से l
दिल खुशी के गीत गाएगा ll
२-५-२०२२

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महफिल में शमा ख्वाबों की जलाई है l
जैसे तैसे दिलसे याद उनकी भुलाई है ll

परियों की कहानियों सुना सुनाकर l
हमने हररोज याद उनकी सुलाई है ll

भुला दिया था साथ गुज़रा लम्हा l
वक्त बेवक्त याद उनकी रुलाई है ll

मेरी मुहब्बत का अह्सास है उनको l
नसीब में खुदा की बहोत भलाई है ll
१-५ -२०२२

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जुबा नहीं ख़ामोशी बोलती है l
दिलों दिमाग को टटोलती है ll

वक्र के पिटारे मे बंध पड़े हुए l
सालो पूराने राज खोलती है ll

बेजुबान बेपनाह इश्क़ करके l
रूह में प्यार को घोल ती है ll
३०-४-२०२२

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चलो प्यार की शमा जलायें l
दिलों की चिनगारी दिखाये ll

दिलों से नफरतों को मिटा के l
फ़िर दुनिया को स्वर्ग बनाये ll

सभी मुरझाये हुए चहरे को l
खुशी की मुस्कान से सजाये ll

कदम से कदम मिलाकर अब l
कामयाबी की और बढ़ाये ll

भाइचारे का दौर शुरू करे l
एक दूसरे को गले लगाये ll
२९-४-२०२२

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मेरा प्यार कभी ना बिसरा देना l
अपने दिल मे कभी आसरा देना ll

आगाज तुम करना अंजाम हम देगे l
गीत ग़ज़ल के लिए मिसरा देना ll

जिंदगी के अनजाने से सफ़र में l
एक दो नहीं तो उत्तर तीसरा देना ll
२८-४-२०२२

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हुश्न ने मजबूरी मे भुलाया होगा l
दिल ने बहोत ही सताया होगा ll

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चहेरे का नूर ना देख l
दिल की तड़प को देख ll

हर कही मृगतृष्णा फैला l
सहरा मे प्यास को देख ll

समंदर की तरह गहरी l
आँखों मे पानी की देख ll

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न पूछ तेरे बग़ैर वक्त कैसे गुज़रता है l
जैसे तेरा जाता मेरा वैसे गुज़रता है ll

पल पल लम्हा लम्हा ठहर गया है l
साल दर साल जैसे तैसे गुज़रता है ll

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तेरे खामोश लबों की सदा हूँ में l
तूने रब से मांगी हुईं दुआ हूँ में ll

सालो से खोया हुआ था कहीं l
तेरे नादान दिल का पता हूँ में ll

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आँखों में शर्म -हया का  हिजाब रखा करो l
सुनो खुदाया चहेरे पर नकाब रखा करो ll

जब लोगों की अंगुलियां बढ़ लगे तब l
ज़माने को देने मूतोड़ जबाव रखा करो ll

कई कशिशो ने रूह में डेरा ड़ाला हुआ है l
दिल मे तमन्नाओ का शराब रखा करो ll

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इक दिन ऐसा भी आये  l
याद आते ही तुम आये ll

आज इश्क से जुदा होकर l
रात और दिन ना जाये ll

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दर्द हद से ज़्यादा बढ़ जाता था l
जुबान पे ताला पड़ जाता था ll

ज़ालिम मुस्कुराकर देते थे तो l
तावीज असर कर जाता था ll

दर्दो-ग़म से नाता जुड़ा तब से l
अश्कों से दामन भर जाता था ll
२१-४-२०२२

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ये बता दो क्या कमी है मुझ में प्यारे l
दिल भी नहीं जान भी कुर्बान है प्यारे ll

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फूल जैसे प्रेम ने जीवन दिया l
राजकुमारी सा जीवन जिया ll

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टूटने को चाहना को किसे कहते हैं?
मिटने को चाहना को किसे कहते हैं?

ताउम्र किसी के लिए इंतखाब रखना l
बस लुटने को चाहना को इसे कहते है ll

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