मे और मेरे अह्सास - 3 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

मे और मेरे अह्सास - 3

मे और मेरे अह्सास

(3)

अकेले है फिर भी व्यस्त्त रहते हैं l
अपने आप मे ही मस्त रहते हैं ll

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दिल्लगी कर ने आया है वो l
जिंदगी मेरी बन गया है वो ll

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दिल की धड़कन मे रहते हो l
किसी के नहीं सिर्फ मेरे हो ll

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तुज से मिलने के अंगिनत बहाने है पास मेरे l
तू भी तो बात करने के लिए हरपल तैयार है ll

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दिल के दरवाजे खोल दो l
आज खुलके तुम हस दो ll

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वक़्त का खेल है सब l
बस यही खेल हम नहीं खेलते ll

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पतंग मे याद लिखकर
खुदा को
वॉट्सअप
भेजा है ll

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अरमानो को खुले
आकाश में
छोड़ दिया है l
देखे कितनी ऊंची
उड़ान भरने
वाले है ll

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मुस्कुराहट को गहना
बना दिया है l
लोग समझते हैं
सब ठीकठाक है ll

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महफिल मे ना कोई खुशी महसूस हुईं l
रह रहकर आज तेरी कमी महसूस हुईं ll

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कहने सुनने के लिए कुछ नहीं है रहा l
आज खुलके तुमने सब कुछ है कहा ll

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कभी कभी शांति की
प्राप्ति के लिए
अंदर के शोर को
शांत करना चाहिए ll

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ढाई अक्षर के
शब्द के
इर्द गिर्द
दुनिया
चलती है ll

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तुजे जितना करीब पाती हूं l
तुजे उतना अजीब पाती हूं ll

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तेरे साथ होने से
लगता है l
सारी दुनिया
मेरे पास है ll

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देर से आने की
आदते अपनी
बदल दालों l
राह तकते तकते
आंखे थक
चुकी है ll

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आज हमारे चहरे से
नजर नहीं हट
रहीं आपकी l
कुछ नेक इरादा
नहीं लगता है
जनाब आपका ll

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बेपनाह प्यार किया है l
बेइंतिहा प्यार किया है ll
तुझे जाने जाना टूट के l
मेरी जान प्यार किया है ll

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सुहानी यादो का
पतारा क्यों खोले बेठे हो l
पुरानी यादो का
पतारा क्यों खोले बेठे हो ll
कई बार ऐसा लगा
साथ हर बार रहते हो l
तूफानी यादो का
पतारा क्यों खोले बेठे हो ll

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जिनका वीर सरहद
पर शहीद होता है l
उस घर का हर
सदस्य शहिद होता है ll

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जीने की चाह
मन में विस्वास
खुद पे भरोसा
मजिल की तड़प
रास्ते बना देते हैं ll

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गुलाम थे तो
अच्छा था l
आजाद क्या हुए
वादों-जातिवाद मे
बट गए ll

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हर बार तुम्हारी याद
दिल को सुकून दे जाती है l
मन को शांति और सुख
का अनुभव होता है ll

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लगता है आजादी
इत्तफाक से मिली है l
वर्ना देशवासियों को
इस की कदर होती ll

*****

रातें मेरी
नींद उसकी ll

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तुम खुदा का
दिया गया वो तोहफ़ा हों l
जिसे दुनिया
की नजरो से बचाना है ll

*****

मतलबी नहीं है
कि भुला देगे l
ये तिश्नगी अब
ना बुजने देगे ll

*****

बात इतनी सी उन्हें खल गई l
आज मेरी हुकूमत चल गई ll

*****

आई थी तूफान लेके बड़ा l
रात काली बेअसर ढल गई ll

*****

कंटको के साये मे देख लो l
फूल सी कोमल कली पल गई ll
१-२-२०२०

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सुहानी जिंदगी महसूस होती है l
रसीली जिंदगी महसूस होती है ll

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हुश्न की आंख मे तूफान देखा तब l
नशीली जिंदगी महसूस होती है ll

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गुलाबी फूल राहो मे बिछाएं है l
परी सी जिंदगी महसूस होती है l|

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उस डोर से गुज़र रही हूँ l
जिस डोर मे तु ही तु हैं ll

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सुकून मिल गया है, जब से तू जिंदगी में सामिल हुआ है l
किसे शुक्रिया कहे तुजे या रबको जिसने तोहफा दिया है ll

*****

तेरे आने की खबर है l
हवाए महकी हुई है l
फ़िज़ाए बहकी हुई है l
हमारे दिल की
धड़कने तेज हुई है ll

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बाग मे खिले हुए हर
फूलों को जी जान से
संभालना चाहिए ll

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Dr. Damyanti H. Bhatt

Dr. Damyanti H. Bhatt मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले

महेश रौतेला

महेश रौतेला मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले

Swatigrover

Swatigrover मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले

Yakshita Patel

Yakshita Patel मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले

Nilesh D Chavda

Nilesh D Chavda 2 साल पहले