हिंदी कविता कहानियाँ मुफ्त में पढ़ेंंऔर PDF डाउनलोड करें

कविता - बिटिया
द्वारा उषा जरवाल

हर एक लड़की के जीवन में उसके पिता का अहम् स्थान होता है |  मेरी जिंदगी में मेरे पापा का भी सबसे ऊँचा स्थान है | आज मेरे पापा ...

स्वर दो तुम्हें मैं गीत का उपहार दूंगा
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

तुम मुझे स्वर दो तुम्हें मैं गीत का उपहार दूंगा   खोजता था मैं अभी तक आंधियों में शांति के क्षण, जिन्दगी से हार मांगे मौत से दो मधुर ...

स्‍वतंत्र सक्‍सेना की कविताएं - 1
द्वारा बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

स्‍वतंत्र सक्‍सेना की कविता                      काव्‍य संग्रह                     सरल नहीं था यह काम                                  स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना     सवित्री सेवा आश्रम तहसील रोड़ डबरा (जिला-ग्‍वालियर) ...

उड़ान होंसलो की
द्वारा Mohit Rajak

ये कहानी उन दोस्तों के लिए लिये जो केवल सोचते रहते हैं, जो केवल सपने देखते की वे एक दिन आसमान की बुलंदी को छू लेगे, लेकिन वो सिर्फ ...

भले रूठ कर शाप दे, शाप सहने का वरदान दो
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

भले रूठ कर शाप देते रहो प्रिय, मगर शाप सहने का वरदान दे दो।   अभी तो बहुत देर है जबकि तम चीर सूरज धरा पर उजाला करेगा, अभी ...

गीत मेरी जिंदगी का प्यार है
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

के बी एल पांडेय के गीत   गीत मेरी जिंदगी का प्यार है आधार है   जब बसंती ओढ्नी में पुष्प पंखुरिया विहंसती मंजरी पर झूम कोकिल तान मुकुलों ...

मे और मेरे अहसास - 27
द्वारा Darshita Babubhai Shah

  हाथो की लकीरों मे नहीं है lउसका दिल में टैटू गया है ll   **************************************************** छोटी छोटी बातों मे दिल मत दुखाया कीजिए lहर बार जान को तुम ...

जनजीवन - 11
द्वारा Rajesh Maheshwari

जीवन का क्रम   मेघाच्छादित नील-गगन गरजते मेघ और तड़कती विद्युत भी आकाश के अस्तित्व और अस्मिता को नष्ट नहीं कर पाते, वायु का प्रवाह छिन्न-भिन्न कर देता है ...

जनजीवन - 10
द्वारा Rajesh Maheshwari

भ्रूण हत्या   उसकी सजल करुणामयी आँखों से टपके दो आँसू हमारी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारो पर लगा रहे हैं प्रश्नचिन्ह? कन्या भ्रूण हत्या एक जघन्य अपराध और अमानवीयता ...

जनजीवन - 9
द्वारा Rajesh Maheshwari

हे माँ नर्मदे!   हे माँ नर्मदे! हम करते हैं आपकी स्तुति और पूजा सुबह और शाम आप हैं हमारी आन बान शान बहता हुआ निष्कपट और निश्चल निर्मल ...

जनजीवन - 8
द्वारा Rajesh Maheshwari

समय और जीवन   कौन कहता है कि समय निर्दय होता है,वह तो तरुणाई की कथा जैसा होता है मधुर और प्रीतिमय, वह यौवन के आभास सा होता है ...

मे और मेरे अहसास - 26
द्वारा Darshita Babubhai Shah

दिल की सजावत हो तुम lआँखों की चमक हो तुम ll हाल दिल का कौन समझेगा lबातों की जान हो तुम ll   ******************************************* एक रोज़ रंग लाएगी फ़ाक़ा ...

जनजीवन - 7
द्वारा Rajesh Maheshwari

भक्त और भगवान   उसका जीवन प्रभु को अर्पित था वह अपनी सम्पूर्ण श्रृद्धा और समर्पण के साथ तल्लीन रहता था प्रभु की भक्ति में। एक दिन उसके दरवाजे ...

मेरे अल्फ़ाज़ - शेर...शायरी
द्वारा anjana Vegda

मेरे अल्फाज......by Anjana Vegda❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️जुखाम तो दिल को होना ही था,तेरी यादों की बारिश में भीगे जोो थे।❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️तुमसेेे होती शिकायतें तो और बात थी....गर खुद सेेेे हो रुसवा तो कहां ...

जनजीवन - 6
द्वारा Rajesh Maheshwari

आस्था और विश्वास   आस्था और विष्वास हैं जीवन का आधार दोनों का समन्वय है सृजनशीलता व विकास। विश्वास देता है संतुष्टि और आस्था से मिलती है आत्मा को ...

कर्मण्येवाधिकारस्ते
द्वारा Annada patni

कर्मण्येवाधिकारस्ते   अन्नदा पाटनी       छिटक कर आती वातायन से किरणें   सूरज की,   कमरे की दीवार पर बनाती हुई एक आकृति अंगूठे की   जैसे ...

जनजीवन - 5
द्वारा Rajesh Maheshwari

चिन्ता, चिता और चैतन्य        चिन्ता, चिता और चैतन्य जीवन के तीन रंग। चिन्ता जब होगी खत्म तब होगा जीवन में आनन्द का शुभारम्भ। चिन्ता देती है विषाद, दुख ...

सिर्फ तुम.. - 5
द्वारा Sarita Sharma

सिर्फ तुम-5 चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएँ, फिर से किसी मोड़ पर मिलें, और फिर से दिल हार जाएं... पर इसबार जो मिलेंगे तो इतना समझा ...

जनजीवन - 4
द्वारा Rajesh Maheshwari

अंत से प्रारंभ।   माँ का स्नेह देता था स्वर्ग की अनुभूति, उसका आशीष भरता था जीवन में स्फूर्ति। एक दिन उसकी सांसों में हो रहा था सूर्यास्त हम ...

पहला पहला प्यार है।
द्वारा Nurussaba Nishi

पहला पहला प्यार है।पहली पहली बार है।।हर वक़्त आता ज़ेहन में तेरा ख़याल है।ख़ुद से भी ज़्यादा चाहा तुझको मेरे यार है।पहला पहला प्यार है। पहली पहली बार है।।ज़िन्दगी ...

जनजीवन - 3
द्वारा Rajesh Maheshwari

दस्तक         मेरे स्मृति पटल पर देंगी दस्तक तुम्हारे साथ बीते हुए लम्हों की मधुर यादें, ये हैं धरोहर मेरे अन्तरमन की इनसे मिलेगा कभी खुशी कभी गम का ...

जनजीवन - 2
द्वारा Rajesh Maheshwari

दूध और पानी   प्रभु ने पूछा- नारद! भारत की संस्कारधानी जबलपुर की ओर क्या देख रहे हो? नारद बोले- प्रभु ! देख रहा हूँ गौ माता को नसीब ...

कविताएँ
द्वारा Abha Dave

१)मुहूर्त---------हरेक त्यौहार का होता है मुहूर्तलोग इस मुहूर्त में जिंदगी के महत्त्वपूर्ण काम को करने में लग जाते हैं । इंतजार करते हैं उसशुभ घड़ी का जोजीवन को खुशियों ...

जनजीवन - 1
द्वारा Rajesh Maheshwari

हे राम!   इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान, मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम। रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष, विनत ...

मैं भारत बोल रहा हूं-काव्य संकलन - 14
द्वारा बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

मैं भारत बोल रहा हूं   14                          (काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’ 56. सोच में गदहे.......... राजनीति से दुखित हो, ...

मे और मेरे अह्सास - 25
द्वारा Darshita Babubhai Shah

  अकेला ही नहीं साथ तुम्हारे चलना है lआगाह ये है तो अंजाम भी अच्छा है ll खुदा  पर कर भरोसा दिल ए नादा  lहर काली रात के बाद ...

मैं भारत बोल रहा हूं-काव्य संकलन - 13
द्वारा बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

मैं भारत बोल रहा हूं   13                         (काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’ 51. खूब कबड्डीं खिली------   खूब कबड्डीं खिली ...

मैं भारत बोल रहा हूं-काव्य संकलन - 12
द्वारा बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

  मैं भारत बोल रहा हूं   12                          (काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’     47. तौंद का विस्तार तौंद की पैमाइस, किसने कब लई। जो मलाई देश की, सब चर ...

मैं भारत बोल रहा हूं-काव्य संकलन - 11
द्वारा बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

मैं भारत बोल रहा हूं   11                           (काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’   43. सविधान की दहरी आज तुम्हारे इस चिंतन से, सविंधान की दहरी कॅंपती। श्रम पूंजी के खॉंडव वन ...

उनको याद करते हैं ..... ।
द्वारा Vyas Dhara

                      " उनको याद करते हैं ...... "     चलो आज फिर उनको याद करते हैं।    वही पुरानी ...

मे और मेरे अह्सास - 24
द्वारा Darshita Babubhai Shah

होश   तुम्हें पा लिया है lफ़ायदा किया है ll होश खो रहे हैं lजाम जो पिया है ll चैन पा लिया है lहोठो को सिया है ll दूर ...

मैं भारत बोल रहा हूं -काव्य संकलन - 10
द्वारा बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

मैं भारत बोल रहा हूं                              (काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’   37. कवच कुण्डल विना व्याकरण ना पढ़ा, व्याख्या करते दिखा, शब्द-संसार को जिसने जाना नहीं। स्वर से व्यजंन ...